शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

ISO 9001:2026 QMS में गुणवत्ता संस्कृति और नैतिक व्यवहार की अपेक्षाएँ

ISO 9001:2026 QMS में गुणवत्ता संस्कृति और नैतिक व्यवहार की अपेक्षाएँ   

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ISO 9001:2026 मानक का अध्ययन करते समय मैंने देखा कि इसमें 'गुणवत्ता संस्कृति और नैतिक व्यवहार' (Quality Culture and Ethical Behaviour) पदबंध का कई बार प्रयोग किया गया है। आइए, इन अवधारणाओं के महत्व तथा गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (QMS) की अपेक्षाओं पर इनके प्रभाव को समझने का प्रयास करें।

1. ISO 9001:2026 में संदर्भ

Foreword (प्रस्तावना) 

मानक की प्रस्तावना में गुणवत्ता संस्कृति और नैतिक व्यवहार को शामिल करना संशोधित मानक के प्रमुख परिवर्तनों में से एक बताया गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि अब इन पहलुओं को मानक की अपेक्षाओं में स्थान दिया गया है, विशेष रूप से नेतृत्व, जागरूकता तथा प्रक्रियाओं के संचालन के लिए वातावरण के संदर्भ में।

Clause 5.1.1 — नेतृत्व एवं प्रतिबद्धता (Leadership and commitment)

उपखंड 5.1.1 (i) के अनुसार, शीर्ष प्रबंधन को गुणवत्ता संस्कृति और नैतिक व्यवहार को बढ़ावा देकर QMS के प्रति अपना नेतृत्व एवं प्रतिबद्धता प्रदर्शित करनी चाहिए।

इस उपखंड के अंत में दिया गया Note 2 स्पष्ट करता है कि किसी संगठन की गुणवत्ता संस्कृति और नैतिक व्यवहार उसके साझा मूल्यों, दृष्टिकोणों, कार्य-पद्धतियों और कार्यों में परिलक्षित होते हैं।

Clause 7.1.4 — प्रक्रियाओं के संचालन के लिए वातावरण (Environment for the operation of processes)

इस उपखंड के अनुसार, संगठन को अपनी प्रक्रियाओं के संचालन तथा उत्पादों और सेवाओं की अनुरूपता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक वातावरण का निर्धारण, व्यवस्था और रखरखाव करना चाहिए।

इस उपखंड में दिया गया नोट स्पष्ट करता है कि उपयुक्त वातावरण में मानवीय और भौतिक कारकों का संयोजन शामिल हो सकता है। इसमें यह भी बताया गया है कि कुछ कारक संगठन की गुणवत्ता संस्कृति और नैतिक व्यवहार से प्रभावित हो सकते हैं।

Clause 7.3 — जागरूकता (Awareness)

उपखंड 7.3 (e) के अनुसार, संगठन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके नियंत्रण में कार्य करने वाले व्यक्ति संगठन की गुणवत्ता संस्कृति और नैतिक व्यवहार के प्रति जागरूक हों।

Annex A — अपेक्षाओं के संबंध में मार्गदर्शन (Guidance on the requirements) 

मानक के Annex A में भी 'गुणवत्ता संस्कृति और नैतिक व्यवहार' पदबंध का कई बार प्रयोग किया गया है। हालांकि, Annex A एक सूचनात्मक (Informative) भाग है, जो अपेक्षाओं को समझने में मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह QMS के लिए कोई अतिरिक्त अपेक्षा निर्धारित नहीं करता।

2. ऑडिट के दृष्टिकोण से निहितार्थ

यदि हम इन प्रावधानों को ऑडिट के दृष्टिकोण से देखें, तो दो स्पष्ट अपेक्षाएँ विशेष ध्यान देने योग्य हैं।

(1) नेतृत्व (Leadership): क्या शीर्ष प्रबंधन ने संगठन में गुणवत्ता संस्कृति और नैतिक व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए अपना नेतृत्व प्रदर्शित किया है?

(2) जागरूकता (Awareness): क्या संगठन के नियंत्रण में कार्य करने वाले व्यक्ति संगठन की गुणवत्ता संस्कृति और नैतिक व्यवहार के प्रति जागरूक हैं?

ऑडिटर इन अपेक्षाओं के कार्यान्वयन की पुष्टि के लिए वस्तुनिष्ठ साक्ष्य (Objective Evidence) की तलाश कर सकते हैं। ऐसे साक्ष्यों में प्रबंधन के निर्णय, संचार, जागरूकता कार्यक्रम, कार्यस्थल की कार्य-पद्धतियाँ तथा संगठन के नेतृत्व और कर्मचारियों का व्यवहार शामिल हो सकते हैं।

ऑडिटर को केवल यह सत्यापित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए कि कोई नीति या वक्तव्य मौजूद है। ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि संगठन गुणवत्ता संस्कृति और नैतिक व्यवहार को किस प्रकार बढ़ावा देता है तथा संबंधित व्यक्ति इनके प्रति कितने जागरूक हैं।

इसके अतिरिक्त, Clause 7.1.4 संगठनात्मक संस्कृति, नैतिक व्यवहार और प्रक्रियाओं के संचालन के वातावरण के बीच संबंध स्थापित करता है। इसलिए, ऑडिट को केवल नेतृत्व और जागरूकता तक सीमित रखना उचित नहीं होगा।

3. Clause 9 — निष्पादन मूल्यांकन (Performance evaluation) में क्या कोई कमी (Gap) है?

एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मानक के Clause 9 में गुणवत्ता संस्कृति और नैतिक व्यवहार की प्रभावशीलता की निगरानी, मापन या मूल्यांकन करने की कोई स्पष्ट अपेक्षा नहीं दी गई है।

Clause 9 में निगरानी, मापन, विश्लेषण, मूल्यांकन, आंतरिक ऑडिट और प्रबंधन समीक्षा के माध्यम से निष्पादन मूल्यांकन का प्रावधान है। हालांकि, यह विशेष रूप से यह अपेक्षा नहीं करता कि संगठन गुणवत्ता संस्कृति और नैतिक व्यवहार को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन भी करे।

इससे एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है: यदि मानक गुणवत्ता संस्कृति और नैतिक व्यवहार को बढ़ावा देने के प्रयासों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने की स्पष्ट अपेक्षा निर्धारित नहीं करता, तो संगठन यह कैसे सुनिश्चित करेगा कि उसके प्रयास अपेक्षित परिणाम दे रहे हैं? उदाहरण के लिए, कोई संगठन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर सकता है और नैतिक व्यवहार से संबंधित अपेक्षाओं का संचार कर सकता है। लेकिन केवल इन गतिविधियों का आयोजन हो जाना इस बात का पर्याप्त प्रमाण नहीं है कि संगठन में अपेक्षित गुणवत्ता संस्कृति विकसित हो गई है अथवा नैतिक व्यवहार का निरंतर पालन किया जा रहा है।

यदि मानक में गुणवत्ता संस्कृति और नैतिक व्यवहार की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने की स्पष्ट अपेक्षा होती, तो इससे संगठनों को यह आकलन करने के लिए प्रोत्साहन मिलता कि उनके प्रयास अपेक्षित परिणाम प्राप्त कर रहे हैं या नहीं।

4. निष्कर्ष

ISO 9001:2026 ने नेतृत्व, जागरूकता तथा प्रक्रियाओं के संचालन के वातावरण से संबंधित अपेक्षाओं में गुणवत्ता संस्कृति और नैतिक व्यवहार को स्पष्ट रूप से शामिल करके इन पहलुओं को अधिक महत्व दिया है। फिर भी, Clause 9 में इनकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने की स्पष्ट अपेक्षा का अभाव मानक की एक सीमा माना जा सकता है। मेरे विचार में, गुणवत्ता संस्कृति और नैतिक व्यवहार को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है, लेकिन इन प्रयासों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना भी उतना ही आवश्यक है। ऐसा मूल्यांकन संगठनों को कमियों की पहचान करने, उपयुक्त कार्रवाई करने तथा अपनी QMS को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायता कर सकता है।

आपकी क्या राय है? क्या ISO 9001 में यह स्पष्ट अपेक्षा होनी चाहिए कि संगठन निष्पादन मूल्यांकन के अंतर्गत अपनी गुणवत्ता संस्कृति और नैतिक व्यवहार की प्रभावशीलता का भी मूल्यांकन करें?

