गुरुवार, 22 दिसंबर 2022

संस्थाओं को ग्राहक केंद्रित होना चाहिए

संस्थाओं को ग्राहक केंद्रित होना चाहिए

'''''''''''''''''''

तुर्की के शहर इंस्तांबुल से दिल्ली आ रही एक फ्लाइट का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एयर होस्टेस और एक यात्री के बीच भोजन को लेकर तीखी बहस हो रही है। एक जानकारी के मुताबिक यह वीडियो 16 नवंबर 2022 की है। इसमें बहस के दौरान एक पैसेंजर एयर होस्टेस से कहता है, "तुम यात्रियों की नौकर हो।" इसका जवाब देते हुए एयर होस्टेस कहती हैं, "मैं एक कर्मचारी हूँ, आपकी नौकर नहीं... मैं आपकी नौकर नहीं हूँ।" इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर यूजर्स की अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। मैं फिलहाल इस वीडियो की घटना पर कोई विशिष्ट जजमेंट नहीं देना चाहता और न ही यात्री के अशिष्ट बोलने को सहमति देना चाहता, पर अपने अनुभवों के आधार पर यह बताना चाहता हूँ कि संस्थाओं और उनके कर्मचारियों को ग्राहक केंद्रित और ग्राहकोन्मुख होना चाहिए। 








एक यात्री अपने लिए विमान के टिकट बुक कराते समय यात्रा के दौरान जैन लंच बुक करता है और यात्रा के दौरान उसे कहा जाता है कि जैन खाना तो उपलब्ध नहीं है, कुछ वैकल्पिक ले लो। यहाँ विमान कंपनी के लिए अपनी व्यवस्था (सिस्टम) को सुधारने कि जरुरत है। 


अवयस्क बेटी के बैंक-खाते के लिए उसकी माँ (जो खाता संचालित करती है और उस खाते में जॉइंट अकॉउंट होल्डर भी है) एटीएम कार्ड कि माँग करती है तो बैंक के कर्मचारी द्वारा उसे कहा जाता है कि अवयस्क के खातों में एटीएम देने की व्यवस्था नहीं है। जबकि रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार अवयस्क खातों में एटीएम दिया जा सकता है। यहाँ बैंक को अपनी व्यवस्था सुधारने की  जरुरत है। यदि सर्कुलर जारी करने की जरुरत है तो सर्कुलर जारी किया जाना चाहिए और समय-समय पर ऐसे छोटे-छोटे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए, जिससे बैंक कर्मचारियों कि जागरूकता बढे। 


बैंक का एक डिपोजिटर चाहता है कि उसकी जमा रसीद पर नामांकित व्यक्ति (Nominee) का नाम लिख दिया जाए और बैंक कर्मचारी ग्राहक को यह कहकर टाल देता है कि सिस्टम सपोर्ट नहीं करता नामांकित व्यक्ति (Nominee) का नाम छापना। यहाँ तथ्य यह है कि कर्मचारी की जानकारी में कमी है, जिसे सुधारने कि जरुरत है। यदि सर्कुलर जारी करने की जरुरत है तो सर्कुलर जारी किया जाना चाहिए और समय-समय पर ऐसे छोटे-छोटे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए, जिससे बैंक कर्मचारियों कि जागरूकता बढे। 


ग्राहक ईमेल से सम्प्रेषण भेजता है और बैंक द्वारा उसे न तो पावती दी जाती है और न ही कोई जवाब। यहाँ बैंक का रवैया किसी भी प्रकार से उचित नहीं कहा जा सकता। यहाँ बैंक को व्यवस्था सुधारने की जरुरत है। जैसे ही बैंक आईडी पर कोई ईमेल पहुँचे, उसके लिए स्वचालित पावती पावती-नंबर के साथ जारी होनी चाहिए जिसमें ग्राहक के ईमेल पर मामले से सम्बंधित जवाब देने  के लिए दिनों कि संख्या भी लिखी हो। बैंक का यह कदम निश्चित ही ग्राहक-सेवा में सुधार लाएगा। 


