गुणवत्ता प्रबंधन (Quality Management) में सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) एक सहायक उपकरण
— जोखिम-आधारित सोच के साथ एक संतुलित गुणवत्ता सुधार दृष्टिकोण
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प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe
मैं पिछले दिनों डॉ दिव्या सिंघल और क्रिस्टल फेर्रो की किंडल किताब 'Business for Good in Action - Celebrating AIM2Flourish Stories Through Appreciative Inquiry' पढ़ रहा था तो मेरे मन में यह विचार आया कि सराहनात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) किस तरह गुणवत्ता प्रबंधन के लिए सहायक हो सकता है। मैंने जाना कि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) एक सकारात्मक और सहभागी दृष्टिकोण है, जिसका उपयोग संगठन अपने विकास, परिवर्तन प्रबंधन (Change Management), टीम बनाने (Building Team) और अपने लोगों के व्यक्तिगत विकास के लिए करते हैं। यह समस्या-केंद्रित सोच (Problem-Focused Thinking) के बजाय सफलताओं, शक्तियों और संभावनाओं पर ध्यान देता है। यह अवधारणा डॉ. डेविड कूपरराइडर, जो Case Western Reserve University (USA) से संबद्ध रहे, ने 1980 के दशक में विकसित की और यह सिद्धांत उनके डॉक्टरेट शोध (PhD Dissertation) से निकला।
सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) का मूल विचार "समस्याओं को सुधारने के बजाय, जो अच्छा है उसे और बेहतर बनाया जाए" है। संक्षेप में चर्चा करें तो हम पाते हैं कि सराहात्मक अन्वेषण दृष्टिकोण के पाँच सिद्धांत हैं - (1) सकारात्मकता (Positivity) - सकारात्मक प्रश्न सकारात्मक ऊर्जा और समाधान उत्पन्न करते हैं। (2) निर्माणवादी (Constructivist) - हमारी बातचीत और भाषा हमारी वास्तविकता का निर्माण करती है। (3) समानांतरता (Simultaneity) - प्रश्न पूछते ही परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। (4) काव्यात्मकता (poeticism) - संगठन एक खुली किताब की तरह है—जिस अध्याय पर ध्यान देंगे, वही बढ़ेगा। (5) भविष्य दृष्टि - प्रत्याशित (Anticipatory) - भविष्य की सकारात्मक कल्पना वर्तमान कार्यों को दिशा देती है।
जब भी संगठन में सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) दृष्टिकोण काम में लाया जाता है तो उससे अनेक लाभ मिलते हैं। कर्मचारियों की भागीदारी (Involvement) और प्रेरणा (Motivation) बढ़ती है। नवाचार (Innovation) और रचनात्मकता (Creativity) को प्रोत्साहन मिलता है। सकारात्मक संगठनात्मक संस्कृति बनती है। परिवर्तन के प्रति प्रतिरोध कम होता है। नेतृत्व और टीमवर्क मजबूत होता है।
पारंपरिक तौर से हम अपने संगठन में प्रश्न पूछते हैं - “हमारी प्रक्रिया में क्या गलत है?” जबकि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) दृष्टिकोण अपनाने पर हम प्रश्न पूछते हैं - “कब हमारी प्रक्रिया सबसे अच्छी तरह काम करती है और क्यों?” इस प्रकार हम पाते हैं कि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) एक ऐसी सोच है जो कमियों पर नहीं, क्षमताओं पर आधारित होती है। यह गुणवत्ता, लीन, नवाचार, नेतृत्व और सतत सुधार की दिशा में अत्यंत प्रभावी दृष्टिकोण है।
हालाँकि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) लगातार सुधार की दिशा में प्रभावी दृष्टिकोण है, पर मेरे मन में यह विचार आया कि यह कमियों को नजरंदाज कर सकता है और इस प्रकार शायद यह सोच गुणवत्ता प्रबंधन के लिए लाभदायक न हो। वास्तव में गुणवत्ता प्रबंधन (Quality Management) में सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) तभी प्रभावी सिद्ध होती है जब उसका सही ढंग से उपयोग किया जाए। गुणवत्ता प्रबंधन में सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) के अनेक लाभ हैं, जिनकी मैं चर्चा करना चाहूँगा।
(1) सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) सकारात्मक गुणवत्ता संस्कृति के निर्माण में सहायक है। गुणवत्ता (Quality) केवल प्रक्रियाओं से नहीं, लोगों के दृष्टिकोण से आती है। सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) दोष खोजने की संस्कृति से हटाकर सीखने और सुधार की संस्कृति विकसित करती है। इससे भयमुक्त रिपोर्टिंग (Fear-free Reporting), सुझाव प्रणाली और सहभागिता बढ़ती है।
(2) सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) की पहचान और विस्तार में सहायक है। पारंपरिक आतंरिक संपरीक्षण (Internal Audit) में हम पता लगाते हैं कि गैर-अनुरूपता (Nonconformity) कहाँ हैं? सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) यह पता लगाता है कि कहाँ प्रक्रिया ने सर्वोत्तम परिणाम दिए? क्यों? गुणवत्ता प्रबंधन के लिए दोहराए जाने योग्य सर्वोत्तम प्रथाओं (Repeatable Best Practices) को पहचानने में सहायक है। साथ ही यह मानकीकरण और बेंचमार्किंग (Standardization and Benchmarking को सशक्त बनाता है।
(3) सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) लगातार सुधार (Continual Improvement को ऊर्जा देती है। आईएसओ 9001 गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली में लगातार सुधार (Continual Improvement) अपेक्षा (Requirement) है। इस प्रकार सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) सुधार को सुधारात्मक बोझ (Corrective Burden) नहीं, विकास का अवसर (Growth opportunity) देती है। कर्मचारी सुधार गतिविधियों में स्वेच्छा से जुड़ते हैं।