सादर,  

केशव राम सिंघल 


आंतरिक ऑडिट और प्रबंधन समीक्षा

आंतरिक ऑडिट और प्रबंधन समीक्षा 

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बहुत से संगठनों में आंतरिक ऑडिट (Internal Audit) या प्रबंधन समीक्षा (Management Review) प्रबंधन प्रणाली के प्रमाणन ऑडिटरों के आने से कुछ समय पहले ही आयोजित की जाती है, ताकि वे आंतरिक ऑडिट या प्रबंधन समीक्षा न करने की गैर-अनुरूपता (Nonconformity) से बच सकें। यह एक आम और गलत प्रथा है।


कई संगठन आंतरिक ऑडिट और प्रबंधन समीक्षा को केवल “प्रमाणन ऑडिटर के आने से पहले की औपचारिकता” मानकर करते हैं, ताकि गैर-अनुरूपता न आए। इससे वे मानक की न्यूनतम अपेक्षा तो पूरी कर लेते हैं, लेकिन प्रबंधन प्रणाली (Management System) का असली उद्देश्य खो जाता है।


मानक क्या कहता है?


ISO 9001 (और अन्य प्रबंधन प्रणाली मानक जैसे ISO 14001, ISO 45001, ISO 27001 तथा ISO 30201) में आंतरिक ऑडिट (क्लॉज 9.2) और प्रबंधन समीक्षा (क्लॉज 9.3) “Planned intervals” (नियोजित अंतरालों) पर करने की अपेक्षा वर्णित है। इनमें कोई निश्चित आवृत्ति (Frequency) नहीं दी गई है, लेकिन:


- ऑडिट कार्यक्रम प्रक्रिया की महत्वपूर्णता, पिछले ऑडिट परिणामों और परिवर्तनों के आधार पर बनाया जाना चाहिए।

- पूरी प्रणाली को एक चक्र (आमतौर पर एक वर्ष) में कवर करना होता है।

- प्रबंधन समीक्षा में आवश्यक निवेश (inputs) जैसे ऑडिट परिणाम, ग्राहक संतुष्टि, प्रक्रिया प्रदर्शन, जोखिम और अवसर आदि पर चर्चा होनी चाहिए तथा ठोस निर्णय और कार्यवाही की जानी चाहिए।


केवल बाहरी ऑडिट से कुछ सप्ताह पहले आंतरिक ऑडिट और प्रबंधन समीक्षा एक बार कर लेने से “Planned intervals” की भावना और प्रभावी प्रणाली की अपेक्षा पूरी नहीं होती।


ऐसा करने के नुकसान


- निरंतर सुधार का अवसर खो जाता है: समस्याएँ साल भर बनी रहती हैं और केवल बाहरी ऑडिट के समय ही सामने आती हैं।

- समय की कमी: गैर-अनुरूपताओं को बंद करने, मूल कारण विश्लेषण (Root Cause Analysis) और प्रभावशीलता सत्यापन (Effectiveness Verification) के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता।

- सतही ऑडिट: जल्दबाजी में किए गए ऑडिट और समीक्षा अक्सर औपचारिक होते हैं तथा वास्तविक मूल्य नहीं देते।

- प्रमाणन निकाय की दृष्टि: अनुभवी ऑडिटर आसानी से पहचान लेते हैं कि सारी गतिविधियाँ केवल उनके आने के ठीक पहले हुई हैं। इससे प्रणाली की परिपक्वता पर प्रश्न उठते हैं।


बेहतर तरीका


संगठन के हित में बेहतर है कि:


(1) वर्ष भर चलने वाला ऑडिट कार्यक्रम बनाएँ। महत्वपूर्ण या उच्च जोखिम वाली प्रक्रियाओं का अधिक बार ऑडिट करें।

(2) प्रबंधन समीक्षा को तिमाही या अर्धवार्षिक रखें (या कम से कम वार्षिक, परंतु बीच-बीच में प्रभावी निगरानी के साथ)। इसे केवल डेटा संग्रहण न बनाएँ — निर्णय और संसाधन आवंटन (Resource Allocation) के साथ करें।

(3) बाहरी ऑडिट से 6–8 सप्ताह पहले अंतिम आंतरिक ऑडिट पूरा कर लें, ताकि पाई गई गैर-अनुरूपताएँ समय पर बंद हो सकें।

(4) आंतरिक ऑडिट को “गैर-अनुरूपता खोजने का उपकरण” नहीं, बल्कि “सुधार और प्रभावशीलता जाँचने का उपकरण” मानें।


सार 


आंतरिक ऑडिट और प्रबंधन समीक्षा प्रमाणन के लिए नहीं, बल्कि संगठन के निरंतर सुधार और जोखिम प्रबंधन के लिए हैं। इन्हें नियमित और ईमानदारी से करने से ही वास्तविक लाभ मिलता है — बेहतर प्रक्रियाएँ, कम समस्याएँ और मजबूत प्रणाली।संगठन को उपर्युक्त स्थिति से बचना चाहिए तथा समय-समय पर आंतरिक ऑडिट और प्रबंधन समीक्षा करते रहना चाहिए। यह संगठन के हित में है।


सादर,

केशव राम सिंघल  


रविवार, 25 अक्टूबर 2026

QMS के प्रभावी कार्यान्वयन में नेतृत्व का महत्व

QMS के प्रभावी कार्यान्वयन में नेतृत्व का महत्व

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एक प्रसिद्ध कथन के अनुसार, यदि कुत्तों की सेना का नेतृत्व शेर करे, तो कुत्ते भी शेरों की तरह लड़कर जीत हासिल कर सकते हैं। इसके विपरीत, यदि शेरों की सेना का नेतृत्व कुत्ता करे, तो शेर भी कुत्तों की तरह लड़कर हार सकते हैं। इस कथन का मूल संदेश यह है कि नेतृत्व की गुणवत्ता किसी टीम के प्रदर्शन, प्रेरणा और सफलता को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती है।

ISO 9001:2026 QMS के संदर्भ में नेतृत्व का महत्व

गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (Quality Management System — QMS) के प्रभावी कार्यान्वयन में नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शीर्ष प्रबंधन (Top Management) की प्रतिबद्धता यह निर्धारित करती है कि संगठन में गुणवत्ता को कितनी गंभीरता से लिया जाता है और गुणवत्ता प्रबंधन के सिद्धांतों को संगठन की गतिविधियों में कितनी प्रभावशीलता से एकीकृत किया जाता है। QMS की सफलता केवल दस्तावेज तैयार करने, प्रक्रियाएँ निर्धारित करने और ऑडिट कराने से सुनिश्चित नहीं होती। इसके लिए प्रभावी नेतृत्व, कर्मचारियों की भागीदारी, पर्याप्त संसाधन तथा ग्राहक अपेक्षाओं को पूरा करने और प्रदर्शन में निरंतर सुधार करने की प्रतिबद्धता आवश्यक है।

ISO 9001:2026 का खंड 5.1.1 बताता है कि शीर्ष प्रबंधन को QMS के प्रति नेतृत्व और प्रतिबद्धता किस प्रकार प्रदर्शित करनी चाहिए। इन अपेक्षाओं को निम्नलिखित स्पष्टीकरणों और व्यावहारिक उदाहरणों से समझा जा सकता है।

1. गुणवत्ता नीति और गुणवत्ता उद्देश्यों की स्थापना

शीर्ष प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गुणवत्ता नीति और गुणवत्ता उद्देश्य निर्धारित किए जाएँ तथा वे संगठन की रणनीतिक दिशा के अनुरूप हों।

उदाहरण: एक विनिर्माण संगठन अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने उत्पादों की आपूर्ति बढ़ाना चाहता है। शीर्ष प्रबंधन ऐसी गुणवत्ता नीति निर्धारित करता है जिसमें ग्राहक संतुष्टि, उत्पाद अनुरूपता और निरंतर सुधार पर बल दिया जाता है। साथ ही, संगठन एक वर्ष के भीतर उत्पाद अस्वीकृति की दर को 4% से घटाकर 2% करने का मापनीय गुणवत्ता उद्देश्य निर्धारित करता है।

इस प्रकार संगठन की व्यावसायिक रणनीति और गुणवत्ता उद्देश्यों के बीच सामंजस्य स्थापित होता है।

2. QMS अपेक्षाओं का व्यावसायिक प्रक्रियाओं में एकीकरण

QMS की अपेक्षाओं को संगठन की नियमित व्यावसायिक प्रक्रियाओं में एकीकृत किया जाना चाहिए। उन्हें केवल प्रमाणन प्राप्त करने या बनाए रखने के उद्देश्य से की जाने वाली अलग-अलग गतिविधियों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

