रविवार, 6 सितंबर 2026

संक्षिप्त आलेख - आंतरिक संपरीक्षण (Internal audit) में अपालना (Nonconformity)

 संक्षिप्त आलेख - आंतरिक संपरीक्षण (Internal audit) में अपालना (Nonconformity)

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आम तौर पर आंतरिक संपरीक्षण में संपरीक्षक (Auditor) रिपोर्ट करने के लिए अपालना देखता है, ताकि यह साबित हो सके कि उसने अपना काम अच्छे से किया है। लेकिन ऐसा करते समय, वह सबूत (Evidence) के बारे में भूल जाता है। अपालना (Nonconformity) वस्तुनिष्ठ सबूत (Objective evidence) पर आधारित होनी चाहिए। आतंरिक संपरीक्षक द्वारा पहचानी गई हर अपालना वस्तुनिष्ठ सबूत पर आधारित होनी चाहिए। यह एक खास तौर पर ज़रूरी ऑडिटिंग सिद्धांत है।


प्रायोगिक तौर पर, एक संपरीक्षक को "राय (Opinion)→ शक (Suspicion) → अपालना (Nonconformity)" के बजाय "अपेक्षा (Requirement) → सबूत (Evidence) → पता लगाना (Finding) → अपालना (Nonconformity)" तय करने में सक्षम होना चाहिए। 


संपरीक्षक को लागू संपरीक्षण मापदंड (Audit criteria) के हिसाब से संपरीक्षण सबूतों का वस्तुनिष्ठ तरीके से मूल्यांकन करना चाहिए। संपरीक्षण करना (Auditing) खुद संपरीक्षण सबूत पाने और वस्तुनिष्ठ तरीके से मूल्यांकन करने के लिए एक प्रणालीगत, स्वतन्त्र और प्रलेखित प्रक्रिया (Documented Process) है। अच्छी संपरीक्षा राय पर नहीं, वस्तुनिष्ठ सबूत पर आधारित होती है। 


सादर,

केशव राम सिंघल


मंगलवार, 1 सितंबर 2026

संक्षिप्त आलेख - आंतरिक संपरीक्षा (Internal Audit) में गैर-अनुरूपता (Nonconformities)

संक्षिप्त आलेख

आंतरिक संपरीक्षा (Internal Audit) में गैर-अनुरूपता (Nonconformities) 

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आंतरिक संपरीक्षा (Internal Audit) का असली मकसद यह पता लगाना है कि प्रबंधन प्रणाली (Management System – MS) निर्धारित (Planned) व्यवस्थाओं के अनुरूप है या नहीं; प्रबंधन प्रणाली मानक (जैसे ISO 9001, ISO 14001 आदि) की अपेक्षाओं के अनुरूप है या नहीं; संगठन की अपनी निर्धारित प्रबंधन प्रणाली अपेक्षाओं के अनुरूप है या नहीं; और इसे प्रभावी तरीके से लागू तथा बनाए रखा गया है या नहीं।


इसलिए, गैर-अनुरूपताओं (Nonconformities) की पहचान करना प्रबंधन प्रणाली के वास्तविक स्वास्थ्य और प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।


संपरीक्षा (Audit) के परिणामों (Results) से प्रबंधन को सुधार के लिए उचित और प्रभावी कदम उठाने में मदद मिलनी चाहिए। इसलिए, किसी गैर-अनुरूपता को केवल संपरीक्षा रिपोर्ट में दर्ज एक प्रविष्टि बनकर नहीं रह जाना चाहिए। उसे सुधार (Correction), सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) और अंततः प्रबंधन प्रणाली में सुधार का आधार बनना चाहिए।


सादर,

केशव राम सिंघल


बुधवार, 26 अगस्त 2026

संक्षिप्त आलेख - गैर-अनुरूपता (Nonconformity)

संक्षिप्त आलेख

गैर-अनुरूपता (Nonconformity)