मैं एक ही बात फिर दोहराता हूँ - संस्थाओं को ग्राहक केंद्रित होना चाहिए। यदि ग्राहक पर ध्यान नहीं दिया गया तो निश्चित है कि संस्था का भविष्य भी अच्छा नहीं होगा। 


प्रसंगवश - आने वाला ज़माना Lean Banking का होगा और इस पर मैंने एक किंडल पुस्तक लिखी है "Future Banking Is Lean Banking" जिसे अमेजन से प्राप्त किया जा सकता है।  इस पुस्तक का ASIN ‏ नंबर ‎ B09FZ4FX33 है। Kindle Unlimited के सदस्य इस किंडल पुस्तक को निःशुल्क पढ़ सकते हैं।


सादर,

केशव राम सिंघल 


शुक्रवार, 16 दिसंबर 2022

आप अपनी संस्था में मजबूत प्रबंधन प्रणाली (Robust Management System) चाहते हैं?

आप अपनी संस्था में मजबूत प्रबंधन प्रणाली (Robust Management System) चाहते हैं?

''''''''''''''''

एक शीर्ष प्रबंधन अधिकारी ने एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मुझसे पूछा, "हम एक मजबूत प्रबंधन प्रणाली (Robust Management System) कैसे प्राप्त कर सकते हैं।" 


"आप एक मजबूत प्रबंधन प्रणाली (Robust Management System) क्यों चाहते हैं," मैंने उनसे एक जवाबी सवाल किया। 


उन्होंने उत्तर दिया, "एक सफल संस्था बनने के लिए।" 


"तो, आपकी अपनी संस्था को लगातार सफलता प्राप्त करने की आवश्यकता है, जिसके लिए आप एक सीखने वाली संस्था (learning organization) के रूप में अपनी संस्था का निर्माण करते रहें," मैंने उसे सुझाव दिया। यह एक छोटी सी बातचीत थी, जो हमने की थी।


एक सीखने वाली संस्था अपनी प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करेगा और सफल होने के लिए अपना मार्ग प्रशस्त करेगा। हमेशा अपनी संस्था की सीखने की क्षमता को अपने प्रतिस्पर्धियों (competitors) से तेज़ रखें।


याद रखें, सीखना एक सतत प्रक्रिया है। (Learning is a continuous process.) सीखने के लिए एक संस्था की प्रतिबद्धता और क्षमता उसके सदस्यों की तुलना में अधिक नहीं हो सकती है, यही कारण है कि कुछ संस्थाएँ अपने लोगों के विकास को प्रोत्साहित करती हैं, जिसका उन्हें दीर्घकालीन लाभ मिलता है। 


संस्था के वातावरण में निरंतर अनुकूलन और परिवर्तन संस्था के सीखने की दृष्टि पर निर्भर करता है। जब संस्था की एक दृष्टि होती है, तो संस्था में लोग उत्कृष्टता प्राप्त करते हैं और सीखते हैं, इसलिए नहीं कि उन्हें कहा जाता है, बल्कि इसलिए कि वे नया कुछ सीखना चाहते हैं। सीखने के माध्यम से हम खुद को पुनर्निर्मित (re-create) करते हैं। सीखने से हम वह करने में सक्षम हो जाते हैं जो हम पूर्व में कभी नहीं कर पाए।


एक 'सीखने वाली संस्था' का मूल अर्थ - एक ऐसी संस्था जो अपने भविष्य को बनाने के लिए लगातार अपनी क्षमता का विस्तार करती है। सीखना एक प्रक्रिया है जो परिवर्तन की ओर ले जाती है। परिवर्तन अनुभव के परिणामस्वरूप होता है और बेहतर प्रदर्शन और भविष्य में सीखने की संभावना को बढ़ाता है।


आपको इस पर अधिक विचार करना चाहिए कि आप अपनी संस्था को एक सीखने वाली संस्था बनाकर अपनी संस्था की प्रबंधन प्रणाली को कैसे मजबूत कर सकते हैं।


