मंगलवार, 16 जून 2026

सुधार (Correction), सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) और निवारक कार्रवाई (Preventive Action)

सुधार (Correction), सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) और निवारक कार्रवाई (Preventive Action)

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किसी भी प्रबंध प्रणाली के कार्यान्वयन में अक्सर तीन प्रकार की कार्रवाइयों—सुधार (Correction), सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) और निवारक कार्रवाई (Preventive Action)—का सामना होता है। ये तीनों पद कई बार भ्रम उत्पन्न करते हैं। सुधार (Correction) से समस्या ठीक होती है, सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) से समस्या का कारण समाप्त किया जाता है और निवारक कार्रवाई (Preventive Action) के माध्यम से समस्या उत्पन्न होने से पहले ही उसके संभावित कारण को दूर कर दिया जाता है।


सुधार (Correction) = समस्या को तुरंत ठीक करना।

सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) = समस्या के मूल कारण को खोजकर उसे समाप्त करना ताकि वही समस्या दोबारा न हो।

निवारक कार्रवाई (Preventive Action) = समस्या उत्पन्न होने से पहले उसके संभावित कारण को समाप्त करना।


उदाहरण के तौर पर इसे इस प्रकार समझा जा सकता है। मैंने देखा कि मेरे घर की छत से बारिश का पानी टपक रहा है। समस्या देखकर मैंने बाल्टी रखकर पानी को फर्श पर फैलने से रोक दिया और टपकने वाली जगह पर अस्थायी सीलेंट लगा दिया। यह सुधार (Correction) है, क्योंकि मैंने तत्काल समस्या को संभाल लिया, लेकिन पानी टपकने का मूल कारण अभी भी समाप्त नहीं हुआ।


इसके बाद मैंने समस्या के मूल कारण को खोजने का प्रयास किया और पाया कि घर की छत की वॉटरप्रूफिंग खराब हो गई है। यह समस्या दोबारा न हो, इसके लिए मैंने पूरी छत की मरम्मत करवाई और नई वॉटरप्रूफिंग करवाई। यह सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) है, क्योंकि मैंने पानी टपकने के मूल कारण को समाप्त कर दिया।


पिछले वर्ष बारिश के दिनों में मैंने अपने पड़ोसी के घर की छत से पानी टपकने की समस्या देखी थी। यद्यपि उस समय मेरे घर में ऐसी कोई समस्या नहीं हुई थी, फिर भी इस बार वर्षा ऋतु शुरू होने से पहले मैंने अपनी छत का निरीक्षण करवाया। निरीक्षण में पता चला कि मेरी छत की वॉटरप्रूफिंग भी पुरानी हो चुकी है। इसलिए मैंने वर्षा ऋतु आने से पहले ही उसकी वॉटरप्रूफिंग करवा ली। यह निवारक कार्रवाई (Preventive Action) है, क्योंकि मैंने संभावित समस्या को उत्पन्न होने से पहले ही रोक दिया।


एक अन्य सरल उदाहरण से भी इन अवधारणाओं को समझा जा सकता है। मैं अपने स्कूटर से बाजार जा रहा था कि रास्ते में मेरे स्कूटर का टायर पंचर हो गया। मैंने पंचर ठीक करवा लिया। यह सुधार (Correction) है।


जब पंचर की मरम्मत करवाई जा रही थी, तब मैंने देखा कि ट्यूब में बड़ा पंचर है और पहले भी उसमें कई बार पंचर हो चुके हैं। स्थायी समाधान के लिए मैंने नई ट्यूब लगवा ली। यह सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) है।


बाद में जब मेरा स्कूटर नियमित सर्विसिंग के लिए गया, तब मैंने टायर और ट्यूब की स्थिति की जाँच करवाई। उनके अधिक पुराने और घिसे हुए होने के कारण मैंने उन्हें पहले ही बदलवा दिया, ताकि पंचर जैसी समस्या उत्पन्न न हो। यह निवारक कार्रवाई (Preventive Action) है।


ये तीनों पद वास्तव में तीन महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं, जो हमारे दैनिक जीवन में भी लागू होती हैं और विभिन्न प्रबंध प्रणालियों, जैसे ISO 9001 तथा ISO 14001, के कार्यान्वयन में भी व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं।


सुधार (Correction) → समस्या ठीक करो।

सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) → समस्या के कारण को समाप्त करो।

निवारक कार्रवाई (Preventive Action) → समस्या आने से पहले उसके कारण को समाप्त करो।


यदि कोई संगठन इन तीनों अवधारणाओं का नियमित रूप से उपयोग करता है, तो उसकी प्रबंध प्रणाली निश्चित रूप से अधिक प्रभावी और मजबूत बनती है। हालाँकि वर्तमान प्रबंध प्रणाली मानकों में 'निवारक कार्रवाई' (Preventive Action) शब्द का प्रत्यक्ष उपयोग पहले की भाँति नहीं किया जाता है, फिर भी इसकी मूल अवधारणा आज भी विद्यमान है। अब संभावित जोखिमों और अवसरों की पहचान तथा उन्हें संबोधित करने की अपेक्षा के माध्यम से निवारक कार्रवाई की भावना को प्रबंध प्रणालियों में समाहित किया गया है।


