सोमवार, 2 नवंबर 2026

अनुभवात्मक अधिगम चक्र (Experiential Learning Cycle)

अनुभवात्मक अधिगम चक्र (Experiential Learning Cycle) 

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इस आलेख में हम अनुभवात्मक अधिगम चक्र की चर्चा करेंगे। इस चक्र का मूल सिद्धांत है कि व्यक्ति केवल पढ़कर या सुनकर ही नहीं, बल्कि स्वयं किसी गतिविधि को करके, उसके अनुभवों पर विचार करके और उनसे सीख लेकर अधिक प्रभावी ढंग से सीखता है। इस चक्र में सीखने की प्रक्रिया के पाँच क्रमिक चरण हैं। यह एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें प्राप्त सीख का उपयोग नए अनुभवों में किया जाता है। इस चक्र को निम्न चित्र के माध्यम से समझा जा सकता है।










अनुभवात्मक अधिगम चक्र के पाँच चरण

1. अनुभव प्राप्त करना (Experience) - किसी गतिविधि को स्वयं करना या उसमें भाग लेना। इसमें व्यक्ति प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करता है। उदाहरण: किसी कर्मचारी को किसी नई मशीन पर काम करने का अवसर देना।

2.  अनुभव साझा करना (Share) - गतिविधि के दौरान प्राप्त प्रतिक्रियाओं, अनुभवों और अवलोकनों को दूसरों के साथ साझा करना। उदाहरण: जब किसी कर्मचारी को किसी नई मशीन पर काम करने का अवसर दिया जाए तो कर्मचारी यह बताए कि मशीन चलाते समय उसे क्या अच्छा लगा और किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

3.  अनुभव का विश्लेषण करना (Process) - प्राप्त अनुभवों का विश्लेषण करना और यह समझना कि क्या हुआ, क्यों हुआ तथा उसके पीछे क्या कारण थे। उदाहरण: मशीन चलाने में हुई गलतियों, उनके कारणों और सुधार की संभावनाओं का विश्लेषण करना।

4.  सामान्य निष्कर्ष निकालना (Generalize) - व्यक्तिगत अनुभवों से सामान्य सीख प्राप्त करना तथा उन्हें वास्तविक जीवन या कार्यस्थल की अन्य परिस्थितियों से जोड़ना। उदाहरण: यह निष्कर्ष निकालना कि मशीन का सुरक्षित और प्रभावी संचालन करने के लिए उचित प्रशिक्षण, निर्देशों का पालन और नियमित रखरखाव आवश्यक है।

5. व्यवहार में लागू करना (Apply) - सीखी गई बातों का उपयोग करना अर्थात् प्राप्त ज्ञान और सीख को समान या अलग परिस्थितियों में लागू करना तथा अभ्यास के माध्यम से दक्षता विकसित करना। उदाहरण: कर्मचारी सीखी गई बातों का उपयोग दूसरी मशीन पर काम करते समय भी करें।

सीखने के तीन प्रमुख पहलू

सीखने के तीन महत्वपूर्ण पहलू निम्न हैं - 

(1) पहला पहलू - करना (Do) - स्वयं गतिविधि करना और अनुभव प्राप्त करना। 

(2) दूसरा पहलू  - विचार करना (Reflect) - अनुभव पर विचार करना और उसका विश्लेषण करना। 

(3) तीसरा पहलू - लागू करना (Apply) - प्राप्त सीख को व्यवहार में लागू करना। 

ये तीनों पहलू एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। केवल गतिविधि करना पर्याप्त नहीं है। अनुभव पर विचार करना और उससे प्राप्त सीख को लागू करना भी आवश्यक है।

ISO 9001:2026 QMS के संदर्भ में इस चक्र की उपयोगिता

यह चक्र गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (QMS) के विकास और प्रभावी क्रियान्वयन में विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है।

उदाहरण के लिए, किसी संगठन में आंतरिक ऑडिटरों को प्रशिक्षित करने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है।

1. अनुभव प्राप्त करना (Experience) - प्रशिक्षुओं को वास्तविक या अनुकरणात्मक आंतरिक ऑडिट करने का अवसर देना।

2. अनुभव साझा करना (Share) - ऑडिट के दौरान प्राप्त अनुभव और अवलोकन साझा करना।

3. अनुभव का विश्लेषण करना (Process) - ऑडिट में सामने आई कठिनाइयों और त्रुटियों का विश्लेषण करना।

4. सामान्य निष्कर्ष निकालना (Generalize) - प्रभावी ऑडिट के लिए आवश्यक सिद्धांतों और अच्छी कार्यप्रणालियों की पहचान करना।

5. व्यवहार में लागू करना (Apply) - अगली ऑडिट गतिविधि में सीखी गई बातों को लागू करना।

इस प्रकार अनुभवात्मक अधिगम चक्र के पाँच चरणों को अपनाकर प्रशिक्षण केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कार्यस्थल पर व्यावहारिक दक्षता विकसित करने में सहायता करता है।

चक्र का मूल संदेश

करके सीखना → अनुभव साझा करना → विश्लेषण करना → निष्कर्ष निकालना → व्यवहार में लागू करना।

मेरे विचार से इस चक्र की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह सीखने को एक बार की गतिविधि न मानकर निरंतर सुधार (Continual improvement) की प्रक्रिया बनाता है। इस चक्र को ISO 9001 के PDCA Cycle (Plan–Do–Check–Act) से भी जोड़ा जा सकता है। दोनों में अनुभव, मूल्यांकन, सीख और सुधार के माध्यम से बेहतर परिणाम प्राप्त करने की अवधारणा समान रूप से महत्वपूर्ण है। हालांकि दोनों चक्रों का उद्देश्य और संरचना अलग है। अनुभवात्मक अधिगम चक्र व्यक्तिगत और सामूहिक सीखने को प्रोत्साहित करता है, जबकि PDCA संगठनात्मक प्रक्रियाओं के प्रबंधन और सुधार का एक व्यवस्थित दृष्टिकोण है।

निरंतर सुधार के लिए पूरक चरण  

मुझे मुंबई के डॉ संतोष राणे का एक महत्त्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुआ, जिसके अनुसार हम अनुभवात्मक अधिगम चक्र से प्राप्त सीख को संगठनात्मक स्तर पर  निरंतर सुधार (Continual improvement) के लिए निम्न तीन चरणों से जोड़ सकते हैं: 

1. मानकीकरण करना (Standardise): सफल अनुभवों और बेहतर कार्यप्रणालियों को मानक प्रक्रिया के रूप में अपनाना।

2. वर्तमान कार्यप्रणाली को चुनौती देना (Challenge the Status Quo): स्थापित कार्यप्रणाली पर पुनर्विचार करना तथा सुधार की नई संभावनाएँ तलाशना।

3. और अधिक सुधार करना (Improve Further): पहचानी गई सुधार संभावनाओं को लागू करना और बेहतर परिणाम प्राप्त करना।

ये तीन अतिरिक्त चरण अनुभवात्मक अधिगम चक्र के मूल पाँच चरणों का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि उनसे प्राप्त सीख को संस्थागत बनाने और निरंतर सुधार को प्रोत्साहित करने वाले पूरक चरण हैं। इस प्रकार अनुभवात्मक सीख (Experiential Learning) से आगे बढ़कर संगठनात्मक सीख (Organizational Learning) और निरंतर सुधार (Continual Improvement) की अवधारणा भी समाहित हो सकेगी।

सादर, 

केशव राम सिंघल