बुधवार, 30 सितंबर 2026

गुणवत्ता प्रबंधक: एक व्यक्ति, सात भूमिकाएँ, बड़ा प्रभाव

गुणवत्ता प्रबंधक: एक व्यक्ति, सात भूमिकाएँ, बड़ा प्रभाव

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सामान्यतया संगठनों में गुणवत्ता प्रबंधन के कार्यान्वयन और देखरेख के लिए गुणवत्ता विभाग का गठन कर गुणवत्ता प्रबंधक की नियुक्ति की जाती है। वर्तमान में गुणवत्ता प्रबंधक केवल गुणवत्ता की जाँच करने वाला अधिकारी नहीं रह गया। अब उसे कई भूमिकाएँ एक साथ निभानी पड़ती हैं — तभी संगठन पर उसकी भूमिकाओं का असली प्रभाव पड़ता है। इस सम्बन्ध केंद्रीय विचार यह हो सकता है - एक व्यक्ति, कई भूमिकाएँ और बड़ा प्रभाव। एक गुणवत्ता प्रबंधक कई भूमिकाएँ निभा कर अपेक्षाओं को परिणाम में बदलता है। हम नीचे गुणवत्ता प्रबंधक की सात भूमिकाओं की चर्चा कर रहे हैं। 

(1) रणनीतिकार (The Strategist) — रणनीतिकार वार्षिक लक्ष्य बनाकर नहीं रुकता। वह पूछता है कि अगले तीन वर्षों में बाजार, नियमन, प्रौद्योगिकी और प्रतिस्पर्धा गुणवत्ता पर क्या दबाव डालेंगे। सिर्फ आज नहीं, वह आगे देखता है। गुणवत्ता को व्यावसायिक रणनीति से जोड़ता है, जोखिम और अवसर पहचानता है। रणनीतिकार केवल वार्षिक गुणवत्ता लक्ष्य नहीं बनाता। वह पूछता है—अगले तीन वर्षों में बाजार, नियमन, प्रौद्योगिकी और प्रतिस्पर्धा गुणवत्ता पर क्या दबाव डालेंगे? वह गुणवत्ता नीति को व्यावसायिक रणनीति का अनुवाद बनाता है: लागत नेतृत्व हो या विभेदीकरण, गुणवत्ता का योगदान अलग होगा। जोखिम और अवसर को SWOT या PESTLE से जोड़कर प्राथमिकता देता है, ताकि गुणवत्ता बजट “खर्च” न लगे, “निवेश” लगे।

(2) जन नेता (The People Leader) — वह टीम बनाता है, प्रशिक्षित करता है, संस्कृति और सहयोग बढ़ाता है, क्योंकि गुणवत्ता लोग ही लाते हैं। गुणवत्ता लोगों के व्यवहार से जन्म लेती है, फॉर्म से नहीं। जन नेता निरीक्षकों की सेना नहीं चलाता; वह ऑपरेटर, अभियंता, विक्रेता और आपूर्तिकर्ता में स्वामित्व पैदा करता है। कोचिंग का अर्थ गलती पकड़ना नहीं, समस्या सुलझाने की क्षमता बढ़ाना है। वह पूछता है—कौन से व्यवहार दोहराए जाने चाहिए? कौन सी मौन सहमति गुणवत्ता को कमजोर करती है?

(3) व्यावसायिक भागीदार (The Business Partner) — वह गुणवत्ता को पैसा, संवृद्धि और लाभ से जोड़ता है। संचालन, वित्त और बाजार की भाषा बोलता है। कई संगठन गुणवत्ता को लागत-केंद्र मानते हैं। व्यावसायिक भागीदार इस धारणा को तोड़ता है। वह Scrap, Rework, Warranty, Expedite और Lost Sales को एक ही भाषा में प्रस्तुत करता है—रूपये और ग्राहक-विश्वास। वित्त से Cost of Poor Quality, संचालन से थ्रूपुट, विपणन से NPS/CSAT जोड़ता है। बैठक में “गैर-अनुरूपता” की जगह “ग्राहक खोने का जोखिम” बोलता है।

(4) डेटा-संचालित निर्णय निर्माता (The Data-Driven Decision Maker) — वह डेटा आधारित तथ्यों से फैसला लेता है, लक्षण नहीं जड़ देखता है, अनुमान को तथ्यों से चुनौती देता है। डेटा होना पर्याप्त नहीं; सही प्रश्न होना जरूरी है। यह भूमिका लक्षण (late delivery) और जड़ (अस्थिर प्रक्रिया, अस्पष्ट विनिर्देश, आपूर्तिकर्ता क्षमता) में फर्क करती है। नियंत्रण चार्ट, पारेतो, रिग्रेशन या सरल स्तरीकरण—उपकरण से अधिक महत्वपूर्ण है यह आदत कि धारणा को तथ्य से जाँचा जाए। वह पूछता है—क्या माप प्रणाली स्वयं विश्वसनीय है? क्या हम औसत देख रहे हैं या भिन्नता?

(5) ग्राहक अधिवक्ता (The Customer Advocate) — वह ग्राहक को केंद्र में रखता है। ग्राहक की आवाज (Voice of Customer) समझता है और फीडबैक को सुधार में बदलता है। ग्राहक अधिवक्ता केवल शिकायत बंद नहीं करता; वह पूछता है कि ग्राहक खरीदते समय, उपयोग करते समय और समस्या आने पर क्या अनुभव करता है। विनिर्देश पूरा होना न्यूनतम है; उपयोग में आसानी, स्थिरता और सेवा-प्रतिक्रिया मूल्य बनाती है। फीडबैक को डिज़ाइन, प्रक्रिया और आपूर्तिकर्ता तक लौटाना इस भूमिका का असली काम है। आंतरिक ग्राहक (अगली प्रक्रिया) को भूलना भी घातक है।

(6) जोखिम प्रबंधक (The Risk Manager) — समस्या आने से पहले रोकता है। FMEA जैसी टूल्स से जोखिम कम करता है और व्यावसायिक निरंतरता सुनिश्चित करता है। जोखिम प्रबंधक आग बुझाने वाला नहीं, आग लगने की संभावना घटाने वाला है। वह उत्पाद, प्रक्रिया, आपूर्तिकर्ता, साइबर/डेटा, नियामक और व्यावसायिक निरंतरता—सभी स्तरों पर सोचता है। FMEA, HAZOP या जोखिम रजिस्टर तभी काम करते हैं जब रेटिंग ईमानदार हो और कार्रवाई संसाधन मिले। नया उत्पाद, नया आपूर्तिकर्ता या प्रक्रिया परिवर्तन—यही वे क्षण हैं जब जोखिम सबसे सस्ता पकड़ा जाता है।

(7) परिवर्तन एजेंट (The Change Agent) — वह निरंतर सुधार चलाता है, संस्कृति बदलता है, परिवर्तन की अगुवाई करता है और चुनौती को अवसर में बदलता है। परिवर्तन एजेंट का काम नया सॉफ्टवेयर लगाना नहीं, नई आदतें टिकाना है। वह प्रतिरोध को दुश्मनी नहीं, जानकारी का अभाव मानता है। छोटे प्रयोग (PDCA), सफल कहानियाँ और मध्य-प्रबंधन की भागीदारी से गति बनती है। सुधार तभी जीवित रहता है जब वह दैनिक प्रबंधन में घुल जाए—अन्यथा अभियान खत्म होते ही पुरानी प्रक्रिया लौट आती है। चुनौती को “दोषी कौन” से हटाकर “प्रणाली क्या कहती है” पर लाता है।

मजबूत गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली, ज्यादा ग्राहक संतुष्टि, कम लागत, कम जोखिम, बेहतर संचालन और लंबी व्यावसायिक सफलता मिलती है। रणनीतिकार दिशा देता है; जन नेता लोगों को उस दिशा में सक्षम बनाता है; व्यावसायिक भागीदार संसाधन और प्राथमिकता दिलाता है; डेटा वाले निर्णय को पक्षपात से बचाते हैं; ग्राहक अधिवक्ता उद्देश्य याद दिलाता है; जोखिम प्रबंधक गति को सुरक्षित रखता है; परिवर्तन एजेंट नई अवस्था को स्थायी बनाता है। एक भूमिका कमजोर हुई कि बाकी प्रदर्शन घट जाता है। कुशल प्रबंधक सातों भूमिकाएँ एक साथ नहीं निभाता; वह स्थिति देखकर चुनता है कि आज रणनीति चाहिए, लोग चाहिए या जोखिम की रोकथाम। 

