बुधवार, 16 सितंबर 2026

ISO 9001:2026 का प्रमोचन (Launch) — प्रमुख बातें

ISO 9001:2026 का प्रमोचन (Launch) — प्रमुख बातें

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आज, 16 सितंबर 2026 को ISO 9001:2026 आधिकारिक रूप से प्रकाशित हो गया है। यह ISO 9001 का छठा संस्करण (Sixth edition) है और ISO की आधिकारिक साइट पर इसे Published, Edition 6, 2026 के रूप में प्रदर्शित किया गया है। आज आयोजित ऑनलाइन ISO आयोजन (Event) में चार वक्ताओं ने ISO 9001:2026 के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। आयोजन का संक्षिप्त विवरण निम्न है—


1. Katie Clift — संदर्भ और संवाद


Katie Clift, ISO की Head of Public Relations, ने ISO 9001 को व्यापक संदर्भ में प्रस्तुत किया। उनकी भूमिका केवल Technical changes बताने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह समझाना भी था कि आज के बदलते Business environment में ISO 9001 क्यों प्रासंगिक है। उनकी बातचीत में निम्न प्रमुख Themes दिखाई दिए—


* बदलती ग्राहक अपेक्षाएँ (Customer expectations)

* डिजिटल परिवर्तन (Digital transformation) और कृत्रिम बुद्धिमता (AI)

* आपूर्ति श्रृंखला जटिलता (Supply-chain complexity)

* लचीलापन (Resilience) 

* नवाचार (Innovation)

* संगठनात्मक निष्पादन (Organizational performance)

* और सबसे महत्वपूर्ण — विश्वास (Trust)


2. Sam Somerville — Revision के पीछे की सोच


Sam Somerville, ISO/TC 176/SC 2 की Chair और ISO 9001 Revision project से जुड़ी प्रमुख व्यक्ति तथा Convenor, ने संशोधन (Revision) के तकनीकी (Technical) और व्यवहारिक (Practical) पक्ष पर प्रकाश डाला। उनके संदेश का सार यह था कि ISO 9001:2026 का उद्देश्य ISO 9001 को पूरी तरह बदल देना नहीं, बल्कि उसे वर्तमान और भविष्य की संगठनात्मक वास्तविकताएँ (Organizational realities) के लिए अधिक स्पष्ट और उपयोगी बनाना है। इसलिए ISO 9001:2015 का मूल QMS ढाँचा (Framework) समाप्त नहीं होता। ग्राहक केंद्रित (Customer focus), प्रक्रिया सोच (Process approach), नेतृत्व (Leadership), निष्पादन मूल्यांकन (Performance evaluation) और लगातार सुधार (Continual improvement) जैसे मूलभूत सिद्धांत (Principles) बने रहते हैं। साथ ही, 2026 संस्करण में विशेष रूप से निम्न क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है—


* अपेक्षाओं (Requirements) की भाषा और स्पष्टता (Clarity) में सुधार

* नेतृत्व (Leadership) और गुणवत्ता संस्कृति (Quality culture) पर अधिक महत्त्व 

* जोखिमों और अवसरों को अधिक स्पष्ट रूप से संबोधित करना

* परिवर्तन प्रबंधन

* संगठनात्मक ज्ञान  

* जलवायु परिवर्तन विचारों (Climate-change considerations) की स्पष्टता

* अन्य ISO प्रबंधन-प्रणाली मानकों के साथ बेहतर संरेखण (Alignment)


इस प्रकार संशोधन (Revision) को केवल खण्डों (Clauses) में परिवर्तन के रूप में नहीं, बल्कि QMS को अधिक उपयुक्त (Relevant) और प्रभावी (Effective) बनाने के प्रयास के रूप में देखना उपयोगी होगा।


3. Isabela Santos — व्यवहारिक/व्यावसायिक परिपेक्ष्य (Practical/Business perspective)


Isabela Santos ने ISO 9001:2026 को व्यवहारिक और व्यावसायिक परिपेक्ष्य  से देखते हुए चर्चा की कि संशोधित मानक लोगों, Projects और संगठनात्मक निष्पादन (Organizational performance) को किस प्रकार सपोर्ट कर सकता है। यह पहलू विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि ISO 9001 को केवल “अनुपालन दस्तावेज" (Compliance document) के रूप में देखने के बजाय एक ऐसे प्रबंधन ढाँचे (Management framework) के रूप में समझने की आवश्यकता है जो लोगों (People) → प्रक्रियाओं (Processes) → निष्पादन (Performance) → सुधार (Improvement) → व्यावसायिक परिणामों (Business outcomes) को आपस में जोड़ता है। इस दृष्टिकोण से QMS केवल प्रमाणन (Certification) प्राप्त करने या बनाए रखने का साधन नहीं रहता, बल्कि संगठन के बेहतर संचालन और परिणामों में योगदान देने वाला प्रबंधन ढाँचा बन सकता है।


4. Sergio Mujica — ISO का व्यापक संदेश


Sergio Mujica, ISO Secretary-General, ने ISO 9001 की वैश्विक भूमिका और उसके भविष्य के महत्व पर बात की। उनके अनुसार आज ISO 9001 से एक मिलियन से अधिक संगठन जुड़े हुए हैं और यह 189 देशों में उपयोग किया जाता है। इसलिए ISO 9001:2026 संशोधन को केवल एक तकनीकी संशोधन के रूप में नहीं समझना चाहिए। इसका व्यापक उद्देश्य गुणवत्ता को संगठनात्मक निष्पादन (Organizational performance), विश्वास (Trust) और सतत विकास (Sustainable growth) से जोड़ना है।