उदाहरण: एक कंपनी उत्पादन के उपयुक्त चरणों पर गुणवत्ता जाँच की व्यवस्था करती है, क्रय प्रक्रिया में आपूर्तिकर्ताओं का मूल्यांकन शामिल करती है तथा उत्पाद विकास और सेवा सुधार में ग्राहक प्रतिक्रिया का उपयोग करती है। इस प्रकार गुणवत्ता प्रबंधन दैनिक व्यावसायिक गतिविधियों का अभिन्न अंग बन जाता है।

3. आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना

शीर्ष प्रबंधन को QMS के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए। इन संसाधनों में सक्षम कर्मचारी, उपयुक्त उपकरण, उचित आधारभूत संरचना, आवश्यक तकनीक और वित्तीय संसाधन शामिल हो सकते हैं।

उदाहरण: यदि पुराने परीक्षण उपकरणों के कारण उत्पादों में दोष उत्पन्न हो रहे हैं, तो प्रबंधन उपयुक्त उपकरणों की व्यवस्था करता है और यह सुनिश्चित करता है कि कर्मचारी उनका उपयोग करने में सक्षम हों। इससे उत्पाद अनुरूपता की अधिक विश्वसनीय जाँच संभव होती है।

4. प्रभावी गुणवत्ता प्रबंधन के महत्व का संप्रेषण

कर्मचारियों को यह समझना आवश्यक है कि प्रभावी गुणवत्ता प्रबंधन क्यों महत्वपूर्ण है और QMS की अपेक्षाओं का पालन न करने के क्या परिणाम हो सकते हैं।

उदाहरण: कर्मचारियों की बैठक में प्रबंधन समझाता है कि गलत मापन से दोषपूर्ण उत्पाद बन सकते हैं, ग्राहक शिकायतें बढ़ सकती हैं, दोबारा काम करना पड़ सकता है और वित्तीय हानि हो सकती है। कर्मचारियों को निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करने तथा गुणवत्ता संबंधी समस्याओं की समय पर सूचना देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इससे कर्मचारियों को समझ आता है कि गुणवत्ता केवल गुणवत्ता नियंत्रण विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे संगठन की साझा जिम्मेदारी है।

5. QMS के अपेक्षित परिणाम प्राप्त करना

शीर्ष प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि QMS अपने अपेक्षित परिणाम प्राप्त करे। इनमें अनुरूप उत्पादों और सेवाओं की निरंतर आपूर्ति तथा ग्राहक संतुष्टि में वृद्धि शामिल हैं।

उदाहरण: प्रबंधन ग्राहक शिकायतों, उत्पाद अस्वीकृति, समय पर आपूर्ति और प्रक्रिया दक्षता से संबंधित आँकड़ों की समय-समय पर समीक्षा करता है। यदि परिणाम निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप नहीं हैं, तो उचित सुधारात्मक कार्रवाई की जाती है।

यहाँ जोर केवल दस्तावेजी कार्यवाही और ऑडिट पूरा करने पर नहीं, बल्कि वास्तविक परिणाम प्राप्त करने पर है।

6. कर्मचारियों को दिशा देना और सहयोग प्रदान करना

प्रभावी नेतृत्व में कर्मचारियों को दिशा देना और उनका सहयोग करना शामिल है, ताकि वे QMS की प्रभावशीलता में योगदान दे सकें।

उदाहरण: जब उत्पादन कर्मचारी किसी दोष की बार-बार पुनरावृत्ति देखते हैं, तो प्रबंधन उन्हें समस्या के मूल कारण की जाँच करने के लिए प्रोत्साहित करता है। आवश्यक तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाती है और संभावित समाधानों के परीक्षण में सहयोग दिया जाता है।

समस्याओं की सूचना देने के लिए कर्मचारियों को दोषी ठहराने के बजाय, प्रबंधन उन्हें समस्याओं के समाधान में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करता है।

7. निरंतर सुधार को प्रोत्साहित करना

शीर्ष प्रबंधन को संगठन की प्रक्रियाओं, उत्पादों, सेवाओं और QMS में निरंतर सुधार को प्रोत्साहित करना चाहिए।

उदाहरण: एक संगठन पाता है कि ऑर्डर की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब हो रहा है। प्रबंधन प्रक्रिया की समीक्षा करता है, अनुमोदन के अनावश्यक चरणों को सरल बनाता है और परिणामों की निगरानी करता है कि क्या ऑर्डर पूरा करने में लगने वाला समय कम हुआ है।

निरंतर सुधार एक नियमित गतिविधि होनी चाहिए, न कि केवल बाहरी ऑडिट से पहले किया जाने वाला कार्य।

8. संगठन के अन्य स्तरों पर नेतृत्व को प्रोत्साहित करना

शीर्ष प्रबंधन को संगठन में अन्य संबंधित भूमिकाओं को उनके कार्यक्षेत्र में नेतृत्व प्रदर्शित करने के लिए सहयोग प्रदान करना चाहिए।

उदाहरण: उत्पादन प्रबंधक को उत्पादन दोष कम करने, क्रय प्रबंधक को आपूर्तिकर्ताओं के प्रदर्शन में सुधार करने और ग्राहक सेवा प्रबंधक को शिकायतों का प्रभावी समाधान करने की जिम्मेदारी दी जाती है।

शीर्ष प्रबंधन आवश्यक अधिकार और संसाधन उपलब्ध कराता है तथा यह सुनिश्चित करता है कि संबंधित प्रबंधक अपनी जिम्मेदारियों के प्रति जवाबदेह रहें। इससे नेतृत्व केवल शीर्ष स्तर तक सीमित न रहकर संगठन के विभिन्न स्तरों पर विकसित होता है।

9. गुणवत्ता संस्कृति और नैतिक व्यवहार को बढ़ावा देना

एक प्रभावी गुणवत्ता संस्कृति तब विकसित होती है, जब संगठन के साझा मूल्य, दृष्टिकोण, कार्यप्रथाएँ और व्यवहार गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते हैं। नैतिक व्यवहार ईमानदारी, निष्पक्षता और जिम्मेदार निर्णय लेने को प्रोत्साहित करके इस संस्कृति को मजबूत करता है।

उदाहरण: गुणवत्ता निरीक्षण के दौरान एक कर्मचारी पाता है कि कोई उत्पाद निर्धारित अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है। वह इस गैर-अनुरूपता की सूचना देता है, भले ही इससे उत्पाद की आपूर्ति में विलंब हो सकता हो। प्रबंधन कर्मचारी के निर्णय का समर्थन करता है, समस्या के समाधान की व्यवस्था करता है और गुणवत्ता अभिलेखों को छिपाने या उनमें गलत जानकारी दर्ज करने को हतोत्साहित करता है। इससे स्पष्ट होता है कि ग्राहक का विश्वास और उत्पाद अनुरूपता, अल्पकालिक उत्पादन लक्ष्यों से अधिक महत्वपूर्ण हैं।

10. प्रक्रिया दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना

प्रक्रिया दृष्टिकोण (Process Approach) का अर्थ है कि परस्पर संबंधित प्रक्रियाओं को एक समन्वित प्रणाली के रूप में समझा और प्रबंधित किया जाए, ताकि अपेक्षित परिणाम प्रभावी ढंग से प्राप्त किए जा सकें।

उदाहरण: एक विनिर्माण संगठन में ग्राहक के ऑर्डर की पूर्ति के लिए कई परस्पर संबंधित प्रक्रियाएँ होती हैं, जैसे ऑर्डर की समीक्षा, क्रय, उत्पादन योजना, विनिर्माण, निरीक्षण, पैकेजिंग और आपूर्ति।

यदि क्रय प्रक्रिया में अनुपयुक्त कच्चा माल प्राप्त होता है, तो इससे विनिर्माण और निरीक्षण प्रक्रियाएँ प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए प्रबंधन सुनिश्चित करता है कि इन प्रक्रियाओं के बीच समन्वय बना रहे और उनके प्रदर्शन की निगरानी की जाए। प्रक्रिया दृष्टिकोण प्रभावी QMS का आधार स्तंभ है, क्योंकि एक प्रक्रिया का प्रदर्शन अन्य संबंधित प्रक्रियाओं के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है।

11. जोखिम-आधारित और अवसर-आधारित चिंतन को प्रोत्साहित करना

शीर्ष प्रबंधन को प्रक्रियाओं की योजना बनाने और उनका संचालन करने के दौरान जोखिमों और अवसरों पर विचार करने की संस्कृति विकसित करनी चाहिए। जोखिम-आधारित चिंतन संभावित समस्याओं की पहचान करने में सहायता करता है, जबकि अवसर-आधारित चिंतन प्रदर्शन में सुधार और बेहतर परिणाम प्राप्त करने की संभावनाओं को पहचानने में मदद करता है।

