गुरुवार, 28 मई 2026

ISO 19011:2026 मानक जारी - ऑडिटिंग के एक नए युग की शुरुआत

ISO 19011:2026 मानक जारी - ऑडिटिंग के एक नए युग की शुरुआत

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प्रतीकात्मक चित्र 


ISO 19011:2026 मानक आधिकारिक रूप से प्रकाशित हो चुका है। ISO के आधिकारिक लिंक पर अब इसकी स्थिति 'Published' (प्रकाशित) दर्शा रही है।


इस संशोधित मानक के प्रकाशन के साथ ही ऑडिटिंग की दुनिया में एक नए युग की शुरुआत हो गई है, जहाँ पारंपरिक ऑडिटिंग के तरीकों को पूरी तरह से आधुनिक और डिजिटल अपेक्षाओं के अनुरूप ढाल दिया गया है।


चूँकि अब यह मानक आधिकारिक रूप से लागू हो गया है, संगठनों और ऑडिटर्स के लिए ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बातें निम्नलिखित हैं - 


- मानक की प्रति - अब संगठन और ऑडिटर्स ISO Store से इस नए मानक (ISO 19011:2026) की प्रति प्राप्त कर सकते हैं और इसके विस्तृत दिशा-निर्देशों का अध्ययन कर सकते हैं।


- परिवर्तन काल (Transition Period) - संक्रमण काल की शुरुआत हो चुकी है। यद्यपि इसकी समय-सीमा 3 वर्ष की है, लेकिन विशेषज्ञों की सलाह है कि संगठनों को पहले वर्ष (यानी अगले 12 महीनों) के भीतर ही अपनी आंतरिक ऑडिट टीमों को प्रशिक्षित करना और नई गाइडलाइंस लागू करना शुरू कर देना चाहिए। इससे रिमोट और तकनीक-आधारित ऑडिट को डिज़ाइन करने में आपकी टीम को पर्याप्त अनुभव मिल जाएगा।


- ऑडिटर्स के लिए अपग्रेड - ऑडिटर्स के लिए अब ISO 19011:2018 से ISO 19011:2026 ब्रिजिंग कोर्स प्रासंगिक हो गए हैं, ताकि वे नए नियमों—विशेष रूप से रिमोट और हाइब्रिड ऑडिटिंग के लाइफसाइकिल डिज़ाइन, आईसीटी (ICT) सक्षमता और सूचना सुरक्षा से जुड़े बदलावों को समझकर खुद को अपग्रेड कर सकें।


- रिमोट ऑडिटिंग की अनिवार्यता - इस प्रकाशन के साथ अब रिमोट ऑडिटिंग केवल एक वैकल्पिक टूल नहीं रह गया है, बल्कि ऑडिट प्रोग्राम के योजना चरण (Planning Stage) से ही इसे एक मुख्य पद्धति के रूप में शामिल करना अनिवार्य हो गया है।


यह मानक मुख्य रूप से निम्नलिखित 13 प्रबंध प्रणालियों के ऑडिट के लिए अत्यंत उपयुक्त और प्रभावी है -


ISO 9001 (Quality)

ISO 14001 (Environment)

ISO 45001 (Health & Safety)

ISO/IEC 27001 (Information Security)

ISO 22301 (Business Continuity)

ISO/IEC 20000-1 (IT Service)

ISO/IEC 42001 (Artificial Intelligence)

ISO 22000 (Food Safety)

ISO 13485 (Medical Devices)

ISO 50001 (Energy)

ISO 37001 (Anti-Bribery)

ISO 41001 (Facility Management) 

ISO 10012:2026 (Measurement)  


प्रबंधन प्रणाली ऑडिटिंग से जुड़े प्रोफेशनल्स को अब तुरंत इस नए संस्करण को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा देना चाहिए।


सादर,

केशव राम सिंघल

मंगलवार, 26 मई 2026

ISO/FDIS 9001:2026 जारी

ISO/FDIS 9001:2026 जारी 

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अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (ISO) ने इसी माह ISO/FDIS 9001:2026 को अंतिम मतदान (Ballot) और समीक्षा के लिए जारी कर दिया है। इसके बाद, मुख्य मानक ISO 9001:2026 का अंतिम प्रकाशन सितंबर 2026 में अपेक्षित है।