प्रतिक्रियाएँ


प्रमोचन से पहले ISO के LinkedIn announcement पर गुणवत्ता पेशेवरों (Quality professionals) की प्रतिक्रियाएँ विविध रहीं। कुछ लोगों ने इसे लंबे समय से प्रतीक्षित अपडेट बताया और जलवायु परिवर्तन (Climate change), आपूर्ति-श्रृंखला लचीलापन (Supply-chain resilience) तथा डिजिटल परिवर्तन (Digital transformation) जैसे विषयों की ओर ध्यान आकर्षित किया। कुछ प्रतिक्रियाओं में यह विचार भी सामने आया कि परिपक्व ISO 9001:2015 QMS वाले संगठनों के लिए परिवर्तन बहुत बड़ी क्रांति (Revolution) नहीं है। इस संशोधन को कुछ लोगों ने क्रमिक विकास, क्रान्ति नहीं" (Evolution, not revolution) के रूप में वर्णित किया है। दूसरी ओर, कुछ पेशेवरों (Professionals) ने यह प्रश्न भी उठाया कि क्या संशोधित मानक वास्तव में आख़िरी उपयोगकर्ताओं (End users) के लिए पर्याप्त सरल और सहज होगा। इन प्रतिक्रियाओं से यह संकेत मिलता है कि ISO 9001:2026 को लेकर उत्सुकता के साथ-साथ इसके व्यावहारिक कार्यान्वयन (Practical implementation) को लेकर स्वाभाविक प्रश्न भी हैं।


मेरी प्रतिक्रिया


मेरे विचार में ISO 9001:2026 को समझने का सबसे अच्छा तरीका नए मानक (New standard) से अधिक नए महत्त्व (New emphasis) को समझना है। ISO 9001:2026 का महत्व केवल यह जानने में नहीं है कि कौन-सा खंड (Clause) बदला है, बल्कि यह समझने में है कि QMS वास्तव में संगठन (Organization) को बेहतर निर्णय लेने, जोखिमों और अवसरों को समझने, परिवर्तनों को नियंत्रित करने, गुणवत्ता संस्कृति (Quality culture) विकसित करने और बेहतर निष्पादन (Performance) प्राप्त करने में कैसे मदद करता है? यही वह स्थान है जहाँ ISO 9001 जागरूकता की वर्षों से चली आ रही दृष्टि (Approach) विशेष रूप से उपयुक्त (Relevant) दिखाई देती है।


मुझे तीन महत्वपूर्ण प्रसंग दिखाई देते हैं —


1. अनुपालन से प्रभावशीलता की ओर - केवल प्रमाणपत्र (Certificate) बनाए रखना पर्याप्त नहीं है; QMS को संगठन के वास्तविक काम में मूल्य (Value) पैदा करना चाहिए।

2. दस्तावेज (Documentation) से संगठनात्मक सोच (Organizational Thinking) की ओर - ISO 9001:2026 को केवल दस्तावेज (Documents) बदलने का अभ्यास (Exercise) बना देना इसके उद्देश्य को छोटा कर देगा। महत्वपूर्ण यह है कि QMS की सोच संगठन के वास्तविक कार्यों और निर्णयों में दिखाई दे।

3. गुणवत्ता विभाग से गुणवत्ता संस्कृति की ओर - गुणवत्ता केवल गुणवत्ता प्रबंधक या गुणवत्ता विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। नेतृत्व (Leadership), लोगों (People), प्रक्रियाओं (Processes) और निर्णय लेने (Decision-making) —सभी में गुणवत्ता सोच (Quality thinking) दिखाई देनी चाहिए।


जलवायु परिवर्तन (Climate Change) — एक विशेष पहलू


एक विशेष बात यह है कि ISO 9001:2026 में जलवायु परिवर्तन को अलग से कोई नया पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (Environmental Management System) विषय बनाने के बजाय संगठनात्मक प्रसंग और हितधारकों (Organizational context and Interested parties) के संदर्भ में QMS से जोड़ा गया है। यह 2024 के ISO 9001:2015/Amd 1:2024 Amendment की दिशा का ही आगे का विकास है। इसलिए संगठनों के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न केवल यह नहीं है कि क्या हमने जलवायु परिवर्तन (Climate change) को अपने QMS दस्तावेज में लिख दिया है? बल्कि यह है कि “क्या जलवायु परिवर्तन हमारे संगठन के प्रसंग, हितधारकों, जोखिमों, अवसरों या QMS के इच्छित परिणामों (Intended results) को प्रभावित करता है?” यदि प्रभावित करता है, तो उसे QMS में उचित रूप से संबोधित किया जाना चाहिए।


एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर 


आज की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि ISO 9001:2026 अब केवल FDIS या Proposed revision नहीं रहा—यह आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय मानक (International Standard) बन चुका है। ISO के आधिकारिक दस्तावेज में इसकी प्रकाशन तिथि 16 सितम्बर 2026 दी गई है। अब अगला महत्वपूर्ण चरण संगठनों, सलाहकारों, ऑडिटरों, प्रमाणन निकायों और गुणवत्ता पेशेवरों (Organizations, Consultants, Auditors, Certification Bodies and Quality professionals) के लिए ISO 9001:2026 को समझना, उसके परिवर्तनों का विश्लेषण करना और यह देखना है कि उन्हें प्रभावी रूप से QMS में कैसे लागू किया जाए।


ISO 9001:2026 का वास्तविक मूल्य केवल संशोधित अपेक्षाओं (Revised requirements) को समझने में नहीं, बल्कि उन अपेक्षाओं के माध्यम से बेहतर गुणवत्ता, बेहतर निष्पादन और बेहतर संगठनात्मक परिणाम प्राप्त करने में है।