उदाहरण: एक विनिर्माण संगठन पहचानता है कि केवल एक आपूर्तिकर्ता पर निर्भर रहने से उत्पादन बाधित हो सकता है। प्रबंधन वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं का मूल्यांकन करता है और आवश्यक आकस्मिक व्यवस्थाएँ विकसित करता है। इसी दौरान संगठन निरीक्षण की एक दोहराव वाली गतिविधि को स्वचालित करने का अवसर पहचानता है। व्यवहार्यता का मूल्यांकन करने के बाद प्रबंधन निरीक्षण की एकरूपता और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए स्वचालन लागू करता है। इस प्रकार संगठन संभावित समस्याओं के लिए तैयार रहता है और सुधार के अवसरों का लाभ उठाता है।

12. QMS की प्रभावशीलता के लिए जवाबदेही स्वीकार करना

शीर्ष प्रबंधन को QMS की प्रभावशीलता के लिए जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए। इसका अर्थ है कि वह QMS के प्रदर्शन की जिम्मेदारी ले तथा यह सुनिश्चित करे कि प्रणाली अपने अपेक्षित परिणाम प्राप्त करे।

उदाहरण: यदि संगठन लगातार अपने गुणवत्ता उद्देश्यों को प्राप्त करने में विफल रहता है, तो शीर्ष प्रबंधन इसके कारणों की समीक्षा करता है। वह यह भी जाँचता है कि पर्याप्त संसाधन और प्रभावी नियंत्रण उपलब्ध हैं या नहीं तथा आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करता है।

QMS की प्रभावशीलता को केवल गुणवत्ता प्रबंधक या आंतरिक ऑडिट टीम की जिम्मेदारी नहीं माना जा सकता। विभिन्न व्यक्तियों को जिम्मेदारियाँ सौंपी जा सकती हैं, लेकिन QMS की प्रभावशीलता के लिए जवाबदेही शीर्ष प्रबंधन की रहती है।

ग्राहक केंद्रितता : नेतृत्व की एक आवश्यक जिम्मेदारी

ISO 9001:2026 का खंड 5.1.2 ग्राहक केंद्रितता के संबंध में नेतृत्व और प्रतिबद्धता पर विशेष बल देता है।

शीर्ष प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ग्राहक संबंधी तथा लागू वैधानिक और विनियामक अपेक्षाओं की पहचान की जाए, उन्हें समझा जाए और उनका निरंतर पालन किया जाए। इसके अतिरिक्त, उत्पादों और सेवाओं की अनुरूपता तथा ग्राहक संतुष्टि बढ़ाने की क्षमता को प्रभावित करने वाले प्रासंगिक जोखिमों और अवसरों की पहचान करके उनका समाधान किया जाना चाहिए। ग्राहक संतुष्टि बढ़ाने पर निरंतर ध्यान बनाए रखना भी आवश्यक है।

उदाहरण: एक सेवा संगठन को ग्राहक अनुरोधों के समाधान में होने वाले विलंब के संबंध में बार-बार शिकायतें प्राप्त होती हैं। शीर्ष प्रबंधन शिकायतों के आँकड़ों की समीक्षा करता है, सेवा प्रक्रिया की कमजोरियों की पहचान करता है, प्रतिक्रिया समय के लिए लक्ष्य निर्धारित करता है और प्रदर्शन की निगरानी करता है। इसके बाद संगठन ग्राहक प्रतिक्रिया का मूल्यांकन करता है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किए गए परिवर्तनों से ग्राहक संतुष्टि में सुधार हुआ है या नहीं।

यह उदाहरण स्पष्ट करता है कि ग्राहक केंद्रितता केवल शिकायतों का उत्तर देने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्राहक की अपेक्षाओं को समझने और पूरा करने के लिए व्यवस्थित कार्रवाई करने की माँग करती है।

निष्कर्ष

QMS के सफल कार्यान्वयन और रखरखाव में नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका है। ISO 9001:2026 का खंड 5.1 शीर्ष प्रबंधन को अपने निर्णयों, कार्यों और सहयोग के माध्यम से नेतृत्व तथा प्रतिबद्धता प्रदर्शित करने का ढाँचा प्रदान करता है। एक प्रभावी नेता स्पष्ट दिशा निर्धारित करता है, आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराता है, गुणवत्ता संबंधी अपेक्षाओं को व्यावसायिक प्रक्रियाओं में एकीकृत करता है, कर्मचारियों की भागीदारी को प्रोत्साहित करता है, नैतिक व्यवहार को बढ़ावा देता है और QMS की प्रभावशीलता के लिए जवाबदेही स्वीकार करता है। एक अच्छा नेता केवल निर्देश नहीं देता, बल्कि स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करके दूसरों को प्रेरित करता है।

शेर और कुत्तों की सेना से संबंधित प्रसिद्ध कथन यह संदेश देता है कि नेतृत्व किसी टीम के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है। हालाँकि, किसी संगठन की स्थायी सफलता कर्मचारियों की योग्यता, उपयुक्त संसाधनों, प्रभावी प्रक्रियाओं, टीमवर्क और गुणवत्ता के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर भी निर्भर करती है।

याद रखें : गुणवत्ता की संस्कृति केवल निर्देश देने से विकसित नहीं होती, बल्कि प्रभावी नेतृत्व, प्रतिबद्धता, नैतिक व्यवहार और निरंतर कार्रवाई से विकसित होती है।

सादर,  

केशव राम सिंघल 

बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

विश्व मानक दिवस (World Standards Day) – 14 अक्टूबर – मानक: बेहतर गुणवत्ता और सुरक्षित भविष्य का आधार

विश्व मानक दिवस (World Standards Day) – 14 अक्टूबर – मानक: बेहतर गुणवत्ता और सुरक्षित भविष्य का आधार 

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प्रत्येक वर्ष 14 अक्टूबर को विश्व मानक दिवस (World Standards Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मानकों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उत्पादों, सेवाओं और प्रबंधन प्रणालियों की गुणवत्ता, सुरक्षा, विश्वसनीयता और दक्षता सुनिश्चित करने में मानकों की भूमिका को रेखांकित करना है। विश्व मानक दिवस, अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (ISO), अंतरराष्ट्रीय विद्युत तकनीकी आयोग (IEC) तथा अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के सहयोग से मनाया जाता है। यह उन विशेषज्ञों के योगदान को सम्मान देने का अवसर भी है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।


मानक हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग हैं। वे उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता में एकरूपता लाने, तकनीकी अनुकूलता सुनिश्चित करने, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुगम बनाने में सहायक होते हैं। ISO 9001 जैसे गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली मानक संगठनों को प्रक्रियाओं में सुधार, ग्राहक संतुष्टि बढ़ाने और निरंतर सुधार की संस्कृति विकसित करने में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। आज के बदलते परिवेश में जलवायु परिवर्तन, डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और सतत विकास जैसी चुनौतियों से निपटने में भी मानकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।


विश्व मानक दिवस हमें यह संदेश देता है कि मानक केवल नियमों और अपेक्षाओं का संग्रह नहीं हैं, बल्कि गुणवत्ता, विश्वास, नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा देने के महत्वपूर्ण साधन हैं। आइए, विश्व मानक दिवस पर हम अपने कार्यों और प्रक्रियाओं में मानकों के महत्व को समझें, उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध हों और गुणवत्ता की संस्कृति को बढ़ावा दें। मानकों को अपनाएँ, गुणवत्ता बढ़ाएँ और बेहतर भविष्य बनाएँ।


सादर,

केशव राम सिंघल 

World Standards Day 2026

Joint Message from IEC President, ISO President and UTU Director on World Standards Day - Link Click Here 

शनिवार, 3 अक्टूबर 2026

ISO ने जलवायु अनुकूलन और लचीलेपन पर पेरिस वक्तव्य अपनाया

ISO ने जलवायु अनुकूलन और लचीलेपन पर पेरिस वक्तव्य अपनाया 

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1 अक्टूबर 2026 को पेरिस में ISO की महासभा ने पेरिस वक्तव्य अपनाया। यह अधिक लचीलापन बनाने, जलवायु परिवर्तन के अनुकूल ढलने और प्रकृति की रक्षा की वैश्विक कोशिशों में अंतरराष्ट्रीय मानकों की भूमिका को फिर पुष्ट करता है। प्रस्ताव फ्रांस की राष्ट्रीय मानक संस्था और ISO वार्षिक बैठक 2026 के मेजबान AFNOR का था। वक्तव्य 2021 में अपनाई गई ISO की जलवायु प्रतिबद्धता पर आधारित है और दिखाता है कि जलवायु शमन के साथ अब अनुकूलन, पारिस्थितिकी तंत्र की लचीलापन और प्रकृति संरक्षण पर भी मज़बूत कार्रवाई चाहिए।