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आइए समझते हैं कि गैर-अनुरूपता (Nonconformity) क्या है। कई ISO प्रबंधन प्रणाली मानक गैर-अनुरूपता को किसी अपेक्षा (Requirement) को पूरा न करना बताते हैं। गैर-अनुरूपता को अपेक्षा का अपालन भी कहा जा सकता है।


एक अपेक्षा अलग-अलग स्रोतों (Sources) से आ सकती है। यह निम्न में से एक या अधिक हो सकती है—


- लागू प्रबंधन प्रणाली मानक की कोई अपेक्षा;

- कोई कानूनी या नियामक अपेक्षा;

- ग्राहक की कोई अपेक्षा;

- किसी अनुबंध की कोई अपेक्षा;

- संगठन की कोई नीति;

- किसी प्रलेखित कार्यविधि या प्रक्रिया की अपेक्षा;

- संगठन द्वारा आंतरिक रूप से निर्धारित कोई उद्देश्य या प्रतिबद्धता;

- संगठन द्वारा निर्धारित कोई अन्य अपेक्षा; या

- प्रबंधन प्रणाली पर लागू होने वाली कोई दूसरी अपेक्षा।


इसलिए, गैर-अनुरूपता तब होती है जब जो अपेक्षित है और जो वास्तव में हो रहा है, उनके बीच अंतर (Gap) हो और उस अंतर को वस्तुनिष्ठ प्रमाण (Objective Evidence) से स्थापित किया जा सके।


आसान शब्दों में हम कह सकते हैं—


अपेक्षा + अपेक्षा पूरी न होने का वस्तुनिष्ठ प्रमाण = गैर-अनुरूपता


उदाहरण के लिए, यदि किसी संगठन की कार्यविधि के अनुसार माप उपकरण (Measuring Equipment) को निर्धारित अंतराल पर अंश-शोधित (Calibrated) किया जाना आवश्यक है और वस्तुनिष्ठ प्रमाण यह दर्शाता है कि आवश्यक अंश-शोधन नहीं किया गया, तो यह गैर-अनुरूपता (Nonconformity) है। यहाँ मुद्दा यह नहीं है कि संपरीक्षक (Auditor) व्यक्तिगत रूप से अंश-शोधन को आवश्यक मानता है या नहीं। मुद्दा यह है कि एक लागू अपेक्षा मौजूद है और वस्तुनिष्ठ प्रमाण यह दर्शाते हैं कि वह अपेक्षा पूरी नहीं हुई है।


सादर,

केशव राम सिंघल


संक्षिप्त आलेख - संपरीक्षण करना (Auditing)

संक्षिप्त आलेख

संपरीक्षण करना (Auditing)

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संपरीक्षण करना किसी भी प्रबंधन प्रणाली की अनुरूपता (Conformity), कार्यान्वयन (Implementation) और प्रभावशीलता (Effectiveness) का मूल्यांकन करने का एक आवश्यक तंत्र (Mechanism) है। प्रणाली किसी भी विषय (Discipline) से जुड़ी हो सकती है, जैसे गुणवत्ता, पर्यावरण, व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, सूचना सुरक्षा, मानव संसाधन, ऊर्जा या कोई अन्य संगठनात्मक विषय। संपरीक्षक (Auditor) वस्तुनिष्ठ प्रमाण (Objective Evidence) की तुलना निर्धारित संपरीक्षण मापदंड (Audit Criteria) से करता है। इस मूल्यांकन का परिणाम अनुरूपता, गैर-अनुरूपता (Nonconformity), जोखिम, सुधार के अवसर या अन्य निष्कर्ष (Findings) के रूप में सामने आ सकता है।


इनमें गैर-अनुरूपता (Nonconformity) का विशेष महत्व है।


गैर-अनुरूपता केवल ऐसी चीज नहीं है जो संपरीक्षक को पसंद न हो या जिसे बेहतर किया जा सकता था। यह ऐसा निष्कर्ष (Finding) है, जो वस्तुनिष्ठ प्रमाण से समर्थित हो और यह दर्शाता हो कि कोई निर्धारित अपेक्षा या आवश्यकता (Requirement) पूरी नहीं हुई है।


