मंगलवार, 4 अगस्त 2026

कार्यस्थल पर सामाजिक जवाबदेही पर एक भारतीय मानक

कार्यस्थल पर सामाजिक जवाबदेही पर एक भारतीय मानक  

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IS 16001:2012 एक महत्वपूर्ण भारतीय मानक (Indian Standard) है, जिसके बारे में अधिकांश HR पेशेवरों को अभी भी पूरी जानकारी नहीं है। इस मानक का शीर्षक है — “कार्यस्थल पर सामाजिक जवाबदेही — अपेक्षाएँ” (Social Accountability at the Work Place — Requirements)। इसे भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने प्रकाशित किया है। इस मानक को सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी सेक्शनल कमेटी (MSD 10) ने 2012 में जारी किया था और 2018 में इसे पुनःपुष्टि (Reaffirmed) किया गया है।


उद्देश्य और कार्य-क्षेत्र


इस मानक का उद्देश्य संगठन को निम्नलिखित के योग्य बनाना है -


- कार्यस्थल पर तथा अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में सामाजिक जवाबदेही संबंधी नीतियाँ, कार्यविधियाँ और प्रथाएँ स्थापित करना, बनाए रखना और लागू करना।

- यह प्रदर्शित करना कि बनाई गई नीतियाँ, कार्यविधियाँ और प्रथाएँ लागू कानूनी, वैधानिक व विनियामक अपेक्षाओं, संगठन-विशिष्ट अपेक्षाओं तथा इस मानक की अपेक्षाओं के अनुरूप हैं।


यह मानक सभी प्रकार के संगठनों पर लागू होता है — चाहे उनका आकार, प्रकार, स्वामित्व या भौगोलिक स्थान कुछ भी हो। व्यावसायिक संस्थाएँ, सरकारी संगठन, शैक्षणिक संस्थान, NGO, ट्रस्ट, सोसायटी, सहकारी समितियाँ आदि इसे अपना सकते हैं।


यह एक प्रमाणन योग्य प्रबंधन प्रणाली मानक है। यह कार्यस्थल पर अच्छे व्यवहारों को बढ़ावा देने के लिए व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाता है, जो अक्सर सामान्य कानूनी अनुपालन से आगे जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों की सामाजिक-आर्थिक भलाई की रक्षा करना और उसे बढ़ाना, काम करने की स्थितियों को बेहतर बनाना, नैतिक प्रथाओं का समर्थन करना तथा भारतीय श्रम कानूनों व संबंधित अधिनियमों का पूरक बनना है।


मानक की मुख्य संरचना


इस मानक के प्रमुख संरचनात्मक तत्व निम्नलिखित हैं -


* प्रबंधन प्रणाली और दस्तावेजीकरण

* प्रबंधन की जिम्मेदारी

* संसाधन प्रबंधन

* मूल तत्व (Core Elements)

* कार्यान्वयन, निगरानी, मापन और निरंतर सुधार

* संबंधित भारतीय अधिनियमों, नियमों और विनियमों की सूची वाला परिशिष्ट (Annex)


11 मूल तत्व (Core Elements)


मानक में वर्णित 11 मूल तत्व इस प्रकार हैं -


(1) बाल मज़दूरी (Child Labour)

(2) सामुदायिक जुड़ाव (Community Engagement)

(3) भेदभाव (Discrimination)

(4) अपनी मर्जी से चुना गया रोज़गार (Employment Freely Chosen)

(5) रोज़गार संबंध (Employment Relationship)

(6) कर्मचारियों के कल्याण के उपाय (Employees’ Welfare Measures)

(7) संगठित होने की आज़ादी (Freedom of Association)

(8) कार्यस्थल पर स्वास्थ्य और सुरक्षा (Health and Safety at the Workplace)

(9) उत्पीड़न, दुर्व्यवहार और अमानवीय व्यवहार (Harassment, Abuse and Inhuman Treatment)

(10) वेतन और लाभ (Wages and Benefits)

(11) काम के घंटे (Working Hours)


मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) से संबंध


यह मानक मानव संसाधन, कर्मचारियों और श्रम प्रथाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। हालाँकि इसे शुद्ध रूप से “मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली” मानक के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक जवाबदेही / कार्यस्थल सामाजिक उत्तरदायित्व मानक के रूप में विकसित किया गया है।


यह कार्यस्थल की स्थितियों, कर्मचारियों के अधिकारों, नैतिक व्यवहार, कल्याण और श्रम कानूनों के पालन के संबंध में कर्मचारियों, हितधारकों और समाज के प्रति संगठन की जवाबदेही पर केंद्रित है। इसे लागू करने से भर्ती व रोज़गार प्रथाएँ, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, भेदभाव-मुक्त वातावरण, काम के घंटे व वेतन, कर्मचारी कल्याण, संगठित होने की स्वतंत्रता तथा संबंधित नीति व निगरानी जैसे क्षेत्रों में HR कार्यों को मज़बूत सहायता मिलती है।


यह ISO 30201 जैसा आधुनिक HR प्रबंधन प्रणाली मानक नहीं है। इसके बजाय यह कार्यस्थल पर सामाजिक/नैतिक जवाबदेही और श्रम अधिकारों के अनुपालन पर विशेष ज़ोर देता है। इसी कारण यह HR, अनुपालन (Compliance), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और स्थिरता (Sustainability) कार्यों के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। अधिक जानकारी के लिए मानक का अध्ययन करना बेहतर है, जिसे भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards) से प्राप्त किया जा सकता है।


संक्षेप में, IS 16001:2012 संगठनों को सामाजिक रूप से उत्तरदायी कार्यस्थल प्रथाओं को व्यवस्थित रूप से प्रबंधित करने और प्रदर्शित करने के लिए एक संरचित तथा प्रमाणन योग्य ढाँचा प्रदान करता है।


सादर,

केशव राम सिंघल 

HR = Human resources = मानव संसाधन 


सोमवार, 3 अगस्त 2026

मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) के मार्गदर्शक सिद्धांत (Guiding Principles)

मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) के मार्गदर्शक सिद्धांत (Guiding Principles)

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ISO 30201:2026, मानव संसाधन प्रबंधन पर एक अंतरराष्ट्रीय मानक है, इसके पैरा 0.4 में निम्न आठ मार्गदर्शक सिद्धांत बताए गए हैं - (1) पारस्परिक (Reciprocity) (2) मूल्य (Value) (3) अनुकूलनशीलता (Adaptability) (4) तालमेल (Synergy) (5) उत्तरदायित्व (Responsibility) (6) संगठनात्मक संस्कृति (Organizational culture) (7) कार्य वातावरण (Work environment) (8) समाज (Society) 