हालाँकि, ISO/FDIS 9001:2026 का ड्राफ्ट सार्वजनिक रूप से मुफ्त उपलब्ध नहीं है और इसे केवल ISO स्टोर से खरीदा जा सकता है। फिर भी, इस ड्राफ्ट के आधार पर कुछ प्रमुख प्रमाणन निकायों (जैसे BSI, DQS, BV आदि) ने मुफ्त श्वेतपत्र (Whitepapers) और तुलनात्मक दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनमें FDIS के प्रमुख बदलावों का खंड-दर-खंड (Clause-by-Clause) विश्लेषण दिया गया है, जिसका मुख्य सार निम्नलिखित है -


1. खंड 4 (Context of the Organization) - इसके अंतर्गत पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को संगठन के संदर्भ में देखना अनिवार्य होगा। अब संगठनों को अपनी जोखिम रूपरेखा (Risk Profile) में पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासनिक (ESG) पहलुओं को शामिल करना होगा।


2. खंड 5 (Leadership) - संगठन में गुणवत्ता संस्कृति (Quality Culture) और नैतिक व्यवहार को बढ़ावा देना अब पूरी तरह से नेतृत्व की जिम्मेदारी होगी। ऑडिटर्स केवल प्रलेखित गुणवत्ता नीति (Quality Policy) ही नहीं देखेंगे, बल्कि यह भी जाँचेंगे कि कर्मचारियों का व्यावहारिक व्यवहार गुणवत्ता और नैतिकता के अनुरूप है या नहीं।


3. खंड 6 (Planning) - नए संशोधन में 'जोखिम' (Risks) और 'अवसर' (Opportunities) को अलग-अलग उपखंडों में स्पष्ट किया गया है। संगठनों को इन दोनों को ही संबोधित (Address) करना होगा। इस प्रकार, अब 'जोखिम-आधारित सोच' (Risk-based Thinking) के साथ-साथ 'अवसर-आधारित सोच' (Opportunity-based Thinking) के लिए भी एक मजबूत ढाँचा तैयार करना होगा।


4. खंड 7 (Support) - कर्मचारियों के प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों में गुणवत्ता नीति के साथ-साथ संगठन की संस्कृति (Culture) और नैतिकता (Ethics) को भी अनिवार्य रूप से शामिल करना होगा। इसके परिणामस्वरूप संगठनों को अपनी मौजूदा प्रशिक्षण कार्ययोजना में बदलाव करना होगा।


5. नया अनुलग्नक (Annex) - इस बार 15 पृष्ठों का एक विस्तृत मार्गदर्शी अनुलग्नक जोड़ा गया है, जो खंड 4 से 10 तक की अपेक्षाओं (Requirements) की व्याख्या करता है। यह अनुलग्नक उपयोगकर्ताओं के लिए मानकों को समझने में बेहद लाभकारी सिद्ध होगा और ऑडिटर्स व संगठनों के बीच व्याख्या (Interpretation) के मतभेदों को काफी हद तक कम करेगा।


यदि आगामी प्रक्रियाएँ सुचारू रूप से चलती रहीं, तो गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली का यह बहुप्रतीक्षित और संशोधित मानक ISO 9001:2026 सितंबर 2026 में हमारे सामने होगा।


सादर,

केशव राम सिंघल 


सोमवार, 18 मई 2026

ISO 9001:2026 QMS के FDIS की वर्तमान स्थिति

ISO 9001:2026 QMS के FDIS की वर्तमान स्थिति 

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प्रतीकात्मक चित्र साभार जैमिनी गूगल


ISO 9001:2026 QMS के FDIS (Final Draft International Standard) की वर्तमान स्थिति निम्न प्रकार है -


* तकनीकी सहमति - फरवरी 2026 में मेक्सिको सिटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की बैठक में, मानक के मुख्य खण्डों (Clauses 1 से 10) की अपेक्षाओं पर पूर्ण सहमति (Consensus) बन चुकी है।