हालाँकि, गैर-अनुरूपता की पहचान करने का महत्व केवल असफलता को दर्ज करने तक सीमित नहीं है। अच्छी तरह समझी और विश्लेषित की गई गैर-अनुरूपता सुधार (Correction), सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action), जोखिम में कमी, पुनरावृत्ति की रोकथाम और निरंतर सुधार (Continual Improvement) के लिए एक महत्वपूर्ण निवेश (Input) बन सकती है।


सादर,

केशव राम सिंघल


शुक्रवार, 21 अगस्त 2026

कविता - मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) प्रणाली के सिद्धांत

 कविता -

मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) प्रणाली के सिद्धांत

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मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली का अंतरराष्ट्रीय मानक आया,

संगठन के सफल निष्पादन के लिए व्यवस्थित संदेश लाया।

आओ हम कार्यान्वित करें HRM के सभी मार्गदर्शक सिद्धांत,

ताकि प्रबंधन प्रणाली का कार्यान्वयन हो प्रभावी और उत्कृष्ट।


पारस्परिकता से आपसी सहयोग और विश्वास बढ़ाएँ,

संगठन और कार्यकर्ताओं के हितों में हम संतुलन बनाएँ।

मूल्य समझें हर कार्यकर्ता की कार्यक्षमता और योगदान का,

मूल्य सृजन करें ज्ञान, कौशल और नवाचार के माध्यम से।


अनुकूलनशीलता से परिस्थितियों में स्वयं को ढालें,

नई तकनीक और नई चुनौतियों को अवसरों में बदलें।

तालमेल से मिलकर संगठन की सुदृढ़ टीम बनाएँ,

सामूहिक प्रयासों से प्रदर्शन के बेहतर परिणाम पाएँ।


उत्तरदायित्व समझें और सभी अपना कर्तव्य निभाएँ,

कार्यकर्ताओं का विकास कर सही कार्य पर उन्हें लगाएँ।

सीखना और सम्मान की संगठनात्मक संस्कृति बनाएँ,

विश्वास, नैतिकता और निरंतर सुधार का वातावरण बनाएँ।


कार्य वातावरण सुरक्षित, स्वस्थ और सम्मानजनक बनाएँ,

कार्यकर्ताओं को बेहतर प्रदर्शन के अवसर दिलाएँ।

समाज के प्रति सभी अपनी जिम्मेदारी भी सजग निभाएँ,

पर्यावरण और सतत विकास में सकारात्मक योगदान दें।


संगठन में आठों सिद्धांतों को HRM में व्यवहार में लाएँ,

ISO 30201:2026 के अनुरूप प्रभावी HRMS बनाएँ।


सादर,

केशव राम सिंघल 

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ISO 30201:2026 के आठ मार्गदर्शक सिद्धांत (Guiding Principles)


(1) पारस्परिकता (Reciprocity)

(2) मूल्य (Value)

(3) अनुकूलनशीलता (Adaptability)

(4) तालमेल (Synergy)

(5) उत्तरदायित्व (Responsibility)

(6) संगठनात्मक संस्कृति (Organizational Culture)

(7) कार्य वातावरण (Work Environment)

(8) समाज (Society)


बुधवार, 19 अगस्त 2026

मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) और PDCA चक्र

मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) और PDCA चक्र 

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अधिकांश आधुनिक प्रबंधन प्रणाली मानक (Management System Standards – MSS), जैसे ISO 9001, ISO 14001, ISO 45001, प्लान-डू-चेक-एक्ट (PDCA) चक्र पर आधारित हैं, उसी प्रकार ISO 30201:2026 मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) भी प्लान-डू-चेक-एक्ट चक्र (PDCA Cycle) पर आधारित है। यह प्रणाली PDCA (योजना-करें-जाँचें-कार्रवाई करें) चक्र के रूप में कार्य करती है - 