सादर,

केशव राम सिंघल


सोमवार, 14 सितंबर 2026

प्रबंधन प्रणाली संपरीक्षण (Auditing) के सिद्धांत

प्रबंधन प्रणाली संपरीक्षण (Auditing) के सिद्धांत

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किसी भी प्रबंधन प्रणाली (Management System) को लागू करने और उसे बनाए रखने में संपरीक्षण (Auditing) एक महत्वपूर्ण गतिविधि है। यह कई सिद्धांतों पर आधारित है, जो संपरीक्षण को विश्वसनीय और प्रभावी बनाने तथा संगठन को सुधार के अवसर पहचानने में मदद करते हैं। ये सिद्धांत इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे यह सुनिश्चित करने में मदद करते हैं कि संपरीक्षण (Audit) के निष्कर्ष और परिणाम प्रासंगिक, विश्वसनीय और उपयुक्त ऑडिट साक्ष्यों पर आधारित हों। संगठन (Organization) और संपरीक्षक (Auditor) इन सिद्धांतों का उपयोग प्रबंधन प्रणाली संपरीक्षण की प्रभावशीलता और मूल्य को बढ़ाने के लिए कर सकते हैं।


ISO 19011:2026 प्रबंधन प्रणाली संपरीक्षण के सात सिद्धांतों की पहचान करता है, जिनसे प्रत्येक संपरीक्षक को परिचित होना चाहिए। आइए, इन सिद्धांतों पर एक-एक करके चर्चा करते हैं।


(1) सत्यनिष्ठा (Integrity)


सत्यनिष्ठा व्यावसायिकता (Professionalism) की नींव है। एक संपरीक्षक (ऑडिटर) से अपेक्षा की जाती है कि वह संपरीक्षण की गतिविधियों को नैतिकता, ईमानदारी और ज़िम्मेदारी के साथ करे। एक ऑडिटर को ऑडिट तभी करना चाहिए जब वह ऐसा करने के लिए सक्षम हो और उसे निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए। ऑडिटर को निष्पक्ष और पूर्वाग्रह से मुक्त रहना चाहिए तथा ऐसी स्थितियों से बचना चाहिए जिनसे उसकी सत्यनिष्ठा से समझौता हो सकता हो।


उदाहरण - मान लीजिए कि एक ऑडिटर को किसी ऐसी प्रक्रिया में गैर-अनुरूपता (Nonconformity) मिलती है जिसे एक वरिष्ठ प्रबंधक संचालित करता है और वह प्रबंधक ऑडिटर का करीबी पेशेवर परिचित है। ऑडिटर को व्यक्तिगत संबंध के कारण गैर-अनुरूपता को नज़रअंदाज़ या कम करके आँकने के बजाय, उसे निष्पक्ष रूप से रिपोर्ट करना चाहिए।


(2) निष्पक्ष प्रस्तुति (Fair presentation)


निष्पक्ष प्रस्तुति से तात्पर्य ऑडिटर की इस ज़िम्मेदारी से है कि वह ऑडिट के दौरान देखी गई बातों को सच्चाई, सटीकता और निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करे। ऑडिट के निष्कर्षों और रिपोर्ट में ऑडिट के दौरान प्राप्त जानकारी और साक्ष्यों को इस प्रकार प्रस्तुत किया जाना चाहिए कि कोई भ्रामक निष्कर्ष न निकले।


उदाहरण - एक ऑडिट के दौरान ऑडिटर पाता है कि जाँचे गए दस रिकॉर्ड में से तीन एक निर्धारित अपेक्षा (Requirement) को पूरा नहीं करते हैं। ऑडिटर को इस स्थिति की सही रिपोर्ट करनी चाहिए तथा जाँचे गए सैंपल और प्राप्त ऑडिट साक्ष्यों का स्पष्ट उल्लेख करना चाहिए। उसे इस आधार पर यह नहीं कहना चाहिए कि संगठन के सभी रिकॉर्ड अपेक्षाओं को पूरा नहीं करते।


(3) उचित पेशेवर सावधानी (Due professional care)


उचित पेशेवर सावधानी का अर्थ है ऑडिटर की यह ज़िम्मेदारी कि वह ऑडिट का कार्य लगन, योग्यता और पेशेवर निर्णय (Professional judgement) के साथ करे। ऑडिटर को उचित सावधानी बरतनी चाहिए और ऑडिट के उद्देश्य, परिस्थितियों तथा उपलब्ध जानकारी को ध्यान में रखते हुए सोच-समझकर, संतुलित और जानकारी पर आधारित निर्णय लेने चाहिए।


उदाहरण - एक रिमोट ऑडिट के दौरान ऑडिटर स्क्रीन पर कोई दस्तावेज़ स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता है। ऐसी स्थिति में अनुमान के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय, ऑडिटर ऑडिटी से दस्तावेज़ दोबारा साझा करने या उसकी स्पष्ट प्रतिलिपि और अन्य प्रासंगिक साक्ष्य उपलब्ध कराने के लिए कहता है। पर्याप्त और उपयुक्त साक्ष्य प्राप्त करने के बाद ही ऑडिटर ऑडिट निष्कर्ष निकालता है।


(4) गोपनीयता (Confidentiality)


गोपनीयता का अर्थ है ऑडिट के दौरान प्राप्त जानकारी की सुरक्षा करना। ऑडिटर को ऑडिट के दौरान अनुबंध (Contract), वित्तीय आँकड़े (Financial Data), उत्पाद डिज़ाइन, व्यावसायिक रणनीति (Business Strategy) और तकनीकी दस्तावेज़ीकरण (Technical Documentation) जैसी संवेदनशील जानकारी तक पहुँच मिल सकती है। ऑडिटर को ऐसी जानकारी का उपयोग ज़िम्मेदारी से करना चाहिए और इसे अनधिकृत पक्षों के साथ साझा नहीं करना चाहिए।


(5) स्वतंत्रता (Independence)


ऑडिट में निष्पक्षता और वस्तुनिष्ठता (Objectivity) के लिए स्वतंत्रता (Independence) एक महत्वपूर्ण आधार है। जहाँ तक संभव हो, ऑडिटर को ऑडिट की जा रही गतिविधियों से स्वतंत्र रहना चाहिए और हितों के ऐसे टकराव (Conflict of Interest) से बचना चाहिए जो उसके निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं।


