मंगलवार, 13 जनवरी 2026

गुणवत्ता प्रबंधन (Quality Management) में सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) एक सहायक उपकरण — जोखिम-आधारित सोच के साथ एक संतुलित गुणवत्ता सुधार दृष्टिकोण

 गुणवत्ता प्रबंधन (Quality Management) में सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) एक सहायक उपकरण

— जोखिम-आधारित सोच के साथ एक संतुलित गुणवत्ता सुधार दृष्टिकोण

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प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe 

मैं पिछले दिनों डॉ दिव्या सिंघल और क्रिस्टल फेर्रो की किंडल किताब 'Business for Good in Action - Celebrating AIM2Flourish Stories Through Appreciative Inquiry' पढ़ रहा था तो मेरे मन में यह विचार आया कि सराहनात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) किस तरह गुणवत्ता प्रबंधन के लिए सहायक हो सकता है। मैंने जाना कि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) एक सकारात्मक और सहभागी दृष्टिकोण है, जिसका उपयोग संगठन अपने विकास, परिवर्तन प्रबंधन (Change Management), टीम बनाने (Building Team) और अपने लोगों के व्यक्तिगत विकास के लिए करते हैं। यह समस्या-केंद्रित सोच (Problem-Focused Thinking) के बजाय सफलताओं, शक्तियों और संभावनाओं पर ध्यान देता है। यह अवधारणा डॉ. डेविड कूपरराइडर, जो Case Western Reserve University (USA) से संबद्ध रहे, ने 1980 के दशक में विकसित की और यह सिद्धांत उनके डॉक्टरेट शोध (PhD Dissertation) से निकला। 


सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) का मूल विचार "समस्याओं को सुधारने के बजाय, जो अच्छा है उसे और बेहतर बनाया जाए" है। संक्षेप में चर्चा करें तो हम पाते हैं कि सराहात्मक अन्वेषण दृष्टिकोण के पाँच सिद्धांत हैं - (1) सकारात्मकता  (Positivity) - सकारात्मक प्रश्न सकारात्मक ऊर्जा और समाधान उत्पन्न करते हैं। (2) निर्माणवादी (Constructivist) - हमारी बातचीत और भाषा हमारी वास्तविकता का निर्माण करती है। (3) समानांतरता (Simultaneity) - प्रश्न पूछते ही परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। (4) काव्यात्मकता (poeticism) - संगठन एक खुली किताब की तरह है—जिस अध्याय पर ध्यान देंगे, वही बढ़ेगा। (5) भविष्य दृष्टि - प्रत्याशित (Anticipatory) - भविष्य की सकारात्मक कल्पना वर्तमान कार्यों को दिशा देती है। 


जब भी संगठन में सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) दृष्टिकोण काम में लाया जाता है तो उससे अनेक लाभ मिलते हैं। कर्मचारियों की भागीदारी (Involvement) और प्रेरणा (Motivation) बढ़ती है। नवाचार (Innovation) और रचनात्मकता (Creativity) को प्रोत्साहन मिलता है। सकारात्मक संगठनात्मक संस्कृति बनती है। परिवर्तन के प्रति प्रतिरोध कम होता है। नेतृत्व और टीमवर्क मजबूत होता है। 


पारंपरिक तौर से हम अपने संगठन में प्रश्न पूछते हैं - “हमारी प्रक्रिया में क्या गलत है?” जबकि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) दृष्टिकोण अपनाने पर हम प्रश्न पूछते हैं - “कब हमारी प्रक्रिया सबसे अच्छी तरह काम करती है और क्यों?” इस प्रकार हम पाते हैं कि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) एक ऐसी सोच है जो कमियों पर नहीं, क्षमताओं पर आधारित होती है। यह गुणवत्ता, लीन, नवाचार, नेतृत्व और सतत सुधार की दिशा में अत्यंत प्रभावी दृष्टिकोण है। 


हालाँकि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) लगातार सुधार की दिशा में प्रभावी दृष्टिकोण है, पर मेरे मन में यह विचार आया कि यह कमियों को नजरंदाज कर सकता है और इस प्रकार शायद यह सोच गुणवत्ता प्रबंधन के लिए लाभदायक न हो। वास्तव में गुणवत्ता प्रबंधन  (Quality Management) में सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) तभी प्रभावी सिद्ध होती है जब उसका सही ढंग से उपयोग किया जाए। गुणवत्ता प्रबंधन में सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) के अनेक लाभ हैं, जिनकी मैं चर्चा करना चाहूँगा। 


(1) सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) सकारात्मक गुणवत्ता संस्कृति के निर्माण में सहायक है। गुणवत्ता (Quality) केवल प्रक्रियाओं से नहीं, लोगों के दृष्टिकोण से आती है। सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) दोष खोजने की संस्कृति से हटाकर सीखने और सुधार की संस्कृति विकसित करती है। इससे भयमुक्त रिपोर्टिंग (Fear-free Reporting), सुझाव प्रणाली और सहभागिता बढ़ती है।