आइए एक-एक कर इन सिद्धांतों की चर्चा करें। 


1. पारस्परिकता (Reciprocity)


पारस्परिकता (Reciprocity) से तात्पर्य है किसी के द्वारा किए गए कार्य या व्यवहार के बदले में वैसा ही व्यवहार या प्रतिफल देना। यह आपसी लेन-देन, सहयोग और आदान-प्रदान का एक सामाजिक नियम है।


संगठन का मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) ऐसा होना चाहिए जिससे संगठन की अपेक्षाओं (Requirements) और कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं (Needs and Expectations) के बीच संतुलन और परस्पर लाभ (Mutual Benefit) स्थापित हो। अर्थात् केवल संगठन को लाभ या केवल कर्मचारी को लाभ नहीं, बल्कि दोनों के हितों का समन्वय हो।


यह सिद्धांत संगठन में क्यों उपयोगी है? संगठन के मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) में इस सिद्धांत को लागू करने से -

- कार्यकर्ता का विश्वास बढ़ता है।

- कार्यकर्ता सहभागिता एवं जुड़ाव (Worker Engagement) बढ़ता है।

- कार्यकर्ता पलायन (Attrition) कम होता है।

- संगठन और कार्यकर्ता दोनों दीर्घकालिक लाभ प्राप्त करते हैं।


उदाहरण -  यदि संगठन अपने कार्यकर्ताओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण देता है तो वे बेहतर प्रदर्शन करते हैं। इससे संगठन की उत्पादकता बढ़ती है और कर्मचारी के कैरियर का भी विकास होता है।


यहाँ कार्यकर्ता (Worker) से तात्पर्य है संगठन के लिए कार्य करने वाले सभी व्यक्ति, चाहे वे कर्मचारी हों, संविदा कर्मी हों अथवा अन्य प्रकार के कार्यकर्ता।


संगठन में मानव संसाधन प्रबंधन रणनीतिक तालमेल (Strategic alignment) बनाता है और संगठन की ज़रूरतों और उसके वर्कर्स की ज़रूरतों के बीच आपसी तालमेल को बढ़ावा देता है।


2. मूल्य (Value) 


मानव संसाधन (HR) में मूल्य (Value) का अर्थ संगठन के लक्ष्यों को प्राप्त करने और कार्यकर्ताओं की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए मूल्य सृजन (Value Creation), कर्मचारी कल्याण और नैतिक आचरण से है। यह संगठन को सही प्रतिभा देने और बेहतर संस्कृति बनाने में मदद करता है। कार्यकर्ता (Worker) संगठन के लिए केवल लागत (Cost) नहीं बल्कि मूल्य (Value) का स्रोत हैं। उनका वास्तविक मूल्य उनके योगदान (Contribution) में है। लोग संगठन के लिए मूल्य (Value) का स्रोत होते हैं। लोगों का मूल्य संगठन में उनके योगदान से है।


यह सिद्धांत संगठन में क्यों उपयोगी है? जब संगठन कार्यकर्ताओं को निवेश (Investment) मानता है, तब परिणाम निम्न होते हैं -


- संगठन में नवाचार बढ़ता है।

- संगठन में उत्पादकता बढ़ती है।

- संगठन के उत्पादों और सेवाओं के प्रति ग्राहक संतुष्टि बढ़ती है।

- संगठन की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होती है।


उदाहरण - एक अनुभवी मशीन ऑपरेटर के सुझाव से उत्पादन में 15% सुधार हो जाता है। उसका ज्ञान संगठन के लिए मूल्य उत्पन्न करता है।


3. अनुकूलनशीलता (Adaptability) 


मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) में अनुकूलनशीलता (Adaptability) का अर्थ है, बदलती हुई व्यापारिक परिस्थितियों, नई तकनीकों और अनिश्चित माहौल के अनुसार खुद को और कार्यकर्ताओं को तुरंत ढालना। यह मुख्य रूप से लचीलापन, त्वरित सीखना, और संकट प्रबंधन पर आधारित है। इस सिद्धांत से तात्पर्य है कि मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) को संगठन की परिस्थितियों तथा बाहरी परिवेश के अनुसार स्वयं को बदलते रहना चाहिए। 


यह सिद्धांत संगठन में क्यों उपयोगी है? यदि संगठन अनुकूलनशीलता के सिद्धान को व्यवहारिक तौर पर अपनाता है तो -


- संगठन में नई तकनीकों को अपनाने में सुविधा रहती है।

- संगठन में बदलते श्रम कानूनों का अनुपालन होता है ।

- बाजार परिवर्तन के अनुसार कार्यकर्ताओं के कौशल विकास पर ध्यान दिया जाता है।

- विशेष परिस्थितियों में संगठन संकटों का प्रभावी प्रबंधन करने के लिए तैयार रहता है।


उदाहरण - कोविड के बाद अनेक संगठनों ने Hybrid Working और Remote Working नीति अपनाई। मानव संसाधन (HR) ने नई उपस्थिति, प्रदर्शन मूल्यांकन और प्रशिक्षण प्रणाली विकसित की।


4. तालमेल (Synergy)


मानव संसाधन (HR) में तालमेल (Synergy) से तात्पर्य है अलग-अलग कार्यकर्ताओं और विभागों को इस तरह जोड़ना कि उनका सामूहिक काम व्यक्तिगत योगदान से बहुत बड़ा परिणाम दे। मुख्य लाभों में बेहतर टीम वर्क, लक्षित कार्यप्रणाली, और उत्पादकता में वृद्धि शामिल हैं। मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) ऐसा वातावरण बनाए जिसमें लोग मिलकर कार्य करें और उनका संयुक्त योगदान व्यक्तिगत योगदानों के योग से भी अधिक हो। मानव संसाधन प्रबंधन संगठन में लोगों को मिलकर काम करने में मदद करता है। 


यह सिद्धांत संगठन में क्यों उपयोगी है? इस सिद्धांत के उपयोग से संगठन में - 


- टीमवर्क मजबूत होता है।

- विभागों के बीच सहयोग बढ़ता है।

- समस्याओं का बेहतर समाधान निकलता है।

- नवाचार को बढ़ावा मिलता है।


उदाहरण - उत्पादन, गुणवत्ता, रखरखाव और मानव संसाधन (HR) विभाग मिलकर गुणवत्ता सुधार परियोजना चलाते हैं। परिणाम किसी एक विभाग के प्रयास से कहीं बेहतर प्राप्त होते हैं।


