मंगलवार, 13 जनवरी 2026

गुणवत्ता प्रबंधन (Quality Management) में सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) एक सहायक उपकरण — जोखिम-आधारित सोच के साथ एक संतुलित गुणवत्ता सुधार दृष्टिकोण

 गुणवत्ता प्रबंधन (Quality Management) में सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) एक सहायक उपकरण

— जोखिम-आधारित सोच के साथ एक संतुलित गुणवत्ता सुधार दृष्टिकोण

********* 









प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe 

मैं पिछले दिनों डॉ दिव्या सिंघल और क्रिस्टल फेर्रो की किंडल किताब 'Business for Good in Action - Celebrating AIM2Flourish Stories Through Appreciative Inquiry' पढ़ रहा था तो मेरे मन में यह विचार आया कि सराहनात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) किस तरह गुणवत्ता प्रबंधन के लिए सहायक हो सकता है। मैंने जाना कि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) एक सकारात्मक और सहभागी दृष्टिकोण है, जिसका उपयोग संगठन अपने विकास, परिवर्तन प्रबंधन (Change Management), टीम बनाने (Building Team) और अपने लोगों के व्यक्तिगत विकास के लिए करते हैं। यह समस्या-केंद्रित सोच (Problem-Focused Thinking) के बजाय सफलताओं, शक्तियों और संभावनाओं पर ध्यान देता है। यह अवधारणा डॉ. डेविड कूपरराइडर, जो Case Western Reserve University (USA) से संबद्ध रहे, ने 1980 के दशक में विकसित की और यह सिद्धांत उनके डॉक्टरेट शोध (PhD Dissertation) से निकला। 


सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) का मूल विचार "समस्याओं को सुधारने के बजाय, जो अच्छा है उसे और बेहतर बनाया जाए" है। संक्षेप में चर्चा करें तो हम पाते हैं कि सराहात्मक अन्वेषण दृष्टिकोण के पाँच सिद्धांत हैं - (1) सकारात्मकता  (Positivity) - सकारात्मक प्रश्न सकारात्मक ऊर्जा और समाधान उत्पन्न करते हैं। (2) निर्माणवादी (Constructivist) - हमारी बातचीत और भाषा हमारी वास्तविकता का निर्माण करती है। (3) समानांतरता (Simultaneity) - प्रश्न पूछते ही परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। (4) काव्यात्मकता (poeticism) - संगठन एक खुली किताब की तरह है—जिस अध्याय पर ध्यान देंगे, वही बढ़ेगा। (5) भविष्य दृष्टि - प्रत्याशित (Anticipatory) - भविष्य की सकारात्मक कल्पना वर्तमान कार्यों को दिशा देती है। 


जब भी संगठन में सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) दृष्टिकोण काम में लाया जाता है तो उससे अनेक लाभ मिलते हैं। कर्मचारियों की भागीदारी (Involvement) और प्रेरणा (Motivation) बढ़ती है। नवाचार (Innovation) और रचनात्मकता (Creativity) को प्रोत्साहन मिलता है। सकारात्मक संगठनात्मक संस्कृति बनती है। परिवर्तन के प्रति प्रतिरोध कम होता है। नेतृत्व और टीमवर्क मजबूत होता है। 


पारंपरिक तौर से हम अपने संगठन में प्रश्न पूछते हैं - “हमारी प्रक्रिया में क्या गलत है?” जबकि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) दृष्टिकोण अपनाने पर हम प्रश्न पूछते हैं - “कब हमारी प्रक्रिया सबसे अच्छी तरह काम करती है और क्यों?” इस प्रकार हम पाते हैं कि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) एक ऐसी सोच है जो कमियों पर नहीं, क्षमताओं पर आधारित होती है। यह गुणवत्ता, लीन, नवाचार, नेतृत्व और सतत सुधार की दिशा में अत्यंत प्रभावी दृष्टिकोण है। 


हालाँकि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) लगातार सुधार की दिशा में प्रभावी दृष्टिकोण है, पर मेरे मन में यह विचार आया कि यह कमियों को नजरंदाज कर सकता है और इस प्रकार शायद यह सोच गुणवत्ता प्रबंधन के लिए लाभदायक न हो। वास्तव में गुणवत्ता प्रबंधन  (Quality Management) में सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) तभी प्रभावी सिद्ध होती है जब उसका सही ढंग से उपयोग किया जाए। गुणवत्ता प्रबंधन में सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) के अनेक लाभ हैं, जिनकी मैं चर्चा करना चाहूँगा। 


(1) सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) सकारात्मक गुणवत्ता संस्कृति के निर्माण में सहायक है। गुणवत्ता (Quality) केवल प्रक्रियाओं से नहीं, लोगों के दृष्टिकोण से आती है। सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) दोष खोजने की संस्कृति से हटाकर सीखने और सुधार की संस्कृति विकसित करती है। इससे भयमुक्त रिपोर्टिंग (Fear-free Reporting), सुझाव प्रणाली और सहभागिता बढ़ती है।


(2) सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) की पहचान और विस्तार में सहायक है। पारंपरिक आतंरिक संपरीक्षण (Internal Audit) में हम पता लगाते हैं कि गैर-अनुरूपता (Nonconformity) कहाँ हैं? सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) यह पता लगाता है कि कहाँ प्रक्रिया ने सर्वोत्तम परिणाम दिए? क्यों? गुणवत्ता प्रबंधन के लिए दोहराए जाने योग्य सर्वोत्तम प्रथाओं (Repeatable Best Practices) को पहचानने में सहायक है। साथ ही यह मानकीकरण और बेंचमार्किंग (Standardization and Benchmarking को सशक्त बनाता है।


(3) सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) लगातार सुधार (Continual Improvement को ऊर्जा देती है। आईएसओ 9001 गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली में लगातार सुधार (Continual Improvement) अपेक्षा (Requirement) है। इस प्रकार सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) सुधार को सुधारात्मक बोझ (Corrective Burden) नहीं, विकास का अवसर (Growth opportunity) देती है। कर्मचारी सुधार गतिविधियों में स्वेच्छा से जुड़ते हैं।