(2) सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) की पहचान और विस्तार में सहायक है। पारंपरिक आतंरिक संपरीक्षण (Internal Audit) में हम पता लगाते हैं कि गैर-अनुरूपता (Nonconformity) कहाँ हैं? सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) यह पता लगाता है कि कहाँ प्रक्रिया ने सर्वोत्तम परिणाम दिए? क्यों? गुणवत्ता प्रबंधन के लिए दोहराए जाने योग्य सर्वोत्तम प्रथाओं (Repeatable Best Practices) को पहचानने में सहायक है। साथ ही यह मानकीकरण और बेंचमार्किंग (Standardization and Benchmarking को सशक्त बनाता है।


(3) सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) लगातार सुधार (Continual Improvement को ऊर्जा देती है। आईएसओ 9001 गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली में लगातार सुधार (Continual Improvement) अपेक्षा (Requirement) है। इस प्रकार सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) सुधार को सुधारात्मक बोझ (Corrective Burden) नहीं, विकास का अवसर (Growth opportunity) देती है। कर्मचारी सुधार गतिविधियों में स्वेच्छा से जुड़ते हैं।


(4) सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) नेतृत्व (Leadership) और टीम की संलग्नता (Engagement of Team) में सहायक है। यह कर्मचारियों को समस्या स्रोत (Problem source) नहीं, समाधान भागीदार (Solution partner) मानती है। इससे कर्मचारियों में स्वामित्व (Ownership) की भावना बढ़ती है और संगठन में क्रॉस-फ़ंक्शनल गुणवत्ता सुधार (Cross-functional Quality Improvement ) संभव होता है। 


(5) सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) परिवर्तन प्रबंधन (Change Management) में सहायक है। नए गुणवत्ता पहलों (Quality Initiatives) में यह प्रतिरोध (Resistance) कम करती है और बदलाव को सफल अनुभवों की निरंतरता के रूप में प्रस्तुत करती है। 


इतना सब कुछ समझने के बाद आपकी चिंता यह हो सकती है कि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) कमियों को नजरअंदाज कर सकता है। हाँ, यदि इसे गलत समझा जाए। यह इस दृष्टिकोण की कमजोरी नहीं, गलत उपयोग का जोखिम है। इस दृष्टिकोण के अपनाने के संभावित जोखिम के तहत महत्वपूर्ण असंगतियाँ महत्वपूर्ण गैर-अनुरूपता (Critical Nonconformity) अनदेखी रह सकती है, मूल कारण विश्लेषण (Root Cause Analysis) कमजोर पड़ सकता है, नियामक (Regulatory) और ग्राहक (Customer) अपेक्षाओं (Requirements) की पालना में कमी रह सकती है। यह ध्यान में रखा जाना चाहिए सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) को अकेले इस्तेमाल करना खतरनाक हो सकता है। इसलिए समाधान यह है कि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) और जोखिम आधारित सोच (Risk-based Thinking) को एक साथ अपनाकर संतुलित गुणवत्ता सुधार मॉडल (Balanced Quality Improvement Model) बनाया जाए। आईएसओ 9001:2015 मानक में भी जोखिम आधारित सोच (Risk-based thinking) एक अपेक्षा (Requirement) है। इसलिए सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) को इस तरह प्रयोग करना चाहिए कि सकारात्मक फ्रेमिंग (Positive Framing) के साथ अंतर विश्लेषण (Gap Analysis) किया जाए। उदाहरण के लिए, यहाँ क्या गलत है? कब यह प्रक्रिया बिना दोष के चली और क्यों? फिर उसी से अंतर (Gap) और जोखिम (Risk) पहचान सकते हैं। 


सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) को पीडीसीए चक्र (PDCA Cycle) में समाहित किया जा सकता है। पी अर्थात आयोजना (Plan) के अंतर्गत ताकत, सफल अनुभव और अवसर देखें, डी के अंतर्गत प्रेरित क्रियान्वयन करें, सी के अंतर्गत आंकड़े जाँचे, संपरीक्षण करें और अपालना चेक करें और ए के अंतर्गत सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) आधारित सुधार और मानकीकरण करें।  सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) का अर्थ यह नहीं है कि गैर-अनुरूपताओं (Nonconformities) का पता न लगाया जाए बल्कि संपरीक्षण निष्कर्ष (Audit Findings) को सीखने के अवसर के रूप में लिया जाए और दोषमुक्त (Blamefree) मूल कारण विश्लेषण (Root Cause Analysis) किया जाए। 