* सुझावों का संकलन - ड्राफ्ट इंटरनेशनल स्टैंडर्ड (DIS) को दिसंबर 2025 में सदस्य देशों द्वारा 97% की सहमति से मंजूरी मिलने के बाद, दुनिया भर से मिले सुझावों (Comments) को संकलित कर लिया गया है। वर्तमान में वर्किंग ग्रुप अंतिम सूचनात्मक भागों (Informative text) और 'Annex A' को अंतिम रूप देने पर कार्य कर रहा है।

* FDIS का प्रकाशन - ISO/FDIS 9001 QMS का फाइनल ड्राफ्ट मतदान के लिए जून 2026 तक आधिकारिक रूप से जारी (Publish) होने की उम्मीद है।


संभावित समयबद्धता (Timeline)


आगामी चरणों के लिए निम्नलिखित समयसीमा तय की गई है -


* जून 2026 - FDIS (Final Draft) का प्रकाशन और अंतिम मतदान का प्रारम्भ।

* सितंबर 2026 - संशोधित मानक ISO 9001:2026 QMS का आधिकारिक अंतिम प्रकाशन (Official Release)।

* सितंबर 2026 से अगस्त 2027 - इस अवधि में सर्टिफिकेशन बॉडीज (CBs) नए मानक के अनुसार ऑडिट करने के लिए खुद को प्रशिक्षित करेंगी और मान्यता (Accreditation) प्राप्त करने की कार्रवाई पूरी करेंगी।

* अगस्त 2027 - मानक के संशोधित संस्करण ISO 9001:2026 के तहत पहले प्रमाणीकरण (Certification) जारी होना शुरू होने की संभावना है।

* सितंबर 2029 - 3 वर्ष का ट्रांजिशन पीरियड (Transition Period) समाप्त होने पर मानक का वर्तमान संस्करण ISO 9001:2015 QMS पूरी तरह से निष्प्रभावी (Retire) हो जाएगा।


नए मानक में संभावित बदलाव 


यह प्रश्न इस क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों के मन में है कि नए मानक में किन बदलावों की आशा की जाए। हालाँकि अंतिम मानक का प्रकाशन सितम्बर 2026 में अपेक्षित होने के कारण अभी कुछ भी निश्चित कहना जल्दबाजी होगी, फिर भी विशेषज्ञों के अनुसार ISO 9001:2026 QMS में होने वाले संशोधन 'क्रांतिकारी' न होकर एक 'विकासवादी' (Evolutionary) बदलाव होंगे। इसका कोर हाई-लेवल स्ट्रक्चर (HLS) यथावत रहेगा। निम्नलिखित महत्वपूर्ण बदलाव आने की प्रबल संभावना है:


* खण्ड 4 (Context of the Organization) - इसमें जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और स्थिरता (Sustainability) के संदर्भ को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाएगा, जो कि 2024 के संशोधन (Amendment) में भी देखा गया था।

* खण्ड 5 (Leadership) - शीर्ष प्रबंधन (Top Management) के लिए संगठन में गुणवत्ता संस्कृति (Quality Culture) और नैतिक व्यवहार (Ethical Behaviour) को बढ़ावा देना तथा प्रदर्शित करना अनिवार्य (Mandatory) कर दिया जाएगा।

* खण्ड 6 (Risk and Opportunity) - जोखिम (Risk) और अवसर (Opportunity) के प्रबंधन को अधिक स्पष्टता प्रदान की जाएगी, जिससे 'अवसर-आधारित सोच' (Opportunity-based thinking) को बढ़ावा मिले।

* खण्ड 7 (Support) - कर्मचारियों की जागरूकता (Awareness) के दायरे में अब गुणवत्ता संस्कृति और व्यावसायिक नैतिकता की समझ को भी जोड़ा जाएगा।

* नया Annex A - ISO 9001 मानक के इतिहास में पहली बार लगभग 15 पृष्ठों का एक विस्तृत मार्गदर्शिका अनुलग्नक (Informative Annex) जोड़ा जा रहा है, जो मानक की अपेक्षाओं और शब्दावलियों को समझने में उपयोगकर्ताओं व ऑडिटर्स की मदद करेगा।