(4) सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) नेतृत्व (Leadership) और टीम की संलग्नता (Engagement of Team) में सहायक है। यह कर्मचारियों को समस्या स्रोत (Problem source) नहीं, समाधान भागीदार (Solution partner) मानती है। इससे कर्मचारियों में स्वामित्व (Ownership) की भावना बढ़ती है और संगठन में क्रॉस-फ़ंक्शनल गुणवत्ता सुधार (Cross-functional Quality Improvement ) संभव होता है। 


(5) सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) परिवर्तन प्रबंधन (Change Management) में सहायक है। नए गुणवत्ता पहलों (Quality Initiatives) में यह प्रतिरोध (Resistance) कम करती है और बदलाव को सफल अनुभवों की निरंतरता के रूप में प्रस्तुत करती है। 


इतना सब कुछ समझने के बाद आपकी चिंता यह हो सकती है कि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) कमियों को नजरअंदाज कर सकता है। हाँ, यदि इसे गलत समझा जाए। यह इस दृष्टिकोण की कमजोरी नहीं, गलत उपयोग का जोखिम है। इस दृष्टिकोण के अपनाने के संभावित जोखिम के तहत महत्वपूर्ण असंगतियाँ महत्वपूर्ण गैर-अनुरूपता (Critical Nonconformity) अनदेखी रह सकती है, मूल कारण विश्लेषण (Root Cause Analysis) कमजोर पड़ सकता है, नियामक (Regulatory) और ग्राहक (Customer) अपेक्षाओं (Requirements) की पालना में कमी रह सकती है। यह ध्यान में रखा जाना चाहिए सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) को अकेले इस्तेमाल करना खतरनाक हो सकता है। इसलिए समाधान यह है कि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) और जोखिम आधारित सोच (Risk-based Thinking) को एक साथ अपनाकर संतुलित गुणवत्ता सुधार मॉडल (Balanced Quality Improvement Model) बनाया जाए। आईएसओ 9001:2015 मानक में भी जोखिम आधारित सोच (Risk-based thinking) एक अपेक्षा (Requirement) है। इसलिए सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) को इस तरह प्रयोग करना चाहिए कि सकारात्मक फ्रेमिंग (Positive Framing) के साथ अंतर विश्लेषण (Gap Analysis) किया जाए। उदाहरण के लिए, यहाँ क्या गलत है? कब यह प्रक्रिया बिना दोष के चली और क्यों? फिर उसी से अंतर (Gap) और जोखिम (Risk) पहचान सकते हैं। 


सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) को पीडीसीए चक्र (PDCA Cycle) में समाहित किया जा सकता है। पी अर्थात आयोजना (Plan) के अंतर्गत ताकत, सफल अनुभव और अवसर देखें, डी के अंतर्गत प्रेरित क्रियान्वयन करें, सी के अंतर्गत आंकड़े जाँचे, संपरीक्षण करें और अपालना चेक करें और ए के अंतर्गत सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) आधारित सुधार और मानकीकरण करें।  सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) का अर्थ यह नहीं है कि गैर-अनुरूपताओं (Nonconformities) का पता न लगाया जाए बल्कि संपरीक्षण निष्कर्ष (Audit Findings) को सीखने के अवसर के रूप में लिया जाए और दोषमुक्त (Blamefree) मूल कारण विश्लेषण (Root Cause Analysis) किया जाए। 


यदि हम गुणवत्ता प्रबंधन में सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) का सही स्थान खोजें तो पाते हैं कि यह संस्कृति निर्माण (Culture building), कर्मचारी सहभागिता (Employee engagement), उत्कर्ष प्रथाओं को साझा करने (Best practice sharing), नवाचार और निरंतर सुधार (Innovation and Continual Improvement) के लिए अत्यंत प्रभावी है। साथ ही हम यह भी पाते हैं कि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) की भूमिका विनियामक अनुपालन (Regulatory compliance), सुरक्षा सम्बंधित प्रक्रियाओं (Safety-critical processes), कानूनी और वैधानिक अंतराल (Legal and statutory gaps) तथा गंभीर गैर-अनुरूपता से निपटना (Serious Nonconformity handling) के लिए सीमित है। हमें यह भली प्रकार समझ लेना चाहिए कि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) गुणवत्ता प्रबंधन (Quality Management) के लिए अत्यंत उपयोगी है, लेकिन यह दोष पहचान (Defect Identification) का विकल्प नहीं है। इसके लिए सही दृष्टिकोण यही होगा कि कामों को सुधारने के लिए समस्या देखे, सुधार करें और सुधार को टिकाऊ बनाने के लिए शक्तियों को पहचाने।  


सार


सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) गुणवत्ता प्रबंधन (Quality Management) को मानवीय, सहभागी और प्रेरणादायी बनाता है। यह दोष पहचान का विकल्प नहीं, बल्कि उसे संतुलित और टिकाऊ सुधार में बदलने का माध्यम है। जोखिम-आधारित सोच और पीडीसीए चक्र के साथ इसका समन्वय संगठन को सीखने वाली संस्था (Learning Organization) की ओर ले जाता है। सही उपयोग के साथ सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) गुणवत्ता संस्कृति, नवाचार और निरंतर सुधार का सशक्त आधार बन सकता है।


सादर,

केशव राम सिंघल 

अगला लेख - गुणवत्ता प्रबंधन (Quality Management) में सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) लागू करने के लिए चरण-दर-चरण (Step-by-Step) कार्यान्वयन मॉडल 


गुरुवार, 8 जनवरी 2026

आंतरिक संपरीक्षण (Internal Audit): सिर्फ अनुपालन की औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रारंभिक चेतावनी तंत्र है

आंतरिक संपरीक्षण (Internal Audit) - सिर्फ अनुपालन की औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रारंभिक चेतावनी तंत्र है

************* 









चित्र साभार NightCafe 

ज्यादातर संगठनों में आंतरिक संपरीक्षण (Internal Audit) को “कर लिया-भूल गए” जैसा काम समझा जाता है। गुणवत्ता प्रबंधन से जुड़े लोग सोचते हैं कि निर्धारित तारीख पर संपरीक्षण कर लो, जांच-सूची से प्रश्न पूछ लो, कुछ गैर-अनुरूपताएँ (Nonconformities) या अपालनाएँ (noncompliances) ढूंढो, उन्हें सामने लाओ और उन्हें सुधार कर मानक के अनुरूप ठीक कर दो। अंत में रिपोर्ट बनाओ, उसे फाइल कर दो ताकि जब प्रमाणन संपरीक्षण हो तो प्रमाणन संस्था के संपरीक्षकों (auditors) को बताया जा सके कि नियत समय पर आंतरिक संपरीक्षण हुआ, ताकि प्रमाणन (certification) बरकरार रहे और काम खत्म।