5. उत्तरदायित्व (Responsibility)


मानव संसाधन (HR) में उत्तरदायित्व का मुख्य संबंध कार्यकर्ताओं के जीवनचक्र का प्रबंधन करना है, जिसमें भर्ती (Recruitment), प्रशिक्षण और विकास (Training & Development), तथा वेतन एवं लाभ प्रबंधन (Compensation & Benefits) शामिल हैं। मानव संसाधन (HR) विभाग संगठन  के लक्ष्यों और कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करता है। मानव संसाधन (HR) की जिम्मेदारी केवल भर्ती करना नहीं है बल्कि योग्य लोगों को आकर्षित करना, उनका विकास करना तथा उन्हें सही कार्य पर तैनात करना भी है।


यह सिद्धांत संगठन में क्यों उपयोगी है? इस सिद्धांत के उपयोग से संगठन में - 


- सही व्यक्ति सही कार्य पर नियुक्त होता है।

- कार्यकर्ताओं की दक्षता बढ़ती है।

- भविष्य के नेतृत्व का विकास होता है।

- उत्तराधिकार योजना (Succession Planning) मजबूत होती है।


उदाहरण - संगठन में नई मशीन आने पर मानव संसाधन (HR) पहले कर्मचारियों को प्रशिक्षण देता है और उसके बाद उन्हें उस मशीन पर नियुक्त करता है।


6. संगठनात्मक संस्कृति (Organizational Culture)


मानव संसाधन (HR) में संगठनात्मक संस्कृति (Organizational Culture) का अर्थ उन साझा मूल्यों, मान्यताओं और व्यवहारों से है जो किसी संगठन के काम करने के तरीके को तय करते हैं। यह कार्यकर्ताओं की भर्ती, उनके जुड़ाव और कार्यस्थल के माहौल को सीधा प्रभावित करती है। मानव संसाधन (HR) को ऐसी संस्कृति विकसित करनी चाहिए जिसमें विश्वास, सम्मान, नैतिकता, समावेशन, सीखने की प्रवृत्ति और निरंतर सुधार को बढ़ावा मिले।


यह सिद्धांत संगठन में क्यों उपयोगी है? इस सिद्धांत के उपयोग से संगठन में - 


- कार्यकर्ता बेझिझक सुझाव देते हैं।

- शिकायतें कम होती हैं।

- नवाचार बढ़ता है।

- संगठन की प्रतिष्ठा मजबूत होती है।


उदाहरण - यदि किसी कर्मचारी से गलती हो जाए तो उसे दंडित करने के बजाय कारणों का विश्लेषण कर सुधारात्मक कार्रवाई की जाती है।


7. कार्य वातावरण (Work Environment) 


मानव संसाधन (HR) में कार्य वातावरण का अर्थ एक ऐसा सकारात्मक और सुरक्षित माहौल तैयार करना है, जिसमें कार्यकर्ता शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें। एक अच्छा कार्य वातावरण कार्यकर्ताओं के बीच अच्छे संबंध बनाने, काम में मन लगाने और संगठन में लंबे समय तक टिके रहने में मदद करता है।


मानव संसाधन (HRM) ऐसा कार्य वातावरण विकसित करे जो सुरक्षित, स्वस्थ, सम्मानजनक और प्रेरणादायक हो।


यह सिद्धांत संगठन में क्यों उपयोगी है? इस सिद्धांत के उपयोग से संगठन में - 


- दुर्घटनाएँ कम होती हैं।

- तनाव कम होता है।

- उत्पादकता बढ़ती है।

- कार्यकर्ता लंबे समय तक संगठन से जुड़े रहते हैं।


उदाहरण - संगठन एर्गोनोमिक कार्यस्थल, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, लचीला कार्य समय और सुरक्षित कार्य परिस्थितियाँ उपलब्ध कराता है। 


एर्गोनोमिक कार्यस्थल (ergonomic workplace) वह व्यवस्था है जो काम करने के माहौल और उपकरणों को इंसान के शरीर के मुताबिक ढालती है, जैसे कि सही कुर्सी, सही ऊंचाई की मेज और सही जगह पर रखा कंप्यूटर। इसका मुख्य उद्देश्य शरीर के दर्द को रोकना, काम करने में आराम देना और ऊर्जा तथा उत्पादकता को बढ़ाना है।


8. समाज (Society)


मानव संसाधन प्रबंधन में 'समाज' सिद्धांत का अर्थ है कि संगठन अपनी मानव संसाधन (HR) नीतियों और कार्यप्रणालियों के माध्यम से समाज, पर्यावरण तथा सतत विकास में सकारात्मक योगदान दें। मानव संसाधन नीतियाँ (HR policies) केवल संगठन तक सीमित न रहें बल्कि समाज, पर्यावरण और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी ध्यान में रखें।


यह सिद्धांत संगठन में क्यों उपयोगी है? इस सिद्धांत के उपयोग से संगठन में - 


- संगठन की सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ती है।

- सतत विकास (Sustainable Development) को बढ़ावा मिलता है।

- विविधता एवं समावेशन (Diversity & Inclusion) मजबूत होते हैं।

- दीर्घकालिक विश्वास विकसित होता है।


उदाहरण - संगठन स्थानीय युवाओं को रोजगार देता है, महिलाओं एवं दिव्यांग व्यक्तियों को समान अवसर देता है तथा सामुदायिक कौशल विकास कार्यक्रम चलाता है।


सार 


ISO 30201:2026 मानक के ये आठ मार्गदर्शक सिद्धांत केवल मानव संसाधन (HR) विभाग के लिए नहीं हैं, बल्कि पूरे संगठन के लिए एक ऐसी मानव संसाधन प्रबंधन संस्कृति विकसित करने का आधार प्रदान करते हैं, जिसमें लोगों को संगठन की सबसे महत्वपूर्ण पूंजी माना जाता है। इन सिद्धांतों का उद्देश्य केवल कार्यकर्ताओं का प्रबंधन करना नहीं, बल्कि संगठन, कार्यकर्ताओं और समाज—तीनों के लिए दीर्घकालिक मूल्य (Long-term Value) का सृजन करना है। इन मार्गदर्शक सिद्धांतों को संगठन की नीतियों, प्रक्रियाओं, नेतृत्व, प्रशिक्षण, प्रदर्शन मूल्यांकन तथा निरंतर सुधार की गतिविधियों में समाहित करके एक प्रभावी मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) विकसित की जा सकती है।