सार 


संक्षेप में कहें तो ISO/FDIS 9001:2026 QMS का मसौदा प्रकाशन के लिए आगे बढ़ रहा है। जून 2026 में इसका अंतिम प्रारूप वोटिंग के लिए सामने आने की संभावना है और सितंबर 2026 में यह नया गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली अंतरराष्ट्रीय मानक प्रकाशित और लागू होने की संभावना है ।


सादर,

केशव राम सिंघल 

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गुरुवार, 7 मई 2026

संगठन में विवेकपूर्ण नेतृत्व

संगठन में विवेकपूर्ण नेतृत्व 
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प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe


ज़्यादातर ISO 9001 QMS प्रमाणन प्राप्त संगठनों में नियमावली, प्रक्रियाओं और प्राधिकारों (Authorities) का स्पष्ट उल्लेख किया जाता है। विभिन्न पदों की भूमिकाएँ, जिम्मेदारियाँ, अधिकार तथा कार्यविधियाँ विस्तार से निर्धारित की जाती हैं। ऐसी संरचना आवश्यक भी है, क्योंकि यही व्यवस्था संगठन में अनुशासन, जवाबदेही और कार्यक्षमता सुनिश्चित करती है।

फिर भी, वास्तविक परिस्थितियों में नेतृत्व शायद ही कभी केवल तय नियमों के अनुसार कार्य करता हो। संगठनात्मक वातावरण स्थिर नहीं होता। इंसानी भावनाएँ जटिल होती हैं, परिस्थितियाँ तेजी से बदलती हैं, और कई बार ऐसे हालात उत्पन्न हो जाते हैं जिनका पूर्ण अनुमान कोई लिखित कार्यविधि या नियमावली पहले से नहीं लगा सकती। ऐसे समय में केवल नियम पर्याप्त या सहायक नहीं होते; यह नेतृत्व की वास्तविक परीक्षा का समय होता है।

जब कोई प्रक्रिया केवल लिखित नियमों तक सीमित रह जाती है, तब प्राधिकार मात्र प्रशासनिक औपचारिकता बनकर रह जाता है। वह नियमों का पालन तो करवा सकता है, लेकिन हर स्थिति में न्यायपूर्ण निर्णय नहीं दे सकता। सच्चे नेतृत्व के लिए कुछ और आवश्यक होता है। भारतीय दर्शन इसे एक गहरे शब्द में व्यक्त करता है - “विवेक”। विवेक केवल ज्ञान (Knowledge) नहीं है; यह सही और सुविधाजनक, नियम और न्याय, तथा शब्द और भावना के बीच अंतर समझने की क्षमता है। यही आंतरिक स्पष्टता व्यक्ति को बदलती परिस्थितियों में सिद्धांतों को समझदारी से लागू करने योग्य बनाती है।

वर्तमान प्रशासनिक और प्रबंधन व्यवस्था में अक्सर “विवेकाधीन शक्ति” (Discretionary Power) की बात होती है। यह किसी पद (Position) के साथ मिलने वाला अधिकार है, जिसके अंतर्गत व्यक्ति परिस्थितियों के अनुसार निर्णय ले सकता है। लेकिन विवेकाधीन शक्ति और विवेक दोनों एक ही चीज़ नहीं हैं। विवेकाधीन शक्ति नेतृत्व का बाहरी अधिकार है, जबकि विवेक उसके भीतर से उत्पन्न नैतिक समझ है।

यदि निर्णय लेने की स्वतंत्रता विवेक से नियंत्रित न हो, तो उसके मनमाने, पक्षपातपूर्ण या तात्कालिक भावनाओं से प्रभावित होने का खतरा रहता है। परंतु जब वही शक्ति विवेक से जुड़ जाती है, तब वह न्याय, संतुलन और नैतिकता का माध्यम बन जाती है। लिखित नियमावली यह बता सकती है कि क्या करने की अनुमति है, लेकिन विवेक यह तय करता है कि क्या वास्तव में उचित है।