उदाहरण - खरीद (Purchasing) के लिए ज़िम्मेदार कर्मचारी को उसी खरीद प्रक्रिया का ऑडिट नहीं करना चाहिए जिसमें वह सीधे तौर पर शामिल है। एक स्वतंत्र ऑडिटर, जिसकी उस प्रक्रिया के लिए कोई प्रत्यक्ष ज़िम्मेदारी नहीं है, उस प्रक्रिया का ऑडिट अधिक वस्तुनिष्ठ तरीके से कर सकता है।


(6) साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण (Evidence-based approach)


ऑडिट के निष्कर्ष सत्यापन योग्य ऑडिट साक्ष्यों (Verifiable audit evidence) पर आधारित होने चाहिए। साक्षात्कार (Interview), अवलोकन (Observation), दस्तावेज़ीकृत जानकारी (Documented Information) और सैंपलिंग (Sampling) के माध्यम से एकत्र किए गए साक्ष्य इतने पर्याप्त और उपयुक्त होने चाहिए कि वे ऑडिट निष्कर्षों और परिणामों को समर्थन दे सकें।


उदाहरण - यदि कोई ऑडिटर यह निष्कर्ष निकालता है कि कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण नहीं मिल रहा है, तो इस निष्कर्ष को प्रशिक्षण रिकॉर्ड, कर्मचारियों के साक्षात्कार और संगठन की प्रशिक्षण अपेक्षाओं जैसे साक्ष्यों से समर्थित होना चाहिए। ऑडिटर को केवल अनुमान या किसी एक कर्मचारी के बयान के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।


(7) जोखिम-आधारित दृष्टिकोण (Risk-based approach)


ऑडिटर को ऑडिट की योजना बनाते समय और ऑडिट करते समय संगठन की गतिविधियों से जुड़े जोखिमों और अवसरों पर विचार करना चाहिए। ऑडिटर को उन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देना चाहिए जो संगठन के लिए अधिक महत्वपूर्ण हैं या जिनमें जोखिम का स्तर अधिक है, जैसे महत्वपूर्ण प्रक्रियाएँ, नियामक अपेक्षाएँ (Regulatory Requirements), महत्वपूर्ण परिवर्तन (Significant Changes) और आउटसोर्स की गई गतिविधियाँ।


उदाहरण - एक विनिर्माण संगठन (Manufacturing Organization) में ऑडिटर किसी महत्वपूर्ण उत्पादन प्रक्रिया पर अधिक ध्यान दे सकता है, जहाँ उपकरण की विफलता (Equipment Failure) उत्पाद की गुणवत्ता और ग्राहक को समय पर आपूर्ति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है। ऑडिटर किसी ऐसी आउटसोर्स की गई प्रक्रिया पर लागू नियंत्रणों की भी जाँच कर सकता है, जिसका संगठन के उत्पाद या सेवा की अनुरूपता (Conformity) पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।


सार


ऊपर वर्णित सात सिद्धांत प्रभावी प्रबंधन प्रणाली ऑडिटिंग की नींव बनाते हैं। ये ऑडिटर को ऑडिट को सुसंगत, निष्पक्ष और पेशेवर तरीके से करने में मदद करते हैं तथा ऑडिट परिणामों की विश्वसनीयता और मूल्य में योगदान देते हैं।


हर ऑडिटर को इन सिद्धांतों को समझना चाहिए और पूरी ऑडिट प्रक्रिया के दौरान उन्हें व्यवहार में लागू करना चाहिए।


सादर,

केशव राम सिंघल 


गुरुवार, 10 सितंबर 2026

आपको क्यों “प्रबंध प्रणाली जागरूकता” (Management Systems Awareness) ब्लॉग पढ़ना चाहिए?

आपको क्यों “प्रबंध प्रणाली जागरूकता” (Management Systems Awareness) ब्लॉग पढ़ना चाहिए?

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आज लगभग प्रत्येक संगठन के सामने गुणवत्ता (Quality), पर्यावरण (Environment), कार्यस्थल सुरक्षा (Health and Safety), सूचना सुरक्षा (Information Security), मानव संसाधन (Human Resources), जोखिम प्रबंधन (Risk Management) और निरंतर सुधार (Continual Improvement) जैसी अनेक महत्वपूर्ण चुनौतियाँ हैं। इन चुनौतियों को व्यवस्थित ढंग से समझने और संबोधित करने में प्रबंध प्रणालियाँ (Management Systems) महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।


इसी उद्देश्य से “प्रबंध प्रणाली जागरूकता (Management Systems Awareness)” ब्लॉग प्रस्तुत किया गया है।


यह ब्लॉग प्रारंभ में मुख्यतः ISO 9001 गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली (Quality Management System) के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित था। समय के साथ इसका दायरा बढ़ाकर विभिन्न प्रबंध प्रणाली मानकों (Management System Standards) और उनसे जुड़े विषयों को शामिल किया गया है।


यह ब्लॉग क्यों पढ़ना चाहिए?