सार 

गुणवत्ता नेतृत्व (Quality leadership) = दिशा + लोग + व्यवसाय की भाषा + तथ्य + ग्राहक + पूर्वानुमानित जोखिम + टिकाऊ बदलाव।

निरीक्षण अंत है, शुरुआत नहीं। अपेक्षाओं को परिणाम में बदलने वाला प्रबंधक वह है जो एक साथ कई भूमिकाएँ सचेत रूप से निभाए—और जानता रहे कि इस समय कौन-सी भूमिका निभाना सबसे जरूरी है।


सादर, 

केशव राम सिंघल 


मंगलवार, 29 सितंबर 2026

ISO वार्षिक बैठक उद्घाटन समारोह

 ISO वार्षिक बैठक उद्घाटन समारोह 

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सोमवार 28 सितम्बर 2026 को पेरिस में ISO Annual Meeting 2026 का उद्घाटन समारोह आयोजित हुआ। वार्षिक बैठक की थीम रही — "Building trust in a changing world." मेजबान के रूप में फ्रांस का मानकीकरण संगठन AFNOR अपने शताब्दी वर्ष में कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। समारोह का रिप्ले ISO की साइट पर उपलब्ध है।

ISO वार्षिक बैठक उद्घाटन समारोह केवल औपचारिक स्वागत नहीं था। ISO के शब्दों में यह संरेखण, चिंतन और आगे देखने का क्षण था। सत्र की भाषा अंग्रेज़ी थी; अरबी, चीनी, फ्रेंच, रूसी और स्पेनिश में दुभाषिया व कैप्शन उपलब्ध थे। पत्रकार श्यूली घोष ने कार्यक्रम का संचालन किया। आधिकारिक वक्ता सूची में तीन प्रमुख भाषण हैं। सुबह की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सर्जियो मुजिका (ISO महासचिव) और ओलिविए पेरा (AFNOR के CEO / Director-General) पहले ही बोल चुके थे; शाम को मंच पर मुख्य रूप से अध्यक्ष-स्तरीय संदेश रहे।

ISO अध्यक्ष डॉ. खालिद सूफी ने वैश्विक मानक समुदाय का पेरिस में स्वागत किया और सप्ताह की थीम स्पष्ट की - विश्वास (Trust) अब स्वतः नहीं माना जाता — उसे बनाना, सिद्ध करना और समय के साथ बनाए रखना पड़ता है। उनके विचार का सार यह भी है कि विश्वास ISO की मुख्य पूंजी है और दुनिया को संगठन का यही योगदान है। AFNOR अध्यक्ष गाइ मॉगी ने मेजबान संस्था की ओर से स्वागत किया। उनका संदेश यह रहा कि जब देश (Countries) अपने ज्ञान और महत्वाकांक्षा को एक साझा मेज पर लाते हैं, तभी विश्वास बढ़ता है। फ्रांस की Minister Delegate for Francophonie, International Partnerships and French Nationals Abroad एलियोनोर कारोआ ने बहुपक्षीय सहयोग पर जोर दिया। उनका उद्धरण: “Multilateralism is more needed than ever.” फ्रेंच में उन्होंने कहा कि ISO के कुछ प्रतीकात्मक मानक वैश्विक चुनौतियों के उत्तर हैं, जो सभी से जुड़े हैं।

समारोह में नाट्य और नृत्य की कलात्मक प्रस्तुति “सीमाओं के पार संस्कृतियों के सहयोग का उत्सव” दिख रहा था। अनास्तासिया विलानोवा की कोरियोग्राफी और कलाकारों की प्रस्तुति शानदार थी। समकालीन नृत्य, बदलती दुनिया का शक्तिशाली उत्तर। इससे शाम शुरू हुई और Murmuration से समापन हुआ। 27 नर्तक एक लय में चले और दर्शकों को भी प्रदर्शन में शामिल किया गया, ताकि पूरा हाल एक इकाई की तरह हिले।

इस समारोह से पहले ISO/UNDP 53001 मानक का लॉन्च हो चुका था। AFNOR के लिए यह शताब्दी वर्ष का यादगार आयोजन रहा।


सादर, 

केशव राम सिंघल 


ISO/UNDP 53001:2026 मानक का प्रमोचन (Launch)

ISO/UNDP 53001:2026 मानक का प्रमोचन (Launch)

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28 सितंबर 2026 को पेरिस में शुरू हुई ISO वार्षिक बैठक के पहले दिन ISO/UNDP 53001:2026 का आधिकारिक प्रमोचन हुआ। यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के लिए दुनिया का पहला अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन प्रणाली मानक है। ISO Annual Meeting 2026 फ्रांस की राष्ट्रीय मानक संस्था AFNOR की मेजबानी में 28 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चल रही है। थीम है — Building trust in a changing world (बदलती दुनिया में विश्वास बनाना)।

मानक का प्रमोचन ISO और UNDP का संयुक्त कार्यक्रम था। सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में मानक पेश किया गया। मंच पर थे — डॉ. खालिद सूफी (ISO अध्यक्ष), सर्जियो मुजिका (ISO महासचिव), मार्कोस नेटो और ओलिविए पेरा (AFNOR CEO)। मुजिका ने कहा कि SDGs एक दशक से साझा वैश्विक दृष्टि दे रहे हैं; अब संगठन उस दृष्टि को ठोस कार्रवाई में बदलना चाहते हैं। संयुक्त राष्ट्र सहायक महासचिव और UNDP के Bureau for Policy and Programme Support के निदेशक मार्कोस नेटो ने कहा कि 2030 एजेंडा तभी आगे बढ़ेगा जब संगठन महत्वाकांक्षा को रोजमर्रा के निर्णय और शासन में शामिल करें।

मानक क्या है

ISO/UNDP 53001:2026 — Management systems for the United Nations Sustainable Development Goals (SDGs) — Requirements — अपेक्षा-आधारित प्रबंधन प्रणाली मानक है, जैसे ISO 9001 या ISO 14001। संगठन इसके अनुसार प्रणाली बना और लागू कर सकते हैं; तीसरे पक्ष से अनुपालन का प्रमाणन भी संभव हो सकेगा।

उद्देश्य

संगठन SDGs को केवल घोषणा या रिपोर्टिंग तक न छोड़ें, बल्कि उन्हें रणनीति, प्रबंध व्यवस्था और दैनिक संचालन में शामिल करें और प्रगति माप सकें। मानक हर प्रकार के संगठन के लिए है — कंपनी, सरकार, शिक्षण संस्थान, नागरिक समाज — आकार या क्षेत्र की परवाह किए बिना। संगठन अपने संदर्भ और हितधारकों के अनुसार सबसे प्रासंगिक SDGs पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

संगठन से अपेक्षाएँ 

- संगठनात्मक संदर्भ का विश्लेषण और हितधारकों से संवाद

- SDGs पर वास्तविक व संभावित सकारात्मक-नकारात्मक प्रभावों की पहचान, आकलन और प्राथमिकता

- सार्थक SDG उद्देश्य और लक्ष्य

- प्रभावों पर डेटा और प्रगति का मूल्यांकन

- लक्ष्यों के अंतर्संबंध, तालमेल और ट्रेड-ऑफ का प्रबंधन

- PDCA चक्र से निरंतर सुधार

मानक प्रत्येक SDG को अलग परियोजना नहीं मानता; एकीकृत नजरिया देता है। 2030 के बाद के वैश्विक लक्ष्यों के लिए भी इसे प्रासंगिक रखने की व्यवस्था है।

विकास

मानक विकास कार्य ISO/PC 343 (Sustainable development goals management) ने किया; सचिवालय Danish Standards के पास था। आधार UNDP के SDG Impact Standards for Enterprises थे। पहली बार मानक पर ISO/UNDP का दोहरा लोगो है। 2024 में दिशानिर्देश वाला ISO/UNDP PAS 53002 आया, उसके बाद पूर्ण अंतरराष्ट्रीय मानक ISO/UNDP 53001:2026। काम लगभग 2023 से चला। कार्यान्वयन मार्गदर्शन के लिए ISO/UNDP 53002 तैयार हो रहा है। मानक लगभग 36 पृष्ठ का है और ISO की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

ISO/UNDP 53001:2026 का प्रमोचन SDGs को घोषणा से निकालकर प्रबंधन प्रणाली का हिस्सा बनाने का प्रयास है, ताकि योगदान मापा जा सके, जवाबदेही दिखे और सुधार जारी रहे।