यह सोच गलत है और मानक की मूल भावना के विरुद्ध है। आईएसओ 9001:2015 मानक के खंड 9.2 में स्पष्ट लिखा है कि आंतरिक संपरीक्षण का उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि संगठन में गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (QMS) मानक की अपेक्षाओं (requirements) के अनुरूप है, और प्रभावी ढंग से कार्यान्वित (implemented) और पोषित (maintained) है।


मानक की अपेक्षाओं को “प्रभावी ढंग से” कार्यान्वित करना ज्यादातर संगठन भूल जाते हैं। जबकि परिपक्व संगठनों में आंतरिक संपरीक्षण प्रारंभिक चेतावनी रडार (Early Warning Radar) की तरह काम करता है। यह आपको बताता है कि कहीं प्रक्रिया चुपचाप खराब या क्षीण तो नहीं हो रही, इससे पहले कि ग्राहक शिकायत करे, नियामक नोटिस भेजे या बड़ा नुकसान हो जाए।


जब संपरीक्षण केवल “अनुपालन टिक-मार्क” (Compliance tick mark) बन जाता है, तो गैर-अनुरूपताएँ (nonconformities) या अपालनाएँ    (noncompliances) सतही ठीक हो जाती हैं, लेकिन मूल कारण नहीं हटता। जोखिम (risks) छिपे रहते हैं, सुधार के अवसर खो जाते हैं और नेतृत्व को लगता है “सब ठीक है”, जबकि जमीनी हकीकत अलग होती है।


उत्कृष्ट संगठन अलग तरह से संपरीक्षण करते हैं। जोखिम आधारित सोच (रिस्क-बेस्ड थिंकिंग) के तहत वे इन सवालों पर केंद्रित (focus) करते हैं -


(1) यह प्रक्रिया अभी तो चल रही है, लेकिन दबाव (उच्च मांग, कर्मचारी कमी, सप्लायर देरी) में क्या यह प्रक्रिया टिकेगी?


(2) कौन से नियंत्रण केवल दस्तावेजों में हैं, जमीन पर नहीं?


(3) कौन से “जुगाड़” (workarounds) अब स्थायी प्रक्रिया बन गए हैं?


(4) कौन से जोखिम बढ़ रहे हैं, पर अभी मुख्य निष्पादन संकेतक (KPI) में नहीं दिख रहे?


मैं कुछ वास्तविक उदाहरणों की चर्चा करना चाहूंगा।


(1) एक उत्पादन कंपनी (manufacturing company) में मशीन रखरखाव की प्रक्रिया लिखित थी, पर कर्मचारी “तुरंत उत्पादन” के चक्कर में निवारक रखरखाव (preventive maintenance) पर ध्यान नहीं देते थे। अनुपालन संपरीक्षण में सब “ठीक है” दिखता था। जोखिम-आधारित संपरीक्षण (risk based audit) में संपरीक्षक (auditor) ने पिछले 6 महीने के टूट-फूट लॉग (breakdown log) की जाँच की, जिससे पता चला  कि 70 % टूट-फूट (breakdown) अनियोजित (unplanned) थे। सुधार के बाद डाउनटाइम (downtime) 40 % कम हुआ, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ी। 


(2) एक सर्विस कंपनी (BPO) के कॉल सेंटर में “कॉल रिकॉर्डिंग रिव्यू” प्रक्रिया थी। चेकलिस्ट में टिक मार्क लग जाता था। जब संपरीक्षक (auditor) ने अचानक कॉल्स (random calls) सुनीं, तो पता चला प्रतिनिधि स्क्रिप्ट की पालना नहीं कर रहे और ग्राहक डेटा के रिसाव (customer data leak) का जोखिम था। मुख्य निष्पादन संकेतक (KPI - AHT, CSAT) तो अच्छे थे, पर जोखिम छिपा था। सुधार के बाद डेटा सुरक्षा में 25% सुधार हुआ।


(3) एक फार्मा कंपनी के पैकेजिंग विभाग में दृश्य निरीक्षण प्रक्रिया (visual inspection process) थी। प्रशिक्षण अभिलेख (training record) पूरे थे। संपरीक्षक (auditor) ने लाइन पर 15 मिनट खड़े होकर देखा तो पता चला प्रकाश (lighting) कम था और कर्मचारी 12 घंटे की शिफ्ट में थकान से गलतियाँ कर रहे थे। यह बात मुख्य निष्पादन संकेतक (KPI) में नहीं दिख रही थी, पर वापिस बुलाने (recall) का बड़ा जोखिम था। सुधार (बेहतर लाइटिंग और शिफ्ट रोटेशन) से त्रुटि दर 30% घटी।


निष्कर्ष 


अगर आपके संगठन के आंतरिक संपरीक्षण आपको और उच्च प्रबंधन (top management) को असहज नहीं करते, तो वे आपकी प्रणाली की रक्षा नहीं कर रहे – सिर्फ सजावट कर रहे हैं।


पाँच ऐसे प्रश्न, जिनका उत्तर भी आतंरिक सम्परीक्षकों को आंतरिक संपरीक्षण में जरूर जानने का प्रयास करना चाहिए -


(1) क्या यह प्रक्रिया मौजूदा कर्मचारी के बिना चलेगी?


(2) अगर ग्राहक ऑर्डर दोगुना हो जाए तो क्या होगा?


(3) कौन सा नियंत्रण पिछले 6 महीने से 100 % अनुपालन दिखा रहा है? (यह संदेहास्पद हो सकता है!)


(4) क्या कोई जोखिम है जो अभी मुख्य निष्पादन संकेतक (KPI) में नहीं दिख रहा?


(5) कौन से “जुगाड़” (workarounds) अब स्थायी प्रक्रिया बन गए हैं?