शुभकामनाएँ,

केशव राम सिंघल

शुक्रवार, 11 नवंबर 2022

जोखिम प्रबंधन पर जागरूकता लेख-श्रृंखला

जोखिम प्रबंधन पर जागरूकता लेख-श्रृंखला

'''''''''''''

मैंने जोखिम प्रबंधन पर जागरूकता लेख-श्रृंखला हिंदी में लिखना प्रारम्भ किया है, जिसे मेरे ब्लॉग पर पढ़ा जा सकता है। ये लेख हिंदी में लिखे गए हैं, पर ब्लॉग में गूगल अनुवाद व्यवस्था है, अतः आप इच्छित भाषा में मेरे लेखों का अनुवाद पढ़ सकते हैं।

मेरे जोखिम प्रबधन जागरूकता ब्लॉग का लिंक नीचे दिया है।

आपको जागरूकता लेख कैसे लगे, कृपया टिप्पणी करें। आपके सुझाव आमंत्रित हैं।

सादर,
केशव राम सिंघल 

जोखिम प्रबंधन जागरूकता ब्लॉग के लिंक के लिए क्लिक करें।

 


गुरुवार, 10 नवंबर 2022

विश्व गुणता दिवस

विश्व गुणता दिवस

''''''''''''''''''''''''''''

विश्व गुणता दिवस हर साल नवंबर के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता है। इस साल यह आज 10 नवंबर 2022 को है।

 

विश्व गुणता दिवस को नवाचार, विकास और स्थिरता के सुधार को मजबूत करने के लिए राष्ट्रों और संगठनों में पेशेवर जिम्मेदारियों और कार्यों के गुणता प्रदर्शन के महत्व और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रारम्भ किया गया था। इस दिन का उद्देश्य गुणता जागरूकता बढ़ाना और आर्थिक समृद्धि की उपलब्धि और उच्च गुणता मानकों को अपनाने के लिए व्यक्तियों और संस्थाओं को सहायता प्रदान करना है।

 

हर साल विश्व गुणता दिवस का विषय (theme) चार्टर्ड क्वालिटी इंस्टीट्यूट (C.Q.I.) द्वारा तय की जाती है। इस वर्ष का विषय "गुणवत्ता विवेक: सही काम करना" है।

 






सभी को बधाई और शुभकामनाएँ,

केशव राम सिंघल

गुणता = गुणवत्ता = Quality

सोमवार, 7 नवंबर 2022

गुणता माह 2022 का विषय - गुणता विवेक: सही काम करना

गुणता माह 2022 का विषय - गुणता विवेक: सही काम करना

''''''''''

विश्व गुणता दिवस - 10 नवंबर 2022

विश्व गुणता सप्ताह - 7 से 11 नवंबर 2022

विश्व गुणता माह - नवंबर 2022

 







गुणता माह 2022 का विषय - गुणता विवेक: सही काम करना

 

(1) "गुणता विवेक" सही और गलत, अच्छे और बुरे के बारे में जागरूक होने की स्थिति है।

 

(2) गुणता विवेक को देखने का एक और तरीका है 'गुणता चेतना', जो तब होता है जब लोग मानकों (standards) के बारे में जानते हैं और यह जानते हैं कि वे क्या हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

 

(3) गुणता चेतना की संस्कृति वह है जिसमें कर्मचारी अपने दिन-प्रतिदिन के कार्य में गुणता के महत्व से अवगत होते हैं।

 

(4) गुणता चेतना की संस्कृति सर्वोत्तम संभव सेवा या उत्पाद प्रदान करने की इच्छा है।

 

(5) गुणता चेतना की संस्कृति के प्रति जागरूकता निरंतर प्रशिक्षण और विकास के साथ-साथ एक सहायक कार्य वातावरण के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है।


 



आइए हम अपने जीवन के हर चरण में "गुणता विवेक: सही काम करने" को बढ़ावा दें। यह निश्चित रूप से हमारे जीवन की गुणता में सुधार करेगा।

 

शुभकामनाएँ,

केशव राम सिंघल

 