- P (Plan) – नियोजन - इसमें मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली के लिए आवश्यक प्रक्रियाएँ, नीति, उद्देश्य तथा प्रदर्शन मानदंड स्थापित किए जाते हैं। संगठन के प्रसंग (Context of the Organization) का विश्लेषण (Analysis), मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) के जोखिमों और अवसरों (Risks and Opportunities) का निर्धारण (Determination) तथा उनका मूल्यांकन (Assessment) किया जाता है, मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) मैनेजमेंट पॉलिसी और उद्देश्य (Policy and objectives) संस्थापित किए जाते हैं। 


- D (Do) – लागू करना - मानव संसाधन प्रबंधन नीति, उद्देश्यों तथा नियोजित प्रक्रियाओं को लागू किया जाता है। आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं तथा कार्यकर्ताओं की भर्ती, विकास, सहभागिता और अन्य HR प्रक्रियाओं का संचालन किया जाता है। 


- C (Check) – जाँच एवं मूल्यांकन – मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) के प्रदर्शन की निगरानी (Monitoring), मापन (Measurement), विश्लेषण (Analysis) तथा मूल्यांकन (Evaluation) किया जाता है। परिणामों की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार रिपोर्ट तैयार की जाती है।


- A (Act) – सुधार (Improvement) – प्राप्त परिणामों के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई (Corrective Action) तथा अन्य सुधार (Improvement) किए जाते हैं, जिससे मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली के प्रदर्शन और प्रभावशीलता में निरंतर सुधार हो सके। 


PDCA चक्र का प्रभावी कार्यान्वयन मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) की प्रभावशीलता बढ़ाने, उसके उद्देश्यों को प्राप्त करने तथा निरंतर सुधार (Continual Improvement) सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण साधन है।


सादर, 

केशव राम सिंघल 


मंगलवार, 18 अगस्त 2026

सांख्यिकी उपकरणों और तकनीकों को समझना -1 - समस्या निवारण की प्रभावी सोच - 'DRIVE'

सांख्यिकी उपकरणों और तकनीकों को समझना -1 - समस्या निवारण की प्रभावी सोच - 'DRIVE'

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किसी भी संगठन (Organization) या संस्थान (Institution) में प्रक्रियाओं (Processes) के सुधार (Improvement) और समस्याओं (Problems) के त्वरित (Early) समाधान (Solution) के लिए सही सोच का होना आवश्यक है। 'DRIVE' एक ऐसी ही वैज्ञानिक और व्यावहारिक समस्या-निवारण (Problem-Solving) कार्यपद्धति है, जो किसी भी प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करती है।


'DRIVE' का अर्थ और इसके चरण:


D – Define (परिभाषित करना) - समस्या के दायरे (Scope) और सफलता के मापदंडों (Success Criteria) को स्पष्ट रूप से निर्धारित (Determine) करना।


R – Review (समीक्षा करना) - वर्तमान स्थिति, पृष्ठभूमि और प्रदर्शन से जुड़े आँकड़ों (Data) का विश्लेषण (Analysis) कर समस्या के मूल कारणों (Root causes) की पहचान करना।


I – Identify (समाधान खोजना) - प्रक्रिया में सुधार और समस्या को दूर करने के लिए विभिन्न विकल्पों (Options) या बदलावों (Changes) को चिह्नित करना।


V – Verify (सत्यापित करना) - यह जाँचना कि प्रस्तावित समाधान निर्धारित (Determined) सफलता के मापदंडों पर खरे उतरेंगे या नहीं।


E – Execute (कार्यान्वयन करना) - चुने गए समाधानों की योजना बनाकर उन्हें लागू (Implement) करना और परिणामों की समीक्षा (Review) करना।


उदाहरण (प्रकरण अध्ययन)


एक विद्यालय (School) में प्रथम मूल्यांकन (Assessment) परीक्षा का परिणाम आने पर प्रबंधन (Management) ने देखा कि 50% विद्यार्थी गणित में अनुत्तीर्ण हो गए हैं, जबकि अन्य विषयों (Subjects) में परिणाम 95% से 100% तक रहा। विद्यालय प्रबंधन ने इस समस्या के समाधान के लिए 'DRIVE' दृष्टिकोण अपनाया। 