इस प्रकार आपका आंतरिक संपरीक्षण अनुपालन का टिक-मार्क नहीं, बल्कि संगठन का सबसे शक्तिशाली रणनीतिक उपकरण (Strategic Tool) बन सकता है। 


सौजन्य - धन्यवाद, Buchi Okoro, आपकी फेसबुक पोस्ट के लिए जिसे पाठक यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।


सादर,

केशव राम सिंघल 

#आईएसओ9001 #आतंरिकसंपरीक्षण #गुणवत्ताप्रबंधन #जोखिमआधारितसोच 

#ISO9001 #InternalAudit #QualityManagement #RiskBasedThinking 


रविवार, 14 दिसंबर 2025

संतुलित मूल्यांकन पत्रक (Balanced Scorecard)

 संतुलित मूल्यांकन पत्रक (Balanced Scorecard)

*********** 









प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe 

परिचय 


संतुलित मूल्यांकन पत्रक (Balanced Scorecard) एक रणनीतिक आयोजना और प्रबंधन (strategic planning and management) और प्रदर्शन मापन (performance measurement) का तंत्र (framework) या उपकरण (tool) है। इस मूल्यांकन पत्रक को 1992 में डॉ. रॉबर्ट कपलान (Robert S. Kaplan) और डॉ. डेविड नॉर्टन (David P. Norton) ने विकसित किया था। यह मूल्यांकन पत्रक पारंपरिक वित्तीय मापदंडों (financial metrics) से आगे बढ़कर संगठन के प्रदर्शन (performance) को चार अलग-अलग परिप्रेक्ष्य (Perspectives) से मापता (measure) है ताकि दीर्घकालिक रणनीति (long-term strategy) को प्रभावी ढंग से लागू (implement effectively) किया जा सके।


मुख्य परिपेक्ष्य 


संतुलित मूल्यांकन पत्रक के चार मुख्य परिप्रेक्ष्य (Four Perspectives) हैं, जिन्हें वित्तीय परिपेक्ष्य, ग्राहक परिपेक्ष्य, आंतरिक प्रक्रिया परिपेक्ष्य और सीख एवं विकास परिप्रेक्ष्य में विभाजित किया गया है। 


(1) वित्तीय परिप्रेक्ष्य (Financial Perspective) - इस परिपेक्ष्य के अंतर्गत संस्था यह मूल्यांकन करने का प्रयास करती है कि संस्था का वित्तीय स्वास्थ्य कैसा है तथा संस्था के शेयरधारक संस्था को कैसे देखते हैं? उदाहरण के लिए मुख्य निष्पादन संकेतक (KPIs) क्या हैं - राजस्व वृद्धि कितनी है, लाभ मार्जिन (profit margin) कितना है, नियोजित पूंजी पर प्रतिफल (ROCE - Return on Capital Employed) कितना है, लागत में कमी के तरीके अपनाए गए, नकदी प्रवाह नियोजित है आदि। इस मूल्यांकन का मुख्य केंद्रबिंदु (focus) यह होता है कि संस्था आर्थिक रूप से कितनी सफल है?


(2) ग्राहक परिप्रेक्ष्य (Customer Perspective) - इसके अंतर्गत संस्था यह मूल्यांकन करने का प्रयास करती है कि संस्था के ग्राहक संस्था को कैसे देखते हैं? उदाहरण के लिए मुख्य निष्पादन संकेतक (KPIs) क्या हैं - ग्राहक संतुष्टि मूल्यांकन, ग्राहक प्रतिधारण दर, बाजार हिस्सेदारी, शुद्ध प्रमोटर मूल्यांकन (NPS - Net Promoter Score), डिलीवरी समय आदि क्या हैं। इस मूल्यांकन का मुख्य केंद्रबिंदु (focus) यह होता है कि ग्राहकों की जरूरतें पूरी की जाएं और उनके लिए मूल्य (value) सृजित हो।


(3) आंतरिक प्रक्रिया परिप्रेक्ष्य (Internal Process Perspective) - इसके अंतर्गत संस्था यह मूल्यांकन करने का प्रयास करती है कि संस्था को किस चीज में उत्कृष्ट होना चाहिए? उदाहरण के लिए मुख्य निष्पादन संकेतक (KPIs) क्या हैं - उत्पादन चक्र समय, गुणवत्ता दर, प्रक्रिया दक्षता, नवाचार पाइपलाइन, ऑपरेशनल एक्सीलेंस, सप्लाई चेन प्रदर्शन आदि। इस मूल्यांकन का मुख्य केंद्रबिंदु (focus) यह होता है कि संस्था उन आंतरिक प्रक्रियाओं का पता लगाए जिनमें संस्था को सुधार करना जरूरी है।


(4) सीख एवं विकास परिप्रेक्ष्य (Learning and Growth Perspective) - इसके अंतर्गत संस्था यह मूल्यांकन करने का प्रयास करती है कि क्या संस्था निरंतर सुधार की ओर बढ़ रही है और मूल्य (value) सृजित कर पा रहे है? उदाहरण के लिए मुख्य निष्पादन संकेतक (KPIs) क्या हैं - कर्मचारी संतुष्टि, कर्मचारी टर्नओवर दर, प्रशिक्षण घंटे प्रति कर्मचारी, आईटी सिस्टम क्षमता, संस्था-संस्कृति, नवाचार की संख्या आदि। इस मूल्यांकन का मुख्य केंद्रबिंदु (focus) यह होता है कि संस्था में कर्मचारी, प्रणाली (system) और संस्था की प्रक्रियाओं की क्षमता बढे।


विशेषताएँ


संतुलित मूल्यांकन पत्रक संस्था की रणनीति को मापने योग्य बनाता है। यह संस्था की दूरदृष्टि (vision) और रणनीति (strategy) को ठोस लक्ष्य (concrete goals), मापदंड (measures), लक्ष्य मान (targets) और पहल (initiatives) में बदल देता है। कारण-और-प्रभाव संबंध (Cause-and-Effect Relationship) दृष्टि से देखा जाए तो चारों परिप्रेक्ष्य एक-दूसरे से जुड़े होते हैं।  उदाहरण के लिए कर्मचारियों का बेहतर सीख और विकास (Learning & Growth), जिससे प्रक्रियाएँ (Internal Process) बेहतर होती है, परिणामस्वरूप बेहतर ग्राहक संतुष्टि (Customer satisfaction) और बेहतर वित्तीय परिणाम (Financial results) मिलते है। संतुलित मूल्यांकन पत्रक के अंतर्गत सामान्यतः एक रणनीति मानचित्र (Strategy Map) बनाया जाता है, जो यह दिखाता है कि कैसे निचले स्तर के लक्ष्य ऊपरी स्तर के वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करते हैं।