(4) सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) नेतृत्व (Leadership) और टीम की संलग्नता (Engagement of Team) में सहायक है। यह कर्मचारियों को समस्या स्रोत (Problem source) नहीं, समाधान भागीदार (Solution partner) मानती है। इससे कर्मचारियों में स्वामित्व (Ownership) की भावना बढ़ती है और संगठन में क्रॉस-फ़ंक्शनल गुणवत्ता सुधार (Cross-functional Quality Improvement ) संभव होता है।
(5) सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) परिवर्तन प्रबंधन (Change Management) में सहायक है। नए गुणवत्ता पहलों (Quality Initiatives) में यह प्रतिरोध (Resistance) कम करती है और बदलाव को सफल अनुभवों की निरंतरता के रूप में प्रस्तुत करती है।
इतना सब कुछ समझने के बाद आपकी चिंता यह हो सकती है कि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) कमियों को नजरअंदाज कर सकता है। हाँ, यदि इसे गलत समझा जाए। यह इस दृष्टिकोण की कमजोरी नहीं, गलत उपयोग का जोखिम है। इस दृष्टिकोण के अपनाने के संभावित जोखिम के तहत महत्वपूर्ण असंगतियाँ महत्वपूर्ण गैर-अनुरूपता (Critical Nonconformity) अनदेखी रह सकती है, मूल कारण विश्लेषण (Root Cause Analysis) कमजोर पड़ सकता है, नियामक (Regulatory) और ग्राहक (Customer) अपेक्षाओं (Requirements) की पालना में कमी रह सकती है। यह ध्यान में रखा जाना चाहिए सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) को अकेले इस्तेमाल करना खतरनाक हो सकता है। इसलिए समाधान यह है कि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) और जोखिम आधारित सोच (Risk-based Thinking) को एक साथ अपनाकर संतुलित गुणवत्ता सुधार मॉडल (Balanced Quality Improvement Model) बनाया जाए। आईएसओ 9001:2015 मानक में भी जोखिम आधारित सोच (Risk-based thinking) एक अपेक्षा (Requirement) है। इसलिए सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) को इस तरह प्रयोग करना चाहिए कि सकारात्मक फ्रेमिंग (Positive Framing) के साथ अंतर विश्लेषण (Gap Analysis) किया जाए। उदाहरण के लिए, यहाँ क्या गलत है? कब यह प्रक्रिया बिना दोष के चली और क्यों? फिर उसी से अंतर (Gap) और जोखिम (Risk) पहचान सकते हैं।
सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) को पीडीसीए चक्र (PDCA Cycle) में समाहित किया जा सकता है। पी अर्थात आयोजना (Plan) के अंतर्गत ताकत, सफल अनुभव और अवसर देखें, डी के अंतर्गत प्रेरित क्रियान्वयन करें, सी के अंतर्गत आंकड़े जाँचे, संपरीक्षण करें और अपालना चेक करें और ए के अंतर्गत सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) आधारित सुधार और मानकीकरण करें। सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) का अर्थ यह नहीं है कि गैर-अनुरूपताओं (Nonconformities) का पता न लगाया जाए बल्कि संपरीक्षण निष्कर्ष (Audit Findings) को सीखने के अवसर के रूप में लिया जाए और दोषमुक्त (Blamefree) मूल कारण विश्लेषण (Root Cause Analysis) किया जाए।
यदि हम गुणवत्ता प्रबंधन में सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) का सही स्थान खोजें तो पाते हैं कि यह संस्कृति निर्माण (Culture building), कर्मचारी सहभागिता (Employee engagement), उत्कर्ष प्रथाओं को साझा करने (Best practice sharing), नवाचार और निरंतर सुधार (Innovation and Continual Improvement) के लिए अत्यंत प्रभावी है। साथ ही हम यह भी पाते हैं कि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) की भूमिका विनियामक अनुपालन (Regulatory compliance), सुरक्षा सम्बंधित प्रक्रियाओं (Safety-critical processes), कानूनी और वैधानिक अंतराल (Legal and statutory gaps) तथा गंभीर गैर-अनुरूपता से निपटना (Serious Nonconformity handling) के लिए सीमित है। हमें यह भली प्रकार समझ लेना चाहिए कि सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) गुणवत्ता प्रबंधन (Quality Management) के लिए अत्यंत उपयोगी है, लेकिन यह दोष पहचान (Defect Identification) का विकल्प नहीं है। इसके लिए सही दृष्टिकोण यही होगा कि कामों को सुधारने के लिए समस्या देखे, सुधार करें और सुधार को टिकाऊ बनाने के लिए शक्तियों को पहचाने।
सार
सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) गुणवत्ता प्रबंधन (Quality Management) को मानवीय, सहभागी और प्रेरणादायी बनाता है। यह दोष पहचान का विकल्प नहीं, बल्कि उसे संतुलित और टिकाऊ सुधार में बदलने का माध्यम है। जोखिम-आधारित सोच और पीडीसीए चक्र के साथ इसका समन्वय संगठन को सीखने वाली संस्था (Learning Organization) की ओर ले जाता है। सही उपयोग के साथ सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) गुणवत्ता संस्कृति, नवाचार और निरंतर सुधार का सशक्त आधार बन सकता है।
सादर,
केशव राम सिंघल
अगला लेख - गुणवत्ता प्रबंधन (Quality Management) में सराहात्मक अन्वेषण (Appreciative Inquiry) लागू करने के लिए चरण-दर-चरण (Step-by-Step) कार्यान्वयन मॉडल
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