सादर, 

केशव राम सिंघल 


ब्लॉग का नया नाम

ब्लॉग का नया नाम

अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (International Organization for Standardization – ISO) ने वर्ष 1987 में गुणवत्ता प्रबंधन के लिए ISO 9001, ISO 9002 तथा ISO 9003 अंतरराष्ट्रीय मानक प्रकाशित किए थे। इसके बाद विभिन्न प्रबंध प्रणाली मानकों (Management System Standards) के अनेक अंतरराष्ट्रीय मानक प्रकाशित हुए, जिनकी संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है।

इसी परिवर्तन और विस्तार को ध्यान में रखते हुए हमने अपने ब्लॉग का नाम "गुणवत्ता और गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली पर जानकारी" से बदलकर "प्रबंध प्रणाली जागरूकता (Management Systems Awareness)" कर दिया है।

अब इस नए नाम के अनुरूप हमारा प्रयास रहेगा कि विभिन्न प्रबंध प्रणालियों (Management Systems) से संबंधित जागरूकता आलेख, उपयोगी जानकारी, नवीनतम अंतरराष्ट्रीय मानकों तथा उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों से संबंधित सामग्री नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाए।

आशा है कि हमारे पाठकों को यह परिवर्तन पसंद आएगा और उन्हें पूर्व की भाँति आपका सहयोग एवं प्रोत्साहन मिलता रहेगा। आपके सुझाव और टिप्पणियाँ सादर आमंत्रित हैं।

सादर,
केशव राम सिंघल

रविवार, 2 अगस्त 2026

मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (Human resources management systems)

मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (Human resources management systems)

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अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन 'इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन फॉर स्टैंडर्डाइज़ेशन' (ISO) ने 1987 में गुणवत्ता प्रबंधन के लिए ISO 9001, ISO 9002 तथा ISO 9003 अंतरराष्ट्रीय मानक प्रकाशित किए। इसके बाद विभिन्न प्रबंधन प्रणालियों (Management System Standards) के अनेक अंतरराष्ट्रीय मानक प्रकाशित किए गए, जिनकी संख्या निरंतर बढ़ रही है। 22 जून 2026 को ISO ने मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (Human Resources Management Systems – HRMS) पर पहला अंतरराष्ट्रीय मानक ISO 30201:2026 प्रकाशित किया। यह मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) के लिए अपेक्षाएँ (Requirements) वर्णित करता है। यह सभी आकार के पब्लिक या प्राइवेट संगठनों को संगत (Consistent) मानव संसाधन प्रबंधन प्रक्रियाएँ स्थापित करने, कार्यबल (Workforce) के लक्ष्यों को व्यावसायिक रणनीति (Business strategy) के साथ संरेखित (Align) करने और कर्मचारी की भलाई को बेहतर बनाने में मदद करता है। यह दस्तावेज अपेक्षाओं (Requirements) पर आधारित प्रबंधन प्रणाली मानक (MSS) है जो मानव संसाधन प्रबंधन (HR Management) पर फ़ोकस करता है। यह मानक दस्तावेज टेक्निकल कमेटी ISO/TC 260 द्वारा तैयार किया गया।


एक प्रभावी मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) संगठन के कार्यबल (Workforce) की पूरी क्षमता का उपयोग करके संगठन का श्रेष्ठ प्रदर्शन (Performance) सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। मानव संसाधन सभी संगठनों के लिए एक ज़रूरी संसाधन हैं और संगठन के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए उनका प्रभावी प्रबंधन ज़रूरी है।


यह मानक दस्तावेज मानव संसाधन प्रबंधन सिद्धांत (HR management principles) बताता है, मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) के लिए अपेक्षाएँ वर्णित करता है और इस बात के उदाहरण देता है कि सिद्धांतो और अपेक्षाओं का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। एक प्रभावी HRMS कार्यकर्ता (Worker), संगठन और जुड़े समुदाय को लगातार फ़ायदे देता है, जिस समुदाय में वे कार्य करते हैं। यहाँ कार्यकर्ता (Worker) से तात्पर्य है संगठन के लिए कार्य करने वाले सभी व्यक्ति, चाहे वे कर्मचारी हों, संविदा कर्मी हों अथवा अन्य प्रकार के कार्यकर्ता।


यह मानक दस्तावेज मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) के  लिए अपेक्षाएँ वर्णित करता है, जो एक संगठन  को निम्न करने में मदद करता है:


- HRMS  के असरदार इस्तेमाल और लगातार सुधार के ज़रिए हितधारक मूल्य (Stakeholder value) बनाना, जिसमें कार्यकर्ताओं को लाना, उनका विकास (Development) और उनकी तैनाती (Deployment) शामिल है;


- HRMS को संगठन की पूरी प्रबंधन प्रणाली में एकीकृत (Integrate) करना, जिसमें जोखिम प्रबंधन (Risk management) भी शामिल है;


- अपने कार्यकर्ता को लगातार इस तरह से प्रबंधित (Manage) करने की अपनी क्षमता दिखाना जो हितधारकों की अपेक्षाओं को को पूरा करने में मदद करे, जिसमें संगठन के उद्देश्य को पूरा करना और कार्यकर्ता (Worker) और नियोक्ता (Employer) की अपेक्षाओं पर ध्यान देना शामिल है;


- मानव पूंजी (Human Capital) अर्थात संगठन के कार्यबल का सामूहिक ज्ञान, कौशल, अनुभव तथा क्षमताएँ (Collective knowledge, skills, experience and abilities) पर सकारात्मक प्रभाव डालना।


यह मानक सभी आकार, प्रकार और सेक्टर के संगठन पर लागू होता है, चाहे वह पब्लिक हो या प्राइवेट, लाभ के लिए हो या लाभ के लिए नहीं (Not-for-profit) हो। यह मानक दस्तावेज संगठन की रणनीति और उद्देश्य तय नहीं करता है।


इस मानक  को लागू करने वाला संगठन यूनाइटेड नेशंस (UN) सतत विकास लक्ष्यों (SDGs), यानी SDG3, SDG4, SDG5, SDG8, SDG 9 और SDG10 में योगदान दे सकता है। इस मानक में वर्णित HRMS प्लान-डू-चेक-एक्ट (PDCA) चक्र पर आधारित है। 


यह मानक मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) के मार्गदर्शक सिद्धांत (Guiding principles) वर्णित करता है जो प्रभावी  मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) के लिए एक नींव (Foundation) का काम करते हैं और एक सकारात्मक और उत्पादक संगठनात्मक संस्कृति में मदद कर सकते हैं। मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) के मार्गदर्शक सिद्धांत (Guiding principles) संगठन के रणनीतिक लक्ष्यों और समाज में भूमिका को समर्थन (Support) देते हैं, जिसमें सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियाँ शामिल हैं। यह मानक किसी देश में प्रचलित श्रम कानूनों, सामूहिक सौदेबाजी (Collective Bargaining), ट्रेड यूनियन व्यवस्था अथवा कर्मचारी प्रतिनिधित्व प्रणाली का स्थान नहीं लेता।


यद्यपि प्रमाणन इस मानक की अपेक्षा (Requirement) नहीं है, फिर भी कोई संगठन यदि चाहे तो किसी मान्यता प्राप्त प्रमाणन निकाय (Certification Body) से ISO 30201:2026 की अनुरूपता (Conformity) का प्रमाणन प्राप्त कर सकता है।


सादर, 

केशव राम सिंघल 


शनिवार, 27 जून 2026

क्या PDCA Cycle को अब PDCI Cycle के रूप में देखा जाना चाहिए?