एक मजबूत प्रबंध प्रणाली केवल समस्याओं को ठीक नहीं करती, बल्कि उनके कारणों को समाप्त करती है और संभावित समस्याओं को उत्पन्न होने से पहले ही रोकने का प्रयास करती है।


सादर,

केशव राम सिंघल 


मंगलवार, 2 जून 2026

महत्वपूर्ण अद्यतन - ISO 9000:2026 मानक प्रकाशित

महत्वपूर्ण अद्यतन - ISO 9000:2026 मानक प्रकाशित

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गुणवत्ता प्रबंधन (Quality Management) के क्षेत्र में 2015 के बाद पहला बड़ा बदलाव करते हुए ISO 9000:2026 (Fundamentals and vocabulary) का 5वाँ संस्करण प्रकाशित हो चुका है।


मुख्य बातें -

- आशा की जानी चाहिए कि भारत में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) इसे IS/ISO 9000:2026 के रूप में शीघ्र जारी करेगा।

- इसे आगामी ISO 9001:2026 मानक के साथ पूरी तरह समन्वित किया गया है ताकि बदलती अपेक्षाओं (Updated Requirements) से तालमेल बिठाया जा सके।

- यह मानक अब केवल 'प्रणाली' (System) तक सीमित न रहकर संपूर्ण गुणवत्ता प्रबंधन के लिए एक वैश्विक भाषा तय करेगा।


सादर,

केशव राम सिंघल 

गुरुवार, 28 मई 2026

ISO 19011:2026 मानक जारी - ऑडिटिंग के एक नए युग की शुरुआत

ISO 19011:2026 मानक जारी - ऑडिटिंग के एक नए युग की शुरुआत

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प्रतीकात्मक चित्र 


ISO 19011:2026 मानक आधिकारिक रूप से प्रकाशित हो चुका है। ISO के आधिकारिक लिंक पर अब इसकी स्थिति 'Published' (प्रकाशित) दर्शा रही है।


इस संशोधित मानक के प्रकाशन के साथ ही ऑडिटिंग की दुनिया में एक नए युग की शुरुआत हो गई है, जहाँ पारंपरिक ऑडिटिंग के तरीकों को पूरी तरह से आधुनिक और डिजिटल अपेक्षाओं के अनुरूप ढाल दिया गया है।


चूँकि अब यह मानक आधिकारिक रूप से लागू हो गया है, संगठनों और ऑडिटर्स के लिए ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बातें निम्नलिखित हैं - 


- मानक की प्रति - अब संगठन और ऑडिटर्स ISO Store से इस नए मानक (ISO 19011:2026) की प्रति प्राप्त कर सकते हैं और इसके विस्तृत दिशा-निर्देशों का अध्ययन कर सकते हैं।


- परिवर्तन काल (Transition Period) - संक्रमण काल की शुरुआत हो चुकी है। यद्यपि इसकी समय-सीमा 3 वर्ष की है, लेकिन विशेषज्ञों की सलाह है कि संगठनों को पहले वर्ष (यानी अगले 12 महीनों) के भीतर ही अपनी आंतरिक ऑडिट टीमों को प्रशिक्षित करना और नई गाइडलाइंस लागू करना शुरू कर देना चाहिए। इससे रिमोट और तकनीक-आधारित ऑडिट को डिज़ाइन करने में आपकी टीम को पर्याप्त अनुभव मिल जाएगा।


- ऑडिटर्स के लिए अपग्रेड - ऑडिटर्स के लिए अब ISO 19011:2018 से ISO 19011:2026 ब्रिजिंग कोर्स प्रासंगिक हो गए हैं, ताकि वे नए नियमों—विशेष रूप से रिमोट और हाइब्रिड ऑडिटिंग के लाइफसाइकिल डिज़ाइन, आईसीटी (ICT) सक्षमता और सूचना सुरक्षा से जुड़े बदलावों को समझकर खुद को अपग्रेड कर सकें।


- रिमोट ऑडिटिंग की अनिवार्यता - इस प्रकाशन के साथ अब रिमोट ऑडिटिंग केवल एक वैकल्पिक टूल नहीं रह गया है, बल्कि ऑडिट प्रोग्राम के योजना चरण (Planning Stage) से ही इसे एक मुख्य पद्धति के रूप में शामिल करना अनिवार्य हो गया है।


यह मानक मुख्य रूप से निम्नलिखित 13 प्रबंध प्रणालियों के ऑडिट के लिए अत्यंत उपयुक्त और प्रभावी है -


ISO 9001 (Quality)

ISO 14001 (Environment)

ISO 45001 (Health & Safety)

ISO/IEC 27001 (Information Security)

ISO 22301 (Business Continuity)

ISO/IEC 20000-1 (IT Service)

ISO/IEC 42001 (Artificial Intelligence)

ISO 22000 (Food Safety)

ISO 13485 (Medical Devices)

ISO 50001 (Energy)

ISO 37001 (Anti-Bribery)

ISO 41001 (Facility Management) 

ISO 10012:2026 (Measurement)  


प्रबंधन प्रणाली ऑडिटिंग से जुड़े प्रोफेशनल्स को अब तुरंत इस नए संस्करण को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा देना चाहिए।


सादर,

केशव राम सिंघल

मंगलवार, 26 मई 2026

ISO/FDIS 9001:2026 जारी

ISO/FDIS 9001:2026 जारी 

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अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (ISO) ने इसी माह ISO/FDIS 9001:2026 को अंतिम मतदान (Ballot) और समीक्षा के लिए जारी कर दिया है। इसके बाद, मुख्य मानक ISO 9001:2026 का अंतिम प्रकाशन सितंबर 2026 में अपेक्षित है।