Define (परिभाषा) - समस्या - गणित विषय में 50% विद्यार्थियों का अनुत्तीर्ण होना। सफलता का मापदंड (Criteria) - आगामी परीक्षा में गणित में कम से कम 95% विद्यार्थी अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हों।


Review (समीक्षा) - वर्तमान स्थिति - अनुत्तीर्ण छात्र अन्य विषयों में कुशल हैं, केवल गणित में प्रदर्शन खराब है। पृष्ठभूमि/मूल कारण - जुलाई माह में गणित के शिक्षक ने त्यागपत्र दे दिया था। विद्यालय में कुल 3 गणित शिक्षकों की आवश्यकता के मुकाबले केवल 2 ही कार्यरत हैं, और गणित विषय की कक्षाएँ अन्य विषय के शिक्षक ले रहे हैं। नए शिक्षक की भर्ती प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है।


Identify (समाधान की पहचान) - समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर समयबद्ध तरीके से नए शिक्षक की भर्ती (Recruitment) करना। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक पास के विद्यालय से गणित शिक्षक की सेवाएँ (Outsourcing) लेना। अतिरिक्त मानदेय देकर वर्तमान दो शिक्षकों के माध्यम से अवकाश के दिनों में गणित विषय की विशेष कक्षाएँ आयोजित करना।


Verify (सत्यापन) - प्रबंधन ने यह जाँचा कि क्या अस्थायी शिक्षक और रविवार की विशेष कक्षाओं से पाठ्यक्रम समय पर पूरा होकर विद्यार्थियों का स्तर सुधरेगा? इस योजना को सफलता के मापदंड (95% परिणाम) को प्राप्त करने में पूरी तरह व्यावहारिक और सक्षम पाया गया।


Execute (कार्यान्वयन) - विद्यालय प्रबंधन ने तुरंत पड़ोसी विद्यालय से संपर्क किया, जिसने एक माह के लिए अपने गणित शिक्षक को प्रतिनियुक्त (Depute) करने पर सहमति दी। साथ ही छात्रों के लिए गणित विषय अतिरिक्त कक्षाएँ शुरू की गईं और भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ कर एक माह के भीतर एक  गणित शिक्षक की नियुक्ति कर ली गई।


निष्कर्ष - इस प्रकार, सही समय पर 'DRIVE' कार्यपद्धति का व्यवस्थित प्रयोग करके विद्यालय प्रबंधन ने अपनी शैक्षणिक प्रक्रिया में सुधार किया और विद्यार्थियों के परिणाम को सुरक्षित किया।


सादर,

केशव राम सिंघल 

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सोमवार, 17 अगस्त 2026

गुणवत्ता की ओर बढ़ता भारत — चाय भी अब गुणवत्ता वाली

गुणवत्ता की ओर बढ़ता भारत — चाय भी अब गुणवत्ता वाली

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चाय हमारे दैनिक जीवन का एक लोकप्रिय पेय है। अब भारतीय चाय की गुणवत्ता, परीक्षण और Traceability को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है।


चाय चिन्ह (Tea Mark) Tea Board of India द्वारा शुरू की गई एक स्वैच्छिक गुणवत्ता प्रमाणन एवं आश्वासन योजना है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में बिकने वाली चाय के लिए गुणवत्ता और traceability का एक विश्वसनीय तथा उपभोक्ता को दिखाई देने वाला पहचान-चिन्ह उपलब्ध कराना है।


चाय चिन्ह (Tea Mark) यह संकेत देता है कि संबंधित चाय का निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार परीक्षण और सत्यापन किया गया है तथा वह लागू नियंत्रण आदेशों और FSSAI Parameters के अनुरूप है। इस प्रकार उपभोक्ताओं को चाय की गुणवत्ता के संबंध में अतिरिक्त भरोसा प्राप्त हो सकता है।


इस योजना का एक महत्वपूर्ण पक्ष Supply Chain Traceability है। इसके माध्यम से चाय की आपूर्ति-श्रृंखला से संबंधित जानकारी को अधिक पारदर्शी बनाने और चाय के स्रोत तथा उसके प्रसंस्करण से जुड़ी जानकारी को पता (Trace) करने में सहायता मिलेगी।