सादर,

केशव राम सिंघल


सोमवार, 28 सितंबर 2026

ISO 9001:2026 मानक मुख्य परिवर्तन - मानक संरेखण (Standard Alignment)

ISO 9001:2026 मानक मुख्य परिवर्तन  - मानक संरेखण (Standard Alignment)

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ISO 9001:2026 का एक मुख्य परिवर्तन विषयवस्तु का Annex SL और TMB Resolution 16/2025 के साथ संरेखण है। आधार ढाँचा ISO 9001:2015 जैसा ही है — दस खंड, प्रक्रिया दृष्टिकोण, PDCA और जोखिम-आधारित सोच। नई अपेक्षाएँ इसी ढाँचे में जोड़ी गई हैं।


TMB Resolution 16/2025, ISO Technical Management Board का नीति-स्पष्टीकरण है। यह तय करता है कि प्रबंधन प्रणाली मानकों (MSS) को Annex SL / Harmonized Structure (HS) से कितना बाँधकर रखा जाए। इसे 19–20 मार्च 2025 को साल्वाडोर (ब्राज़ील) में TMB की 92वीं बैठक में अपनाया गया। शीर्षक: Management of deviations on Management Systems Standards (MSS) – Policy clarification।


सरल अर्थ में कहें तो Annex SL सभी प्रबंधन प्रणाली मानकों के लिए साझा ढाँचा है — एक जैसी खंड संख्या, खंड शीर्षक, मूल पाठ और मूल परिभाषाएँ — ताकि ISO 9001, ISO 14001, ISO 45001 आदि को एक साथ लागू करना आसान रहे। TMB संकल्प 16/2025 कहता है - 


- खंड/उपखंड के शीर्षक नहीं बदले जा सकते; क्रम भी नहीं।

- HS की मूल शब्दावली और परिभाषाएँ ज्यों की त्यों रखनी हैं।

- अपवाद - “जोखिम” (risk) की प्रविष्टि TMB Resolution 33/2024 के अनुसार बदली जा सकती है।

- विषय-विशेष बातें अतिरिक्त नोट, अधीनस्थ परिभाषा या अधीनस्थ खंड से जोड़ी जा सकती हैं (Annex SL, Appendix 3)।

- शीर्षक और मूल परिभाषाओं के अतिरिक्त अन्य विचलन हो सकते हैं; उन्हें deviation report में दर्ज करना होगा। ISO/CS सलाह दे सकता है, अस्वीकार नहीं कर सकता; अंतिम निर्णय संबंधित समिति का है।

- परियोजना पंजीकरण के समय चालू HS संस्करण संशोधन और संशोधन-पत्र पर लागू रहेगा। नया संस्करण बनाते समय चालू HS पूरा लागू होगा।


मानक लेखकों के लिए ISO/JTCG मार्गदर्शिका - Understanding Annex SL and applying TMB resolution 16/2025 Link 


Global ACI दस्तावेज़ में “Alignment with Annex SL and TMB resolution 16/2025” का अर्थ यही है कि ISO 9001:2026 ने HS के खंड शीर्षक और मूल परिभाषाओं से जानबूझकर दूरी नहीं की। गुणवत्ता संस्कृति, नैतिक व्यवहार तथा जोखिम व अवसर का अलग उपचार इसी ढाँचे के भीतर जोड़े गए हैं।


यह TMB संकल्प प्रमाणित संगठनों के लिए नई अपेक्षा नहीं बनाता। ISO 9001:2026 में गुणवत्ता संस्कृति जैसी नई अपेक्षाएँ हैं, पर वे इसी दस-खंड ढाँचे में जोड़ी गई हैं। संगठनों के लिए व्यावहारिक संदेश यह है कि ISO 9001:2026 मानक का आधार ढाँचा ISO 9001:2015 जैसा रहेगा, इसलिए एकीकृत प्रबंधन प्रणाली का ढाँचा नहीं टूटेगा। 

 

सादर,

केशव राम सिंघल 


शब्दावली  

TMB = Technical Management Board

MSS = Management System Standard

HS = Harmonized Structure

JTCG = Joint Technical Coordination Group on MSS

ISO/CS = ISO Central Secretariat


नेशनल सेंटर फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट (NCQM) का वार्षिक दिवस समारोह

नेशनल सेंटर फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट (NCQM) का वार्षिक दिवस समारोह 

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नेशनल सेंटर फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट (NCQM) की वार्षिक सामान्य बैठक (AGM) 26 सितंबर 2026 को मुंबई में वार्षिक दिवस समारोह के साथ हुई। डॉ. संतोष बी. राणे, सरदार पटेल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, मुंबई के मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के हेड, फंक्शन में मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता थे। डॉ. राणे ने “Human-Robot Collaboration in Industry 5.0-Enabled Manufacturing” पर अपना व्याख्यान दिया।







इंडस्ट्री 4.0 से इंडस्ट्री 5.0 तक - डॉ. संतोष बी. राणे ने इंडस्ट्री 4.0 और इंडस्ट्री 5.0 के बीच का अंतर समझाया। जहाँ इंडस्ट्री 4.0 ऑटोमेशन, IoT, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्मार्ट मशीनों पर काफी जोर देता है, वहीं इंडस्ट्री 5.0 ह्यूमन-सेंट्रिसिटी, सस्टेनेबिलिटी और रेजिलिएंस को ज्यादा महत्व देता है।

इंसान + रोबोट = कोलेबोरेशन (Collaboration) - इंडस्ट्री 5.0 पर चर्चा करते हुए, डॉ. राणे ने एक ज़रूरी कॉन्सेप्ट पर ज़ोर दिया: इंसान + रोबोट = कोलेबोरेशन — कॉम्पिटिशन नहीं। इसका मकसद इंसानों को रोबोट से बदलना नहीं होना चाहिए, बल्कि रोबोट को इंसानों के साथ मिलकर काम करने लायक बनाना होना चाहिए। उन्होंने समझाया कि क्रिएटिविटी, जजमेंट, फ्लेक्सिबिलिटी और प्रॉब्लम-सॉल्विंग जैसी इंसानी काबिलियत को रोबोट की प्रिसिजन, स्ट्रेंथ, स्पीड और कंसिस्टेंसी जैसी काबिलियत के साथ जोड़ा जा सकता है। ऐसी एक-दूसरे को पूरा करने वाली काबिलियत मैन्युफैक्चरिंग में बेहतर नतीजे पाने में मदद कर सकती हैं।










कोलेबोरेटिव रोबोट – कोबोट्स - डॉ. राणे ने कोलेबोरेटिव रोबोट (कोबोट्स) पर भी चर्चा की। कोबोट्स को शेयर्ड वर्कस्पेस में इंसानी वर्कर्स के साथ सुरक्षित रूप से काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इनका इस्तेमाल असेंबली, इंस्पेक्शन और मटीरियल हैंडलिंग जैसे कई तरह के एप्लीकेशन के लिए किया जा सकता है।

AI और स्मार्ट टेक्नोलॉजी की भूमिका - उन्होंने इंसान-रोबोट कोलेबोरेशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, मशीन विज़न और सेंसर्स की भूमिका पर ज़ोर दिया। डॉ. राणे के अनुसार, भविष्य के रोबोट सिर्फ़ पहले से प्रोग्राम किए गए इंस्ट्रक्शन को फॉलो करने से कहीं आगे बढ़ेंगे। AI और दूसरी स्मार्ट टेक्नोलॉजी की मदद से, वे इंसानों के साथ काम करते हुए बदलते हालात के हिसाब से ज़्यादा ढल सकते हैं और ज़्यादा असरदार तरीके से रिस्पॉन्ड कर सकते हैं।







लोग, सेफ्टी, एथिक्स और भरोसा - इंडस्ट्री 5.0 सिर्फ़ टेक्नोलॉजी के बारे में नहीं है। लोग और उनकी काबिलियत इसे सफलतापूर्वक लागू करने के लिए ज़रूरी हैं। डॉ. राणे ने स्किल डेवलपमेंट, ट्रेनिंग, एम्प्लॉई की भलाई और चेंज मैनेजमेंट के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने ह्यूमन-रोबोट कोलेबोरेशन में सेफ्टी, एथिक्स और भरोसे पर भी चर्चा की। जब इंसान और रोबोट एक ही वर्कस्पेस में काम करते हैं, तो कोलिजन अवॉइडेंस, रिस्क असेसमेंट और फंक्शनल सेफ्टी जैसे पहलू खास तौर पर ज़रूरी हो जाते हैं। उन्होंने सही कहा: “भरोसा सुरक्षित, नैतिक और भरोसेमंद कोलेबोरेशन से कमाया जाता है।”