हालाँकि, ISO/FDIS 9001:2026 का ड्राफ्ट सार्वजनिक रूप से मुफ्त उपलब्ध नहीं है और इसे केवल ISO स्टोर से खरीदा जा सकता है। फिर भी, इस ड्राफ्ट के आधार पर कुछ प्रमुख प्रमाणन निकायों (जैसे BSI, DQS, BV आदि) ने मुफ्त श्वेतपत्र (Whitepapers) और तुलनात्मक दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनमें FDIS के प्रमुख बदलावों का खंड-दर-खंड (Clause-by-Clause) विश्लेषण दिया गया है, जिसका मुख्य सार निम्नलिखित है -


1. खंड 4 (Context of the Organization) - इसके अंतर्गत पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को संगठन के संदर्भ में देखना अनिवार्य होगा। अब संगठनों को अपनी जोखिम रूपरेखा (Risk Profile) में पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासनिक (ESG) पहलुओं को शामिल करना होगा।


2. खंड 5 (Leadership) - संगठन में गुणवत्ता संस्कृति (Quality Culture) और नैतिक व्यवहार को बढ़ावा देना अब पूरी तरह से नेतृत्व की जिम्मेदारी होगी। ऑडिटर्स केवल प्रलेखित गुणवत्ता नीति (Quality Policy) ही नहीं देखेंगे, बल्कि यह भी जाँचेंगे कि कर्मचारियों का व्यावहारिक व्यवहार गुणवत्ता और नैतिकता के अनुरूप है या नहीं।


3. खंड 6 (Planning) - नए संशोधन में 'जोखिम' (Risks) और 'अवसर' (Opportunities) को अलग-अलग उपखंडों में स्पष्ट किया गया है। संगठनों को इन दोनों को ही संबोधित (Address) करना होगा। इस प्रकार, अब 'जोखिम-आधारित सोच' (Risk-based Thinking) के साथ-साथ 'अवसर-आधारित सोच' (Opportunity-based Thinking) के लिए भी एक मजबूत ढाँचा तैयार करना होगा।


4. खंड 7 (Support) - कर्मचारियों के प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों में गुणवत्ता नीति के साथ-साथ संगठन की संस्कृति (Culture) और नैतिकता (Ethics) को भी अनिवार्य रूप से शामिल करना होगा। इसके परिणामस्वरूप संगठनों को अपनी मौजूदा प्रशिक्षण कार्ययोजना में बदलाव करना होगा।


5. नया अनुलग्नक (Annex) - इस बार 15 पृष्ठों का एक विस्तृत मार्गदर्शी अनुलग्नक जोड़ा गया है, जो खंड 4 से 10 तक की अपेक्षाओं (Requirements) की व्याख्या करता है। यह अनुलग्नक उपयोगकर्ताओं के लिए मानकों को समझने में बेहद लाभकारी सिद्ध होगा और ऑडिटर्स व संगठनों के बीच व्याख्या (Interpretation) के मतभेदों को काफी हद तक कम करेगा।


यदि आगामी प्रक्रियाएँ सुचारू रूप से चलती रहीं, तो गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली का यह बहुप्रतीक्षित और संशोधित मानक ISO 9001:2026 सितंबर 2026 में हमारे सामने होगा।


सादर,

केशव राम सिंघल 


सोमवार, 18 मई 2026

ISO 9001:2026 QMS के FDIS की वर्तमान स्थिति

ISO 9001:2026 QMS के FDIS की वर्तमान स्थिति 

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प्रतीकात्मक चित्र साभार जैमिनी गूगल


ISO 9001:2026 QMS के FDIS (Final Draft International Standard) की वर्तमान स्थिति निम्न प्रकार है -


* तकनीकी सहमति - फरवरी 2026 में मेक्सिको सिटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की बैठक में, मानक के मुख्य खण्डों (Clauses 1 से 10) की अपेक्षाओं पर पूर्ण सहमति (Consensus) बन चुकी है।

* सुझावों का संकलन - ड्राफ्ट इंटरनेशनल स्टैंडर्ड (DIS) को दिसंबर 2025 में सदस्य देशों द्वारा 97% की सहमति से मंजूरी मिलने के बाद, दुनिया भर से मिले सुझावों (Comments) को संकलित कर लिया गया है। वर्तमान में वर्किंग ग्रुप अंतिम सूचनात्मक भागों (Informative text) और 'Annex A' को अंतिम रूप देने पर कार्य कर रहा है।

* FDIS का प्रकाशन - ISO/FDIS 9001 QMS का फाइनल ड्राफ्ट मतदान के लिए जून 2026 तक आधिकारिक रूप से जारी (Publish) होने की उम्मीद है।


संभावित समयबद्धता (Timeline)


आगामी चरणों के लिए निम्नलिखित समयसीमा तय की गई है -


* जून 2026 - FDIS (Final Draft) का प्रकाशन और अंतिम मतदान का प्रारम्भ।

* सितंबर 2026 - संशोधित मानक ISO 9001:2026 QMS का आधिकारिक अंतिम प्रकाशन (Official Release)।