यह संयुक्त राष्ट्र का पेरिस समझौता नहीं है, और कोई नया अंतरराष्ट्रीय मानक भी नहीं। यह ISO सदस्यों का वक्तव्य है। मानक पहले की तरह स्वैच्छिक रहते हैं। समुदाय, सरकारें और व्यवसाय आपस में जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं — जलवायु के प्रभाव और जैव विविधता की हानि से लेकर जल व संसाधनों का दबाव, खाद्य सुरक्षा, वैश्विक स्वास्थ्य और तनी हुई आपूर्ति श्रृंखलाएँ। पेरिस वक्तव्य अंतरराष्ट्रीय मानकों को ऐसे व्यावहारिक औजार मानता है जो वैश्विक प्रतिबद्धता को कार्रवाई में बदलने में मदद कर सकते हैं।

वक्तव्य ISO रणनीति 2030 की प्राथमिकता के रूप में पर्यावरणीय सततता को भी मज़बूत करता है, और पेरिस समझौते, संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों तथा अनुकूलन व लचीलेपन के वैश्विक प्रयासों के प्रति ISO की प्रतिबद्धता को दोहराता है। ISO अध्यक्ष डॉ. खालिद सूफी ने महासभा में कहा, “आज पेरिस वक्तव्य के ज़रिए वैश्विक लचीलेपन और जलवायु अनुकूलन के लिए ISO की प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर था। यह जलवायु प्रतिबद्धताओं को ठोस कार्रवाई में बदलने के हमारे सामूहिक संकल्प का प्रतीक है। मैं अपने साझा दृष्टिकोण को साकार करने में आपके समर्थन पर भरोसा करता हूँ।” AFNOR के उप मुख्य कार्यकारी फ्रैंक लेबूगल ने कहा, “पेरिस वक्तव्य का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्वैच्छिक मानक चल रहे बड़े बदलावों का समर्थन करें: डिजिटल, पर्यावरणीय और सामाजिक संक्रमण। वे प्रमाणित, साझा सर्वोत्तम प्रथाएँ देकर आर्थिक पक्षों को सक्षम बनाते रहेंगे, ताकि वे लगातार बदलते वैश्विक परिदृश्य में मार्ग निकाल सकें और ढल सकें। अब पहले से कहीं अधिक, विश्वास हमारे संबंधों, हमारी अंतःक्रिया और आगे बढ़ने की सामूहिक क्षमता के केंद्र में होना चाहिए।” 

पेरिस वक्तव्य

“तेज़ होते पारिस्थितिक, ऊर्जा और डिजिटल संक्रमणों के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय मानक लचीले और सतत विकास को संभव बनाने का रणनीतिक उत्तोलक हैं। खुली बहुपक्षीय व्यवस्था में विकसित ये स्वैच्छिक औजार हैं — जोखिमों का अनुमान लगाने, उन्हें मापने और प्रबंधित करने तथा व्यवहार बदलने के लिए।

अंतरराष्ट्रीय मानक नवाचार, लचीले अवसंरचना और सतत औद्योगिक विकास को आधार देकर सतत विकास लक्ष्यों में योगदान करते हैं, और तनी हुई आपूर्ति श्रृंखलाओं, जैव विविधता की हानि, संसाधनों के क्षय, जल और मिट्टी प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा तथा वैश्विक स्वास्थ्य जैसी जुड़ी चुनौतियों का समाधान करते हैं।

इन्हें स्थानीय और क्षेत्रीय विशिष्टताओं के अनुसार ढाला जा सकता है, ताकि समुदाय और संगठन बदलती सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप ढल सकें। ये वैज्ञानिक ज्ञान, तकनीकी विशेषज्ञता और बहु-हितधारक सहमति पर टिके हैं।

ISO रणनीति 2030 के अनुरूप ISO अपनी पर्यावरणीय सततता की कार्यसूची के केंद्र में विज्ञान, पारिस्थितिकी तंत्र की लचीलापन, जलवायु अनुकूलन और प्रकृति संरक्षण की केंद्रीय भूमिका की पुनः पुष्टि करता है।

ISO नीति-निर्माताओं, उद्योग और हितधारकों को भरोसेमंद ढाँचे देकर सुरक्षित, लचीला और टिकाऊ भविष्य का समर्थन जारी रखेगा, जो अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पहलों को व्यावहारिक क्रियान्वयन से जोड़ते हैं।

ISO सदस्य, तकनीकी समुदाय और सभी साझेदार निरंतर सहयोग, ज्ञान-साझा तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के विकास और उपयोग के माध्यम से जीवन को आसान, सुरक्षित और बेहतर बनाने के हमारे साझा उद्देश्य में योगदान दें।”

(ISO वक्तव्य और विज्ञप्ति पढ़ने के लिए क्लिक करें) 

ISO वार्षिक बैठक 2026 AFNOR की मेजबानी में 28 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक पेरिस में हुई। थीम थी — बदलती दुनिया में विश्वास बनाना। बैठक ने वैश्विक नेताओं, नीति-निर्माताओं और मानक विशेषज्ञों को यह देखने के लिए एक साथ लाया कि दुनिया की सबसे आवश्यक चुनौतियों से निपटने में अंतरराष्ट्रीय मानकों की क्या भूमिका है।


सादर,

केशव राम सिंघल 


बुधवार, 30 सितंबर 2026

गुणवत्ता प्रबंधक: एक व्यक्ति, सात भूमिकाएँ, बड़ा प्रभाव

गुणवत्ता प्रबंधक: एक व्यक्ति, सात भूमिकाएँ, बड़ा प्रभाव

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सामान्यतया संगठनों में गुणवत्ता प्रबंधन के कार्यान्वयन और देखरेख के लिए गुणवत्ता विभाग का गठन कर गुणवत्ता प्रबंधक की नियुक्ति की जाती है। वर्तमान में गुणवत्ता प्रबंधक केवल गुणवत्ता की जाँच करने वाला अधिकारी नहीं रह गया। अब उसे कई भूमिकाएँ एक साथ निभानी पड़ती हैं — तभी संगठन पर उसकी भूमिकाओं का असली प्रभाव पड़ता है। इस सम्बन्ध केंद्रीय विचार यह हो सकता है - एक व्यक्ति, कई भूमिकाएँ और बड़ा प्रभाव। एक गुणवत्ता प्रबंधक कई भूमिकाएँ निभा कर अपेक्षाओं को परिणाम में बदलता है। हम नीचे गुणवत्ता प्रबंधक की सात भूमिकाओं की चर्चा कर रहे हैं। 

(1) रणनीतिकार (The Strategist) — रणनीतिकार वार्षिक लक्ष्य बनाकर नहीं रुकता। वह पूछता है कि अगले तीन वर्षों में बाजार, नियमन, प्रौद्योगिकी और प्रतिस्पर्धा गुणवत्ता पर क्या दबाव डालेंगे। सिर्फ आज नहीं, वह आगे देखता है। गुणवत्ता को व्यावसायिक रणनीति से जोड़ता है, जोखिम और अवसर पहचानता है। रणनीतिकार केवल वार्षिक गुणवत्ता लक्ष्य नहीं बनाता। वह पूछता है—अगले तीन वर्षों में बाजार, नियमन, प्रौद्योगिकी और प्रतिस्पर्धा गुणवत्ता पर क्या दबाव डालेंगे? वह गुणवत्ता नीति को व्यावसायिक रणनीति का अनुवाद बनाता है: लागत नेतृत्व हो या विभेदीकरण, गुणवत्ता का योगदान अलग होगा। जोखिम और अवसर को SWOT या PESTLE से जोड़कर प्राथमिकता देता है, ताकि गुणवत्ता बजट “खर्च” न लगे, “निवेश” लगे।

(2) जन नेता (The People Leader) — वह टीम बनाता है, प्रशिक्षित करता है, संस्कृति और सहयोग बढ़ाता है, क्योंकि गुणवत्ता लोग ही लाते हैं। गुणवत्ता लोगों के व्यवहार से जन्म लेती है, फॉर्म से नहीं। जन नेता निरीक्षकों की सेना नहीं चलाता; वह ऑपरेटर, अभियंता, विक्रेता और आपूर्तिकर्ता में स्वामित्व पैदा करता है। कोचिंग का अर्थ गलती पकड़ना नहीं, समस्या सुलझाने की क्षमता बढ़ाना है। वह पूछता है—कौन से व्यवहार दोहराए जाने चाहिए? कौन सी मौन सहमति गुणवत्ता को कमजोर करती है?