गुणता = गुणवत्ता = Quality

रविवार, 6 नवंबर 2022

गुणवत्ता माह

गुणवत्ता माह

विश्व गुणवत्ता दिवस - 10 नवंबर 2022
विश्व गुणवत्ता सप्ताह - 7 से 11 नवंबर 2022
विश्व गुणवत्ता माह - नवंबर 2022









दुनिया भर की संस्थाएँ नवंबर माह को गुणवत्ता माह के रूप में मनाते हैं। गुणवत्ता माह मनाने का उद्देश्य संस्था में गुणवत्ता जागरूकता के स्तर को बढ़ाना और गुणवत्ता पेशेवरों के प्रयासों और योगदान को मान्यता देना है।
यह उत्सव संस्था और उसके लोगों ने हाल के दिनों में हासिल की गई सफलता का जश्न मनाने का एक अवसर भी है। यह उत्सव उन लोगों, विचारों और उपकरणों को एक साथ लाता है जो हमारी दुनिया को बेहतर बनाते हैं।








2022 विश्व गुणवत्ता सप्ताह (#WQW22) का विषय "गुणवत्ता विवेक: सही काम करना" है। हम समूह के सदस्यों से इस विषय पर बैनर, पोस्टर, स्लोगन, कविता पोस्ट करने का अनुरोध करते हैं।
शुभकामनाएँ,
केशव राम सिंघल

चित्र साभार - इंटरनेट खोज

रविवार, 23 अक्टूबर 2022

गुणवत्ता की चुनौती

गुणवत्ता की चुनौती

'''''''''''''''''

गुणवत्ता की चुनौती आयी स्वीकार करो

क्या कमी रह गई देखो और सुधार करो !

.

गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली लागू करो

प्रणाली सुधार से कभी भी ना डरो !

.

प्रक्रिया सोच सहित गुणवत्ता प्रबंध के सात सिद्धांत अपनाओ

साथ ही सही व्यवस्था के लिए योकजाका* सदा अपनाओ !

.

ग्राहक संतुष्टि पर सदा रखो अपना ध्यान

अपनी टीम को हरदम दो गुणवत्ता ज्ञान !

.

गुणवत्ता को अपनाना है

भारत को आत्मनिर्भर बनाना है !

.

- केशव राम सिंघल

*योकजाका (PDCA) = योजना बनाओ (P), करो योजनानुसार (D), जाँचो किया काम (C), कार्रवाई करो जाँच परिणाम पर (A) = PDCA

शब्दावली

======

गुणवत्ता = गुणता = Quality 

सुधार = Improvement

प्रबंध = Management

प्रणाली = पद्धति = व्यवस्था = System

सिद्धांत = Principle

व्यवस्था = System

ग्राहक = Customer

संतुष्टि = Satisfaction


मंगलवार, 26 मई 2020

जोखिम नियंत्रण व्यवस्था Risk management


जोखिम नियंत्रण व्यवस्था Risk management

रिस्क, उन कारणों को कहते हैं जो विश्वसनीय किन्तु सम्भावित हो सकते हैं जिससे लक्ष्य या किसी संकल्प की पूर्ति में व्यवधान या असफलता हो. लक्ष्य का होना किसी भी रिस्क या जोखिम के लिए आवश्यक है. जिसका कोई लक्ष्य या संकल्प ही न हो उसके पूर्ति या न पूर्ति होने से क्या फर्क़ पड़ेगा. जिसका लक्ष्य मृत्यु का हो उसके लिए दुर्घटना एक अवसर है किन्तु जिसका लक्ष्य जीवित रहना है उसके लिए कोई भी बीमारी या अस्वस्थ रहना या दुर्घटनाग्रस्त होना, रिस्क या जोखिम होगा. इसी विषय को गंभीरता से समझने के लिए हिंदी भाषी प्रबंध शास्त्रियों के लिए यह लेख प्रस्तुत किया गया है.
.....

एक व्यक्ति कार से रोज अपने काम पर जाता आता है. उसकी इच्छा (goal) यही रहती है कि वह कार चलाते समय सदा सुरक्षित रहे, उसे रास्ते में कोई ट्रेफिक पुलिस परेशान न करे, और सदैव समय पर अपने ऑफिस पहुंचे.