* सितंबर 2026 से अगस्त 2027 - इस अवधि में सर्टिफिकेशन बॉडीज (CBs) नए मानक के अनुसार ऑडिट करने के लिए खुद को प्रशिक्षित करेंगी और मान्यता (Accreditation) प्राप्त करने की कार्रवाई पूरी करेंगी।

* अगस्त 2027 - मानक के संशोधित संस्करण ISO 9001:2026 के तहत पहले प्रमाणीकरण (Certification) जारी होना शुरू होने की संभावना है।

* सितंबर 2029 - 3 वर्ष का ट्रांजिशन पीरियड (Transition Period) समाप्त होने पर मानक का वर्तमान संस्करण ISO 9001:2015 QMS पूरी तरह से निष्प्रभावी (Retire) हो जाएगा।


नए मानक में संभावित बदलाव 


यह प्रश्न इस क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों के मन में है कि नए मानक में किन बदलावों की आशा की जाए। हालाँकि अंतिम मानक का प्रकाशन सितम्बर 2026 में अपेक्षित होने के कारण अभी कुछ भी निश्चित कहना जल्दबाजी होगी, फिर भी विशेषज्ञों के अनुसार ISO 9001:2026 QMS में होने वाले संशोधन 'क्रांतिकारी' न होकर एक 'विकासवादी' (Evolutionary) बदलाव होंगे। इसका कोर हाई-लेवल स्ट्रक्चर (HLS) यथावत रहेगा। निम्नलिखित महत्वपूर्ण बदलाव आने की प्रबल संभावना है:


* खण्ड 4 (Context of the Organization) - इसमें जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और स्थिरता (Sustainability) के संदर्भ को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाएगा, जो कि 2024 के संशोधन (Amendment) में भी देखा गया था।

* खण्ड 5 (Leadership) - शीर्ष प्रबंधन (Top Management) के लिए संगठन में गुणवत्ता संस्कृति (Quality Culture) और नैतिक व्यवहार (Ethical Behaviour) को बढ़ावा देना तथा प्रदर्शित करना अनिवार्य (Mandatory) कर दिया जाएगा।

* खण्ड 6 (Risk and Opportunity) - जोखिम (Risk) और अवसर (Opportunity) के प्रबंधन को अधिक स्पष्टता प्रदान की जाएगी, जिससे 'अवसर-आधारित सोच' (Opportunity-based thinking) को बढ़ावा मिले।

* खण्ड 7 (Support) - कर्मचारियों की जागरूकता (Awareness) के दायरे में अब गुणवत्ता संस्कृति और व्यावसायिक नैतिकता की समझ को भी जोड़ा जाएगा।

* नया Annex A - ISO 9001 मानक के इतिहास में पहली बार लगभग 15 पृष्ठों का एक विस्तृत मार्गदर्शिका अनुलग्नक (Informative Annex) जोड़ा जा रहा है, जो मानक की अपेक्षाओं और शब्दावलियों को समझने में उपयोगकर्ताओं व ऑडिटर्स की मदद करेगा।


सार 


संक्षेप में कहें तो ISO/FDIS 9001:2026 QMS का मसौदा प्रकाशन के लिए आगे बढ़ रहा है। जून 2026 में इसका अंतिम प्रारूप वोटिंग के लिए सामने आने की संभावना है और सितंबर 2026 में यह नया गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली अंतरराष्ट्रीय मानक प्रकाशित और लागू होने की संभावना है ।


सादर,

केशव राम सिंघल 

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गुरुवार, 7 मई 2026

संगठन में विवेकपूर्ण नेतृत्व

संगठन में विवेकपूर्ण नेतृत्व 
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प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe


ज़्यादातर ISO 9001 QMS प्रमाणन प्राप्त संगठनों में नियमावली, प्रक्रियाओं और प्राधिकारों (Authorities) का स्पष्ट उल्लेख किया जाता है। विभिन्न पदों की भूमिकाएँ, जिम्मेदारियाँ, अधिकार तथा कार्यविधियाँ विस्तार से निर्धारित की जाती हैं। ऐसी संरचना आवश्यक भी है, क्योंकि यही व्यवस्था संगठन में अनुशासन, जवाबदेही और कार्यक्षमता सुनिश्चित करती है।

फिर भी, वास्तविक परिस्थितियों में नेतृत्व शायद ही कभी केवल तय नियमों के अनुसार कार्य करता हो। संगठनात्मक वातावरण स्थिर नहीं होता। इंसानी भावनाएँ जटिल होती हैं, परिस्थितियाँ तेजी से बदलती हैं, और कई बार ऐसे हालात उत्पन्न हो जाते हैं जिनका पूर्ण अनुमान कोई लिखित कार्यविधि या नियमावली पहले से नहीं लगा सकती। ऐसे समय में केवल नियम पर्याप्त या सहायक नहीं होते; यह नेतृत्व की वास्तविक परीक्षा का समय होता है।

जब कोई प्रक्रिया केवल लिखित नियमों तक सीमित रह जाती है, तब प्राधिकार मात्र प्रशासनिक औपचारिकता बनकर रह जाता है। वह नियमों का पालन तो करवा सकता है, लेकिन हर स्थिति में न्यायपूर्ण निर्णय नहीं दे सकता। सच्चे नेतृत्व के लिए कुछ और आवश्यक होता है। भारतीय दर्शन इसे एक गहरे शब्द में व्यक्त करता है - “विवेक”। विवेक केवल ज्ञान (Knowledge) नहीं है; यह सही और सुविधाजनक, नियम और न्याय, तथा शब्द और भावना के बीच अंतर समझने की क्षमता है। यही आंतरिक स्पष्टता व्यक्ति को बदलती परिस्थितियों में सिद्धांतों को समझदारी से लागू करने योग्य बनाती है।