लाभ 


(1) संतुलित मूल्यांकन पत्रक केवल वित्तीय परिणामों पर केंद्रित नहीं करता, दीर्घकालिक संस्था के स्वास्थ्य पर भी ध्यान देता है।

(2) संतुलित मूल्यांकन पत्रक संस्था की रणनीति को पूरी संस्था में संरेखित (align) करता है।

(3) संतुलित मूल्यांकन पत्रक सभी स्तरों पर कर्मचारियों को स्पष्टता देता है कि उनका काम रणनीति से कैसे जुड़ा है।

(4) संतुलित मूल्यांकन पत्रक की नियमित समीक्षा से रणनीति में जरूरी सुधार किए जा सकते हैं।


वर्तमान में दुनिया की बहुत सी कंपनियाँ (जैसे Apple, Volkswagen, Tata Group, HDFC Bank, Reliance आदि भारतीय कंपनियाँ भी) और सरकारी / गैर-लाभकारी संस्थाएँ संतुलित मूल्यांकन पत्रक का उपयोग करते हैं।


संक्षेप में संतुलित मूल्यांकन पत्रक (Balanced Scorecard) केवल एक प्रदर्शन मापन उपकरण  (Performance measurement tool) ही नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक प्रबंधन प्रणाली (Strategic management system) है जो संस्था को उसकी अपनी रणनीति को सफलतापूर्वक लागू करने में मदद करता है। 


सादर,

केशव राम सिंघल 



रविवार, 7 सितंबर 2025

आगंतुकों का धन्यवाद (Thanks Visitors)

आगंतुकों का धन्यवाद (Thanks Visitors)

************

गुणवत्ता जागरूकता (Quality Awareness) पर मेरे ब्लॉग्स को अब तक सात लाख पचहत्तर हजार से अधिक आगंतुकों (visitors) ने देखा है। यह मेरे लिए हर्ष और प्रेरणा का विषय है।

 

आज की स्थिति:

·       पुराना ब्लॉगQuality Concepts and ISO 9001:2008 QMS Awareness
आगंतुक: 5,50,800+
लिंक: iso9001-2008awareness.blogspot.com

·       वर्तमान ब्लॉगQuality Concepts and ISO 9001 QMS Awareness
आगंतुक: 1,79,200+
लिंक: qmsawareness.blogspot.com

·       यह हिंदी ब्लॉगगुणवत्ता और गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली पर जानकारी 

आगंतुक: 37,400+

 

आप सभी के सहयोग और स्नेहपूर्ण पढ़ने से मुझे लगातार लिखने और साझा करने की प्रेरणा मिलती है।


आगंतुकों का हार्दिक धन्यवाद।

 

सादर,
केशव राम सिंघल

बुधवार, 4 जून 2025

जागरूकता आलेख - गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (Quality Control Orders - QCO) - उपभोक्ता सुरक्षा की दिशा में एक सशक्त कदम

जागरूकता आलेख -  गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (Quality Control Orders - QCO) - उपभोक्ता सुरक्षा की दिशा में एक सशक्त कदम

********* 

गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) भारत सरकार द्वारा जारी ऐसे नियामक प्रावधान हैं, जो सुनिश्चित करते हैं कि देश में उत्पादित, आयातित या विक्रय किए जाने वाले उत्पाद भारतीय मानकों (Indian Standards) का कड़ाई से पालन करें। ये आदेश भारत में निर्मित, आयातित या बेचे जाने वाले उत्पादों पर लागू होते हैं और इनका उद्देश्य उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और विश्वसनीय उत्पाद उपलब्ध कराना है, जिससे भारतीय बाजार में घटिया सामान के प्रवेश को रोका जा सके। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) उत्पादों को प्रमाणित करने और QCO के अनुपालन को लागू करने के लिए जिम्मेदार है। 


गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों के प्रमुख पहलू 


1. उद्देश्य


- उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और विश्वसनीय उत्पाद प्रदान करना। 

- घटिया एवं अविश्वसनीय उत्पादों के निर्माण और आयात पर रोक लगाना। 

- बाजार में उच्च गुणवत्ता बनाए रखना। 


2. कार्यान्वयन


- केन्द्र सरकार के अंतर्गत संबंधित नियामक मंत्रालय (Regulatory Ministries) गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) जारी करते हैं। 

- आदेश जारी होने के बाद संबंधित उत्पादों के लिए भारतीय मानकों की अपेक्षाओं (Requirements of Indian Standards) का अनुपालन अनिवार्य हो जाता है। 


3. भारतीय मानक ब्यूरो की भूमिका 


- भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) गुणवत्ता नियंत्रण आदेश के अंतर्गत सम्मिलित उत्पादों का प्रमाणन प्राधिकरण (Certification Authority) और प्रवर्तन प्राधिकरण (Enforcement Authority) है। 


- भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा प्रमाणित उत्पादों पर आईएसआई चिन्ह (ISI mark) लगाया जाता है। 


4. गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) का अनिवार्य अनुपालन


- गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) के अंतर्गत आने वाले उत्पादों पर आईएसआई चिन्ह (ISI mark) का होना अनिवार्य है। 


- बिना प्रमाणन वाले उत्पादों की बिक्री और आयात भारत में वर्जित है। 


- केन्द्र सरकार के अधीन विभिन्न नियामक मंत्रालय (Regulatory Ministries) समय-समय पर गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO)  जारी करते हैं। 


- गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) के प्रभावी होने के बाद संबंधित उत्पादों के लिए भारतीय मानकों का पालन अनिवार्य हो जाता है। 


5. गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) के गैर-अनुपालन के परिणाम 


- आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। 

- बिना प्रमाणन वाले उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध रहेगा। 

- बिना प्रमाणन वाले उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध रहेगा। 


6. गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) द्वारा कवर किए जाने वाले उत्पाद 


गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) द्वारा कवर किए जाने वाले उत्पादों की सूची दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। उदाहरण के लिए बहुत से उत्पाद निम्न से सम्बंधित हैं -  