उसके लिए समय पर ऑफिस न पहुंचना, ट्रेफिक पुलिस का दंड, या अपनी या उस कार से किसी और की भी दुर्घटना होने की संभावना, जोखिम (risk) कहलाता है. यदि यही जोखिम जो एक संभावना हैं घटित हो जाते हैं, तो यही Incident या असफलता या दुर्घटना कहलाता है.

कार की रख रखाव, उसका ड्राइविंग लाइसेंस, इंश्योरेंस और फिटनेस, उसका उस रास्ते का अनुभव उसकी अंदरूनी ताकत (strength /weakness ) है. जबकि ट्रेफिक पुलिस, उसके कानून या रोड पर होने वाली भीड़ उसके बस की बात नहीं होती, इसलिए वे बाहरी अड़चन Threat/opportunity हैं. अंदरूनी ताकत strenth /weakness और बाहरी अड़ चन Threat opportunities ये दोनों विरोधी हैं और इसके द्वारा तय होता है कि किसी कार्य में जोखिम कितना होगा.

याद रहे कि यदि बाहरी अड़चन Threat न हो तो आंतरिक कमजोरी weakness हो भी, तो भी कोई जोखिम risk नहीं होता. उदाहरण के लिए, ताज महल को कोई उठाकर नहीं ले जा सकता इसलिए वह कितना भी कीमती क्यों न हो उसे कोई Threat बाहरी अड़चन नहीं है, किन्तु उसी ताजमहल में जाने वाले लोगों के मोबाइल फोन को चुराने वाले Threat बहुत हैं और उनको उसका ध्यान रखना आवश्यक है और इसमें कोई असावधानी या कमजोरी weakness नहीं चाहिये. जोखिम के लिये वस्तु का कीमती होना या सस्ता होना महत्वपूर्ण नहीं है. यह महत्वपूर्ण है कि उस का threat या उसके ऊपर किसकी काली नजर है और उसे बचाने के लिए हम कितने सावधान हैं.

जब तक उसकी अंदरूनी ताकत इतनी पर्याप्त नहीं (weakness/strength) है कि वह बाहरी अड़चन threat/opportunities को दूर कर सके तो वह व्यक्ति जोखिम के अंदर है इसलिए भयभीत भी रहेगा किन्तु वह अभी तक घटित नहीं हुयी, या कोई दुर्घटना या पुलिस द्वारा दंड या समय से ऑफिस पहुंचने में देरी से बचा हुआ है. इस स्थिति को ही vulnerability या exposer to risk या लाचारी कहते हैं.

इस लाचारी vulnerability का एक उदाहरण यह है कि किसी दिन उस व्यक्ति के कार का इंश्योरेंस की अवाधि खत्म हो गयी. इसका कारण उसकी अंदरूनी कमजोरियों weakness /strength हैं जैसे कि वह इंश्योरेंस की अंतिम तिथि भूल गया है या, उसे पता होते हुए भी उसे समय नहीं मिला कि वह इंश्योरेंस कंपनी जा सके, या फिर उसे जोखिम की परवाह ही नहीं है. फिर भी, उसके सामने जोखिम या दुर्घटना की संभावना या ट्रेफिक पुलिस के द्वारा चालान होने की संभावना बनी हुई है किन्तु उस जोखिम का घटित होना बचा है.

जो अब तक एक जाना गया जोखिम या exposure to risk था, या उसे जिस दुर्दशा की संभावना थी किन्तु वह अभी तक घटित नहीं हुआ है इसलिये वह एक लाचारी vulnerability है. लाचारी के कारण बहुत हो सकते हैं किन्तु यह नहीं कहा जा सकता कि उसे इसका (known risk) ज्ञान नहीं था, और लापरवाही उनमें से एक हो सकती है. एक दिन यह हो गया कि उस व्यक्ति का उस लाचारी की स्थिति में ट्रेफिक पुलिस से सामना हो गया और वह इंश्योरेंस पॉलिसी उसे दिखा पाने में असमर्थ था. वही जोखिम अब घटित हो गया जिससे उसका तय लक्ष्य पूरा न हो सका. तय लक्ष्य का पूरा न होना ही Incident या दुर्दशा या दुर्घटना या असफलता है.

