शीर्ष प्रबंधन की सोच और गुणवत्ता के प्रति दृष्टिकोण
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एक दिन मुझे दो कंपनियों को देखने तथा उनके शीर्ष प्रबंधन से मिलने का अवसर मिला।
जब मैं पहली कंपनी में पहुँचा, तो मुझे बताया गया कि यह कंपनी ISO 9001:2015 प्रमाणित है। एक शीर्ष प्रबंधक के चैंबर में ISO प्रमाणन का प्रमाणपत्र दीवार पर टंगा हुआ भी दिखाई दिया। मैंने उनकी उत्पादन इकाइयों (Manufacturing Units) का दौरा किया। वहाँ मैंने देखा कि सुपरवाइजर्स (Supervisors) ऑपरेटर्स (Operators) की अत्यंत सतर्कता से निगरानी कर रहे थे। इंस्पेक्टर्स (Inspectors) तैयार माल (Finished Goods) की जाँच कर रहे थे। जैसे ही कोई कमी (Defect) पाई जाती, उस नॉन-कन्फॉर्मिंग उत्पाद (Nonconforming Product) को अलग कर दिया जाता। ऑपरेटर्स को चेतावनी (Warning) दी जाती तथा अच्छी तरह काम करने का दबाव डाला जाता। उत्पादन इकाई की दीवारों पर लक्ष्य स्पष्ट रूप से प्रदर्शित थे। उत्पादन तो हो रहा था, परंतु वातावरण में तनावपूर्ण खामोशी और दबाव का अनुभव हुआ।
इसके बाद मैं दूसरी कंपनी में गया। वहाँ शीर्ष प्रबंधन ने बताया कि उन्होंने अभी तक ISO मानकों के अनुपालन का कोई प्रमाणन (Certification) नहीं लिया है। हालाँकि वे ISO 9001:2015 तथा ISO 14001:2015 को कार्यान्वित करने की योजना बना रहे हैं और इसके लिए कुछ कर्मचारियों को प्रशिक्षण हेतु भेजा गया है। जब मैंने उनकी उत्पादन इकाइयों का निरीक्षण किया, तो पाया कि इस कंपनी में प्रक्रियाएँ (Processes) अत्यंत स्पष्ट रूप से परिभाषित थीं। दीवारों पर कार्य निर्देश (Work Instructions) लिखे हुए थे। समस्याओं पर खुले रूप से चर्चा हो रही थी और ऑपरेटर्स से सुझाव माँगे जा रहे थे कि प्रक्रिया को कैसे और बेहतर बनाया जा सकता है। यहाँ मुख्य ध्यान इस बात पर था कि प्रक्रियाएँ सही ढंग से चलें और यदि कोई कमी हो तो उसे पहचानकर सुधार किया जाए। जब मैंने यहाँ नॉन-कन्फॉर्मिंग उत्पादों के बारे में जानकारी माँगी, तो बताया गया कि प्रक्रियाओं की निरंतर निगरानी और सुधार के कारण यहाँ ऐसे उत्पाद बहुत कम होते हैं। और यदि कभी कोई नॉन-कन्फॉर्मिंग उत्पाद बन भी जाता है, तो ऑपरेटर्स और टीम मिलकर यह विचार करती है कि प्रक्रिया में कौन-सी कमी रही और उसे कैसे दूर किया जाए। इस कंपनी का वातावरण शांत, सकारात्मक और सहयोगपूर्ण लगा। यहाँ तनाव या भय का अनुभव नहीं हुआ।
मेरी राय में पहली कंपनी अधिक तनावग्रस्त और रक्षात्मक (Defensive) प्रतीत हुई, जबकि दूसरी कंपनी शांत, स्थिर (Stable) और सुधार-उन्मुख दिखाई दी। मुझे लगता है कि इन दोनों कंपनियों के बीच वास्तविक अंतर उनके शीर्ष प्रबंधन की सोच और गुणवत्ता के प्रति दृष्टिकोण में है। जहाँ पहली कंपनी प्रमाणन को लक्ष्य मानकर चल रही थी, वहीं दूसरी कंपनी लगातार सुधार (Continual Improvement) को गुणवत्ता संस्कृति (Quality Culture) बनाकर आगे बढ़ रही थी।
अनुभव आधारित सीख - प्रमाणन से अधिक महत्वपूर्ण है गुणवत्ता संस्कृति और लगातार सुधार।
सादर,
केशव राम सिंघल