(3) व्यावसायिक भागीदार (The Business Partner) — वह गुणवत्ता को पैसा, संवृद्धि और लाभ से जोड़ता है। संचालन, वित्त और बाजार की भाषा बोलता है। कई संगठन गुणवत्ता को लागत-केंद्र मानते हैं। व्यावसायिक भागीदार इस धारणा को तोड़ता है। वह Scrap, Rework, Warranty, Expedite और Lost Sales को एक ही भाषा में प्रस्तुत करता है—रूपये और ग्राहक-विश्वास। वित्त से Cost of Poor Quality, संचालन से थ्रूपुट, विपणन से NPS/CSAT जोड़ता है। बैठक में “गैर-अनुरूपता” की जगह “ग्राहक खोने का जोखिम” बोलता है।

(4) डेटा-संचालित निर्णय निर्माता (The Data-Driven Decision Maker) — वह डेटा आधारित तथ्यों से फैसला लेता है, लक्षण नहीं जड़ देखता है, अनुमान को तथ्यों से चुनौती देता है। डेटा होना पर्याप्त नहीं; सही प्रश्न होना जरूरी है। यह भूमिका लक्षण (late delivery) और जड़ (अस्थिर प्रक्रिया, अस्पष्ट विनिर्देश, आपूर्तिकर्ता क्षमता) में फर्क करती है। नियंत्रण चार्ट, पारेतो, रिग्रेशन या सरल स्तरीकरण—उपकरण से अधिक महत्वपूर्ण है यह आदत कि धारणा को तथ्य से जाँचा जाए। वह पूछता है—क्या माप प्रणाली स्वयं विश्वसनीय है? क्या हम औसत देख रहे हैं या भिन्नता?

(5) ग्राहक अधिवक्ता (The Customer Advocate) — वह ग्राहक को केंद्र में रखता है। ग्राहक की आवाज (Voice of Customer) समझता है और फीडबैक को सुधार में बदलता है। ग्राहक अधिवक्ता केवल शिकायत बंद नहीं करता; वह पूछता है कि ग्राहक खरीदते समय, उपयोग करते समय और समस्या आने पर क्या अनुभव करता है। विनिर्देश पूरा होना न्यूनतम है; उपयोग में आसानी, स्थिरता और सेवा-प्रतिक्रिया मूल्य बनाती है। फीडबैक को डिज़ाइन, प्रक्रिया और आपूर्तिकर्ता तक लौटाना इस भूमिका का असली काम है। आंतरिक ग्राहक (अगली प्रक्रिया) को भूलना भी घातक है।

(6) जोखिम प्रबंधक (The Risk Manager) — समस्या आने से पहले रोकता है। FMEA जैसी टूल्स से जोखिम कम करता है और व्यावसायिक निरंतरता सुनिश्चित करता है। जोखिम प्रबंधक आग बुझाने वाला नहीं, आग लगने की संभावना घटाने वाला है। वह उत्पाद, प्रक्रिया, आपूर्तिकर्ता, साइबर/डेटा, नियामक और व्यावसायिक निरंतरता—सभी स्तरों पर सोचता है। FMEA, HAZOP या जोखिम रजिस्टर तभी काम करते हैं जब रेटिंग ईमानदार हो और कार्रवाई संसाधन मिले। नया उत्पाद, नया आपूर्तिकर्ता या प्रक्रिया परिवर्तन—यही वे क्षण हैं जब जोखिम सबसे सस्ता पकड़ा जाता है।

(7) परिवर्तन एजेंट (The Change Agent) — वह निरंतर सुधार चलाता है, संस्कृति बदलता है, परिवर्तन की अगुवाई करता है और चुनौती को अवसर में बदलता है। परिवर्तन एजेंट का काम नया सॉफ्टवेयर लगाना नहीं, नई आदतें टिकाना है। वह प्रतिरोध को दुश्मनी नहीं, जानकारी का अभाव मानता है। छोटे प्रयोग (PDCA), सफल कहानियाँ और मध्य-प्रबंधन की भागीदारी से गति बनती है। सुधार तभी जीवित रहता है जब वह दैनिक प्रबंधन में घुल जाए—अन्यथा अभियान खत्म होते ही पुरानी प्रक्रिया लौट आती है। चुनौती को “दोषी कौन” से हटाकर “प्रणाली क्या कहती है” पर लाता है।

मजबूत गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली, ज्यादा ग्राहक संतुष्टि, कम लागत, कम जोखिम, बेहतर संचालन और लंबी व्यावसायिक सफलता मिलती है। रणनीतिकार दिशा देता है; जन नेता लोगों को उस दिशा में सक्षम बनाता है; व्यावसायिक भागीदार संसाधन और प्राथमिकता दिलाता है; डेटा वाले निर्णय को पक्षपात से बचाते हैं; ग्राहक अधिवक्ता उद्देश्य याद दिलाता है; जोखिम प्रबंधक गति को सुरक्षित रखता है; परिवर्तन एजेंट नई अवस्था को स्थायी बनाता है। एक भूमिका कमजोर हुई कि बाकी प्रदर्शन घट जाता है। कुशल प्रबंधक सातों भूमिकाएँ एक साथ नहीं निभाता; वह स्थिति देखकर चुनता है कि आज रणनीति चाहिए, लोग चाहिए या जोखिम की रोकथाम। 

सार 

गुणवत्ता नेतृत्व (Quality leadership) = दिशा + लोग + व्यवसाय की भाषा + तथ्य + ग्राहक + पूर्वानुमानित जोखिम + टिकाऊ बदलाव।

निरीक्षण अंत है, शुरुआत नहीं। अपेक्षाओं को परिणाम में बदलने वाला प्रबंधक वह है जो एक साथ कई भूमिकाएँ सचेत रूप से निभाए—और जानता रहे कि इस समय कौन-सी भूमिका निभाना सबसे जरूरी है।


सादर, 

केशव राम सिंघल 


मंगलवार, 29 सितंबर 2026

ISO वार्षिक बैठक उद्घाटन समारोह

 ISO वार्षिक बैठक उद्घाटन समारोह 

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सोमवार 28 सितम्बर 2026 को पेरिस में ISO Annual Meeting 2026 का उद्घाटन समारोह आयोजित हुआ। वार्षिक बैठक की थीम रही — "Building trust in a changing world." मेजबान के रूप में फ्रांस का मानकीकरण संगठन AFNOR अपने शताब्दी वर्ष में कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। समारोह का रिप्ले ISO की साइट पर उपलब्ध है।

ISO वार्षिक बैठक उद्घाटन समारोह केवल औपचारिक स्वागत नहीं था। ISO के शब्दों में यह संरेखण, चिंतन और आगे देखने का क्षण था। सत्र की भाषा अंग्रेज़ी थी; अरबी, चीनी, फ्रेंच, रूसी और स्पेनिश में दुभाषिया व कैप्शन उपलब्ध थे। पत्रकार श्यूली घोष ने कार्यक्रम का संचालन किया। आधिकारिक वक्ता सूची में तीन प्रमुख भाषण हैं। सुबह की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सर्जियो मुजिका (ISO महासचिव) और ओलिविए पेरा (AFNOR के CEO / Director-General) पहले ही बोल चुके थे; शाम को मंच पर मुख्य रूप से अध्यक्ष-स्तरीय संदेश रहे।

ISO अध्यक्ष डॉ. खालिद सूफी ने वैश्विक मानक समुदाय का पेरिस में स्वागत किया और सप्ताह की थीम स्पष्ट की - विश्वास (Trust) अब स्वतः नहीं माना जाता — उसे बनाना, सिद्ध करना और समय के साथ बनाए रखना पड़ता है। उनके विचार का सार यह भी है कि विश्वास ISO की मुख्य पूंजी है और दुनिया को संगठन का यही योगदान है। AFNOR अध्यक्ष गाइ मॉगी ने मेजबान संस्था की ओर से स्वागत किया। उनका संदेश यह रहा कि जब देश (Countries) अपने ज्ञान और महत्वाकांक्षा को एक साझा मेज पर लाते हैं, तभी विश्वास बढ़ता है। फ्रांस की Minister Delegate for Francophonie, International Partnerships and French Nationals Abroad एलियोनोर कारोआ ने बहुपक्षीय सहयोग पर जोर दिया। उनका उद्धरण: “Multilateralism is more needed than ever.” फ्रेंच में उन्होंने कहा कि ISO के कुछ प्रतीकात्मक मानक वैश्विक चुनौतियों के उत्तर हैं, जो सभी से जुड़े हैं।