उस व्यक्ति ने किसी तरह पुलिस का चालान भरा और जितना जल्दी हो सकता था मामले को शांत किया. यही निपटान या correction है.

घर आ कर उस व्यक्ति ने उस दिन की घटना Incident और उसकी गंभीरता पर चिंता की impact और फिर उस घटना के होने के लिये उत्तरदायी पुराने या किसी नये अंदरूनी कमजोरियों के कारण root cause analysis की खोज की. और, यह तय किया कि उसे दुबारा कभी इस तरह की लाचारी की स्थिति में नहीं रहना चाहिए. उसके सभी लाइसेंस और इंश्योरेंस और गाड़ी की फिटनेस अपनी अवाधि से पहिले ही बनने चाहिए. उसे इसे न भूलने की भी व्यवस्था करनी होगी. यही control objectives या नियंत्रण के लक्ष्य या माप दंड हैं.

उदाहरण के लिए, उसने अपने कमजोरी के मूल कारण को जान, अपने पिता की मदद ली जो इस विषय के जानकार भी हैं और उनके पास पर्याप्त समय होता है जो उसके इन काम को खुश खुशी कर सकते थे. और इस तरह उनको कभी यह नहीं दुबारा स्थिति नहीं आयी. यही प्रक्रिया में सुधार या Corrective action है.

कभी कभी मूल कारण को जानते हुये भी उसे दूर नहीं किया जा सकता है क्योंकि उस पर या तो हमारा बस नहीं होता इसलिए उन बाहरी अड़चन और अंदरूनी कमजोरियों के साथ रहना सीखना पड़ता है और जहां तक संभव हो उन लक्ष्य या जिम्मेदारी लेने और उनसे संबंधित जोखिम से बचना चाहिए . कारण को जानते हुये सावधानी या बचाव करना आवश्यक है. यही समस्या कहलाता है किन्तु हर बार जब भी वह होगा हमें रास्ता पहिले से ही पता होता है कि किस तरह से उसका सामना किया गया था.
....
उपरोक्त उदाहरण में वर्णित शब्दों की सहायता से निर्मित निम्न लिखित सिद्धांत (शब्दों में परस्पर संबंध) को समझें

लक्ष्य का पूरा न होने या असफलता की संभावना ही जोखिम है.

अंदरूनी कमजोरियां और बाहरी अड़चन ये दोनों ही न हों तो जोखिम नहीं होता. अंदर की कमजोरी को दूर करने से ही बाहरी अड़ चन पर काबू पाया जा सकता है और यही वह मार्ग है जिससे जोखिम या लक्ष्य पूर्ति में असफलता की संभावना, दूर की जा सकती है.

अंदरूनी कमजोरियों को जोखिम नहीं कहते किन्तु यदि उन को दूर न किया गया और बाहरी अड़चन (जो अपने नियंत्रण में नहीं है) बनी हुई है तो उस अवस्था में उस जोखिम को घटित होने से रोकना संभव नहीं है. यह स्थिति लाचारी कहलाती है.

जोखिम risk जब तक घटित नहीं होता तब तक वह एक संभावना है. उस संभावना से पर्याप्त बचाव न होने को helplessness, vulnerable या लाचारी की अवस्था कहते हैं. किन्तु, जब वह घटित हो जाता है तब वही लक्ष्य पूर्ति में असफलता या दुर्घटना या Incident बन जाता है.

दुर्घटना होने पर सबसे पहले, उससे होने वाली हानि कहीं फैल न जाय इसका तुरंत व्यवस्था की जानी चाहिए. इसके बाद उसका निपटान किया जाय जिससे किसी तरह वापस सामान्य स्थिति आ जाय. इसके बाद उस दुर्घटना के मूल कारण की खोज की जानी चाहिए और उसे रोका जाय. इसके लिये योजना बनानी होती है जिससे संगठन में यह कारण दुबारा न दिखे और प्रक्रिया यह निश्चित करे कि उस नये अंदरूनी कमजोरियों जो दुर्घटना के मूल कारण के खोज root cause analysis से प्राप्त हुए हैं उन को न आने दिया जाय Corrective action. यह दो तरह से संभव है.