प्रोसेस और वर्कफ़्लो रीडिज़ाइन - डॉ. राणे ने एक और ज़रूरी बात बताई कि सिर्फ़ रोबोट इंस्टॉल करने से कोई ऑर्गनाइज़ेशन इंडस्ट्री 5.0 के लिए तैयार नहीं हो जाता। प्रोसेस और वर्कफ़्लो को रीडिज़ाइन करते समय इंसानों और रोबोट की काबिलियत और ज़िम्मेदारियों पर विचार करने की ज़रूरत है। मौजूदा प्रोसेस में सिर्फ़ टेक्नोलॉजी जोड़ने के बजाय, ऑर्गनाइज़ेशन को वर्कफ़्लो को फिर से डिज़ाइन करने की ज़रूरत हो सकती है ताकि इंसानों और मशीनों की एक-दूसरे को पूरा करने वाली क्षमताओं का अच्छे से इस्तेमाल किया जा सके।

भारत के लिए एक चुनौती - एक सवाल के जवाब में, डॉ. संतोष बी. राणे ने कहा कि भारत में बड़ी इंडस्ट्रीज़ ने इंडस्ट्री 4.0 को अपना लिया है, लेकिन इंडस्ट्री 4.0 से इंडस्ट्री 5.0 में जाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस बदलाव के लिए न सिर्फ़ टेक्नोलॉजी पर ध्यान देने की ज़रूरत है, बल्कि लोगों, स्किल्स, प्रोसेस, सुरक्षा और ऑर्गनाइज़ेशनल तैयारी पर भी ध्यान देने की ज़रूरत है।

खास बात

आसान शब्दों में, इंडस्ट्री 5.0 का मूल विचार “इंसानों के लिए टेक्नोलॉजी” के तौर पर बताया जा सकता है। यह इंटेलिजेंट मशीनों की क्षमताओं को इंसानी स्किल्स, क्रिएटिविटी और फ़ैसले के साथ मिलाकर ऐसी मैन्युफैक्चरिंग बनाने की कोशिश करता है जो ज़्यादा क्वालिटी-ओरिएंटेड, सुरक्षित, सस्टेनेबल और मज़बूत हो।

मुझे व्याख्यान खास तौर पर उपयोगी लगा क्योंकि इसने टेक्नोलॉजी (Technology), लोग (People), प्रोसेस (Process) और क्वालिटी (Quality) के चार ज़रूरी पहलुओं को एक साथ लाकर इंडस्ट्री 5.0 को समझने का मौका दिया। मुख्य अतिथि का स्वागत और परिचय NCQM के अध्यक्ष श्री संतोष खडगड़े ने किया। मैंने प्रोग्राम में ऑनलाइन हिस्सा लिया और मुझे डॉ. राणे का व्याख्यान सुनने का मौका मिला।


सादर,

केशव राम सिंघल


नेशनल सेंटर फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट (NCQM) के बारे में - जो रीडर्स नेशनल सेंटर फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट (NCQM) के बारे में और जानना चाहते हैं, वे इसकी ऑफिशियल वेबसाइट पर जा सकते हैं। ऑर्गनाइज़ेशन, इसकी गतिविधियों और सदस्य्ता के बारे में जानकारी वहाँ से मिल सकती है। Membership Brochure भी वेबसाइट पर उपलब्ध है।


गुरुवार, 24 सितंबर 2026

IAF और ILAC संगठनों का विलय

IAF और ILAC संगठनों का विलय 

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ISO 9001:2026 मानक के परिवर्तनकाल (transition) की जानकारी के लिए जब मैं International Accreditation Forum (IAF) की गाइडलाइंस खोज रहा था, तब पता चला कि 1 जनवरी 2026 से IAF और ILAC दोनों का विलय Global Accreditation Cooperation Incorporated (Global ACI) में हो चुका है। यह अचानक नहीं हुआ। इसकी योजना 2019 से चल रही थी।


IAF (स्थापना 1993) प्रमाणन निकायों (Certification bodies - CBs) —प्रबंधन प्रणाली (जैसे ISO 9001), उत्पाद, कार्मिक तथा वैलिडेशन/वेरिफिकेशन—के प्रत्यायन का वैश्विक मंच था। ILAC प्रयोगशालाओं, निरीक्षण निकायों, कैलिब्रेशन और संबंधित क्षेत्रों का मंच था। दोनों के अपने-अपने बहुपक्षीय मान्यता समझौते थे—IAF MLA और ILAC MRA।


दोनों संगठन अलग-अलग प्रशासनिक व्यवस्था, समितियाँ, सहकर्मी मूल्यांकन (peer evaluation) और नीतियाँ चला रहे थे। वैश्वीकरण और अनुरूपता आकलन के आपस में जुड़ने से यह दोहरी व्यवस्था अनावश्यक दोहराव और जटिलता पैदा कर रही थी। इसलिए विलय का निर्णय लिया गया, ताकि—


- एक ही अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्रणाली हो,

- एक सहकर्मी मूल्यांकन ढाँचा हो,

- नीतियों और प्रशासन में सामंजस्य हो,

- कार्य दक्षता बढ़े, और

- व्यापार, स्थिरता तथा तकनीकी विश्वास जैसे वैश्विक मुद्दों पर एक मजबूत आवाज़ स्थापित हो।


2019 में फ्रैंकफर्ट में दोनों संगठनों की 19वीं संयुक्त आम सभा (29 अक्टूबर 2019) में एकल अंतरराष्ट्रीय संगठन बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ। अक्टूबर 2024 में बर्लिन में संविधान मंजूर हुआ। 6 दिसंबर 2024 को न्यूज़ीलैंड में Incorporated Society के रूप में पंजीकृत हुआ। अक्टूबर 2025 में बैंकॉक की अंतिम बैठकों में नेतृत्व चुना गया। 1 जनवरी 2026 से Global ACI का पूर्ण संचालन शुरू हुआ और IAF व ILAC का संचालन बंद हो गया। 14 अप्रैल 2026 को “Global ACI” नाम, लोगो और वेबसाइट (Link) सार्वजनिक हुई।


अब IAF MLA और ILAC MRA एक ही Global ACI MRA में समाहित हो गए हैं। मौजूदा प्रत्यायित प्रमाणपत्र, रिपोर्ट और परिणाम वैध बने हुए हैं—कोई व्यवधान नहीं। पुराने IAF/ILAC चिह्न परिवर्तनकाल (transition) में इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जब तक नया चिह्न कानूनी रूप से उपलब्ध न हो। IAF और ILAC कानूनी रूप से कुछ समय और रहेंगे ताकि उनके चिह्नों की सुरक्षा हो सके; उसके बाद उन्हें बंद कर दिया जाएगा।


संक्षेप में, दो समानांतर वैश्विक व्यवस्थाओं को एक एकीकृत ढाँचे में लाने का फैसला था, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विश्वास सरल, सुसंगत और मजबूत हो। मौजूदा प्रमाणन धारकों के लिए व्यावहारिक असर लगभग शून्य है।


टिप्पणी - ISO 9001:2026 के परिवर्तनकाल संबंधी अनिवार्य दस्तावेज़ अब IAF के बजाय Global ACI जारी करता है (जैसे Global ACI-TECH-3-TR)। इसलिए भविष्य में ऐसी गाइडलाइंस Global ACI की वेबसाइट पर देखनी चाहिए।


सादर,  

केशव राम सिंघल 


ISO 9001:2026 परिवर्तनकाल (Transition)

ISO 9001:2026 परिवर्तनकाल (Transition)

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16 सितंबर 2026 को ISO ने आधिकारिक रूप से ISO 9001:2026 (छठा संस्करण) प्रकाशित किया। यह ISO 9001:2015 + संशोधन 1:2024 (जलवायु परिवर्तन) की जगह लेता है। संगठन जिसके पास प्रत्यायित प्रमाणपत्र (Accredited certificate) है, उसे 30 सितंबर 2029 तक संशोधित मानक में ट्रांज़िशन कर लेना चाहिए अर्थात ISO 9001:2026 मानक के अनुसार अनुपालन कर लेना चाहिए। परिवर्तनकाल समयसीमा ISO तय नहीं करता। यह Global Accreditation Cooperation Incorporated (Global ACI) तय करता है, जिसने 1 जनवरी 2026 से IAF और ILAC दोनों का स्थान लिया। Global ACI ने दस्तावेज़ "Transition Requirements for ISO 9001:2026 (Global ACI-TECH-3-TR 2029-09-30)" जारी किया है। गाइडलाइंस के अनुसार 31 मार्च 2028 के बाद कोई नया ISO 9001:2015 अनुपालन प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा सकेगा।