आज अधिकांश संगठन नीतियों (Policies), प्रक्रियाओं और अनुपालन ढाँचों (Compliance Frameworks) के आधार पर संचालित होते हैं। यह आवश्यक भी है, क्योंकि इनके बिना संगठनात्मक स्थिरता संभव नहीं। ISO 9001 QMS मानक भी प्रक्रियाओं की स्पष्टता, जिम्मेदारियों की परिभाषा, जोखिम-आधारित सोच और जवाबदेही पर विशेष बल देता है। लेकिन यह मानक केवल प्रक्रिया पालन (Process compliance) तक सीमित नहीं है; यह नेतृत्व (Leadership), गुणवत्ता संस्कृति (Quality culture), लोगों की सहभागिता (Participation of people) और निरंतर सुधार (Continual improvement) को भी महत्व देता है।

ISO 9001 QMS मानक के Clause 5 में नेतृत्व से अपेक्षा की गई है कि वह केवल नियंत्रण और अनुपालन सुनिश्चित न करे, बल्कि संगठन के लोगों में गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता और सकारात्मक कार्य-संस्कृति भी विकसित करे। यही वह स्थान है जहाँ विवेकपूर्ण नेतृत्व की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी ग्राहक की शिकायत निर्धारित समय सीमा के बाद प्राप्त होती है, तो प्रक्रिया के अनुसार उसे अस्वीकार किया जा सकता है। लेकिन यदि यह स्पष्ट हो कि समस्या संगठन की किसी कमी के कारण उत्पन्न हुई है, तो एक विवेकपूर्ण नेता प्रक्रिया की भावना को समझते हुए ग्राहक को उचित समाधान देने का प्रयास करेगा। ऐसा निर्णय नियम तोड़ना नहीं, बल्कि गुणवत्ता प्रबंधन के मूल उद्देश्य "ग्राहक संतुष्टि और विश्वास" को प्राथमिकता देना है। इसी प्रकार, यदि कोई कर्मचारी पहली बार किसी प्रक्रिया के संचालन में त्रुटि कर देता है, तो केवल दंडात्मक कार्रवाई करना एक आसान विकल्प हो सकता है। परंतु विवेकपूर्ण नेतृत्व गलती के मूल कारण (Root cause) को समझने, प्रशिक्षण प्रदान करने और प्रणालीगत सुधार करने का प्रयास करेगा। यही दृष्टिकोण निरंतर सुधार (Continual Improvement) की गुणवत्ता संस्कृति को मजबूत बनाता है।

संपरीक्षा (Audit) के दौरान भी यह अंतर स्पष्ट दिखाई देता है। कई बार छोटी प्रक्रिया विचलन (Minor Process Deviation) को केवल दोष खोजने का विषय बना दिया जाता है। जबकि विवेकपूर्ण नेतृत्व उसे सीखने और सुधार का अवसर मानता है। वह यह समझने का प्रयास करता है कि समस्या व्यक्ति में है या प्रणाली में।

विवेक से संचालित नेतृत्व प्रतिक्रिया देने से पहले ठहरता है। वह केवल नियमों के शब्द नहीं, बल्कि उनके पीछे के उद्देश्य को भी समझता है। वह निर्णयों का मूल्यांकन केवल कानूनी या प्रक्रियात्मक दृष्टि से नहीं, बल्कि निष्पक्षता, मानवीय प्रभाव और संगठन के दीर्घकालिक हितों के आधार पर भी करता है। ऐसा नेतृत्व यह समझता है कि समझदारी का अर्थ प्राधिकार को कमजोर करना नहीं है, बल्कि उसका ईमानदारी और संतुलन के साथ उपयोग करना है।

संगठन केवल नियमों से नहीं चलते; वे विश्वास, निष्पक्षता और मानवीय संवेदनशीलता से आगे बढ़ते हैं। नियम व्यवस्था दे सकते हैं, लेकिन विवेक उस व्यवस्था को मानवीय बनाता है। ISO 9001 QMS मानक संगठनात्मक प्रक्रियाओं के लिए एक व्यवस्थित ढाँचा प्रदान करते हैं, परंतु उन प्रक्रियाओं में न्याय, संवेदनशीलता और संतुलन लाने का कार्य विवेकपूर्ण नेतृत्व ही करता है। अंततः, वही संगठन दीर्घकाल में अधिक विश्वसनीय और सम्मानित बनते हैं, जहाँ प्राधिकार केवल पद की शक्ति नहीं, बल्कि विवेक, नैतिकता और जिम्मेदारी से संचालित होता है।

सादर, 
केशव राम सिंघल