सरल भाषा में समझने के लिए – अंतरराष्ट्रीय मानकों की भाषा कई बार तकनीकी होती है। ब्लॉग में जटिल अवधारणाओं (Concepts) और अपेक्षाओं (Requirements) को सरल एवं व्यावहारिक ढंग से समझाने का प्रयास किया जाता है।


व्यावहारिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए – केवल किसी मानक की अपेक्षाओं को जानना पर्याप्त नहीं है। यह समझना भी आवश्यक है कि उनका संगठन में उपयोग कैसे किया जा सकता है और उनका मूल्यांकन (Evaluation) कैसे किया जा सकता है।


नए मानकों और विकास से परिचित रहने के लिए – ब्लॉग में ISO 9001 के साथ-साथ विभिन्न प्रबंध प्रणालियों से संबंधित नए मानकों और उनके विकास पर भी सामग्री प्रकाशित की जाती है। हाल में ISO 30201:2026 मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS), ISO 9000:2026 तथा ISO 19011:2026 जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई है।


ऑडिटिंग (Auditing) और सुधार (Improvement) को समझने के लिए – प्रभावी ऑडिट केवल गैर-अनुरूपता (Nonconformity) खोजने तक सीमित नहीं है। प्रक्रिया, प्रमाण (Evidence), जोखिम, प्रदर्शन और सुधार के दृष्टिकोण से सोचना भी आवश्यक है।


ज्ञान को लगातार विकसित करने के लिए – ब्लॉग पर वर्षों से प्रकाशित सामग्री में मूलभूत अवधारणाओं से लेकर वर्तमान और उभरते हुए विषयों तक की जानकारी उपलब्ध है। इसलिए यह विद्यार्थियों, प्रोफेशनल्स, ऑडिटर्स, कन्सल्टेंट्स, प्रबंधकों, प्रशिक्षकों और मानकों में रुचि रखने वाले अन्य पाठकों के लिए उपयोगी ज्ञान-स्रोत बन सकता है।


अपनी इच्छित भाषा में पढ़ने की सुविधा – ब्लॉग में Google Translate की सुविधा उपलब्ध है। इसलिए पाठक अपनी इच्छित भाषा का चयन करके ब्लॉग की सामग्री का भावानुवाद (translated meaning) पढ़ सकता है। इससे विभिन्न भाषाओं के पाठकों के लिए Quality और Management Systems से संबंधित ज्ञान को समझना अधिक सुविधाजनक हो जाता है।


ब्लॉग का उद्देश्य


इस ब्लॉग का उद्देश्य केवल प्रमाणन (Certification) प्राप्त करने की जानकारी देना नहीं है, बल्कि समझ (Understand) → लागू करना (Apply) → मूल्यांकन करना (Evaluate) → सुधार करना (Improve) की सोच विकसित करने में सहायता करना है।


यदि आप प्रबंध प्रणालियों, अंतरराष्ट्रीय मानकों और उनके व्यावहारिक उपयोग को सरल भाषा में समझना चाहते हैं, तो “प्रबंध प्रणाली जागरूकता” ब्लॉग आपके लिए उपयोगी हो सकता है।


पढ़िए, समझिए, विचार कीजिए और अपने अनुभव साझा कीजिए।


सादर,

केशव राम सिंघल 


बुधवार, 9 सितंबर 2026

ISO 9001 को लागू करने के लिए मार्गदर्शन दस्तावेज

ISO 9001 को लागू करने के लिए मार्गदर्शन दस्तावेज 

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ISO 9001 को लागू करने के लिए मार्गदर्शन देने वाला दस्तावेज ISO/TS 9002:2016 (क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम — ISO 9001 को लागू करने के लिए मार्गदर्शन) है। इसे ISO/DIS 9002 के तौर पर संशोधित किया जा रहा है और इसे 2016 के टेक्निकल स्पेसिफिकेशन की जगह एक पूरे  अंतरराष्ट्रीय मानक, ISO 9002 के तौर पर प्रकाशित किया जाएगा। यह ISO 9001 की अपेक्षाओं में कुछ नहीं जोड़ता, घटाता या बदलता है; यह सिर्फ़ मार्गदर्शन और उदाहरण देता है।


ISO 9001:2026 मानक 16 सितंबर 2026 को प्रकाशित होने वाला है। संशोधित ISO 9002 दस्तावेज 2027 की पहली तिमाही में आने की उम्मीद है ताकि यह नए ISO 9001 पाठ के साथ संरेखित (Align) हो सके।  


सादर, 

केशव राम सिंघल


मंगलवार, 8 सितंबर 2026

प्रत्यायन (Accreditation)

 प्रत्यायन (Accreditation)

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स्वीकरण - चित्र में प्रयुक्त Logo केवल पहचान एवं शैक्षिक जागरूकता के उद्देश्य से हैं। इससे किसी प्रकार के संबद्धता, प्रायोजन या समर्थन (Endorsement) का संकेत नहीं माना जाए।



प्रत्यायन (Accreditation) एक स्वतंत्र, तीसरे पक्ष (Third Party) की औपचारिक मान्यता (Formal Recognition) है, जिसके द्वारा यह पुष्टि की जाती है कि कोई अनुरूपता मूल्यांकन निकाय (Conformity Assessment Body—CAB) अपने निर्धारित कार्य को संबंधित मानकों के अनुसार सक्षम, निष्पक्ष और विश्वसनीय तरीके से करने में सक्षम है। प्रत्यायन विश्वास की वह नींव है, जो सुनिश्चित करती है कि जाँच करने वाली संस्थाएँ सक्षम, निष्पक्ष और भरोसेमंद हैं। सरल भाषा में कहें तो प्रमाणन (Certification) किसी संगठन की प्रबंधन प्रणाली या किसी निर्धारित अपेक्षाओं की अनुरूपता का मूल्यांकन है, जबकि प्रत्यायन उस अनुरूपता मूल्यांकन करने वाली संस्था की क्षमता और विश्वसनीयता का मूल्यांकन है। इसलिए इसे सरल रूप में “जाँच करने वालों की जाँच” भी कहा जा सकता है।


प्रत्यायन किसे दिया जाता है?