क्या PDCA Cycle को अब PDCI Cycle के रूप में देखा जाना चाहिए?

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Plan–Do–Check–Act (PDCA) Cycle पिछले कई दशकों से गुणवत्ता प्रबंधन तथा विभिन्न Management Systems की आधारशिला रहा है। आज ISO 9001, ISO 14001, ISO 45001, ISO 50001, ISO 27001 सहित लगभग सभी प्रबंधन प्रणालियाँ इसी अवधारणा पर आधारित हैं। पिछले दिनों एक अनौपचारिक बातचीत में एक विचारणीय प्रश्न सामने आया कि क्या PDCA Cycle के अंतिम चरण "Act" को अधिक स्पष्ट रूप से "Improvement" के रूप में परिभाषित किया जाना चाहिए? क्या अब इसे PDCI (Plan–Do–Check–Improvement) Cycle के रूप में देखने का समय आ गया है? इस आलेख के माध्यम से मैं इस विषय पर विचार-विश्लेषण प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा हूँ। 


PDCA Cycle का ऐतिहासिक महत्व


PDCA Cycle का विकास गुणवत्ता सुधार की अवधारणा को व्यवस्थित रूप से लागू करने के उद्देश्य से हुआ। इस चक्र के चार चरण हैं - 


Plan – योजना बनाना।

Do – योजना का कार्यान्वयन।

Check – परिणामों का मूल्यांकन।

Act – आवश्यक कार्रवाई कर सुधार लागू करना।


दुनिया भर में इस वैश्विक रूप से स्वीकृत चक्र ने संगठनों को निरंतर सुधार की संस्कृति विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।


क्या "Act" शब्द पर्याप्त स्पष्ट है?


व्यावहारिक अनुभव बताता है कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अनेक प्रतिभागी "Act" का अर्थ केवल "कार्य करना" समझ लेते हैं। वास्तव में इसका आशय है -


- सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective action)

- आवश्यक परिवर्तन (Necessary change)

- सफल प्रक्रियाओं का मानकीकरण (Standardization of successful processes)

- अगली सुधार यात्रा का प्रारम्भ (Beginning of next improvement journey)


अर्थात "Act" का वास्तविक लक्ष्य सुधार (Improvement) ही है।


ISO Management Systems का दृष्टिकोण


वर्तमान में ISO प्रबंधन प्रणाली मानकों (Management System Standards) में "सुधार" (Improvement) को स्वतंत्र और अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।


लगभग प्रत्येक प्रबंधन प्रणाली का अंतिम उद्देश्य निम्न है - 


- निरंतर सुधार (Continual Improvement),

- बेहतर प्रदर्शन (Improved Performance),

- जोखिमों का प्रभावी प्रबंधन (Effective Management of Risks), और 

- ग्राहकों एवं अन्य इच्छुक पक्षों (Interested Parties) की बढ़ती अपेक्षाओं की पूर्ति।


इस दृष्टि से "सुधार" (Improvement) शब्द आज पहले की अपेक्षा अधिक प्रमुख हो गया है।


PDCI Cycle का प्रस्ताव


यदि अंतिम चरण को सीधे "सुधार" (Improvement) कहा जाए, तो पूरा चक्र इस प्रकार होगा - Plan → Do → Check → Improvement


इससे प्रत्येक व्यक्ति को तुरंत यह संदेश प्राप्त होगा कि पूरी प्रणाली का अंतिम उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि सुधार (Improvement) प्राप्त करना है।


क्या PDCA को बदल देना चाहिए?


मेरे विचार से आधिकारिक रूप से PDCA को बदलने की आवश्यकता नहीं है। इसके निम्न प्रमुख कारण हैं - 


- PDCA चक्र (Cycle) विश्वभर में स्वीकृत एवं स्थापित मॉडल है।

- "Act" के भीतर सुधार (Improvement) पहले से निहित है।

- वैश्विक मानकों एवं प्रशिक्षण सामग्री में परिवर्तन व्यावहारिक नहीं होगा।


अधिक उपयुक्त होगा कि प्रशिक्षण, लेखन एवं जागरूकता कार्यक्रमों में "Act" की व्याख्या इस प्रकार की जाए—


Act = Improve (सुधार) + Standardize (मानकीकरण) + Learn (सीख)


या


PDCA = Plan – Do – Check – Act for Improvement (सुधार के लिए)


इस प्रकार पारंपरिक मॉडल में परिवर्तन की ज़रूरत नहीं और सुधार (Improvement) का वास्तविक उद्देश्य भी स्पष्ट हो जाएगा।


निष्कर्ष 


PDCA Cycle गुणवत्ता प्रबंधन का एक वैश्विक रूप में स्वीकृत मॉडल है। इसे बदलने की आवश्यकता नहीं है, किन्तु इसकी व्याख्या को आधुनिक संदर्भ में अधिक स्पष्ट बनाना आवश्यक है। यदि PDCI शब्दावली लोगों को यह समझाने में सहायक होती है कि प्रत्येक प्रबंधन प्रणाली का अंतिम लक्ष्य निरंतर सुधार (Continual Improvement) है, तो इसे एक वैचारिक मॉडल (Conceptual Model) के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।


यद्यपि यह एक वैचारिक प्रस्ताव है, फिर भी संभव है कि भविष्य में गुणवत्ता विशेषज्ञों के बीच इस विषय पर व्यापक चर्चा प्रारम्भ हो और यह प्रबंधन प्रणालियों की अवधारणाओं के विकास में एक नया विमर्श बन जाए। यह आलेख लेखक के व्यक्तिगत विचार प्रस्तुत करता है। इसका उद्देश्य स्थापित PDCA अवधारणा को प्रतिस्थापित करना नहीं, बल्कि 'Act' चरण के अंतर्निहित उद्देश्य—निरंतर सुधार (Continual Improvement)—को अधिक स्पष्ट रूप से समझने और समझाने पर विचार-विमर्श को आगे बढ़ाना है।