- विद्युत उपकरण - स्विच, वायर, चार्जर आदि 

- स्टील एवं इस्पात उत्पाद - TMT बार, पाइप आदि

- रसायन - सॉल्वेंट, एसीड आदि 

- वस्त्र - हेलमेट लाइनर, सुरक्षात्मक वस्त्र 

- प्लास्टिक उत्पाद - किचनवेयर, टॉयज़ आदि 

- निर्माण सामग्री आदि 


7. गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) के अंतर्गत आए उत्पादों के लिए अनिवार्य प्रमाणन


भारत में गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) के अंतर्गत आए उत्पादों को बेचने से पहले निर्माताओं और आयातकों को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) से प्रमाणन प्राप्त करना आवश्यक है। 


8. मानकीकरण और उपभोक्ता संरक्षण


- गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) उत्पादों में एकरूपता, विश्वसनीयता और गुणवत्ता सुनिश्चित करते हैं। 

- उपभोक्ताओं को घटिया उत्पादों के बाजार में न होने से सुरक्षा मिलती है और उन्हें सुरक्षित और विश्वसनीय सामान मिलता है। 


9. व्यापार विनियमन


घटिया उत्पादों के आयात पर रोक लगाने और भारतीय आंतरिक बाजार को संरक्षित करने हेतु गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO)  एक सशक्त उपकरण है। 


सार 


गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) केवल एक कानूनी अनिवार्यता नहीं, बल्कि उपभोक्ता हित और देश की औद्योगिक छवि को सुरक्षित रखने का माध्यम भी हैं। गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO)  के प्रभावी कार्यान्वयन से भारतीय बाजार में घटिया उत्पादों का प्रवेश रोका जा सकता है, जिससे उपभोक्ताओं का विश्वास और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित होती है।


विशिष्ट गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) और उनके विवरण के बारे में अधिक जानकारी के लिए, आप भारतीय मानक ब्यूरो की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।


सादर,

केशव राम सिंघल 

शनिवार, 1 मार्च 2025

आईएसओ 9001 गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली मानक का आगामी संशोधन

आईएसओ 9001 गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली मानक का आगामी संशोधन

********* 










आईएसओ 9001 गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली मानक के आगामी संशोधन में डिजिटल परिवर्तन पर जोर दिए जाने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य सततता, जोखिम-आधारित सोच, हितधारक जुड़ाव और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन को मजबूत करते हुए गुणवत्ता प्रबंधन प्रणालियों में प्रौद्योगिकी और डेटा विश्लेषण को एकीकृत करना है।


आईएसओ 9001 गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली में प्रमुख प्रत्याशित परिवर्तनों में निम्नलिखित शामिल होने की संभावना हैं -


(1) डिजिटलीकरण और उद्योग 4.0 


गुणवत्ता प्रबंधन को बढ़ाने के लिए डिजिटल टूल, स्वचालन, डेटा विश्लेषण और सूचना सुरक्षा का लाभ उठाने पर अधिक ध्यान केंद्रित करना।


(2) सततता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी 


कार्बन फुटप्रिंट को कम करने और संधारणीय व्यावसायिक संचालन को बढ़ावा देने के अभ्यासों सहित गुणवत्ता प्रबंधन प्रक्रियाओं में पर्यावरणीय विचारों को एकीकृत करना।


(3) बढ़ा हुआ जोखिम प्रबंधन 


संगठन में संभावित मुद्दों की सक्रिय रूप से पहचान करना और उनका समाधान करना, जोखिम-आधारित सोच का अधिक विकास करना।


(4) मजबूत हितधारक पर केंद्रित 


ग्राहकों की जरूरतों, कर्मचारी जुड़ाव और व्यापक हितधारक अपेक्षाओं को समझने और संबोधित करने पर अधिक जोर।


(5) आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन


आपूर्तिकर्ताओं का अधिक सख्त मूल्यांकन और लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए आपूर्ति श्रृंखला जोखिमों का प्रबंधन।


(6) नैतिकता और अखंडता


गुणवत्ता प्रबंधन प्रणालियों के भीतर नैतिक विचारों और नेतृत्व प्रथाओं को एकीकृत करना।


प्रमुख फोकस क्षेत्र - जैसा कि ऊपर बताया गया है, प्रत्याशित परिवर्तनों के अलावा, संशोधनमें  निम्न भी संबोधित हो सकते हैं -


गुणवत्ता संस्कृति - एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा देना जो गुणवत्ता उद्देश्यों और निरंतर सुधार का समर्थन करती है।


ग्राहक अनुभव - ग्राहक संतुष्टि से व्यापक ग्राहक अनुभव पर ध्यान केंद्रित करना।


ध्यान देने योग्य अतिरिक्त मुख्य बिंदु -


समयरेखा - संशोधित आईएसओ 9001 गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली मानक सितंबर 2026 में प्रकाशन के लिए निर्धारित है।


अन्य मानकों के साथ संरेखण - संशोधन का उद्देश्य एकीकृत प्रबंधन प्रणालियों को सुविधाजनक बनाने के लिए ISO 9001 को अन्य प्रबंधन प्रणाली मानकों, जैसे आईएसओ 14001 (पर्यावरण प्रबंधन) के साथ अधिक निकटता से सामंजस्य स्थापित करना है।


संगठनों पर प्रभाव: प्रमाणित संगठनों को संशोधित मानक का अनुपालन करने के लिए अपनी गुणवत्ता प्रबंधन प्रणालियों को अपडेट करना होगा। पिछले अनुभव के आधार पर, वर्तमान में आईएसओ 9001 गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली मानक के तहत प्रमाणित संगठनों के पास नई अपेक्षाओं को लागू करने के लिए प्रकाशन तिथि से तीन साल की ट्रांजीशन अवधि होगी।


उपरोक्त जानकारी आईएसओ 9001:2026 संशोधन के लिए वर्तमान अपेक्षाओं के अनुरूप है। संशोधन प्रक्रिया 2023 के अंत में शुरू हुई। ISO/TC 176 कार्य समूह 29 (WG 29) ने वर्तमान अपेक्षाओं की समीक्षा करने, नई तकनीकों जैसे उभरते रुझानों पर विचार करने और आईएसओ 9001 को आईएसओ 9000 के अपडेट करने के साथ संरेखित करने के लिए अपडेट शुरू किया, जिसमें बुनियादी बातें और शब्दावली शामिल हैं।