यदि हम गुणवत्ता प्रबंधन में सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) का सही स्थान खोजें तो पाते हैं कि यह संस्कृति निर्माण (Culture building), कर्मचारी सहभागिता (Employee engagement), उत्कर्ष प्रथाओं को साझा करने (Best practice sharing), नवाचार और निरंतर सुधार (Innovation and Continual Improvement) के लिए अत्यंत प्रभावी है। साथ ही हम यह भी पाते हैं कि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) की भूमिका विनियामक अनुपालन (Regulatory compliance), सुरक्षा सम्बंधित प्रक्रियाओं (Safety-critical processes), कानूनी और वैधानिक अंतराल (Legal and statutory gaps) तथा गंभीर गैर-अनुरूपता से निपटना (Serious Nonconformity handling) के लिए सीमित है। हमें यह भली प्रकार समझ लेना चाहिए कि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) गुणवत्ता प्रबंधन (Quality Management) के लिए अत्यंत उपयोगी है, लेकिन यह दोष पहचान (Defect Identification) का विकल्प नहीं है। इसके लिए सही दृष्टिकोण यही होगा कि कामों को सुधारने के लिए समस्या देखे, सुधार करें और सुधार को टिकाऊ बनाने के लिए शक्तियों को पहचाने।  


सार


सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) गुणवत्ता प्रबंधन (Quality Management) को मानवीय, सहभागी और प्रेरणादायी बनाता है। यह दोष पहचान का विकल्प नहीं, बल्कि उसे संतुलित और टिकाऊ सुधार में बदलने का माध्यम है। जोखिम-आधारित सोच और पीडीसीए चक्र के साथ इसका समन्वय संगठन को सीखने वाली संस्था (Learning Organization) की ओर ले जाता है। सही उपयोग के साथ सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) गुणवत्ता संस्कृति, नवाचार और निरंतर सुधार का सशक्त आधार बन सकता है।


सादर,

केशव राम सिंघल 

अगला लेख - गुणवत्ता प्रबंधन (Quality Management) में सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) लागू करने के लिए चरण-दर-चरण (Step-by-Step) कार्यान्वयन मॉडल 


गुरुवार, 8 जनवरी 2026

आंतरिक संपरीक्षण (Internal Audit): सिर्फ अनुपालन की औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रारंभिक चेतावनी तंत्र है

आंतरिक संपरीक्षण (Internal Audit) - सिर्फ अनुपालन की औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रारंभिक चेतावनी तंत्र है

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चित्र साभार NightCafe 

ज्यादातर संगठनों में आंतरिक संपरीक्षण (Internal Audit) को “कर लिया-भूल गए” जैसा काम समझा जाता है। गुणवत्ता प्रबंधन से जुड़े लोग सोचते हैं कि निर्धारित तारीख पर संपरीक्षण कर लो, जांच-सूची से प्रश्न पूछ लो, कुछ गैर-अनुरूपताएँ (Nonconformities) या अपालनाएँ (noncompliances) ढूंढो, उन्हें सामने लाओ और उन्हें सुधार कर मानक के अनुरूप ठीक कर दो। अंत में रिपोर्ट बनाओ, उसे फाइल कर दो ताकि जब प्रमाणन संपरीक्षण हो तो प्रमाणन संस्था के संपरीक्षकों (auditors) को बताया जा सके कि नियत समय पर आंतरिक संपरीक्षण हुआ, ताकि प्रमाणन (certification) बरकरार रहे और काम खत्म।


यह सोच गलत है और मानक की मूल भावना के विरुद्ध है। आईएसओ 9001:2015 मानक के खंड 9.2 में स्पष्ट लिखा है कि आंतरिक संपरीक्षण का उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि संगठन में गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (QMS) मानक की अपेक्षाओं (requirements) के अनुरूप है, और प्रभावी ढंग से कार्यान्वित (implemented) और पोषित (maintained) है।


मानक की अपेक्षाओं को “प्रभावी ढंग से” कार्यान्वित करना ज्यादातर संगठन भूल जाते हैं। जबकि परिपक्व संगठनों में आंतरिक संपरीक्षण प्रारंभिक चेतावनी रडार (Early Warning Radar) की तरह काम करता है। यह आपको बताता है कि कहीं प्रक्रिया चुपचाप खराब या क्षीण तो नहीं हो रही, इससे पहले कि ग्राहक शिकायत करे, नियामक नोटिस भेजे या बड़ा नुकसान हो जाए।


जब संपरीक्षण केवल “अनुपालन टिक-मार्क” (Compliance tick mark) बन जाता है, तो गैर-अनुरूपताएँ (nonconformities) या अपालनाएँ    (noncompliances) सतही ठीक हो जाती हैं, लेकिन मूल कारण नहीं हटता। जोखिम (risks) छिपे रहते हैं, सुधार के अवसर खो जाते हैं और नेतृत्व को लगता है “सब ठीक है”, जबकि जमीनी हकीकत अलग होती है।


उत्कृष्ट संगठन अलग तरह से संपरीक्षण करते हैं। जोखिम आधारित सोच (रिस्क-बेस्ड थिंकिंग) के तहत वे इन सवालों पर केंद्रित (focus) करते हैं -


(1) यह प्रक्रिया अभी तो चल रही है, लेकिन दबाव (उच्च मांग, कर्मचारी कमी, सप्लायर देरी) में क्या यह प्रक्रिया टिकेगी?