वर्तमान प्रशासनिक और प्रबंधन व्यवस्था में अक्सर “विवेकाधीन शक्ति” (Discretionary Power) की बात होती है। यह किसी पद (Position) के साथ मिलने वाला अधिकार है, जिसके अंतर्गत व्यक्ति परिस्थितियों के अनुसार निर्णय ले सकता है। लेकिन विवेकाधीन शक्ति और विवेक दोनों एक ही चीज़ नहीं हैं। विवेकाधीन शक्ति नेतृत्व का बाहरी अधिकार है, जबकि विवेक उसके भीतर से उत्पन्न नैतिक समझ है।

यदि निर्णय लेने की स्वतंत्रता विवेक से नियंत्रित न हो, तो उसके मनमाने, पक्षपातपूर्ण या तात्कालिक भावनाओं से प्रभावित होने का खतरा रहता है। परंतु जब वही शक्ति विवेक से जुड़ जाती है, तब वह न्याय, संतुलन और नैतिकता का माध्यम बन जाती है। लिखित नियमावली यह बता सकती है कि क्या करने की अनुमति है, लेकिन विवेक यह तय करता है कि क्या वास्तव में उचित है।

आज अधिकांश संगठन नीतियों (Policies), प्रक्रियाओं और अनुपालन ढाँचों (Compliance Frameworks) के आधार पर संचालित होते हैं। यह आवश्यक भी है, क्योंकि इनके बिना संगठनात्मक स्थिरता संभव नहीं। ISO 9001 QMS मानक भी प्रक्रियाओं की स्पष्टता, जिम्मेदारियों की परिभाषा, जोखिम-आधारित सोच और जवाबदेही पर विशेष बल देता है। लेकिन यह मानक केवल प्रक्रिया पालन (Process compliance) तक सीमित नहीं है; यह नेतृत्व (Leadership), गुणवत्ता संस्कृति (Quality culture), लोगों की सहभागिता (Participation of people) और निरंतर सुधार (Continual improvement) को भी महत्व देता है।

ISO 9001 QMS मानक के Clause 5 में नेतृत्व से अपेक्षा की गई है कि वह केवल नियंत्रण और अनुपालन सुनिश्चित न करे, बल्कि संगठन के लोगों में गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता और सकारात्मक कार्य-संस्कृति भी विकसित करे। यही वह स्थान है जहाँ विवेकपूर्ण नेतृत्व की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी ग्राहक की शिकायत निर्धारित समय सीमा के बाद प्राप्त होती है, तो प्रक्रिया के अनुसार उसे अस्वीकार किया जा सकता है। लेकिन यदि यह स्पष्ट हो कि समस्या संगठन की किसी कमी के कारण उत्पन्न हुई है, तो एक विवेकपूर्ण नेता प्रक्रिया की भावना को समझते हुए ग्राहक को उचित समाधान देने का प्रयास करेगा। ऐसा निर्णय नियम तोड़ना नहीं, बल्कि गुणवत्ता प्रबंधन के मूल उद्देश्य "ग्राहक संतुष्टि और विश्वास" को प्राथमिकता देना है। इसी प्रकार, यदि कोई कर्मचारी पहली बार किसी प्रक्रिया के संचालन में त्रुटि कर देता है, तो केवल दंडात्मक कार्रवाई करना एक आसान विकल्प हो सकता है। परंतु विवेकपूर्ण नेतृत्व गलती के मूल कारण (Root cause) को समझने, प्रशिक्षण प्रदान करने और प्रणालीगत सुधार करने का प्रयास करेगा। यही दृष्टिकोण निरंतर सुधार (Continual Improvement) की गुणवत्ता संस्कृति को मजबूत बनाता है।

संपरीक्षा (Audit) के दौरान भी यह अंतर स्पष्ट दिखाई देता है। कई बार छोटी प्रक्रिया विचलन (Minor Process Deviation) को केवल दोष खोजने का विषय बना दिया जाता है। जबकि विवेकपूर्ण नेतृत्व उसे सीखने और सुधार का अवसर मानता है। वह यह समझने का प्रयास करता है कि समस्या व्यक्ति में है या प्रणाली में।

विवेक से संचालित नेतृत्व प्रतिक्रिया देने से पहले ठहरता है। वह केवल नियमों के शब्द नहीं, बल्कि उनके पीछे के उद्देश्य को भी समझता है। वह निर्णयों का मूल्यांकन केवल कानूनी या प्रक्रियात्मक दृष्टि से नहीं, बल्कि निष्पक्षता, मानवीय प्रभाव और संगठन के दीर्घकालिक हितों के आधार पर भी करता है। ऐसा नेतृत्व यह समझता है कि समझदारी का अर्थ प्राधिकार को कमजोर करना नहीं है, बल्कि उसका ईमानदारी और संतुलन के साथ उपयोग करना है।