इस सन्दर्भ में निम्न तारीखें महत्वपूर्ण हैं - 

 

(1) 16 सितंबर 2026 - ISO 9001:2026 पब्लिश हुआ, जो ISO 9001:2015 की जगह लेगा जिसमें Amd 1:2024 भी शामिल है।

(2) 31 मार्च 2027 तक - प्रत्यायन निकायों (ABs) को मानक प्रकाशन के छह महीनों में तैयार हो जाना है। ABs को नए संस्करण पर पर्याप्त ज्ञान और जानकारी में सक्षम होना चाहिए और उन्हें अपने परिवर्तनकाल प्रक्रिया (Transition process) की घोषणा करनी चाहिए।

(3) 30 जून 2027 - प्रमाणन निकायों (CBs) को मानक प्रकाशन के नौ महीनों के अंतराल में अपने प्रत्यायन निकाय को परिवर्तनकाल घोषणा और सम्बंधित दस्तावेज जमा कराने हैं। इस अवधि में CBs के संपरीक्षक (Auditors) मानक के नए संस्करण पर प्रशिक्षित हो जाने चाहिए। 

(4) 30 सितंबर 2027 - प्रत्यायन निकायों को मानक प्रकाशन के बारह महीनों के अंतराल में प्रमाणन निकायों को प्रत्यायित करने के निर्णय लेने हैं। उसके बाद प्रत्यायित प्रमाणन निकाय ISO 9001:2026 मानक की अनुपालना का प्रमाणपत्र जारी कर सकेंगे। 30 सितंबर 2027 अंतिम सीमा है, जब तक प्रत्यायन निकायों को CB के प्रत्यायन पर निर्णय ले लेना है। कोई CB यदि उससे पहले प्रत्यायित हो जाता है, तो वह उस निर्णय के बाद ही 2026 प्रमाणपत्र जारी कर सकता है — 30 सितंबर 2027 का इंतज़ार अनिवार्य नहीं।

(5) 31 मार्च 2028 - मानक प्रकाशन के अठारह महीनों के अंतराल के बाद कोई नया ISO 9001:2015 मानक अनुपालना प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाएगा। शुरुआती प्रमाणन सिर्फ़ ISO 9001:2026 अनुपालना के लिए हो सकते हैं — इसलिए 2027 के आखिर में शुरू होने वाले स्टेज 1 और स्टेज 2 ऑडिट के लिए इस कट-ऑफ के हिसाब से प्लानिंग करने की ज़रूरत है, 2029 के हिसाब से नहीं।

(6) 30 सितंबर 2029 - अंतिम तारीख - मानक प्रकाशन के छत्तीस महीनों में सभी प्रमाणन 2026 संस्करण में परिवर्तित हो जाने चाहिए। इस तारीख के बाद ISO 9001 :2015 मानक अनुपालना प्रमाणपत्र वैध नहीं रहेंगे।  


क्या कोई संगठन अभी भी ISO 9001:2015 अनुपालना का प्रमाणपत्र ले सकता है? 31 मार्च 2028 तक, हाँ — और अगर संपरीक्षण (Audit) पहले से चल रहा है तो यह अभी भी सही हो सकता है। 31 मार्च 2028 के बाद, शुरुआती सर्टिफ़िकेशन सिर्फ़ ISO 9001:2026 के लिए हो सकते हैं।


16 सितंबर 2026 के बाद प्रमाणन निकाय (CBs) तुरंत ISO 9001:2026 अनुपालना प्रमाणपत्र नहीं दे सकते। वे तभी जारी कर सकते हैं जब उनका स्वयं का प्रत्यायन नए संस्करण पर स्थानांतरित हो जाए — सामान्यतः 2027 के मध्य से।  


सादर, 

केशव राम सिंघल 


शब्दावली -

प्रत्यायन निकाय = Accreditation Body (AB)

प्रमाणन निकाय = Certification Body (CB/CAB)

संपरीक्षक = Auditor 


बुधवार, 23 सितंबर 2026

प्रक्रिया दृष्टिकोण (Process approach)

प्रक्रिया दृष्टिकोण (Process approach)

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ISO 9001:2026 QMS मानक का पैरा 0.3.1 कहता है कि एक संगठन को अपनी गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (QMS) को जुडी हुई प्रक्रियाओं के एक सेट के तौर पर चलाना चाहिए, न कि अलग-अलग विभाग के तौर पर। इसका उद्देश्य ग्राहक की अपेक्षाओं (Requirements) को पूरा करना और ग्राहक संतुष्टि (Customer satisfaction) को बेहतर बनाना है। ऐसा करने के लिए ज़रूरी अपेक्षाएँ मानक के खंड (Clause) 4.4 में बताई गई हैं।


सरल भाषा में हम कह सकते हैं कि एक प्रक्रिया विभाग नहीं होती। यह गतिविधियों का ऐसा सेट है जो आगत (Input) को निर्गम (Output) में बदलता है। एक प्रक्रिया का निर्गम प्रायः अगली प्रक्रिया का आगत होता है। यदि संगठन केवल “खरीद” और “उत्पादन” को अलग-अलग कार्य मानकर चलाता है, तो गड़बड़ी दोनों के जोड़ पर छिप जाती है। प्रक्रिया दृष्टिकोण उन्हीं जोड़ों का प्रबंधन करता है।


यह निर्धारित करने के लिए कि प्रक्रिया उपयुक्त, पर्याप्त और प्रभावी है या नहीं। प्रक्रिया को उपयुक्त, पर्याप्त और प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए मानक चार प्रमुख विचारों को जोड़ता है—

1. प्रक्रिया को पहचानें और उनकी परस्पर क्रिया का प्रबंधन करें ताकि नियोजित (Planned) परिणाम गुणवत्ता नीति (Quality policy) और रणनीति (Strategy) से मेल खाएँ।

2. PDCA साइकिल (प्लान–डू–चेक–एक्ट) का इस्तेमाल करके पूरी प्रणाली को एक साथ चलाएँ।

3. अनचाहे परिणामों को रोकने के लिए जोखिम-आधारित दृष्टिकोण का इस्तेमाल करें।

4. इच्छित परिणाम पाने के लिए अवसर-आधारित सोच का उपयोग करें। 2026 संस्करण में इसे जोखिम-आधारित सोच के समानांतर, अधिक स्पष्ट रूप से कहा गया है।


अगर इसे सही तरीके से लागू किया जाए, तो यह अपेक्षाओं को लगातार पूरा करता है, हर प्रक्रिया को मूल्य, जोखिम और अवसरों के हिसाब से देखता है, प्रक्रिया का प्रभावी निष्पादन देता है, और आकड़ों (Data) के आधार पर सुधार करता है।


ISO 9001:2026 मानक में दिया गया चित्र संख्या 1 किसी प्रक्रिया के स्रोत (Sources), आगत (Inputs), गतिविधियों (Activities), निर्गत/आउटपुट (Outputs), आउटपुट प्राप्त करने वालों (Recipients) तथा प्रक्रिया और उससे जुड़े जोखिमों के आधार पर निर्धारित निगरानी एवं मापन जाँच-बिंदुओं (Monitoring and measurement check points) को दर्शाता है।



हम आपको दो जुड़े हुए उदाहरण देते हैं।


उदाहरण 1 — उत्पादन 









उत्पादन (Production) सिर्फ़ एक मशीन लाइन नहीं है। इसके स्रोत (Source) हैं खरीद (Purchasing), डिज़ाइन और ग्राहक का ऑर्डर। आगत (Input) हैं सामग्री (Material), ड्रॉइंग और ऊर्जा। गतिविधियाँ हैं सेटअप, विनिर्माण (Manufacturing) और पैकिंग। निर्गम (आउटपुट) हैं तैयार उत्पाद और अभिलेख (Records), जो वेयरहाउस या ग्राहक को मिलते हैं।