सादर, 

केशव राम सिंघल


मंगलवार, 16 जून 2026

सुधार (Correction), सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) और निवारक कार्रवाई (Preventive Action)

सुधार (Correction), सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) और निवारक कार्रवाई (Preventive Action)

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किसी भी प्रबंध प्रणाली के कार्यान्वयन में अक्सर तीन प्रकार की कार्रवाइयों—सुधार (Correction), सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) और निवारक कार्रवाई (Preventive Action)—का सामना होता है। ये तीनों पद कई बार भ्रम उत्पन्न करते हैं। सुधार (Correction) से समस्या ठीक होती है, सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) से समस्या का कारण समाप्त किया जाता है और निवारक कार्रवाई (Preventive Action) के माध्यम से समस्या उत्पन्न होने से पहले ही उसके संभावित कारण को दूर कर दिया जाता है।


सुधार (Correction) = समस्या को तुरंत ठीक करना।

सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) = समस्या के मूल कारण को खोजकर उसे समाप्त करना ताकि वही समस्या दोबारा न हो।

निवारक कार्रवाई (Preventive Action) = समस्या उत्पन्न होने से पहले उसके संभावित कारण को समाप्त करना।


उदाहरण के तौर पर इसे इस प्रकार समझा जा सकता है। मैंने देखा कि मेरे घर की छत से बारिश का पानी टपक रहा है। समस्या देखकर मैंने बाल्टी रखकर पानी को फर्श पर फैलने से रोक दिया और टपकने वाली जगह पर अस्थायी सीलेंट लगा दिया। यह सुधार (Correction) है, क्योंकि मैंने तत्काल समस्या को संभाल लिया, लेकिन पानी टपकने का मूल कारण अभी भी समाप्त नहीं हुआ।


इसके बाद मैंने समस्या के मूल कारण को खोजने का प्रयास किया और पाया कि घर की छत की वॉटरप्रूफिंग खराब हो गई है। यह समस्या दोबारा न हो, इसके लिए मैंने पूरी छत की मरम्मत करवाई और नई वॉटरप्रूफिंग करवाई। यह सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) है, क्योंकि मैंने पानी टपकने के मूल कारण को समाप्त कर दिया।


पिछले वर्ष बारिश के दिनों में मैंने अपने पड़ोसी के घर की छत से पानी टपकने की समस्या देखी थी। यद्यपि उस समय मेरे घर में ऐसी कोई समस्या नहीं हुई थी, फिर भी इस बार वर्षा ऋतु शुरू होने से पहले मैंने अपनी छत का निरीक्षण करवाया। निरीक्षण में पता चला कि मेरी छत की वॉटरप्रूफिंग भी पुरानी हो चुकी है। इसलिए मैंने वर्षा ऋतु आने से पहले ही उसकी वॉटरप्रूफिंग करवा ली। यह निवारक कार्रवाई (Preventive Action) है, क्योंकि मैंने संभावित समस्या को उत्पन्न होने से पहले ही रोक दिया।


एक अन्य सरल उदाहरण से भी इन अवधारणाओं को समझा जा सकता है। मैं अपने स्कूटर से बाजार जा रहा था कि रास्ते में मेरे स्कूटर का टायर पंचर हो गया। मैंने पंचर ठीक करवा लिया। यह सुधार (Correction) है।


जब पंचर की मरम्मत करवाई जा रही थी, तब मैंने देखा कि ट्यूब में बड़ा पंचर है और पहले भी उसमें कई बार पंचर हो चुके हैं। स्थायी समाधान के लिए मैंने नई ट्यूब लगवा ली। यह सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) है।


बाद में जब मेरा स्कूटर नियमित सर्विसिंग के लिए गया, तब मैंने टायर और ट्यूब की स्थिति की जाँच करवाई। उनके अधिक पुराने और घिसे हुए होने के कारण मैंने उन्हें पहले ही बदलवा दिया, ताकि पंचर जैसी समस्या उत्पन्न न हो। यह निवारक कार्रवाई (Preventive Action) है।


ये तीनों पद वास्तव में तीन महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं, जो हमारे दैनिक जीवन में भी लागू होती हैं और विभिन्न प्रबंध प्रणालियों, जैसे ISO 9001 तथा ISO 14001, के कार्यान्वयन में भी व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं।


सुधार (Correction) → समस्या ठीक करो।

सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) → समस्या के कारण को समाप्त करो।

निवारक कार्रवाई (Preventive Action) → समस्या आने से पहले उसके कारण को समाप्त करो।


यदि कोई संगठन इन तीनों अवधारणाओं का नियमित रूप से उपयोग करता है, तो उसकी प्रबंध प्रणाली निश्चित रूप से अधिक प्रभावी और मजबूत बनती है। हालाँकि वर्तमान प्रबंध प्रणाली मानकों में 'निवारक कार्रवाई' (Preventive Action) शब्द का प्रत्यक्ष उपयोग पहले की भाँति नहीं किया जाता है, फिर भी इसकी मूल अवधारणा आज भी विद्यमान है। अब संभावित जोखिमों और अवसरों की पहचान तथा उन्हें संबोधित करने की अपेक्षा के माध्यम से निवारक कार्रवाई की भावना को प्रबंध प्रणालियों में समाहित किया गया है।


एक मजबूत प्रबंध प्रणाली केवल समस्याओं को ठीक नहीं करती, बल्कि उनके कारणों को समाप्त करती है और संभावित समस्याओं को उत्पन्न होने से पहले ही रोकने का प्रयास करती है।


सादर,

केशव राम सिंघल 


मंगलवार, 2 जून 2026

महत्वपूर्ण अद्यतन - ISO 9000:2026 मानक प्रकाशित

महत्वपूर्ण अद्यतन - ISO 9000:2026 मानक प्रकाशित

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गुणवत्ता प्रबंधन (Quality Management) के क्षेत्र में 2015 के बाद पहला बड़ा बदलाव करते हुए ISO 9000:2026 (Fundamentals and vocabulary) का 5वाँ संस्करण प्रकाशित हो चुका है।


मुख्य बातें -

- आशा की जानी चाहिए कि भारत में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) इसे IS/ISO 9000:2026 के रूप में शीघ्र जारी करेगा।