संगठन केवल नियमों से नहीं चलते; वे विश्वास, निष्पक्षता और मानवीय संवेदनशीलता से आगे बढ़ते हैं। नियम व्यवस्था दे सकते हैं, लेकिन विवेक उस व्यवस्था को मानवीय बनाता है। ISO 9001 QMS मानक संगठनात्मक प्रक्रियाओं के लिए एक व्यवस्थित ढाँचा प्रदान करते हैं, परंतु उन प्रक्रियाओं में न्याय, संवेदनशीलता और संतुलन लाने का कार्य विवेकपूर्ण नेतृत्व ही करता है। अंततः, वही संगठन दीर्घकाल में अधिक विश्वसनीय और सम्मानित बनते हैं, जहाँ प्राधिकार केवल पद की शक्ति नहीं, बल्कि विवेक, नैतिकता और जिम्मेदारी से संचालित होता है।

सादर, 
केशव राम सिंघल 

गुरुवार, 9 अप्रैल 2026

प्रबंध प्रणाली मानकों में प्रयुक्त होने वाले सामान्य चार शब्द

प्रबंध प्रणाली मानकों में प्रयुक्त होने वाले सामान्य चार शब्द 

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चित्र साभार NightCafe 


प्रबंध प्रणाली (Management Systems) मानकों (जैसे ISO 9001, ISO 14001) में प्रयुक्त होने वाले शब्द Determine, Establish, Implement, Maintain केवल सामान्य शब्द नहीं हैं—ये एक क्रम (sequence) को दर्शाते हैं। ये शब्द किसी भी प्रबंध प्रणाली (Management System) के विकास और संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। नीचे इनका अर्थ और आपसी अंतर हिंदी और अंग्रेजी दोनों में सरल रूप में समझाने का प्रयास किया गया है। 


1. Determine (निर्धारित करना)


English Meaning - To identify, analyze, and decide what is needed.

हिंदी अर्थ - किसी अपेक्षा, स्थिति या तत्व को पहचानना, उसका विश्लेषण करना और यह निर्णय लेना कि क्या अपेक्षित है।


उदाहरण - 

* Risks and opportunities are determined.

* संगठन अपने जोखिम और अवसरों को निर्धारित करता है।


निर्धारित करना (Determine) प्रबंध प्रणाली (Management System) के विकास और संचालन का पहला चरण है — “क्या करना है?” का उत्तर इसमें मिलता है।


2. Establish (स्थापित करना / संस्थापित करना)


English Meaning - To set up or create something formally with defined structure and documentation.

हिंदी अर्थ - किसी प्रणाली, प्रक्रिया या नीति को औपचारिक रूप से बनाना और उसे संरचित रूप देना।


उदाहरण - 

* A quality policy is established.

* गुणवत्ता नीति स्थापित की जाती है। 


स्थापित / संस्थापित करना (Establish) प्रबंध प्रणाली (Management System) के विकास और संचालन का दूसरा चरण है — “कैसे संरचना बनानी है?”


3. Implement (कार्यान्वित करना / लागू करना)


English Meaning - To put the established system or process into action.

हिंदी अर्थ - स्थापित की गई प्रणाली या प्रक्रिया को वास्तविक रूप से लागू करना और उपयोग में लाना।


उदाहरण -

* The procedure is implemented in daily operations.

* इस प्रक्रिया को दैनिक कार्यों में कार्यान्वित किया जाता है।


कार्यान्वयन / लागू करना (Implement) प्रबंध प्रणाली (Management System) के विकास और संचालन का तीसरा चरण है — “वास्तव में काम शुरू करना।”


4. Maintain (बनाए रखना)


English Meaning - To keep the management system running effectively and up to date.

हिंदी अर्थ - प्रबंध प्रणाली को निरंतर प्रभावी बनाए रखना, उसकी निगरानी करना और आवश्यकता अनुसार उसमें सुधार करना।


उदाहरण - 

* The management system is maintained.

* प्रबंधन प्रणाली को बनाए रखा जाता है।


बनाए रखना (Maintain) प्रबंध प्रणाली (Management System) के विकास और संचालन का चौथा चरण है — “निरंतरता और सुधार सुनिश्चित करना।”


उदाहरण


मान लीजिए, एक संगठन गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली (Quality Management System - QMS) लागू कर रही है। 


* Determine (निर्धारित करना) - पहला चरण - संगठन को किन प्रक्रियाओं की आवश्यकता है, यह तय करना। 

* Establish (स्थापित करना) - दूसरा चरण - उन प्रक्रियाओं को डॉक्यूमेंट और डिज़ाइन करना। 

* Implement (कार्यान्वित करना) - तीसरा चरण - उन प्रक्रियाओं को कार्यरूप में लागू करना। 

* Maintain (बनाए रखना) - चोथा चरण - प्रणाली (System) की लगातार निगरानी (Monitor) और सुधार करते रहना। 


सार 


प्रबंध प्रणाली (Management System) के विकास और संचालन में ये चारों शब्द मिलकर एक पूर्ण चक्र (cycle) बनाते हैं, जो किसी भी प्रबंध प्रणाली (Management System) की सफलता की नींव है। इन शब्दों की सही समझ और उपयोग अंतरराष्ट्रीय मानकों की प्रभावी अनुपालना (compliance) और सतत सुधार (continual improvement) के लिए अत्यंत आवश्यक है।

 

सादर,

केशव राम सिंघल 


सोमवार, 6 अप्रैल 2026

बदलाव (Change)