जाँच बिंदु इस प्रक्रिया के जोखिम से मिलते हैं - 


1. आवक जाँच — लाइन में गलत सामग्री जाने से रोकें।

2. प्रक्रिया दौरान जाँच — पैरामीटर से अंतर को जल्दी पकड़ें।

3. अंतिम जाँच / टेस्ट — कस्टमर तक नॉन-कन्फ़र्मिंग प्रोडक्ट को पहुँचने से रोकें।


यह असल में प्रक्रिया सोच (Process approach) है - प्रक्रिया + नियंत्रण + जोखिम। खरीद का आउटपुट उत्पादन का निवेश बन जाता है — दोनों प्रक्रियाएँ मिलकर एक प्रणाली हैं।


उदाहरण 2 — खरीद (Purchasing) 









खरीदारी का मतलब केवल खरीद आदेश जारी करना नहीं है। इसके स्रोत उत्पादन मांग, डिज़ाइन विनिर्देश और अनुमोदित-आपूर्तिकर्ता सूची हैं। गतिविधियाँ प्रदाता का चयन करना, ऑर्डर जारी करना और सामग्री प्राप्त करना हैं। आउटपुट खरीदे गए उत्पाद और प्रमाणपत्र हैं, जो गोदाम और उत्पादन द्वारा प्राप्त किए जाते हैं।


जाँच बिंदु अलग-अलग हैं क्योंकि जोखिम अलग-अलग हैं - 


1. प्रदाता का मूल्यांकन/पुनर्मूल्यांकन - अनुपयुक्त आपूर्तिकर्ता से बचें।

2. क्रय जानकारी/अनुबंध की समीक्षा - ऑर्डर पर गलत विवरण से बचें।

3. जो प्राप्त हुआ उसका सत्यापन - गैर-अनुरूप उत्पाद को उत्पादन में प्रवेश करना बंद करें।


सिद्ध आपूर्तिकर्ता की कम-जोखिम वाली कैटलॉग वस्तु के लिए केवल दस्तावेज़ और मात्रा की जाँच पर्याप्त हो सकती है। सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण कस्टम पार्ट के लिए स्रोत निरीक्षण के साथ आवक आयामी और सामग्री जाँच भी चाहिए। नियम यही है: जाँच बिंदु प्रक्रिया के चरणों और संबंधित जोखिम के अनुसार बदलते हैं।


किसी प्रक्रिया को डिज़ाइन और समीक्षा करते समय पूछे जाने वाले दस प्रश्न


एक प्रक्रिया को केवल परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए; यह निर्धारित करने के लिए समय-समय पर इसकी समीक्षा भी की जानी चाहिए कि क्या यह उपयुक्त, पर्याप्त और प्रभावी है। किसी नई प्रक्रिया को डिज़ाइन करते समय या किसी मौजूदा प्रक्रिया की समीक्षा करते समय निम्नलिखित प्रश्न किसी संगठन की मदद कर सकते हैं - 


(1) प्रक्रिया का उद्देश्य क्या है?

(2) प्रक्रिया के इनपुट और इच्छित आउटपुट क्या हैं?

(3) इनपुट कौन देता है और आउटपुट कौन प्राप्त करता है?

(4) इच्छित आउटपुट प्राप्त करने के लिए किन गतिविधियों और अनुक्रम की आवश्यकता है?

(5) किन संसाधनों, ज्ञान और बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है?

(6) इस प्रक्रिया से जुड़े जोखिम और अवसर क्या हैं?

(7) पहचाने गए जोखिमों और अवसरों को संबोधित करने के लिए किन नियंत्रणों की आवश्यकता है?

(8) प्रक्रिया के प्रदर्शन और प्रभावशीलता की निगरानी और माप कैसे की जाएगी?

(9) यह प्रक्रिया क्यूएमएस के भीतर अन्य प्रक्रियाओं के साथ कैसे इंटरैक्ट करती है?

(10) बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए किन परिवर्तनों या सुधारों की आवश्यकता है?


ये प्रश्न यह सुनिश्चित करने में मदद करते हैं कि एक प्रक्रिया को उसके इच्छित परिणामों को प्राप्त करने और गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (QMS) की प्रभावशीलता में योगदान करने के लिए डिज़ाइन, नियंत्रण, निगरानी और लगातार सुधार किया जाता है।


संक्षेप में, प्रक्रिया दृष्टिकोण कार्य को प्रक्रियाओं की एक शृंखला मानकर चलाने को कहता है। ऊपर के दो उदाहरण वही शृंखला दिखाते हैं: खरीद का आउटपुट उत्पादन का इनपुट बनता है। नियंत्रण वहीं लगाए जाते हैं जहाँ उस प्रक्रिया का जोखिम वास्तव में होता है।


सादर, 

केशव राम सिंघल 


बुधवार, 16 सितंबर 2026

ISO 9001:2026 का प्रमोचन (Launch) — प्रमुख बातें

ISO 9001:2026 का प्रमोचन (Launch) — प्रमुख बातें

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आज, 16 सितंबर 2026 को ISO 9001:2026 आधिकारिक रूप से प्रकाशित हो गया है। यह ISO 9001 का छठा संस्करण (Sixth edition) है और ISO की आधिकारिक साइट पर इसे Published, Edition 6, 2026 के रूप में प्रदर्शित किया गया है। आज आयोजित ऑनलाइन ISO आयोजन (Event) में चार वक्ताओं ने ISO 9001:2026 के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। आयोजन का संक्षिप्त विवरण निम्न है—


1. Katie Clift — संदर्भ और संवाद


Katie Clift, ISO की Head of Public Relations, ने ISO 9001 को व्यापक संदर्भ में प्रस्तुत किया। उनकी भूमिका केवल Technical changes बताने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह समझाना भी था कि आज के बदलते Business environment में ISO 9001 क्यों प्रासंगिक है। उनकी बातचीत में निम्न प्रमुख Themes दिखाई दिए—


* बदलती ग्राहक अपेक्षाएँ (Customer expectations)

* डिजिटल परिवर्तन (Digital transformation) और कृत्रिम बुद्धिमता (AI)

* आपूर्ति श्रृंखला जटिलता (Supply-chain complexity)

* लचीलापन (Resilience) 

* नवाचार (Innovation)

* संगठनात्मक निष्पादन (Organizational performance)

* और सबसे महत्वपूर्ण — विश्वास (Trust)


2. Sam Somerville — Revision के पीछे की सोच


Sam Somerville, ISO/TC 176/SC 2 की Chair और ISO 9001 Revision project से जुड़ी प्रमुख व्यक्ति तथा Convenor, ने संशोधन (Revision) के तकनीकी (Technical) और व्यवहारिक (Practical) पक्ष पर प्रकाश डाला। उनके संदेश का सार यह था कि ISO 9001:2026 का उद्देश्य ISO 9001 को पूरी तरह बदल देना नहीं, बल्कि उसे वर्तमान और भविष्य की संगठनात्मक वास्तविकताएँ (Organizational realities) के लिए अधिक स्पष्ट और उपयोगी बनाना है। इसलिए ISO 9001:2015 का मूल QMS ढाँचा (Framework) समाप्त नहीं होता। ग्राहक केंद्रित (Customer focus), प्रक्रिया सोच (Process approach), नेतृत्व (Leadership), निष्पादन मूल्यांकन (Performance evaluation) और लगातार सुधार (Continual improvement) जैसे मूलभूत सिद्धांत (Principles) बने रहते हैं। साथ ही, 2026 संस्करण में विशेष रूप से निम्न क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है—


* अपेक्षाओं (Requirements) की भाषा और स्पष्टता (Clarity) में सुधार

* नेतृत्व (Leadership) और गुणवत्ता संस्कृति (Quality culture) पर अधिक महत्त्व 

* जोखिमों और अवसरों को अधिक स्पष्ट रूप से संबोधित करना

* परिवर्तन प्रबंधन

* संगठनात्मक ज्ञान  

* जलवायु परिवर्तन विचारों (Climate-change considerations) की स्पष्टता

* अन्य ISO प्रबंधन-प्रणाली मानकों के साथ बेहतर संरेखण (Alignment)


इस प्रकार संशोधन (Revision) को केवल खण्डों (Clauses) में परिवर्तन के रूप में नहीं, बल्कि QMS को अधिक उपयुक्त (Relevant) और प्रभावी (Effective) बनाने के प्रयास के रूप में देखना उपयोगी होगा।