- इसे आगामी ISO 9001:2026 मानक के साथ पूरी तरह समन्वित किया गया है ताकि बदलती अपेक्षाओं (Updated Requirements) से तालमेल बिठाया जा सके।

- यह मानक अब केवल 'प्रणाली' (System) तक सीमित न रहकर संपूर्ण गुणवत्ता प्रबंधन के लिए एक वैश्विक भाषा तय करेगा।


सादर,

केशव राम सिंघल 

गुरुवार, 28 मई 2026

ISO 19011:2026 मानक जारी - ऑडिटिंग के एक नए युग की शुरुआत

ISO 19011:2026 मानक जारी - ऑडिटिंग के एक नए युग की शुरुआत

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प्रतीकात्मक चित्र 


ISO 19011:2026 मानक आधिकारिक रूप से प्रकाशित हो चुका है। ISO के आधिकारिक लिंक पर अब इसकी स्थिति 'Published' (प्रकाशित) दर्शा रही है।


इस संशोधित मानक के प्रकाशन के साथ ही ऑडिटिंग की दुनिया में एक नए युग की शुरुआत हो गई है, जहाँ पारंपरिक ऑडिटिंग के तरीकों को पूरी तरह से आधुनिक और डिजिटल अपेक्षाओं के अनुरूप ढाल दिया गया है।


चूँकि अब यह मानक आधिकारिक रूप से लागू हो गया है, संगठनों और ऑडिटर्स के लिए ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बातें निम्नलिखित हैं - 


- मानक की प्रति - अब संगठन और ऑडिटर्स ISO Store से इस नए मानक (ISO 19011:2026) की प्रति प्राप्त कर सकते हैं और इसके विस्तृत दिशा-निर्देशों का अध्ययन कर सकते हैं।


- परिवर्तन काल (Transition Period) - संक्रमण काल की शुरुआत हो चुकी है। यद्यपि इसकी समय-सीमा 3 वर्ष की है, लेकिन विशेषज्ञों की सलाह है कि संगठनों को पहले वर्ष (यानी अगले 12 महीनों) के भीतर ही अपनी आंतरिक ऑडिट टीमों को प्रशिक्षित करना और नई गाइडलाइंस लागू करना शुरू कर देना चाहिए। इससे रिमोट और तकनीक-आधारित ऑडिट को डिज़ाइन करने में आपकी टीम को पर्याप्त अनुभव मिल जाएगा।


- ऑडिटर्स के लिए अपग्रेड - ऑडिटर्स के लिए अब ISO 19011:2018 से ISO 19011:2026 ब्रिजिंग कोर्स प्रासंगिक हो गए हैं, ताकि वे नए नियमों—विशेष रूप से रिमोट और हाइब्रिड ऑडिटिंग के लाइफसाइकिल डिज़ाइन, आईसीटी (ICT) सक्षमता और सूचना सुरक्षा से जुड़े बदलावों को समझकर खुद को अपग्रेड कर सकें।


- रिमोट ऑडिटिंग की अनिवार्यता - इस प्रकाशन के साथ अब रिमोट ऑडिटिंग केवल एक वैकल्पिक टूल नहीं रह गया है, बल्कि ऑडिट प्रोग्राम के योजना चरण (Planning Stage) से ही इसे एक मुख्य पद्धति के रूप में शामिल करना अनिवार्य हो गया है।


यह मानक मुख्य रूप से निम्नलिखित 13 प्रबंध प्रणालियों के ऑडिट के लिए अत्यंत उपयुक्त और प्रभावी है -


ISO 9001 (Quality)

ISO 14001 (Environment)

ISO 45001 (Health & Safety)

ISO/IEC 27001 (Information Security)

ISO 22301 (Business Continuity)

ISO/IEC 20000-1 (IT Service)

ISO/IEC 42001 (Artificial Intelligence)

ISO 22000 (Food Safety)

ISO 13485 (Medical Devices)

ISO 50001 (Energy)

ISO 37001 (Anti-Bribery)

ISO 41001 (Facility Management) 

ISO 10012:2026 (Measurement)  


प्रबंधन प्रणाली ऑडिटिंग से जुड़े प्रोफेशनल्स को अब तुरंत इस नए संस्करण को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा देना चाहिए।


सादर,

केशव राम सिंघल

मंगलवार, 26 मई 2026

ISO/FDIS 9001:2026 जारी

ISO/FDIS 9001:2026 जारी 

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अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (ISO) ने इसी माह ISO/FDIS 9001:2026 को अंतिम मतदान (Ballot) और समीक्षा के लिए जारी कर दिया है। इसके बाद, मुख्य मानक ISO 9001:2026 का अंतिम प्रकाशन सितंबर 2026 में अपेक्षित है।


हालाँकि, ISO/FDIS 9001:2026 का ड्राफ्ट सार्वजनिक रूप से मुफ्त उपलब्ध नहीं है और इसे केवल ISO स्टोर से खरीदा जा सकता है। फिर भी, इस ड्राफ्ट के आधार पर कुछ प्रमुख प्रमाणन निकायों (जैसे BSI, DQS, BV आदि) ने मुफ्त श्वेतपत्र (Whitepapers) और तुलनात्मक दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनमें FDIS के प्रमुख बदलावों का खंड-दर-खंड (Clause-by-Clause) विश्लेषण दिया गया है, जिसका मुख्य सार निम्नलिखित है -


1. खंड 4 (Context of the Organization) - इसके अंतर्गत पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को संगठन के संदर्भ में देखना अनिवार्य होगा। अब संगठनों को अपनी जोखिम रूपरेखा (Risk Profile) में पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासनिक (ESG) पहलुओं को शामिल करना होगा।


2. खंड 5 (Leadership) - संगठन में गुणवत्ता संस्कृति (Quality Culture) और नैतिक व्यवहार को बढ़ावा देना अब पूरी तरह से नेतृत्व की जिम्मेदारी होगी। ऑडिटर्स केवल प्रलेखित गुणवत्ता नीति (Quality Policy) ही नहीं देखेंगे, बल्कि यह भी जाँचेंगे कि कर्मचारियों का व्यावहारिक व्यवहार गुणवत्ता और नैतिकता के अनुरूप है या नहीं।


3. खंड 6 (Planning) - नए संशोधन में 'जोखिम' (Risks) और 'अवसर' (Opportunities) को अलग-अलग उपखंडों में स्पष्ट किया गया है। संगठनों को इन दोनों को ही संबोधित (Address) करना होगा। इस प्रकार, अब 'जोखिम-आधारित सोच' (Risk-based Thinking) के साथ-साथ 'अवसर-आधारित सोच' (Opportunity-based Thinking) के लिए भी एक मजबूत ढाँचा तैयार करना होगा।