बदलाव (Change)

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प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe 


डब्लू एडवर्ड्स डेमिंग कहते है, “बदलना अनिवार्य नहीं है। अस्तित्व बनाए रखना भी जरूरी नहीं।”


डेमिंग का यह कथन अत्यंत गहरा और वास्तविकता से जुड़ा हुआ संदेश देता है। वे यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि परिवर्तन करना किसी पर मजबूरी या कोई दबाव नहीं है, लेकिन यदि आप बदलते नहीं हैं, तो आपका अस्तित्व बनाए रखना या सफल बने रहना भी सुनिश्चित नहीं है। इस कथन की व्याख्या निम्न तीन बिंदुओं पर की जा सकती है—


1. परिवर्तन वैकल्पिक है (Change is optional)


किसी व्यक्ति, संगठन या प्रणाली को कोई बाध्य नहीं कर सकता कि वह बदले। हर कोई अपने पुराने तरीकों, सोच और प्रक्रियाओं के साथ बना रह सकता है। उदाहरण - एक कंपनी पुराने तरीकों से काम करती रह सकती है और नई तकनीक या सुधार अपनाने से इंकार कर सकती है।


2. अस्तित्व की गारंटी नहीं (Survival is not mandatory)


यदि व्यक्ति, संगठन या प्रणाली समय के अनुसार नहीं बदलता, तो वह प्रतिस्पर्धा में पीछे छूट सकता है और अंततः समाप्त भी हो सकता है। उदाहरण - अनेक कंपनियाँ डिजिटल युग के अनुरूप स्वयं को नहीं बदल सकीं और बाजार से गायब हो गईं अर्थात् उनका अस्तित्व ही समाप्त हो गया।


3. परिवर्तन = विकास और निरंतर सुधार 


डेमिंग का सम्पूर्ण दर्शन निरंतर सुधार (Continual Improvement) पर आधारित है। वे यह संदेश देते हैं कि बदलना आवश्यक नहीं है, लेकिन बिना परिवर्तन के प्रगति असंभव है।


परिवर्तन का जीवन और संगठन में महत्व 


व्यक्तिगत जीवन में


* जो व्यक्ति सीखना और बदलना बंद कर देता है, वह पीछे रह जाता है।

* नया कौशल और नई सोच ही सफलता की कुंजी है।


संगठन / व्यवसाय में


* बाजार, तकनीक और ग्राहकों की अपेक्षाएँ निरंतर बदलती रहती हैं।

* जो संगठन इन परिवर्तनों के अनुरूप स्वयं को ढाल नहीं पाते, वे प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाते।


सार  


सार रूप में, डेमिंग का यह कथन एक स्पष्ट चेतावनी है।  यदि आप बदलना नहीं चाहते, तो यह आपका चुनाव है; लेकिन फिर प्रतिस्पर्धा में टिके रहने की अपेक्षा भी न रखें। यह कथन हमें सिखाता है कि परिवर्तन डरावना नहीं, बल्कि आवश्यक है, और दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए बदलाव को अपनाना ही बुद्धिमानी है।


सादर,

केशव राम सिंघल



मंगलवार, 10 मार्च 2026

मापन प्रबंध प्रणाली (Measurement Management System) – एक परिचय

मापन प्रबंध प्रणाली (Measurement Management System) – एक परिचय 

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विश्व की अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संस्था इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर स्टैंडर्डाइजेशन (ISO) ने मापन प्रबंध प्रणाली (Measurement Management System) पर आधारित मानक ISO 10012 वर्ष 2003 में प्रकाशित किया था। इस मानक का संशोधित दूसरा संस्करण वर्ष 2026 में प्रकाशित किया गया है। इस मानक को ISO की तकनीकी समिति ISO/TC 176 (Quality Management and Quality Assurance) ने यूरोपियन कमिटी फॉर स्टैंडर्डाइजेशन (CEN) के सहयोग से विकसित किया है। इस मानक में मापन प्रबंध प्रणाली की अपेक्षाओं का वर्णन किया गया है, जिनको पूरा करके किसी भी संस्था में मापन प्रबंध प्रणाली लागू की जा सकती है।


नए मानक में मुख्य बदलाव निम्न हैं - 

— प्रबंध प्रणाली मानकों के लिए एक जैसे संरचना का अनुसरण करने के लिए दस्तावेज को पुनर्गठित किया गया है। 

— हितधारकों (Interested parties) की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं।


मानक के नए संस्करण ने ISO 10012:2003 में एक बड़ा बदलाव किया है, जिसका उद्देश्य किसी संस्था के लिए एक आधार बनाना है ताकि संस्था में मापन प्रक्रिया (Measurement Process) के आरंभ से अंत तक प्रभावी अनुप्रयोग के लिए मापन प्रबंध प्रणाली को लागू किया जा सके तथा निरंतर बेहतर बनाया जा सके। मापन प्रबंध प्रणाली का मुख्य उद्देश्य मापन परिणामों की वैधता (validity) और विश्वसनीयता (reliability) पर विश्वास स्थापित करना है तथा यह सुनिश्चित करना है कि संस्था द्वारा प्रदान किए जाने वाले उत्पादों और/या सेवाओं से संबंधित मापन आवश्यक गुणवत्ता स्तर का समर्थन करें। इसमें मापन प्रक्रियाओं से जुड़े जोखिमों का प्रबंधन भी शामिल है, जो गलत मापन परिणाम उत्पन्न कर सकते हैं और संस्था के उत्पादों अथवा सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।