चाय चिन्ह (Tea Mark) का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control) है। प्रमाणन प्रक्रिया में निर्धारित परीक्षण, निरीक्षण और Batch permission जैसी प्रक्रियाएँ शामिल हैं। Tea Board ने इसके लिए Guidelines और Standard Operating Procedure (SOP) जारी किए हैं। जुलाई 2026 में Tea Mark Licensing Portal तथा ‘Tea Marketplace’ Portal के ऑनलाइन संचालन की भी शुरुआत की गई है।


यह प्रमाणन (Certification) स्वैच्छिक (Optional) है। अर्थात् चाय चिन्ह (Tea Mark) प्राप्त करना चाय निर्माताओं के लिए अनिवार्य नहीं है और गैर-प्रमाणित चाय की सामान्य बिक्री या वितरण पर इस योजना के कारण कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। यह योजना Tea (Marketing) Control Order, 2003 के अंतर्गत पंजीकृत पात्र चाय निर्माताओं के लिए उपलब्ध है।


चाय के नमूनों के परीक्षण के लिए Tea Board ने FSSAI-notified तथा NABL-accredited laboratories की सूची भी जारी की है। 9 जुलाई 2026 की सूची में Tea Board के अधीन चाय के नमूनों के परीक्षण के लिए ऐसी प्रयोगशालाओं का उल्लेख किया गया है।


इस प्रकार चाय चिन्ह (Tea Mark) केवल एक Logo नहीं, बल्कि गुणवत्ता आश्वासन और Traceability की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे भारतीय चाय उद्योग में गुणवत्ता, पारदर्शिता और उपभोक्ता विश्वास को बढ़ावा देने में सहायता मिल सकती है।


गुणवत्ता की ओर बढ़ता भारत — अब चाय भी गुणवत्ता की पहचान के साथ।


चाय चिन्ह (Tea Mark) से संबंधित Guidelines, Standard Operating Procedure (SOP), Licensing Portal तथा अन्य आधिकारिक जानकारी Tea Board of India की वेबसाइट पर उपलब्ध है। 


सादर,

केशव राम सिंघल

गुरुवार, 6 अगस्त 2026

प्रक्रिया में छोटा-सा बदलाव ला सकता है बड़ा परिणाम

प्रक्रिया में छोटा-सा बदलाव ला सकता है बड़ा परिणाम

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एक सैलून का मालिक इस बात से बेहद परेशान था कि उसके यहाँ आने वाले ग्राहकों की संख्या लगातार कम होती जा रही थी। सैलून में वही कुशल स्टाफ था, दरें (Rates) भी वही थीं, फिर भी लोग क्यों नहीं आ रहे थे। यह उसकी समझ से बाहर था। पहले सैलून हमेशा भरा रहता था और लोग अपनी बारी का इंतज़ार भी करते थे, लेकिन अब इंतज़ार वाली कुर्सियाँ खाली पड़ी रहती थीं। अपनी चिंता महसूस करते हुए उसने यह समस्या अपने बेटे को बताई। बेटे ने शनिवार और रविवार—दो दिन सैलून में बैठकर स्थिति को गहराई से समझा और फिर एक छोटा-सा बदलाव किया। उसने दुकान के बाहर एक QR कोड लगा दिया, जिस पर लिखा था: "अपना नंबर बुक करने के लिए स्कैन करें और अपना मोबाइल नंबर एंटर करें। आपकी बारी आने से 15 मिनट पहले आपके पास संदेश आ जाएगा।"


पिता अचंभित थे, क्योंकि कुछ ही दिनों में सैलून में ग्राहकों की हलचल फिर से बढ़ने लगी। जब पिता ने बेटे को धन्यवाद देते हुए यह बात बताई, तो बेटे ने मुस्कुराकर कहा, "पापा, लोगों को अब बेवजह इंतज़ार करना पसंद नहीं है। वे सैलून में बैठकर अपना समय नहीं गँवाना चाहते थे, इसलिए मैंने सेवा में नहीं, केवल प्रक्रिया (Process) में एक छोटा-सा बदलाव कर दिया।"