3. Isabela Santos — व्यवहारिक/व्यावसायिक परिपेक्ष्य (Practical/Business perspective)


Isabela Santos ने ISO 9001:2026 को व्यवहारिक और व्यावसायिक परिपेक्ष्य  से देखते हुए चर्चा की कि संशोधित मानक लोगों, Projects और संगठनात्मक निष्पादन (Organizational performance) को किस प्रकार सपोर्ट कर सकता है। यह पहलू विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि ISO 9001 को केवल “अनुपालन दस्तावेज" (Compliance document) के रूप में देखने के बजाय एक ऐसे प्रबंधन ढाँचे (Management framework) के रूप में समझने की आवश्यकता है जो लोगों (People) → प्रक्रियाओं (Processes) → निष्पादन (Performance) → सुधार (Improvement) → व्यावसायिक परिणामों (Business outcomes) को आपस में जोड़ता है। इस दृष्टिकोण से QMS केवल प्रमाणन (Certification) प्राप्त करने या बनाए रखने का साधन नहीं रहता, बल्कि संगठन के बेहतर संचालन और परिणामों में योगदान देने वाला प्रबंधन ढाँचा बन सकता है।


4. Sergio Mujica — ISO का व्यापक संदेश


Sergio Mujica, ISO Secretary-General, ने ISO 9001 की वैश्विक भूमिका और उसके भविष्य के महत्व पर बात की। उनके अनुसार आज ISO 9001 से एक मिलियन से अधिक संगठन जुड़े हुए हैं और यह 189 देशों में उपयोग किया जाता है। इसलिए ISO 9001:2026 संशोधन को केवल एक तकनीकी संशोधन के रूप में नहीं समझना चाहिए। इसका व्यापक उद्देश्य गुणवत्ता को संगठनात्मक निष्पादन (Organizational performance), विश्वास (Trust) और सतत विकास (Sustainable growth) से जोड़ना है।


प्रतिक्रियाएँ


प्रमोचन से पहले ISO के LinkedIn announcement पर गुणवत्ता पेशेवरों (Quality professionals) की प्रतिक्रियाएँ विविध रहीं। कुछ लोगों ने इसे लंबे समय से प्रतीक्षित अपडेट बताया और जलवायु परिवर्तन (Climate change), आपूर्ति-श्रृंखला लचीलापन (Supply-chain resilience) तथा डिजिटल परिवर्तन (Digital transformation) जैसे विषयों की ओर ध्यान आकर्षित किया। कुछ प्रतिक्रियाओं में यह विचार भी सामने आया कि परिपक्व ISO 9001:2015 QMS वाले संगठनों के लिए परिवर्तन बहुत बड़ी क्रांति (Revolution) नहीं है। इस संशोधन को कुछ लोगों ने क्रमिक विकास, क्रान्ति नहीं" (Evolution, not revolution) के रूप में वर्णित किया है। दूसरी ओर, कुछ पेशेवरों (Professionals) ने यह प्रश्न भी उठाया कि क्या संशोधित मानक वास्तव में आख़िरी उपयोगकर्ताओं (End users) के लिए पर्याप्त सरल और सहज होगा। इन प्रतिक्रियाओं से यह संकेत मिलता है कि ISO 9001:2026 को लेकर उत्सुकता के साथ-साथ इसके व्यावहारिक कार्यान्वयन (Practical implementation) को लेकर स्वाभाविक प्रश्न भी हैं।


मेरी प्रतिक्रिया


मेरे विचार में ISO 9001:2026 को समझने का सबसे अच्छा तरीका नए मानक (New standard) से अधिक नए महत्त्व (New emphasis) को समझना है। ISO 9001:2026 का महत्व केवल यह जानने में नहीं है कि कौन-सा खंड (Clause) बदला है, बल्कि यह समझने में है कि QMS वास्तव में संगठन (Organization) को बेहतर निर्णय लेने, जोखिमों और अवसरों को समझने, परिवर्तनों को नियंत्रित करने, गुणवत्ता संस्कृति (Quality culture) विकसित करने और बेहतर निष्पादन (Performance) प्राप्त करने में कैसे मदद करता है? यही वह स्थान है जहाँ ISO 9001 जागरूकता की वर्षों से चली आ रही दृष्टि (Approach) विशेष रूप से उपयुक्त (Relevant) दिखाई देती है।


मुझे तीन महत्वपूर्ण प्रसंग दिखाई देते हैं —


1. अनुपालन से प्रभावशीलता की ओर - केवल प्रमाणपत्र (Certificate) बनाए रखना पर्याप्त नहीं है; QMS को संगठन के वास्तविक काम में मूल्य (Value) पैदा करना चाहिए।

2. दस्तावेज (Documentation) से संगठनात्मक सोच (Organizational Thinking) की ओर - ISO 9001:2026 को केवल दस्तावेज (Documents) बदलने का अभ्यास (Exercise) बना देना इसके उद्देश्य को छोटा कर देगा। महत्वपूर्ण यह है कि QMS की सोच संगठन के वास्तविक कार्यों और निर्णयों में दिखाई दे।

3. गुणवत्ता विभाग से गुणवत्ता संस्कृति की ओर - गुणवत्ता केवल गुणवत्ता प्रबंधक या गुणवत्ता विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। नेतृत्व (Leadership), लोगों (People), प्रक्रियाओं (Processes) और निर्णय लेने (Decision-making) —सभी में गुणवत्ता सोच (Quality thinking) दिखाई देनी चाहिए।


जलवायु परिवर्तन (Climate Change) — एक विशेष पहलू


एक विशेष बात यह है कि ISO 9001:2026 में जलवायु परिवर्तन को अलग से कोई नया पर्यावरणीय प्रबंध प्रणाली (Environmental Management System) विषय बनाने के बजाय संगठनात्मक प्रसंग और हितधारकों (Organizational context and Interested parties) के संदर्भ में QMS से जोड़ा गया है। यह 2024 के ISO 9001:2015/Amd 1:2024 Amendment की दिशा का ही आगे का विकास है। इसलिए संगठनों के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न केवल यह नहीं है कि क्या हमने जलवायु परिवर्तन (Climate change) को अपने QMS दस्तावेज में लिख दिया है? बल्कि यह है कि “क्या जलवायु परिवर्तन हमारे संगठन के प्रसंग, हितधारकों, जोखिमों, अवसरों या QMS के इच्छित परिणामों (Intended results) को प्रभावित करता है?” यदि प्रभावित करता है, तो उसे QMS में उचित रूप से संबोधित किया जाना चाहिए।


एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर 


आज की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि ISO 9001:2026 अब केवल FDIS या Proposed revision नहीं रहा—यह आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय मानक (International Standard) बन चुका है। ISO के आधिकारिक दस्तावेज में इसकी प्रकाशन तिथि 16 सितम्बर 2026 दी गई है। अब अगला महत्वपूर्ण चरण संगठनों, सलाहकारों, ऑडिटरों, प्रमाणन निकायों और गुणवत्ता पेशेवरों (Organizations, Consultants, Auditors, Certification Bodies and Quality professionals) के लिए ISO 9001:2026 को समझना, उसके परिवर्तनों का विश्लेषण करना और यह देखना है कि उन्हें प्रभावी रूप से QMS में कैसे लागू किया जाए।


ISO 9001:2026 का वास्तविक मूल्य केवल संशोधित अपेक्षाओं (Revised requirements) को समझने में नहीं, बल्कि उन अपेक्षाओं के माध्यम से बेहतर गुणवत्ता, बेहतर निष्पादन और बेहतर संगठनात्मक परिणाम प्राप्त करने में है।


सादर,

केशव राम सिंघल


सोमवार, 14 सितंबर 2026

प्रबंधन प्रणाली संपरीक्षण (Auditing) के सिद्धांत

प्रबंधन प्रणाली संपरीक्षण (Auditing) के सिद्धांत

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किसी भी प्रबंधन प्रणाली (Management System) को लागू करने और उसे बनाए रखने में संपरीक्षण (Auditing) एक महत्वपूर्ण गतिविधि है। यह कई सिद्धांतों पर आधारित है, जो संपरीक्षण को विश्वसनीय और प्रभावी बनाने तथा संगठन को सुधार के अवसर पहचानने में मदद करते हैं। ये सिद्धांत इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे यह सुनिश्चित करने में मदद करते हैं कि संपरीक्षण (Audit) के निष्कर्ष और परिणाम प्रासंगिक, विश्वसनीय और उपयुक्त ऑडिट साक्ष्यों पर आधारित हों। संगठन (Organization) और संपरीक्षक (Auditor) इन सिद्धांतों का उपयोग प्रबंधन प्रणाली संपरीक्षण की प्रभावशीलता और मूल्य को बढ़ाने के लिए कर सकते हैं।