इस मापन प्रबंध प्रणाली को सही मापन परिणामों के डिज़ाइन, विकास, जाँच, निगरानी तथा सुपुर्दगी की प्रक्रियाओं में लागू किया जा सकता है। यह मानक संस्थाओं को मापन प्रबंध प्रणाली की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करने के लिए एक स्पष्ट ढाँचा (framework) प्रदान करता है। यह मानक किसी भी औद्योगिक क्षेत्र में लागू किया जा सकता है जहाँ मापन प्रबंधन की आवश्यकता हो। इसे अन्य प्रबंध प्रणाली मानकों जैसे ISO 9001 (Quality Management System) और ISO 14001 (Environmental Management System) के साथ भी समन्वित रूप से लागू किया जा सकता है।


सामान्य रूप से यह मानक उन संस्थाओं/संगठनों द्वारा उपयोग किया जाता है जहाँ मापन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और गलत मापन से जोखिम (जैसे उत्पाद की गुणवत्ता प्रभावित होना, सुरक्षा खतरे, अनुपालन विफलता) हो सकता है। यह किसी भी प्रकार या आकार की संस्था के लिए लागू है, लेकिन मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों/संस्थाओं में अपनाया जाता है:


- विनिर्माण (Manufacturing) उद्योग — जहाँ उत्पादन में सटीक मापन आवश्यक है (जैसे ऑटोमोटिव, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, धातु आदि)।

- एयरोस्पेस और एविएशन (Aerospace & Aviation) — जहाँ सुरक्षा और मापन की सटीकता सर्वोपरि है।

- डिफेंस/रक्षा क्षेत्र (Defence)।

- हेल्थकेयर और मेडिकल डिवाइस (Healthcare & Medical devices) — उपकरणों के कैलिब्रेशन और मापन में।

- इंजीनियरिंग और प्रोडक्शन ऑपरेशंस — सामान्य उत्पादन और ऑपरेशनल वातावरण में।

- टेस्टिंग और कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज — हालांकि इन संस्थाओ के लिए ISO/IEC 17025 अधिक विशिष्ट है, लेकिन ISO 10012 को सपोर्ट या पूरक के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

- ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, और अन्य रेगुलेटेड सेक्टर — जहाँ मापन डेटा निर्णय लेने, अनुपालन या उत्पाद गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण है।


नए संस्करण के साथ यह मानक अब एक संपरीक्षण योग्य (auditable) और प्रमाणन योग्य (certifiable) प्रबंध प्रणाली मानक के रूप में अधिक सशक्त रूप में उभरा है। 2003 के संस्करण में यह मानक इतनी स्पष्टता और संरचना के साथ विकसित नहीं था। कई संगठन इसे तीसरे पक्ष से प्रमाणित करवाते हैं ताकि ग्राहकों, रेगुलेटर्स या सप्लाई चेन में विश्वसनीयता दिखा सकें।


संक्षेप में, कोई भी संस्था जो मापन पर निर्भर है और मापन जोखिमों को नियंत्रित करना चाहती है, विशेषकर जहाँ उत्पाद/सेवा की गुणवत्ता, सुरक्षा या अनुपालन दांव पर हो, वह इस मानक का उपयोग कर सकती है।


इस मानक में कुल दस खंड (Clauses) और दो परिशिष्ट (Annexes) हैं, जिनमें खंड 4 से 10 तक मापन प्रबंध प्रणाली की आवश्यकताओं (Requirements) का विस्तृत वर्णन किया गया है। 


सादर, 

केशव राम सिंघल 


सोमवार, 2 मार्च 2026

गुणवत्ता प्रबंधन पर एक जागरूकता कविता - गुणवत्ता संस्कृति

गुणवत्ता प्रबंधन पर एक जागरूकता कविता - 

गुणवत्ता संस्कृति 

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प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe 


व्यवहार रूप में गुणवत्ता संस्कृति कैसे विकसित करें,

यह प्रश्न आज भी कई मनों को सालता है।

गुणवत्ता संस्कृति केवल नेतृत्व के आदेश से नहीं,

योजनाबद्ध और नेतृत्व-प्रेरित प्रयासों से विकसित होती है।


स्पष्ट गुणवत्ता दृष्टि और नीति निर्धारित करो, 

और व्यवहार रूप में इसे संगठन में उतारो, 

नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करो, 

मानक अपेक्षाओं को व्यवहार में लागू करो। 


अपेक्षाएँ केवल दस्तावेज़ीकरण तक सीमित न रहें, 

PDCA चक्र अपनाकर निरंतर सुधार को जीवन का हिस्सा बनाओ,

कर्मचारियों को बनाओ जागरूक और सशक्त, 

कर्मचारी-सुझाव योजना अपनाकर नवाचार को बढ़ाओ।


प्रशिक्षण-जागरूकता कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित करो,

दोषारोपण के बजाय मूल कारण विश्लेषण पर ध्यान दो, 

गुणवत्ता लक्ष्यों को मापने योग्य बनाकर पारदर्शी समीक्षा करो, 

इन सतत प्रयासों से गुणवत्ता संस्कृति का दीप जलाओ।

 

सादर, 

केशव राम सिंघल