दिसंबर 2023 में 46 देशों के 80 से अधिक विशेषज्ञों को समीक्षा के लिए एक कार्यकारी मसौदा (WD) भेजा गया था। इनपुट का मूल्यांकन करने और मसौदे को आगे बढ़ाने के लिए फरवरी 2024 में एक बैठक सहित बाद की बैठकें आयोजित की गई हैं। विकास प्रक्रिया में कई चरण शामिल हैं, जिसमें वर्तमान में द्वितीय समिति ड्राफ्ट (CD2) की सामग्री को अंतिम रूप देने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।


फरवरी 2025 तक, संशोधन समिति ड्राफ्ट (CD) चरण में बना हुआ है। पूरी तरह से समीक्षा और आम सहमति बनाने के लिए परियोजना की समयसीमा को 36 महीने तक बढ़ा दिया गया है। संशोधित ISO 9001 मानक का प्रकाशन अब सितंबर 2026 के लिए योजनाबद्ध है।


सुचारू परिवर्तन सुनिश्चित करने के लिए, संगठनों को आधिकारिक ISO संचार के माध्यम से अपडेट रहना चाहिए और उद्योग विशेषज्ञों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ना चाहिए। इस आलेख में दी गई जानकारी विभिन्न स्रोतों से संकलित की गई है।


सादर,

केशव राम सिंघल


 

बुधवार, 12 फ़रवरी 2025

सार - गुणवत्ता प्रबंधन (Quality Management)

सार - गुणवत्ता प्रबंधन (Quality Management)

**********

गुणवत्ता प्रबंधन समन्वित गतिविधियों का एक प्रणालीगत ढाँचा है, जो किसी उत्पाद या सेवा की गुणवत्ता को निर्देशित और नियंत्रित करने के लिए अपनाया जाता है। गुणवत्ता उस स्तर को दर्शाती है, जिस तक किसी उत्पाद या सेवा की अंतर्निहित विशेषताएँ अपेक्षाओं को पूरा करती हैं।


गुणवत्ता प्रबंधन मुख्य रूप से तीन घटकों पर आधारित होता है: गुणवत्ता नियोजन, गुणवत्ता आश्वासन और गुणवत्ता नियंत्रण।


गुणवत्ता नियोजन (Quality Planning) – इसमें गुणवत्ता मानदंडों और प्रक्रियाओं को परिभाषित किया जाता है, ताकि वांछित गुणवत्ता स्तर सुनिश्चित किया जा सके।


गुणवत्ता आश्वासन (Quality Assurance) – यह सुनिश्चित करता है कि नियोजित मानदंडों और प्रक्रियाओं का पालन हो रहा है, जिससे गुणवत्ता में स्थिरता बनी रहे।


गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control) – इसमें अंतिम उत्पाद या सेवा की जाँच की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह निर्धारित मानकों और अपेक्षाओं को पूरा कर रही है।


गुणवत्ता प्रबंधन एक PDCA (योजना-करें-जाँचें-कार्रवाई करें) चक्र के रूप में कार्य करता है:


P (Plan) – गुणवत्ता नियोजन - इसमें स्वीकृति मानदंड और प्रक्रियाएँ स्थापित की जाती हैं।

D (Do) – गुणवत्ता आश्वासन - इसमें निर्धारित प्रक्रियाओं को लागू किया जाता है।

C (Check) – गुणवत्ता नियंत्रण - इसमें कार्यान्वयन की जाँच की जाती है।

A (Act) – समय पर सुधारात्मक एवं निवारक कार्रवाई - प्राप्त परिणामों के आधार पर आवश्यक सुधार किए जाते हैं।


इस प्रकार, गुणवत्ता प्रबंधन संगठनों को उच्च गुणवत्ता बनाए रखने और निरंतर सुधार की दिशा में कार्य करने में सहायता करता है।


सादर,

केशव राम सिंघल


सोमवार, 10 फ़रवरी 2025

गुणवत्ता

गुणवत्ता 

******* 










गुणवत्ता केवल एक मानक, प्रमाणपत्र या कोई गंतव्य नहीं है। यह एक लगातार चलने वाली यात्रा है, जो लगातार सुधार और उत्कृष्टता की ओर ले जाती है। जब हम किसी उत्पाद या सेवा में गुणवत्ता को महत्त्व देते हैं तो हम नवीनतम सोच, तकनीक और बेहतर प्रक्रियाओं को अपनाने पर ध्यान देते हैं। 


दुनिया तेजी से बदल रही है। परिवर्तन बहुत ही तेजी से हो रहे हैं। हमें समय के साथ अपनी सोच में परिवर्तन करना जरूरी है, अन्यथा हम अन्य लोगों से पिछड़ जाएँगे। 


ग्राहक की संतुष्टि बहुत आवश्यक है, क्योंकि हम उसी पर निर्भर हैं और ग्राहक को उत्कृष्ट उत्पाद और सेवा से ही संतुष्ट किया जा सकता है। आज का युग प्रतिस्पर्धा का युग है। गुणवत्ता नवाचार (Quality Innovation) अपनाने पर ही हम आगे बढ़ सकते हैं। गुणवत्ता केवल ग्राहक की संतुष्टि का माध्यम नहीं है, बल्कि यह संगठन को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त (Competitive Advantage) भी प्रदान करता है। उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद और सेवाएँ ब्रांड की प्रतिष्ठा (Reputation) को मजबूत बनाती हैं और दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित करती हैं। कैसे हम आगे बढ़ें? मेरे कुछ सुझाव हैं - 


(1) पारम्परिक तरीकों से आगे सोचकर आगे बढ़े, अलग सोचें और नवाचार पद्धति अपनाएँ। 


(2) अपनी टीम को गुणवत्ता के प्रति जागरूक और प्रेरित करें। गुणवत्ता सीमित लोगों की नहीं, सभी की जिम्मेदारी है। टीम सदस्यों के बीच गुणवत्ता-संस्कृति के बीज बोएँ। गुणवत्ता केवल प्रबंधन की जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि प्रत्येक कर्मचारी की भागीदारी आवश्यक होती है। 

प्रशिक्षण (Training) और कौशल विकास (Skill Development) से टीम को सशक्त बनाना चाहिए।