प्रत्यायन सामान्यतः अनुरूपता मूल्यांकन निकायों (Conformity Assessment Bodies—CABs) को दिया जाता है। इनमें परीक्षण एवं अंशशोधन प्रयोगशालाएँ (Testing and Calibration Laboratories), चिकित्सा प्रयोगशालाएँ, प्रमाणन निकाय (Certification Bodies), निरीक्षण निकाय (Inspection Bodies), Validation and Verification Bodies आदि शामिल हो सकते हैं। भारत में NABL (National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories) विभिन्न प्रकार की प्रयोगशालाओं और अन्य निर्धारित अनुरूपता मूल्यांकन निकायों (Conformity assessment bodies) को प्रत्यायन प्रदान करता है। NABL का प्रत्यायन तंत्र ISO/IEC 17011 की अपेक्षाओं के अनुरूप स्थापित है। इसी प्रकार NABCB (National Accreditation Board for Certification Bodies) प्रमाणन निकायों, निरीक्षण निकायों तथा अन्य निर्धारित अनुरूपता मूल्यांकन गतिविधियों (Conformity assessment activities) के लिए प्रत्यायन प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, NABCB निरीक्षण निकायों का प्रत्यायन ISO/IEC 17020 के अनुसार करता है।


यहाँ एक महत्वपूर्ण बात समझना आवश्यक है—ISO/IEC 17011 प्रत्यायन निकाय (Accreditation Body) के लिए अपेक्षाओं का मानक है, जबकि जिस CAB को प्रत्यायन दिया जाता है, उसके कार्य के अनुसार संबंधित मानक लागू होता है।


प्रमाणन (Certification) और प्रत्यायन (Accreditation) में अंतर


मान लीजिए कोई संगठन ISO 9001 मानक के अनुसार गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (QMS) लागू करता है। वह संगठन प्रमाणन निकाय (Certification body) से ऑडिट करवा कर ISO 9001 प्रमाणन लेता है, यह प्रमाणन (Certification) है। अब यदि वही प्रमाणन निकाय (Certification Body) स्वयं किसी मान्यता प्राप्त प्रत्यायन निकाय (Accreditation Body), जैसे NABCB, से यह मान्यता प्राप्त करती है कि वह संबंधित क्षेत्र में प्रमाणन गतिविधियाँ करने के लिए सक्षम, निष्पक्ष और निर्धारित अपेक्षाओं के अनुरूप है, तो यह प्रत्यायन (Accreditation) है। इसीलिए प्रमाणन और प्रत्यायन दो अलग-अलग स्तर की व्यवस्थाएँ हैं।


प्रमाणन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता


प्रमाणन की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता के पीछे प्रत्यायन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सामान्य व्यवस्था को इस प्रकार समझ सकते हैं।  एक संगठन प्रत्यातित प्रमाणन निकाय (Accredited Certification Body) से प्रमाणन लेती है और इस प्रमाणन निकाय ने राष्ट्रीय प्रत्यायन निकाय (National Accreditation Body) से प्रत्यायन ले रखा है और यह राष्ट्रीय प्रत्यायन निकाय Global ACI MRA का Signatory है तो प्रत्यातित प्रमाणन निकाय का प्रमाणन अन्य देशों में भी मान्य है। यहाँ यह बताना है कि 1 जनवरी 2026 से Global Accreditation Cooperation Incorporated (Global ACI) ने International Accreditation Forum (IAF) और International Laboratory Accreditation Cooperation (ILAC) के कार्यों को एकीकृत करते हुए अपना Multilateral Recognition Arrangement (MRA) शुरू किया है। इससे विभिन्न देशों में मान्यता प्राप्त Conformity assessment results और certificates की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता के लिए एकीकृत व्यवस्था विकसित हुई है।


प्रत्यायन से—


* नियामकों, ग्राहकों और खरीददारों को CAB की तकनीकी क्षमता और निष्पक्षता पर विश्वास मिलता है।

* परीक्षण रिपोर्ट, निरीक्षण रिपोर्ट और प्रमाणपत्रों की विश्वसनीयता बढ़ती है।

* गलत, कमजोर या अपर्याप्त अनुरूपता मूल्यांकन का जोखिम कम होता है।

* अंतरराष्ट्रीय व्यापार में तकनीकी बाधाओं को कम करने में सहायता मिलती है।

* विभिन्न देशों में मान्यता प्राप्त परीक्षण, निरीक्षण और प्रमाणन परिणामों की स्वीकार्यता को बढ़ावा मिलता है।

* सरकारों और नियामक संस्थाओं को विश्वसनीय conformity assessment infrastructure उपलब्ध होता है।


प्रत्यायन कोई स्थायी या बिना शर्त मिलने वाली मान्यता नहीं है। प्रत्यायन निकाय (Accreditation Body) द्वारा समय-समय पर निगरानी (Surveillance), पुनर्मूल्यांकन (Reassessment) और अन्य निर्धारित मूल्यांकन किए जाते हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्यायित संस्था लगातार संबंधित अपेक्षाओं को को पूरा कर रही है।


इसके अतिरिक्त, प्रत्यायन हमेशा एक निश्चित प्रत्यायन के दायरे (Scope of Accreditation) के लिए होता है। किसी संस्था को केवल उन्हीं मानकों, गतिविधियों, क्षेत्रों, परीक्षणों, निरीक्षणों या प्रमाणन योजनाओं के लिए प्रत्यायन प्राप्त होता है जिनका मूल्यांकन उसके निर्धारित दायरे (Scope) के अंतर्गत किया गया है।  


संक्षेप में हम कह सकते हैं कि प्रमाणन यह बताता है कि निर्धारित अपेक्षाओं की अनुरूपता का मूल्यांकन किया गया है, जबकि प्रत्यायन यह विश्वास प्रदान करता है कि वह मूल्यांकन करने वाली संस्था स्वयं निर्धारित अपेक्षाओं के अनुसार सक्षम और विश्वसनीय है। इस प्रकार प्रत्यायन गुणवत्ता अवसंरचना (Quality Infrastructure) की एक महत्वपूर्ण परत है, जो परीक्षण रिपोर्ट, निरीक्षण रिपोर्ट और प्रमाणपत्रों की विश्वसनीयता को मजबूत करती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी स्वीकार्यता में सहायता करती है।