यह प्रसंग इस सत्य को बहुत ही सरलता और प्रभाव के साथ रेखांकित करता है कि "समय परिवर्तनशील है और ग्राहकों की अपेक्षाएँ भी समय के साथ निरंतर बदलती रहती हैं।" व्यापार हो या दैनिक जीवन, कई बार सेवा की गुणवत्ता और मूल्य स्थिर रहने के बावजूद लोगों का रुझान कम होने लगता है। इसका कारण यह नहीं होता कि योग्यता या उत्पाद में कमी आई है, बल्कि यह होता है कि समाज की प्राथमिकताएँ और समय बिताने का तरीका बदल चुका है।


इस कथा से तीन मुख्य जीवन-सूत्र निकलकर आते हैं -


1. समय की कीमत का सम्मान - आधुनिक जीवनशैली में 'समय' सबसे बहुमूल्य संपत्ति है। ग्राहक को गुणवत्ता के साथ-साथ उसके समय की बचत भी चाहिए। यहाँ सेवा नहीं बदली, केवल ग्राहक का मूल्यवान समय बचाया गया—और यही सफलता का आधार बना।


2. नई सोच और तकनीक का समावेश - जब पारंपरिक पद्धतियाँ निष्प्रभावी होने लगें, तो नई पीढ़ी का नज़रिया और आधुनिक तकनीक (जैसे डिजिटल बुकिंग या QR कोड) किसी भी व्यवस्था में नई ऊर्जा फूँक सकते हैं।


3. सूक्ष्म प्रक्रियात्मक सुधार (Micro Process Optimization) - समस्या अक्सर हमारे हुनर या मंशा में नहीं, बल्कि 'काम करने के तरीक़े' में छिपी होती है। सही दिशा में किया गया एक छोटा-सा सुधार भी व्यापक और दूरगामी परिणाम दे सकता है।


सादर,

केशव राम सिंघल 


मंगलवार, 4 अगस्त 2026

कार्यस्थल पर सामाजिक जवाबदेही पर एक भारतीय मानक

कार्यस्थल पर सामाजिक जवाबदेही पर एक भारतीय मानक  

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IS 16001:2012 एक महत्वपूर्ण भारतीय मानक (Indian Standard) है, जिसके बारे में अधिकांश HR पेशेवरों को अभी भी पूरी जानकारी नहीं है। इस मानक का शीर्षक है — “कार्यस्थल पर सामाजिक जवाबदेही — अपेक्षाएँ” (Social Accountability at the Work Place — Requirements)। इसे भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने प्रकाशित किया है। इस मानक को सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी सेक्शनल कमेटी (MSD 10) ने 2012 में जारी किया था और 2018 में इसे पुनःपुष्टि (Reaffirmed) किया गया है।


उद्देश्य और कार्य-क्षेत्र


इस मानक का उद्देश्य संगठन को निम्नलिखित के योग्य बनाना है -


- कार्यस्थल पर तथा अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में सामाजिक जवाबदेही संबंधी नीतियाँ, कार्यविधियाँ और प्रथाएँ स्थापित करना, बनाए रखना और लागू करना।

- यह प्रदर्शित करना कि बनाई गई नीतियाँ, कार्यविधियाँ और प्रथाएँ लागू कानूनी, वैधानिक व विनियामक अपेक्षाओं, संगठन-विशिष्ट अपेक्षाओं तथा इस मानक की अपेक्षाओं के अनुरूप हैं।


यह मानक सभी प्रकार के संगठनों पर लागू होता है — चाहे उनका आकार, प्रकार, स्वामित्व या भौगोलिक स्थान कुछ भी हो। व्यावसायिक संस्थाएँ, सरकारी संगठन, शैक्षणिक संस्थान, NGO, ट्रस्ट, सोसायटी, सहकारी समितियाँ आदि इसे अपना सकते हैं।