(3) तकनीक का सही और प्रभावी उपयोग करें। डिजिटल उपकरण, स्वचालन और आकड़ों के विश्लेषण से गुणवत्ता सुधार करें। 


(4) लगातार सुधार की ओर विशेष ध्यान देते हुए अपनी पद्धतियों (प्रक्रियाओं) को सुधारें। आज की प्रतिस्पर्धात्मक दुनिया में संस्थाओं को लचीला (Agile) होना चाहिए, ताकि वे तेजी से बदलते बाज़ार और ग्राहक की माँगों के अनुरूप कार्य कर सकें। पीडीसीए (Plan-Do-Check-Act) चक्र को अपनाकर निरंतर सुधार सुनिश्चित किया जा सकता है।


(5) संस्थाओं को गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (ISO 9001:2015 आदि) को अपनाना चाहिए, जिससे प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और कुशलता बढ़ती है। गुणवत्ता संपरीक्षण (Quality Audit) और प्रतिक्रिया प्रणाली (Feedback System) को नियमित रूप से लागू करें।


गुणवत्ता कोई संयोग नहीं है, बल्कि यह एक सुविचारित रणनीति, निरंतर प्रयास और जागरूकता का परिणाम होती है। जब हम अपनी सोच में नवीनता लाते हैं, प्रक्रियाओं को बेहतर करते हैं और ग्राहक संतुष्टि को प्राथमिकता देते हैं, तो हम न केवल प्रतिस्पर्धा में आगे रहते हैं, बल्कि उत्कृष्टता की ओर निरंतर बढ़ते रहते हैं। गुणवत्ता की यह यात्रा अनवरत है, और इसमें सतत सुधार ही सफलता की कुंजी है।


सादर,

केशव राम सिंघल 

गुणवत्ता का प्रतीकात्मक चित्र - साभार NightCafe


सोमवार, 11 नवंबर 2024

आईएसओ 9001:2015 गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली मानक संक्षेप में

आईएसओ 9001:2015 गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली मानक संक्षेप में

 










खंड एक, दायरा - नेतृत्व करने के लिए एक मानक मानचित्र,

हर संस्था के लिए, चाहे वह किसी भी प्रकार का क्यों हो।

मानक अपेक्षाएँ लचीली हैं, सभी के लिए बनाई गई हैं,

संस्थाओं में गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए, चाहे वे बड़े हों या छोटे।

 

खंड दो मानक संदर्भ बताता है,

आईएसओ 9000:2015 मूलभूत शब्दावली मानक को बतलाता है

मानक को स्पष्टता के साथ मार्गदर्शन करने के लिए परिभाषाएँ यहाँ हैं,

ताकि हम सभी समझ सकें कि हमें करना क्या है।

 

खंड तीन सावधानी से शब्दों और परिभाषाओं से निपटने के लिए,

यह आईएसओ 9000:2015 शब्दावली मानक का, सटीक संदर्भ देता है।

आईएसओ 9000:2015 में प्रत्येक पद और परिभाषा, सही से बताई गई है,

हमारी समझ को स्पष्ट और सही रखने के लिए।

 

खंड चार, संस्था संदर्भ, व्यापक और विस्तृत,

इच्छुक पक्षों की अपेक्षाएँ मानक को कम नहीं होने देंगे।

दायरा और प्रक्रियाएँ जिन्हें निर्धारित और परिभाषित करना है,

संस्था की गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली को व्यवसाय डिज़ाइन के साथ संरेखित करने के लिए।

 

खंड पाँच, नेतृत्व, मार्ग प्रशस्त करता है,

शीर्ष प्रबंधन की सक्रिय भूमिका यहाँ बनी रहेगी।

भूमिकाएँ, मार्गदर्शन और मूल्य जो वे साझा करते हैं,

संस्था की टीम प्रेरित और तैयार रहती है।

 

खंड छह, आयोजना, जोखिमों और उद्देश्यों को संबोधित करता है,

लक्ष्यों और परिवर्तनों के लिए, अच्छे से योजनाबद्ध किया जाता है।

जोखिम-आधारित सोच संस्था की नींव है,

सफलता, विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए।

 

खंड सात, सम्बल, जिसकी हमें जरुरत है,

संसाधन, कौशल, सफल होने में सहायक।

दस्तावेजों से लेकर प्रणाली ज्ञान साझा करने तक,

एक ठोस गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली, अच्छी तरह से तैयार हुई।

 

खंड आठ, संचालन, इसे जीवंत बनाता है,

डिजाइन और उत्पादन, जिसमें हम कामयाब होते हैं।

सेवाएँ या उत्पाद वितरित किए गए, आउटपुट नियंत्रित किए गए,

हमने मानक पूरे किए और कई प्रक्रियाएँ शुरू कीं।

 

खंड नौ, प्रदर्शन मूल्यांकन, करे जाँच पूरी तरह ,

डेटा विश्लेषण, आंतरिक संपरीक्षण और प्रबंधन समीक्षा हर तरह।

मापना, विश्लेषण करना, यह देखना क्या सही है,

ताकि हमारी प्रणाली मजबूत रहें, लक्ष्य ध्यान में रहे।

 

खंड दस, सुधार, हमेशा आगे बढ़ने का आह्वान,

गैर-अनुरूपता और सुधार कार्रवाई, समझदारी से सीखना।

निरंतर सुधार और विकास, हम जिस कदम पर चलते हैं,

गुणवत्ता की यात्रा प्रगति की ओर हमेशा गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली आगे रहती है।

 

अनुलग्नक सूचनात्मक मार्गदर्शक प्रकाश जोड़ता है,

अवधारणाएँ और शब्द हमारे लिए स्पष्ट किए गए हैं।

अनुलग्नक बी सूचनात्मक अन्य मानकों के बारे में बताता है,

इस प्रकार आईएसओ व्यापक गुणवत्ता क्षेत्र बनाता है।

 

अंत में, दी गई है एक ग्रंथ सूची, बुद्धिमान और गहरी,

गुणवत्ता का संदर्भ देने के लिए जिसे हम बोते हैं और काटते हैं।

आईएसओ 9001:2015 गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली मानक, सद्भाव में प्रतिध्वनित होता है,

उत्कृष्टता के लिए लोकप्रिय गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली मानक आईएसओ लाता है।

 

- केशव राम सिंघल