किसी प्रबंधन प्रणाली के प्रमाणपत्र की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता के संदर्भ में यह देखना महत्वपूर्ण है कि Certificate जारी करने वाली प्रमाणन निकाय (Certification Body) प्रत्यायित है या नहीं, उसका प्रत्यायन दायरा (Accreditation scope) संबंधित प्रमाणन गतिविधि (Certification activity) को शामिल करता है या नहीं, और संबंधित प्रत्यायन निकाय (Accreditation Body) Global ACI की मान्यता व्यवस्था से जुड़ी है या नहीं।


सादर,

केशव राम सिंघल 


रविवार, 6 सितंबर 2026

संक्षिप्त आलेख - आंतरिक संपरीक्षण (Internal audit) में अपालना (Nonconformity)

 संक्षिप्त आलेख - आंतरिक संपरीक्षण (Internal audit) में अपालना (Nonconformity)

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आम तौर पर आंतरिक संपरीक्षण में संपरीक्षक (Auditor) रिपोर्ट करने के लिए अपालना देखता है, ताकि यह साबित हो सके कि उसने अपना काम अच्छे से किया है। लेकिन ऐसा करते समय, वह सबूत (Evidence) के बारे में भूल जाता है। अपालना (Nonconformity) वस्तुनिष्ठ सबूत (Objective evidence) पर आधारित होनी चाहिए। आतंरिक संपरीक्षक द्वारा पहचानी गई हर अपालना वस्तुनिष्ठ सबूत पर आधारित होनी चाहिए। यह एक खास तौर पर ज़रूरी ऑडिटिंग सिद्धांत है।


प्रायोगिक तौर पर, एक संपरीक्षक को "राय (Opinion)→ शक (Suspicion) → अपालना (Nonconformity)" के बजाय "अपेक्षा (Requirement) → सबूत (Evidence) → पता लगाना (Finding) → अपालना (Nonconformity)" तय करने में सक्षम होना चाहिए। 


संपरीक्षक को लागू संपरीक्षण मापदंड (Audit criteria) के हिसाब से संपरीक्षण सबूतों का वस्तुनिष्ठ तरीके से मूल्यांकन करना चाहिए। संपरीक्षण करना (Auditing) खुद संपरीक्षण सबूत पाने और वस्तुनिष्ठ तरीके से मूल्यांकन करने के लिए एक प्रणालीगत, स्वतन्त्र और प्रलेखित प्रक्रिया (Documented Process) है। अच्छी संपरीक्षा राय पर नहीं, वस्तुनिष्ठ सबूत पर आधारित होती है। 


सादर,

केशव राम सिंघल


मंगलवार, 1 सितंबर 2026

संक्षिप्त आलेख - आंतरिक संपरीक्षा (Internal Audit) में गैर-अनुरूपता (Nonconformities)

संक्षिप्त आलेख

आंतरिक संपरीक्षा (Internal Audit) में गैर-अनुरूपता (Nonconformities) 

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आंतरिक संपरीक्षा (Internal Audit) का असली मकसद यह पता लगाना है कि प्रबंधन प्रणाली (Management System – MS) निर्धारित (Planned) व्यवस्थाओं के अनुरूप है या नहीं; प्रबंधन प्रणाली मानक (जैसे ISO 9001, ISO 14001 आदि) की अपेक्षाओं के अनुरूप है या नहीं; संगठन की अपनी निर्धारित प्रबंधन प्रणाली अपेक्षाओं के अनुरूप है या नहीं; और इसे प्रभावी तरीके से लागू तथा बनाए रखा गया है या नहीं।


इसलिए, गैर-अनुरूपताओं (Nonconformities) की पहचान करना प्रबंधन प्रणाली के वास्तविक स्वास्थ्य और प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।


संपरीक्षा (Audit) के परिणामों (Results) से प्रबंधन को सुधार के लिए उचित और प्रभावी कदम उठाने में मदद मिलनी चाहिए। इसलिए, किसी गैर-अनुरूपता को केवल संपरीक्षा रिपोर्ट में दर्ज एक प्रविष्टि बनकर नहीं रह जाना चाहिए। उसे सुधार (Correction), सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) और अंततः प्रबंधन प्रणाली में सुधार का आधार बनना चाहिए।


सादर,

केशव राम सिंघल


बुधवार, 26 अगस्त 2026

संक्षिप्त आलेख - गैर-अनुरूपता (Nonconformity)

संक्षिप्त आलेख

गैर-अनुरूपता (Nonconformity)

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आइए समझते हैं कि गैर-अनुरूपता (Nonconformity) क्या है। कई ISO प्रबंधन प्रणाली मानक गैर-अनुरूपता को किसी अपेक्षा (Requirement) को पूरा न करना बताते हैं। गैर-अनुरूपता को अपेक्षा का अपालन भी कहा जा सकता है।


एक अपेक्षा अलग-अलग स्रोतों (Sources) से आ सकती है। यह निम्न में से एक या अधिक हो सकती है—


- लागू प्रबंधन प्रणाली मानक की कोई अपेक्षा;

- कोई कानूनी या नियामक अपेक्षा;

- ग्राहक की कोई अपेक्षा;

- किसी अनुबंध की कोई अपेक्षा;

- संगठन की कोई नीति;

- किसी प्रलेखित कार्यविधि या प्रक्रिया की अपेक्षा;

- संगठन द्वारा आंतरिक रूप से निर्धारित कोई उद्देश्य या प्रतिबद्धता;

- संगठन द्वारा निर्धारित कोई अन्य अपेक्षा; या

- प्रबंधन प्रणाली पर लागू होने वाली कोई दूसरी अपेक्षा।


इसलिए, गैर-अनुरूपता तब होती है जब जो अपेक्षित है और जो वास्तव में हो रहा है, उनके बीच अंतर (Gap) हो और उस अंतर को वस्तुनिष्ठ प्रमाण (Objective Evidence) से स्थापित किया जा सके।