प्रक्रिया सुधार Process improvement भी इसका उदाहरण है. जिससे, नयी नयी कमजोरी जिसके बारे में पहिले से नहीं सोचा गया था और जोखिम होने के लिये उत्तरदायी थे उनको दूर कर दिया जाय.

यदि कमजोरी weakness पुरानी है या बाहरी अड़चन इस तरह हैं कि उसे दूर नहीं किया जा सकता है या प्रक्रिया बदलना संभव नहीं है, तो उस तरह का लक्ष्य लिया ही न जाए या उस तरह की जिम्मेदारी और जोखिम लेने से बचा जाय, या उसके मूल कारण को जानते हुये, पहिले जिस तरह सावधानी की गयी थी उसका ध्यान रखना चाहिए. इसे lesson learnt या सीख लेना कहते हैं.

धन्यवाद,
कृष्ण गोपाल मिश्र


(साभार - प्रबंध प्रणालियों के प्रमुख सलाहकार और गुरु श्री कृष्ण गोपाल मिश्र और फेसबुक वॉल https://www.facebook.com/kgmisra)

सोमवार, 11 मई 2020

नीति (Policy)


नीति (Policy)
--------------

किसी संस्था या व्यक्ति द्वारा अपनाई या प्रस्तावित की गई क्रिया या सिद्धांत को सामान्यतः नीति कहा जाता है। राष्ट्रों द्वारा भी नीतियों का निर्माण किया जाता है, जैसे राष्ट्रीय खेल नीति, राष्ट्रीय शिक्षा नीति, आदि आदि। संस्थाओं द्वारा भी कई प्रकार की नीतियाँ बनाई जाती हैं। मसलन जब कोई संस्था आईएसओ 9001:2015 गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली कार्यान्वित करती है तो नीति (Policy) बनाती है। आईएसओ 9001:2015 गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली मानक के खंड 5.2 के अधीन ऐसी नीति (Policy) संस्थापित, कार्यान्वित और संपोषित करनी होती है, जो संस्था के उद्देश्य और प्रसंग के प्रति उपयुक्त हो, जो संस्था की सामरिक दिशा को सहारा दे, जो गुणवत्ता उद्देश्यों को स्थापित कराने के लिए ढाँचा प्रदान करे, जिसमें लागू अपेक्षाओं को संतुष्ट कराने और गुणवत्ता प्रबंध प्रणाली के लगातार सुधार की प्रतिबद्धता शामिल हो। साथ ही संस्था का यह दायित्व है की वह संस्था में गुणवत्ता नीति संप्रेषित करें और साथ ही सुनिश्चित करें - (1) संस्था में गुणवत्ता नीति की समझ, (2) संस्था में गुणवत्ता नीति का अनुप्रयोग, (3) उपयुक्त इच्छुक दलों को गुणवत्ता नीति की उपलब्धता, जैसा उपयुक्त हो। साथ ही संस्था गुणवत्ता नीति संस्था में उपलब्ध कराए और इसकी दस्तावेज जानकारी सम्पोषित करे।

मैंने 'नीति' के सम्बन्ध में प्रबंध प्रणालियों के प्रमुख सलाहकार और गुरु श्री कृष्ण गोपाल मिश्र से बातचीत की, तो उन्होंने निम्न विचार सम्प्रेषित किए, जो मैं नीचे प्रस्तुत कर रहा हूँ -