यह एक प्रमाणन योग्य प्रबंधन प्रणाली मानक है। यह कार्यस्थल पर अच्छे व्यवहारों को बढ़ावा देने के लिए व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाता है, जो अक्सर सामान्य कानूनी अनुपालन से आगे जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों की सामाजिक-आर्थिक भलाई की रक्षा करना और उसे बढ़ाना, काम करने की स्थितियों को बेहतर बनाना, नैतिक प्रथाओं का समर्थन करना तथा भारतीय श्रम कानूनों व संबंधित अधिनियमों का पूरक बनना है।


मानक की मुख्य संरचना


इस मानक के प्रमुख संरचनात्मक तत्व निम्नलिखित हैं -


* प्रबंधन प्रणाली और दस्तावेजीकरण

* प्रबंधन की जिम्मेदारी

* संसाधन प्रबंधन

* मूल तत्व (Core Elements)

* कार्यान्वयन, निगरानी, मापन और निरंतर सुधार

* संबंधित भारतीय अधिनियमों, नियमों और विनियमों की सूची वाला परिशिष्ट (Annex)


11 मूल तत्व (Core Elements)


मानक में वर्णित 11 मूल तत्व इस प्रकार हैं -


(1) बाल मज़दूरी (Child Labour)

(2) सामुदायिक जुड़ाव (Community Engagement)

(3) भेदभाव (Discrimination)

(4) अपनी मर्जी से चुना गया रोज़गार (Employment Freely Chosen)

(5) रोज़गार संबंध (Employment Relationship)

(6) कर्मचारियों के कल्याण के उपाय (Employees’ Welfare Measures)

(7) संगठित होने की आज़ादी (Freedom of Association)

(8) कार्यस्थल पर स्वास्थ्य और सुरक्षा (Health and Safety at the Workplace)

(9) उत्पीड़न, दुर्व्यवहार और अमानवीय व्यवहार (Harassment, Abuse and Inhuman Treatment)

(10) वेतन और लाभ (Wages and Benefits)

(11) काम के घंटे (Working Hours)


मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) से संबंध


यह मानक मानव संसाधन, कर्मचारियों और श्रम प्रथाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। हालाँकि इसे शुद्ध रूप से “मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली” मानक के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक जवाबदेही / कार्यस्थल सामाजिक उत्तरदायित्व मानक के रूप में विकसित किया गया है।


यह कार्यस्थल की स्थितियों, कर्मचारियों के अधिकारों, नैतिक व्यवहार, कल्याण और श्रम कानूनों के पालन के संबंध में कर्मचारियों, हितधारकों और समाज के प्रति संगठन की जवाबदेही पर केंद्रित है। इसे लागू करने से भर्ती व रोज़गार प्रथाएँ, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, भेदभाव-मुक्त वातावरण, काम के घंटे व वेतन, कर्मचारी कल्याण, संगठित होने की स्वतंत्रता तथा संबंधित नीति व निगरानी जैसे क्षेत्रों में HR कार्यों को मज़बूत सहायता मिलती है।


यह ISO 30201 जैसा आधुनिक HR प्रबंधन प्रणाली मानक नहीं है। इसके बजाय यह कार्यस्थल पर सामाजिक/नैतिक जवाबदेही और श्रम अधिकारों के अनुपालन पर विशेष ज़ोर देता है। इसी कारण यह HR, अनुपालन (Compliance), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और स्थिरता (Sustainability) कार्यों के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। अधिक जानकारी के लिए मानक का अध्ययन करना बेहतर है, जिसे भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards) से प्राप्त किया जा सकता है।


संक्षेप में, IS 16001:2012 संगठनों को सामाजिक रूप से उत्तरदायी कार्यस्थल प्रथाओं को व्यवस्थित रूप से प्रबंधित करने और प्रदर्शित करने के लिए एक संरचित तथा प्रमाणन योग्य ढाँचा प्रदान करता है।


सादर,

केशव राम सिंघल 

HR = Human resources = मानव संसाधन