4. खंड 7 (Support) - कर्मचारियों के प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों में गुणवत्ता नीति के साथ-साथ संगठन की संस्कृति (Culture) और नैतिकता (Ethics) को भी अनिवार्य रूप से शामिल करना होगा। इसके परिणामस्वरूप संगठनों को अपनी मौजूदा प्रशिक्षण कार्ययोजना में बदलाव करना होगा।


5. नया अनुलग्नक (Annex) - इस बार 15 पृष्ठों का एक विस्तृत मार्गदर्शी अनुलग्नक जोड़ा गया है, जो खंड 4 से 10 तक की अपेक्षाओं (Requirements) की व्याख्या करता है। यह अनुलग्नक उपयोगकर्ताओं के लिए मानकों को समझने में बेहद लाभकारी सिद्ध होगा और ऑडिटर्स व संगठनों के बीच व्याख्या (Interpretation) के मतभेदों को काफी हद तक कम करेगा।


यदि आगामी प्रक्रियाएँ सुचारू रूप से चलती रहीं, तो गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली का यह बहुप्रतीक्षित और संशोधित मानक ISO 9001:2026 सितंबर 2026 में हमारे सामने होगा।


सादर,

केशव राम सिंघल 


सोमवार, 18 मई 2026

ISO 9001:2026 QMS के FDIS की वर्तमान स्थिति

ISO 9001:2026 QMS के FDIS की वर्तमान स्थिति 

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प्रतीकात्मक चित्र साभार जैमिनी गूगल


ISO 9001:2026 QMS के FDIS (Final Draft International Standard) की वर्तमान स्थिति निम्न प्रकार है -


* तकनीकी सहमति - फरवरी 2026 में मेक्सिको सिटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की बैठक में, मानक के मुख्य खण्डों (Clauses 1 से 10) की अपेक्षाओं पर पूर्ण सहमति (Consensus) बन चुकी है।

* सुझावों का संकलन - ड्राफ्ट इंटरनेशनल स्टैंडर्ड (DIS) को दिसंबर 2025 में सदस्य देशों द्वारा 97% की सहमति से मंजूरी मिलने के बाद, दुनिया भर से मिले सुझावों (Comments) को संकलित कर लिया गया है। वर्तमान में वर्किंग ग्रुप अंतिम सूचनात्मक भागों (Informative text) और 'Annex A' को अंतिम रूप देने पर कार्य कर रहा है।

* FDIS का प्रकाशन - ISO/FDIS 9001 QMS का फाइनल ड्राफ्ट मतदान के लिए जून 2026 तक आधिकारिक रूप से जारी (Publish) होने की उम्मीद है।


संभावित समयबद्धता (Timeline)


आगामी चरणों के लिए निम्नलिखित समयसीमा तय की गई है -


* जून 2026 - FDIS (Final Draft) का प्रकाशन और अंतिम मतदान का प्रारम्भ।

* सितंबर 2026 - संशोधित मानक ISO 9001:2026 QMS का आधिकारिक अंतिम प्रकाशन (Official Release)।

* सितंबर 2026 से अगस्त 2027 - इस अवधि में सर्टिफिकेशन बॉडीज (CBs) नए मानक के अनुसार ऑडिट करने के लिए खुद को प्रशिक्षित करेंगी और मान्यता (Accreditation) प्राप्त करने की कार्रवाई पूरी करेंगी।

* अगस्त 2027 - मानक के संशोधित संस्करण ISO 9001:2026 के तहत पहले प्रमाणीकरण (Certification) जारी होना शुरू होने की संभावना है।

* सितंबर 2029 - 3 वर्ष का ट्रांजिशन पीरियड (Transition Period) समाप्त होने पर मानक का वर्तमान संस्करण ISO 9001:2015 QMS पूरी तरह से निष्प्रभावी (Retire) हो जाएगा।


नए मानक में संभावित बदलाव 


यह प्रश्न इस क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों के मन में है कि नए मानक में किन बदलावों की आशा की जाए। हालाँकि अंतिम मानक का प्रकाशन सितम्बर 2026 में अपेक्षित होने के कारण अभी कुछ भी निश्चित कहना जल्दबाजी होगी, फिर भी विशेषज्ञों के अनुसार ISO 9001:2026 QMS में होने वाले संशोधन 'क्रांतिकारी' न होकर एक 'विकासवादी' (Evolutionary) बदलाव होंगे। इसका कोर हाई-लेवल स्ट्रक्चर (HLS) यथावत रहेगा। निम्नलिखित महत्वपूर्ण बदलाव आने की प्रबल संभावना है:


* खण्ड 4 (Context of the Organization) - इसमें जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और स्थिरता (Sustainability) के संदर्भ को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाएगा, जो कि 2024 के संशोधन (Amendment) में भी देखा गया था।

* खण्ड 5 (Leadership) - शीर्ष प्रबंधन (Top Management) के लिए संगठन में गुणवत्ता संस्कृति (Quality Culture) और नैतिक व्यवहार (Ethical Behaviour) को बढ़ावा देना तथा प्रदर्शित करना अनिवार्य (Mandatory) कर दिया जाएगा।

* खण्ड 6 (Risk and Opportunity) - जोखिम (Risk) और अवसर (Opportunity) के प्रबंधन को अधिक स्पष्टता प्रदान की जाएगी, जिससे 'अवसर-आधारित सोच' (Opportunity-based thinking) को बढ़ावा मिले।

* खण्ड 7 (Support) - कर्मचारियों की जागरूकता (Awareness) के दायरे में अब गुणवत्ता संस्कृति और व्यावसायिक नैतिकता की समझ को भी जोड़ा जाएगा।

* नया Annex A - ISO 9001 मानक के इतिहास में पहली बार लगभग 15 पृष्ठों का एक विस्तृत मार्गदर्शिका अनुलग्नक (Informative Annex) जोड़ा जा रहा है, जो मानक की अपेक्षाओं और शब्दावलियों को समझने में उपयोगकर्ताओं व ऑडिटर्स की मदद करेगा।


सार 


संक्षेप में कहें तो ISO/FDIS 9001:2026 QMS का मसौदा प्रकाशन के लिए आगे बढ़ रहा है। जून 2026 में इसका अंतिम प्रारूप वोटिंग के लिए सामने आने की संभावना है और सितंबर 2026 में यह नया गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली अंतरराष्ट्रीय मानक प्रकाशित और लागू होने की संभावना है ।


सादर,

केशव राम सिंघल 

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