ISO 19011:2026 प्रबंधन प्रणाली संपरीक्षण के सात सिद्धांतों की पहचान करता है, जिनसे प्रत्येक संपरीक्षक को परिचित होना चाहिए। आइए, इन सिद्धांतों पर एक-एक करके चर्चा करते हैं।


(1) सत्यनिष्ठा (Integrity)


सत्यनिष्ठा व्यावसायिकता (Professionalism) की नींव है। एक संपरीक्षक (ऑडिटर) से अपेक्षा की जाती है कि वह संपरीक्षण की गतिविधियों को नैतिकता, ईमानदारी और ज़िम्मेदारी के साथ करे। एक ऑडिटर को ऑडिट तभी करना चाहिए जब वह ऐसा करने के लिए सक्षम हो और उसे निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए। ऑडिटर को निष्पक्ष और पूर्वाग्रह से मुक्त रहना चाहिए तथा ऐसी स्थितियों से बचना चाहिए जिनसे उसकी सत्यनिष्ठा से समझौता हो सकता हो।


उदाहरण - मान लीजिए कि एक ऑडिटर को किसी ऐसी प्रक्रिया में गैर-अनुरूपता (Nonconformity) मिलती है जिसे एक वरिष्ठ प्रबंधक संचालित करता है और वह प्रबंधक ऑडिटर का करीबी पेशेवर परिचित है। ऑडिटर को व्यक्तिगत संबंध के कारण गैर-अनुरूपता को नज़रअंदाज़ या कम करके आँकने के बजाय, उसे निष्पक्ष रूप से रिपोर्ट करना चाहिए।


(2) निष्पक्ष प्रस्तुति (Fair presentation)


निष्पक्ष प्रस्तुति से तात्पर्य ऑडिटर की इस ज़िम्मेदारी से है कि वह ऑडिट के दौरान देखी गई बातों को सच्चाई, सटीकता और निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करे। ऑडिट के निष्कर्षों और रिपोर्ट में ऑडिट के दौरान प्राप्त जानकारी और साक्ष्यों को इस प्रकार प्रस्तुत किया जाना चाहिए कि कोई भ्रामक निष्कर्ष न निकले।


उदाहरण - एक ऑडिट के दौरान ऑडिटर पाता है कि जाँचे गए दस रिकॉर्ड में से तीन एक निर्धारित अपेक्षा (Requirement) को पूरा नहीं करते हैं। ऑडिटर को इस स्थिति की सही रिपोर्ट करनी चाहिए तथा जाँचे गए सैंपल और प्राप्त ऑडिट साक्ष्यों का स्पष्ट उल्लेख करना चाहिए। उसे इस आधार पर यह नहीं कहना चाहिए कि संगठन के सभी रिकॉर्ड अपेक्षाओं को पूरा नहीं करते।


(3) उचित पेशेवर सावधानी (Due professional care)


उचित पेशेवर सावधानी का अर्थ है ऑडिटर की यह ज़िम्मेदारी कि वह ऑडिट का कार्य लगन, योग्यता और पेशेवर निर्णय (Professional judgement) के साथ करे। ऑडिटर को उचित सावधानी बरतनी चाहिए और ऑडिट के उद्देश्य, परिस्थितियों तथा उपलब्ध जानकारी को ध्यान में रखते हुए सोच-समझकर, संतुलित और जानकारी पर आधारित निर्णय लेने चाहिए।


उदाहरण - एक रिमोट ऑडिट के दौरान ऑडिटर स्क्रीन पर कोई दस्तावेज़ स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता है। ऐसी स्थिति में अनुमान के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय, ऑडिटर ऑडिटी से दस्तावेज़ दोबारा साझा करने या उसकी स्पष्ट प्रतिलिपि और अन्य प्रासंगिक साक्ष्य उपलब्ध कराने के लिए कहता है। पर्याप्त और उपयुक्त साक्ष्य प्राप्त करने के बाद ही ऑडिटर ऑडिट निष्कर्ष निकालता है।


(4) गोपनीयता (Confidentiality)


गोपनीयता का अर्थ है ऑडिट के दौरान प्राप्त जानकारी की सुरक्षा करना। ऑडिटर को ऑडिट के दौरान अनुबंध (Contract), वित्तीय आँकड़े (Financial Data), उत्पाद डिज़ाइन, व्यावसायिक रणनीति (Business Strategy) और तकनीकी दस्तावेज़ीकरण (Technical Documentation) जैसी संवेदनशील जानकारी तक पहुँच मिल सकती है। ऑडिटर को ऐसी जानकारी का उपयोग ज़िम्मेदारी से करना चाहिए और इसे अनधिकृत पक्षों के साथ साझा नहीं करना चाहिए।


(5) स्वतंत्रता (Independence)


ऑडिट में निष्पक्षता और वस्तुनिष्ठता (Objectivity) के लिए स्वतंत्रता (Independence) एक महत्वपूर्ण आधार है। जहाँ तक संभव हो, ऑडिटर को ऑडिट की जा रही गतिविधियों से स्वतंत्र रहना चाहिए और हितों के ऐसे टकराव (Conflict of Interest) से बचना चाहिए जो उसके निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं।


उदाहरण - खरीद (Purchasing) के लिए ज़िम्मेदार कर्मचारी को उसी खरीद प्रक्रिया का ऑडिट नहीं करना चाहिए जिसमें वह सीधे तौर पर शामिल है। एक स्वतंत्र ऑडिटर, जिसकी उस प्रक्रिया के लिए कोई प्रत्यक्ष ज़िम्मेदारी नहीं है, उस प्रक्रिया का ऑडिट अधिक वस्तुनिष्ठ तरीके से कर सकता है।


(6) साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण (Evidence-based approach)


ऑडिट के निष्कर्ष सत्यापन योग्य ऑडिट साक्ष्यों (Verifiable audit evidence) पर आधारित होने चाहिए। साक्षात्कार (Interview), अवलोकन (Observation), दस्तावेज़ीकृत जानकारी (Documented Information) और सैंपलिंग (Sampling) के माध्यम से एकत्र किए गए साक्ष्य इतने पर्याप्त और उपयुक्त होने चाहिए कि वे ऑडिट निष्कर्षों और परिणामों को समर्थन दे सकें।


उदाहरण - यदि कोई ऑडिटर यह निष्कर्ष निकालता है कि कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण नहीं मिल रहा है, तो इस निष्कर्ष को प्रशिक्षण रिकॉर्ड, कर्मचारियों के साक्षात्कार और संगठन की प्रशिक्षण अपेक्षाओं जैसे साक्ष्यों से समर्थित होना चाहिए। ऑडिटर को केवल अनुमान या किसी एक कर्मचारी के बयान के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।


(7) जोखिम-आधारित दृष्टिकोण (Risk-based approach)


ऑडिटर को ऑडिट की योजना बनाते समय और ऑडिट करते समय संगठन की गतिविधियों से जुड़े जोखिमों और अवसरों पर विचार करना चाहिए। ऑडिटर को उन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देना चाहिए जो संगठन के लिए अधिक महत्वपूर्ण हैं या जिनमें जोखिम का स्तर अधिक है, जैसे महत्वपूर्ण प्रक्रियाएँ, नियामक अपेक्षाएँ (Regulatory Requirements), महत्वपूर्ण परिवर्तन (Significant Changes) और आउटसोर्स की गई गतिविधियाँ।


उदाहरण - एक विनिर्माण संगठन (Manufacturing Organization) में ऑडिटर किसी महत्वपूर्ण उत्पादन प्रक्रिया पर अधिक ध्यान दे सकता है, जहाँ उपकरण की विफलता (Equipment Failure) उत्पाद की गुणवत्ता और ग्राहक को समय पर आपूर्ति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है। ऑडिटर किसी ऐसी आउटसोर्स की गई प्रक्रिया पर लागू नियंत्रणों की भी जाँच कर सकता है, जिसका संगठन के उत्पाद या सेवा की अनुरूपता (Conformity) पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।


सार


ऊपर वर्णित सात सिद्धांत प्रभावी प्रबंधन प्रणाली ऑडिटिंग की नींव बनाते हैं। ये ऑडिटर को ऑडिट को सुसंगत, निष्पक्ष और पेशेवर तरीके से करने में मदद करते हैं तथा ऑडिट परिणामों की विश्वसनीयता और मूल्य में योगदान देते हैं।


हर ऑडिटर को इन सिद्धांतों को समझना चाहिए और पूरी ऑडिट प्रक्रिया के दौरान उन्हें व्यवहार में लागू करना चाहिए।


सादर,

केशव राम सिंघल