आसान शब्दों में हम कह सकते हैं—


अपेक्षा + अपेक्षा पूरी न होने का वस्तुनिष्ठ प्रमाण = गैर-अनुरूपता


उदाहरण के लिए, यदि किसी संगठन की कार्यविधि के अनुसार माप उपकरण (Measuring Equipment) को निर्धारित अंतराल पर अंश-शोधित (Calibrated) किया जाना आवश्यक है और वस्तुनिष्ठ प्रमाण यह दर्शाता है कि आवश्यक अंश-शोधन नहीं किया गया, तो यह गैर-अनुरूपता (Nonconformity) है। यहाँ मुद्दा यह नहीं है कि संपरीक्षक (Auditor) व्यक्तिगत रूप से अंश-शोधन को आवश्यक मानता है या नहीं। मुद्दा यह है कि एक लागू अपेक्षा मौजूद है और वस्तुनिष्ठ प्रमाण यह दर्शाते हैं कि वह अपेक्षा पूरी नहीं हुई है।


सादर,

केशव राम सिंघल


संक्षिप्त आलेख - संपरीक्षण करना (Auditing)

संक्षिप्त आलेख

संपरीक्षण करना (Auditing)

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संपरीक्षण करना किसी भी प्रबंधन प्रणाली की अनुरूपता (Conformity), कार्यान्वयन (Implementation) और प्रभावशीलता (Effectiveness) का मूल्यांकन करने का एक आवश्यक तंत्र (Mechanism) है। प्रणाली किसी भी विषय (Discipline) से जुड़ी हो सकती है, जैसे गुणवत्ता, पर्यावरण, व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, सूचना सुरक्षा, मानव संसाधन, ऊर्जा या कोई अन्य संगठनात्मक विषय। संपरीक्षक (Auditor) वस्तुनिष्ठ प्रमाण (Objective Evidence) की तुलना निर्धारित संपरीक्षण मापदंड (Audit Criteria) से करता है। इस मूल्यांकन का परिणाम अनुरूपता, गैर-अनुरूपता (Nonconformity), जोखिम, सुधार के अवसर या अन्य निष्कर्ष (Findings) के रूप में सामने आ सकता है।


इनमें गैर-अनुरूपता (Nonconformity) का विशेष महत्व है।


गैर-अनुरूपता केवल ऐसी चीज नहीं है जो संपरीक्षक को पसंद न हो या जिसे बेहतर किया जा सकता था। यह ऐसा निष्कर्ष (Finding) है, जो वस्तुनिष्ठ प्रमाण से समर्थित हो और यह दर्शाता हो कि कोई निर्धारित अपेक्षा या आवश्यकता (Requirement) पूरी नहीं हुई है।


हालाँकि, गैर-अनुरूपता की पहचान करने का महत्व केवल असफलता को दर्ज करने तक सीमित नहीं है। अच्छी तरह समझी और विश्लेषित की गई गैर-अनुरूपता सुधार (Correction), सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action), जोखिम में कमी, पुनरावृत्ति की रोकथाम और निरंतर सुधार (Continual Improvement) के लिए एक महत्वपूर्ण निवेश (Input) बन सकती है।


सादर,

केशव राम सिंघल


शुक्रवार, 21 अगस्त 2026

कविता - मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) प्रणाली के सिद्धांत

 कविता -

मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) प्रणाली के सिद्धांत

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मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली का अंतरराष्ट्रीय मानक आया,

संगठन के सफल निष्पादन के लिए व्यवस्थित संदेश लाया।

आओ हम कार्यान्वित करें HRM के सभी मार्गदर्शक सिद्धांत,

ताकि प्रबंधन प्रणाली का कार्यान्वयन हो प्रभावी और उत्कृष्ट।


पारस्परिकता से आपसी सहयोग और विश्वास बढ़ाएँ,

संगठन और कार्यकर्ताओं के हितों में हम संतुलन बनाएँ।

मूल्य समझें हर कार्यकर्ता की कार्यक्षमता और योगदान का,

मूल्य सृजन करें ज्ञान, कौशल और नवाचार के माध्यम से।


अनुकूलनशीलता से परिस्थितियों में स्वयं को ढालें,

नई तकनीक और नई चुनौतियों को अवसरों में बदलें।

तालमेल से मिलकर संगठन की सुदृढ़ टीम बनाएँ,

सामूहिक प्रयासों से प्रदर्शन के बेहतर परिणाम पाएँ।


उत्तरदायित्व समझें और सभी अपना कर्तव्य निभाएँ,

कार्यकर्ताओं का विकास कर सही कार्य पर उन्हें लगाएँ।

सीखना और सम्मान की संगठनात्मक संस्कृति बनाएँ,

विश्वास, नैतिकता और निरंतर सुधार का वातावरण बनाएँ।


कार्य वातावरण सुरक्षित, स्वस्थ और सम्मानजनक बनाएँ,

कार्यकर्ताओं को बेहतर प्रदर्शन के अवसर दिलाएँ।

समाज के प्रति सभी अपनी जिम्मेदारी भी सजग निभाएँ,

पर्यावरण और सतत विकास में सकारात्मक योगदान दें।


संगठन में आठों सिद्धांतों को HRM में व्यवहार में लाएँ,

ISO 30201:2026 के अनुरूप प्रभावी HRMS बनाएँ।


सादर,

केशव राम सिंघल 

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ISO 30201:2026 के आठ मार्गदर्शक सिद्धांत (Guiding Principles)


(1) पारस्परिकता (Reciprocity)

(2) मूल्य (Value)

(3) अनुकूलनशीलता (Adaptability)

(4) तालमेल (Synergy)

(5) उत्तरदायित्व (Responsibility)

(6) संगठनात्मक संस्कृति (Organizational Culture)

(7) कार्य वातावरण (Work Environment)

(8) समाज (Society)