प्रत्यायन (Accreditation)
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प्रत्यायन (Accreditation) एक स्वतंत्र, तीसरे पक्ष (Third Party) की औपचारिक मान्यता (Formal Recognition) है, जिसके द्वारा यह पुष्टि की जाती है कि कोई अनुरूपता मूल्यांकन निकाय (Conformity Assessment Body—CAB) अपने निर्धारित कार्य को संबंधित मानकों के अनुसार सक्षम, निष्पक्ष और विश्वसनीय तरीके से करने में सक्षम है। प्रत्यायन विश्वास की वह नींव है, जो सुनिश्चित करती है कि जाँच करने वाली संस्थाएँ सक्षम, निष्पक्ष और भरोसेमंद हैं। सरल भाषा में कहें तो प्रमाणन (Certification) किसी संगठन की प्रबंधन प्रणाली या किसी निर्धारित अपेक्षाओं की अनुरूपता का मूल्यांकन है, जबकि प्रत्यायन उस अनुरूपता मूल्यांकन करने वाली संस्था की क्षमता और विश्वसनीयता का मूल्यांकन है। इसलिए इसे सरल रूप में “जाँच करने वालों की जाँच” भी कहा जा सकता है।
प्रत्यायन किसे दिया जाता है?
प्रत्यायन सामान्यतः अनुरूपता मूल्यांकन निकायों (Conformity Assessment Bodies—CABs) को दिया जाता है। इनमें परीक्षण एवं अंशशोधन प्रयोगशालाएँ (Testing and Calibration Laboratories), चिकित्सा प्रयोगशालाएँ, प्रमाणन निकाय (Certification Bodies), निरीक्षण निकाय (Inspection Bodies), Validation and Verification Bodies आदि शामिल हो सकते हैं। भारत में NABL (National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories) विभिन्न प्रकार की प्रयोगशालाओं और अन्य निर्धारित अनुरूपता मूल्यांकन निकायों (Conformity assessment bodies) को प्रत्यायन प्रदान करता है। NABL का प्रत्यायन तंत्र ISO/IEC 17011 की अपेक्षाओं के अनुरूप स्थापित है। इसी प्रकार NABCB (National Accreditation Board for Certification Bodies) प्रमाणन निकायों, निरीक्षण निकायों तथा अन्य निर्धारित अनुरूपता मूल्यांकन गतिविधियों (Conformity assessment activities) के लिए प्रत्यायन प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, NABCB निरीक्षण निकायों का प्रत्यायन ISO/IEC 17020 के अनुसार करता है।
यहाँ एक महत्वपूर्ण बात समझना आवश्यक है—ISO/IEC 17011 प्रत्यायन निकाय (Accreditation Body) के लिए अपेक्षाओं का मानक है, जबकि जिस CAB को प्रत्यायन दिया जाता है, उसके कार्य के अनुसार संबंधित मानक लागू होता है।
प्रमाणन (Certification) और प्रत्यायन (Accreditation) में अंतर
मान लीजिए कोई संगठन ISO 9001 मानक के अनुसार गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (QMS) लागू करता है। वह संगठन प्रमाणन निकाय (Certification body) से ऑडिट करवा कर ISO 9001 प्रमाणन लेता है, यह प्रमाणन (Certification) है। अब यदि वही प्रमाणन निकाय (Certification Body) स्वयं किसी मान्यता प्राप्त प्रत्यायन निकाय (Accreditation Body), जैसे NABCB, से यह मान्यता प्राप्त करती है कि वह संबंधित क्षेत्र में प्रमाणन गतिविधियाँ करने के लिए सक्षम, निष्पक्ष और निर्धारित अपेक्षाओं के अनुरूप है, तो यह प्रत्यायन (Accreditation) है। इसीलिए प्रमाणन और प्रत्यायन दो अलग-अलग स्तर की व्यवस्थाएँ हैं।
प्रमाणन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता
प्रमाणन की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता के पीछे प्रत्यायन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सामान्य व्यवस्था को इस प्रकार समझ सकते हैं। एक संगठन प्रत्यातित प्रमाणन निकाय (Accredited Certification Body) से प्रमाणन लेती है और इस प्रमाणन निकाय ने राष्ट्रीय प्रत्यायन निकाय (National Accreditation Body) से प्रत्यायन ले रखा है और यह राष्ट्रीय प्रत्यायन निकाय Global ACI MRA का Signatory है तो प्रत्यातित प्रमाणन निकाय का प्रमाणन अन्य देशों में भी मान्य है। यहाँ यह बताना है कि 1 जनवरी 2026 से Global Accreditation Cooperation Incorporated (Global ACI) ने International Accreditation Forum (IAF) और International Laboratory Accreditation Cooperation (ILAC) के कार्यों को एकीकृत करते हुए अपना Multilateral Recognition Arrangement (MRA) शुरू किया है। इससे विभिन्न देशों में मान्यता प्राप्त Conformity assessment results और certificates की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता के लिए एकीकृत व्यवस्था विकसित हुई है।
प्रत्यायन से—
* नियामकों, ग्राहकों और खरीददारों को CAB की तकनीकी क्षमता और निष्पक्षता पर विश्वास मिलता है।
* परीक्षण रिपोर्ट, निरीक्षण रिपोर्ट और प्रमाणपत्रों की विश्वसनीयता बढ़ती है।
* गलत, कमजोर या अपर्याप्त अनुरूपता मूल्यांकन का जोखिम कम होता है।
* अंतरराष्ट्रीय व्यापार में तकनीकी बाधाओं को कम करने में सहायता मिलती है।
* विभिन्न देशों में मान्यता प्राप्त परीक्षण, निरीक्षण और प्रमाणन परिणामों की स्वीकार्यता को बढ़ावा मिलता है।
* सरकारों और नियामक संस्थाओं को विश्वसनीय conformity assessment infrastructure उपलब्ध होता है।
प्रत्यायन कोई स्थायी या बिना शर्त मिलने वाली मान्यता नहीं है। प्रत्यायन निकाय (Accreditation Body) द्वारा समय-समय पर निगरानी (Surveillance), पुनर्मूल्यांकन (Reassessment) और अन्य निर्धारित मूल्यांकन किए जाते हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्यायित संस्था लगातार संबंधित अपेक्षाओं को को पूरा कर रही है।
इसके अतिरिक्त, प्रत्यायन हमेशा एक निश्चित प्रत्यायन के दायरे (Scope of Accreditation) के लिए होता है। किसी संस्था को केवल उन्हीं मानकों, गतिविधियों, क्षेत्रों, परीक्षणों, निरीक्षणों या प्रमाणन योजनाओं के लिए प्रत्यायन प्राप्त होता है जिनका मूल्यांकन उसके निर्धारित दायरे (Scope) के अंतर्गत किया गया है।
संक्षेप में हम कह सकते हैं कि प्रमाणन यह बताता है कि निर्धारित अपेक्षाओं की अनुरूपता का मूल्यांकन किया गया है, जबकि प्रत्यायन यह विश्वास प्रदान करता है कि वह मूल्यांकन करने वाली संस्था स्वयं निर्धारित अपेक्षाओं के अनुसार सक्षम और विश्वसनीय है। इस प्रकार प्रत्यायन गुणवत्ता अवसंरचना (Quality Infrastructure) की एक महत्वपूर्ण परत है, जो परीक्षण रिपोर्ट, निरीक्षण रिपोर्ट और प्रमाणपत्रों की विश्वसनीयता को मजबूत करती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी स्वीकार्यता में सहायता करती है।
किसी प्रबंधन प्रणाली के प्रमाणपत्र की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता के संदर्भ में यह देखना महत्वपूर्ण है कि Certificate जारी करने वाली प्रमाणन निकाय (Certification Body) प्रत्यायित है या नहीं, उसका प्रत्यायन दायरा (Accreditation scope) संबंधित प्रमाणन गतिविधि (Certification activity) को शामिल करता है या नहीं, और संबंधित प्रत्यायन निकाय (Accreditation Body) Global ACI की मान्यता व्यवस्था से जुड़ी है या नहीं।
सादर,
केशव राम सिंघल