(2) कौन से नियंत्रण केवल दस्तावेजों में हैं, जमीन पर नहीं?


(3) कौन से “जुगाड़” (workarounds) अब स्थायी प्रक्रिया बन गए हैं?


(4) कौन से जोखिम बढ़ रहे हैं, पर अभी मुख्य निष्पादन संकेतक (KPI) में नहीं दिख रहे?


मैं कुछ वास्तविक उदाहरणों की चर्चा करना चाहूंगा।


(1) एक उत्पादन कंपनी (manufacturing company) में मशीन रखरखाव की प्रक्रिया लिखित थी, पर कर्मचारी “तुरंत उत्पादन” के चक्कर में निवारक रखरखाव (preventive maintenance) पर ध्यान नहीं देते थे। अनुपालन संपरीक्षण में सब “ठीक है” दिखता था। जोखिम-आधारित संपरीक्षण (risk based audit) में संपरीक्षक (auditor) ने पिछले 6 महीने के टूट-फूट लॉग (breakdown log) की जाँच की, जिससे पता चला  कि 70 % टूट-फूट (breakdown) अनियोजित (unplanned) थे। सुधार के बाद डाउनटाइम (downtime) 40 % कम हुआ, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ी। 


(2) एक सर्विस कंपनी (BPO) के कॉल सेंटर में “कॉल रिकॉर्डिंग रिव्यू” प्रक्रिया थी। चेकलिस्ट में टिक मार्क लग जाता था। जब संपरीक्षक (auditor) ने अचानक कॉल्स (random calls) सुनीं, तो पता चला प्रतिनिधि स्क्रिप्ट की पालना नहीं कर रहे और ग्राहक डेटा के रिसाव (customer data leak) का जोखिम था। मुख्य निष्पादन संकेतक (KPI - AHT, CSAT) तो अच्छे थे, पर जोखिम छिपा था। सुधार के बाद डेटा सुरक्षा में 25% सुधार हुआ।


(3) एक फार्मा कंपनी के पैकेजिंग विभाग में दृश्य निरीक्षण प्रक्रिया (visual inspection process) थी। प्रशिक्षण अभिलेख (training record) पूरे थे। संपरीक्षक (auditor) ने लाइन पर 15 मिनट खड़े होकर देखा तो पता चला प्रकाश (lighting) कम था और कर्मचारी 12 घंटे की शिफ्ट में थकान से गलतियाँ कर रहे थे। यह बात मुख्य निष्पादन संकेतक (KPI) में नहीं दिख रही थी, पर वापिस बुलाने (recall) का बड़ा जोखिम था। सुधार (बेहतर लाइटिंग और शिफ्ट रोटेशन) से त्रुटि दर 30% घटी।


निष्कर्ष 


अगर आपके संगठन के आंतरिक संपरीक्षण आपको और उच्च प्रबंधन (top management) को असहज नहीं करते, तो वे आपकी प्रणाली की रक्षा नहीं कर रहे – सिर्फ सजावट कर रहे हैं।


पाँच ऐसे प्रश्न, जिनका उत्तर भी आतंरिक सम्परीक्षकों को आंतरिक संपरीक्षण में जरूर जानने का प्रयास करना चाहिए -


(1) क्या यह प्रक्रिया मौजूदा कर्मचारी के बिना चलेगी?


(2) अगर ग्राहक ऑर्डर दोगुना हो जाए तो क्या होगा?


(3) कौन सा नियंत्रण पिछले 6 महीने से 100 % अनुपालन दिखा रहा है? (यह संदेहास्पद हो सकता है!)


(4) क्या कोई जोखिम है जो अभी मुख्य निष्पादन संकेतक (KPI) में नहीं दिख रहा?


(5) कौन से “जुगाड़” (workarounds) अब स्थायी प्रक्रिया बन गए हैं?


इस प्रकार आपका आंतरिक संपरीक्षण अनुपालन का टिक-मार्क नहीं, बल्कि संगठन का सबसे शक्तिशाली रणनीतिक उपकरण (Strategic Tool) बन सकता है। 


सौजन्य - धन्यवाद, Buchi Okoro, आपकी फेसबुक पोस्ट के लिए जिसे पाठक यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।


सादर,

केशव राम सिंघल 

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