समारोह में नाट्य और नृत्य की कलात्मक प्रस्तुति “सीमाओं के पार संस्कृतियों के सहयोग का उत्सव” दिख रहा था। अनास्तासिया विलानोवा की कोरियोग्राफी और कलाकारों की प्रस्तुति शानदार थी। समकालीन नृत्य, बदलती दुनिया का शक्तिशाली उत्तर। इससे शाम शुरू हुई और Murmuration से समापन हुआ। 27 नर्तक एक लय में चले और दर्शकों को भी प्रदर्शन में शामिल किया गया, ताकि पूरा हाल एक इकाई की तरह हिले।

इस समारोह से पहले ISO/UNDP 53001 मानक का लॉन्च हो चुका था। AFNOR के लिए यह शताब्दी वर्ष का यादगार आयोजन रहा।


सादर, 

केशव राम सिंघल 


ISO/UNDP 53001:2026 मानक का प्रमोचन (Launch)

ISO/UNDP 53001:2026 मानक का प्रमोचन (Launch)

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28 सितंबर 2026 को पेरिस में शुरू हुई ISO वार्षिक बैठक के पहले दिन ISO/UNDP 53001:2026 का आधिकारिक प्रमोचन हुआ। यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के लिए दुनिया का पहला अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन प्रणाली मानक है। ISO Annual Meeting 2026 फ्रांस की राष्ट्रीय मानक संस्था AFNOR की मेजबानी में 28 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चल रही है। थीम है — Building trust in a changing world (बदलती दुनिया में विश्वास बनाना)।

मानक का प्रमोचन ISO और UNDP का संयुक्त कार्यक्रम था। सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में मानक पेश किया गया। मंच पर थे — डॉ. खालिद सूफी (ISO अध्यक्ष), सर्जियो मुजिका (ISO महासचिव), मार्कोस नेटो और ओलिविए पेरा (AFNOR CEO)। मुजिका ने कहा कि SDGs एक दशक से साझा वैश्विक दृष्टि दे रहे हैं; अब संगठन उस दृष्टि को ठोस कार्रवाई में बदलना चाहते हैं। संयुक्त राष्ट्र सहायक महासचिव और UNDP के Bureau for Policy and Programme Support के निदेशक मार्कोस नेटो ने कहा कि 2030 एजेंडा तभी आगे बढ़ेगा जब संगठन महत्वाकांक्षा को रोजमर्रा के निर्णय और शासन में शामिल करें।

मानक क्या है

ISO/UNDP 53001:2026 — Management systems for the United Nations Sustainable Development Goals (SDGs) — Requirements — अपेक्षा-आधारित प्रबंधन प्रणाली मानक है, जैसे ISO 9001 या ISO 14001। संगठन इसके अनुसार प्रणाली बना और लागू कर सकते हैं; तीसरे पक्ष से अनुपालन का प्रमाणन भी संभव हो सकेगा।

उद्देश्य

संगठन SDGs को केवल घोषणा या रिपोर्टिंग तक न छोड़ें, बल्कि उन्हें रणनीति, प्रबंध व्यवस्था और दैनिक संचालन में शामिल करें और प्रगति माप सकें। मानक हर प्रकार के संगठन के लिए है — कंपनी, सरकार, शिक्षण संस्थान, नागरिक समाज — आकार या क्षेत्र की परवाह किए बिना। संगठन अपने संदर्भ और हितधारकों के अनुसार सबसे प्रासंगिक SDGs पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

संगठन से अपेक्षाएँ 

- संगठनात्मक संदर्भ का विश्लेषण और हितधारकों से संवाद

- SDGs पर वास्तविक व संभावित सकारात्मक-नकारात्मक प्रभावों की पहचान, आकलन और प्राथमिकता

- सार्थक SDG उद्देश्य और लक्ष्य

- प्रभावों पर डेटा और प्रगति का मूल्यांकन

- लक्ष्यों के अंतर्संबंध, तालमेल और ट्रेड-ऑफ का प्रबंधन

- PDCA चक्र से निरंतर सुधार

मानक प्रत्येक SDG को अलग परियोजना नहीं मानता; एकीकृत नजरिया देता है। 2030 के बाद के वैश्विक लक्ष्यों के लिए भी इसे प्रासंगिक रखने की व्यवस्था है।

विकास

मानक विकास कार्य ISO/PC 343 (Sustainable development goals management) ने किया; सचिवालय Danish Standards के पास था। आधार UNDP के SDG Impact Standards for Enterprises थे। पहली बार मानक पर ISO/UNDP का दोहरा लोगो है। 2024 में दिशानिर्देश वाला ISO/UNDP PAS 53002 आया, उसके बाद पूर्ण अंतरराष्ट्रीय मानक ISO/UNDP 53001:2026। काम लगभग 2023 से चला। कार्यान्वयन मार्गदर्शन के लिए ISO/UNDP 53002 तैयार हो रहा है। मानक लगभग 36 पृष्ठ का है और ISO की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

ISO/UNDP 53001:2026 का प्रमोचन SDGs को घोषणा से निकालकर प्रबंधन प्रणाली का हिस्सा बनाने का प्रयास है, ताकि योगदान मापा जा सके, जवाबदेही दिखे और सुधार जारी रहे।

सादर,

केशव राम सिंघल


सोमवार, 28 सितंबर 2026

ISO 9001:2026 मानक मुख्य परिवर्तन - मानक संरेखण (Standard Alignment)

ISO 9001:2026 मानक मुख्य परिवर्तन  - मानक संरेखण (Standard Alignment)

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ISO 9001:2026 का एक मुख्य परिवर्तन विषयवस्तु का Annex SL और TMB Resolution 16/2025 के साथ संरेखण है। आधार ढाँचा ISO 9001:2015 जैसा ही है — दस खंड, प्रक्रिया दृष्टिकोण, PDCA और जोखिम-आधारित सोच। नई अपेक्षाएँ इसी ढाँचे में जोड़ी गई हैं।


TMB Resolution 16/2025, ISO Technical Management Board का नीति-स्पष्टीकरण है। यह तय करता है कि प्रबंधन प्रणाली मानकों (MSS) को Annex SL / Harmonized Structure (HS) से कितना बाँधकर रखा जाए। इसे 19–20 मार्च 2025 को साल्वाडोर (ब्राज़ील) में TMB की 92वीं बैठक में अपनाया गया। शीर्षक: Management of deviations on Management Systems Standards (MSS) – Policy clarification।


सरल अर्थ में कहें तो Annex SL सभी प्रबंधन प्रणाली मानकों के लिए साझा ढाँचा है — एक जैसी खंड संख्या, खंड शीर्षक, मूल पाठ और मूल परिभाषाएँ — ताकि ISO 9001, ISO 14001, ISO 45001 आदि को एक साथ लागू करना आसान रहे। TMB संकल्प 16/2025 कहता है - 


- खंड/उपखंड के शीर्षक नहीं बदले जा सकते; क्रम भी नहीं।

- HS की मूल शब्दावली और परिभाषाएँ ज्यों की त्यों रखनी हैं।

- अपवाद - “जोखिम” (risk) की प्रविष्टि TMB Resolution 33/2024 के अनुसार बदली जा सकती है।

- विषय-विशेष बातें अतिरिक्त नोट, अधीनस्थ परिभाषा या अधीनस्थ खंड से जोड़ी जा सकती हैं (Annex SL, Appendix 3)।

- शीर्षक और मूल परिभाषाओं के अतिरिक्त अन्य विचलन हो सकते हैं; उन्हें deviation report में दर्ज करना होगा। ISO/CS सलाह दे सकता है, अस्वीकार नहीं कर सकता; अंतिम निर्णय संबंधित समिति का है।

- परियोजना पंजीकरण के समय चालू HS संस्करण संशोधन और संशोधन-पत्र पर लागू रहेगा। नया संस्करण बनाते समय चालू HS पूरा लागू होगा।


मानक लेखकों के लिए ISO/JTCG मार्गदर्शिका - Understanding Annex SL and applying TMB resolution 16/2025 Link 


Global ACI दस्तावेज़ में “Alignment with Annex SL and TMB resolution 16/2025” का अर्थ यही है कि ISO 9001:2026 ने HS के खंड शीर्षक और मूल परिभाषाओं से जानबूझकर दूरी नहीं की। गुणवत्ता संस्कृति, नैतिक व्यवहार तथा जोखिम व अवसर का अलग उपचार इसी ढाँचे के भीतर जोड़े गए हैं।


यह TMB संकल्प प्रमाणित संगठनों के लिए नई अपेक्षा नहीं बनाता। ISO 9001:2026 में गुणवत्ता संस्कृति जैसी नई अपेक्षाएँ हैं, पर वे इसी दस-खंड ढाँचे में जोड़ी गई हैं। संगठनों के लिए व्यावहारिक संदेश यह है कि ISO 9001:2026 मानक का आधार ढाँचा ISO 9001:2015 जैसा रहेगा, इसलिए एकीकृत प्रबंधन प्रणाली का ढाँचा नहीं टूटेगा। 

 

सादर,

केशव राम सिंघल 


शब्दावली  

TMB = Technical Management Board

MSS = Management System Standard

HS = Harmonized Structure

JTCG = Joint Technical Coordination Group on MSS

ISO/CS = ISO Central Secretariat


नेशनल सेंटर फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट (NCQM) का वार्षिक दिवस समारोह

नेशनल सेंटर फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट (NCQM) का वार्षिक दिवस समारोह 

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नेशनल सेंटर फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट (NCQM) की वार्षिक सामान्य बैठक (AGM) 26 सितंबर 2026 को मुंबई में वार्षिक दिवस समारोह के साथ हुई। डॉ. संतोष बी. राणे, सरदार पटेल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, मुंबई के मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के हेड, फंक्शन में मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता थे। डॉ. राणे ने “Human-Robot Collaboration in Industry 5.0-Enabled Manufacturing” पर अपना व्याख्यान दिया।







इंडस्ट्री 4.0 से इंडस्ट्री 5.0 तक - डॉ. संतोष बी. राणे ने इंडस्ट्री 4.0 और इंडस्ट्री 5.0 के बीच का अंतर समझाया। जहाँ इंडस्ट्री 4.0 ऑटोमेशन, IoT, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्मार्ट मशीनों पर काफी जोर देता है, वहीं इंडस्ट्री 5.0 ह्यूमन-सेंट्रिसिटी, सस्टेनेबिलिटी और रेजिलिएंस को ज्यादा महत्व देता है।

इंसान + रोबोट = कोलेबोरेशन (Collaboration) - इंडस्ट्री 5.0 पर चर्चा करते हुए, डॉ. राणे ने एक ज़रूरी कॉन्सेप्ट पर ज़ोर दिया: इंसान + रोबोट = कोलेबोरेशन — कॉम्पिटिशन नहीं। इसका मकसद इंसानों को रोबोट से बदलना नहीं होना चाहिए, बल्कि रोबोट को इंसानों के साथ मिलकर काम करने लायक बनाना होना चाहिए। उन्होंने समझाया कि क्रिएटिविटी, जजमेंट, फ्लेक्सिबिलिटी और प्रॉब्लम-सॉल्विंग जैसी इंसानी काबिलियत को रोबोट की प्रिसिजन, स्ट्रेंथ, स्पीड और कंसिस्टेंसी जैसी काबिलियत के साथ जोड़ा जा सकता है। ऐसी एक-दूसरे को पूरा करने वाली काबिलियत मैन्युफैक्चरिंग में बेहतर नतीजे पाने में मदद कर सकती हैं।










कोलेबोरेटिव रोबोट – कोबोट्स - डॉ. राणे ने कोलेबोरेटिव रोबोट (कोबोट्स) पर भी चर्चा की। कोबोट्स को शेयर्ड वर्कस्पेस में इंसानी वर्कर्स के साथ सुरक्षित रूप से काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इनका इस्तेमाल असेंबली, इंस्पेक्शन और मटीरियल हैंडलिंग जैसे कई तरह के एप्लीकेशन के लिए किया जा सकता है।

AI और स्मार्ट टेक्नोलॉजी की भूमिका - उन्होंने इंसान-रोबोट कोलेबोरेशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, मशीन विज़न और सेंसर्स की भूमिका पर ज़ोर दिया। डॉ. राणे के अनुसार, भविष्य के रोबोट सिर्फ़ पहले से प्रोग्राम किए गए इंस्ट्रक्शन को फॉलो करने से कहीं आगे बढ़ेंगे। AI और दूसरी स्मार्ट टेक्नोलॉजी की मदद से, वे इंसानों के साथ काम करते हुए बदलते हालात के हिसाब से ज़्यादा ढल सकते हैं और ज़्यादा असरदार तरीके से रिस्पॉन्ड कर सकते हैं।







लोग, सेफ्टी, एथिक्स और भरोसा - इंडस्ट्री 5.0 सिर्फ़ टेक्नोलॉजी के बारे में नहीं है। लोग और उनकी काबिलियत इसे सफलतापूर्वक लागू करने के लिए ज़रूरी हैं। डॉ. राणे ने स्किल डेवलपमेंट, ट्रेनिंग, एम्प्लॉई की भलाई और चेंज मैनेजमेंट के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने ह्यूमन-रोबोट कोलेबोरेशन में सेफ्टी, एथिक्स और भरोसे पर भी चर्चा की। जब इंसान और रोबोट एक ही वर्कस्पेस में काम करते हैं, तो कोलिजन अवॉइडेंस, रिस्क असेसमेंट और फंक्शनल सेफ्टी जैसे पहलू खास तौर पर ज़रूरी हो जाते हैं। उन्होंने सही कहा: “भरोसा सुरक्षित, नैतिक और भरोसेमंद कोलेबोरेशन से कमाया जाता है।”

प्रोसेस और वर्कफ़्लो रीडिज़ाइन - डॉ. राणे ने एक और ज़रूरी बात बताई कि सिर्फ़ रोबोट इंस्टॉल करने से कोई ऑर्गनाइज़ेशन इंडस्ट्री 5.0 के लिए तैयार नहीं हो जाता। प्रोसेस और वर्कफ़्लो को रीडिज़ाइन करते समय इंसानों और रोबोट की काबिलियत और ज़िम्मेदारियों पर विचार करने की ज़रूरत है। मौजूदा प्रोसेस में सिर्फ़ टेक्नोलॉजी जोड़ने के बजाय, ऑर्गनाइज़ेशन को वर्कफ़्लो को फिर से डिज़ाइन करने की ज़रूरत हो सकती है ताकि इंसानों और मशीनों की एक-दूसरे को पूरा करने वाली क्षमताओं का अच्छे से इस्तेमाल किया जा सके।

भारत के लिए एक चुनौती - एक सवाल के जवाब में, डॉ. संतोष बी. राणे ने कहा कि भारत में बड़ी इंडस्ट्रीज़ ने इंडस्ट्री 4.0 को अपना लिया है, लेकिन इंडस्ट्री 4.0 से इंडस्ट्री 5.0 में जाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस बदलाव के लिए न सिर्फ़ टेक्नोलॉजी पर ध्यान देने की ज़रूरत है, बल्कि लोगों, स्किल्स, प्रोसेस, सुरक्षा और ऑर्गनाइज़ेशनल तैयारी पर भी ध्यान देने की ज़रूरत है।

खास बात

आसान शब्दों में, इंडस्ट्री 5.0 का मूल विचार “इंसानों के लिए टेक्नोलॉजी” के तौर पर बताया जा सकता है। यह इंटेलिजेंट मशीनों की क्षमताओं को इंसानी स्किल्स, क्रिएटिविटी और फ़ैसले के साथ मिलाकर ऐसी मैन्युफैक्चरिंग बनाने की कोशिश करता है जो ज़्यादा क्वालिटी-ओरिएंटेड, सुरक्षित, सस्टेनेबल और मज़बूत हो।

मुझे व्याख्यान खास तौर पर उपयोगी लगा क्योंकि इसने टेक्नोलॉजी (Technology), लोग (People), प्रोसेस (Process) और क्वालिटी (Quality) के चार ज़रूरी पहलुओं को एक साथ लाकर इंडस्ट्री 5.0 को समझने का मौका दिया। मुख्य अतिथि का स्वागत और परिचय NCQM के अध्यक्ष श्री संतोष खडगड़े ने किया। मैंने प्रोग्राम में ऑनलाइन हिस्सा लिया और मुझे डॉ. राणे का व्याख्यान सुनने का मौका मिला।


सादर,

केशव राम सिंघल


नेशनल सेंटर फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट (NCQM) के बारे में - जो रीडर्स नेशनल सेंटर फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट (NCQM) के बारे में और जानना चाहते हैं, वे इसकी ऑफिशियल वेबसाइट पर जा सकते हैं। ऑर्गनाइज़ेशन, इसकी गतिविधियों और सदस्य्ता के बारे में जानकारी वहाँ से मिल सकती है। Membership Brochure भी वेबसाइट पर उपलब्ध है।