"नीति उसे कहते हैं, जिससे लोग स्वतंत्र निर्णय ले सकें और उनके रास्ते भी एक दिशा और लक्ष्य की ओर जाएं। नीति के बाद कोई भी निर्णय लेने से किसी को कोई आश्चर्य नहीं होता। लोगों को दिशा और लक्ष्य का पता होता है। इससे संस्था में पारदर्शिता आती है और उसके पालन में सभी समान रूप से उत्तरदायी होते हैं। ..... अंग्रेजी भाषा में नीति को पॉलिसी कहते हैं। पॉलिसी, पुलिस, पॉलिटिशियन का मूल अर्थ है डंडा या पोल। किसी भी देश को जीतने के बाद उसके बाउंड्री पर डंडा खड़ा करने की परंपरा रही थी, जिससे लोगों को पता हो कि यह क्षेत्र उनका है। उनकी पहिचान के लिए उस दण्ड पर चिन्ह लगा कपड़ा बाँध कर उसे झंडा कहा जाता है। अपना संकल्प सब को बताने के लिए डंडा या झंडा गाड़े जाने या फहराने को ही पॉलिसी कहते हैं। इसी तरह नीति बनाने वाले उसकी रक्षा के लिए संकल्प लेते हैं और उसे सभी को बताते हैं। व्यवसायियों को भी अपने कर्मचारियों को कार्य की नीति बतानी होती है, जिससे वे मनमानी न कर सकें। उदाहरण के लिए व्यवसायी को अपने कर्मचारियों को उसका यह संकल्प बताना आवश्यक होता है कि ग्राहक की आवश्यकता को वे ठीक से समझे और उसे पूरा करें। इसके लिए कर्मचारियों को हर बार उसे याद दिलाने की कोई आवश्यकता नहीं होती। पॉलिसी बदली जा सकती है, किन्तु सोच समझ कर, और किसी अवधि के बाद। .... नीति प्रबंधन की दिशा लक्ष्य के लिए एक संकल्प है जो सबको पता होना चाहिए। इसके बिना लोग अपने अपने तरीके से निर्णय नहीं ले सकते। उदाहरण के लिए - यह एक व्यावसायिक नीति हो सकती है कि किसी कार्य के लिए किसी को कोई रिश्वत न दी जाय, चाहे उसे न देने से कितना भी नुकसान क्यों न हो, या, रिश्वत देने के बिना यदि काम नहीं हो सकता है तो कहाँ कहाँ उसकी आवश्यकता है, और उसके लिये क्या सावधानी हो और उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा। इसी तरह नीति के स्पष्टीकरण संस्था के लिए आवश्यक होते हैं। इसके बिना रिश्वत देने पर कर्मचारियों को नीति तोड़ने का दोषी माना जायगा। ..... नीति का अर्थ भारत में न्य इति से है। इसका अर्थ है कि नीति बनने के बाद इस पर अनावश्यक बहस नहीं होगी। न्य या बहस का अंत या इति ही नीति है। ट्रैफ़िक लाइट पर कोई बहस करने लग जाय कि लाल रंग पर क्यों रुकें और हरे रंग की लाइट पर ही क्यों चलें, यह नहीं हो सकता। यह जो भी तय हुआ है, वही सभी को बिना किसी बहस किए मानना ही होगा। यही कारण है कि नीति प्रशासन के लिए उपयोगी होती है। इसके बिना कर्मचारियों को समझाना सरल नहीं होता।" (साभार - श्री कृष्ण गोपाल मिश्र, गुरुग्राम, हरियाणा)

मिश्राजी के विचारों से हमें यह समझने में आसानी होती है कि नीति की जरुरत क्यों है। इससे यह स्पष्ट होता है कि नीति से लोगों को दिशा और लक्ष्य का पता होता है। इससे संस्था में पारदर्शिता आती है और उसके पालन में सभी समान रूप से उत्तरदायी होते हैं। कोई भी नीति स्थाई नहीं है, वह बदली जा सकती है सोच समझ कर एक अवधि के बाद अर्थात कोई भी नीति की समीक्षा कर उसे बदला जा सकता है।

शुभकामनाओं सहित,

केशव राम सिंघल

शनिवार, 9 मई 2020

समग्र गुणवत्ता प्रबंधन (टोटल क्वालिटी मैनेजमेंट)


समग्र गुणवत्ता प्रबंधन (टोटल क्वालिटी मैनेजमेंट)

मैं जिस महात्मा का भक्त रहा हूँ उनका एक नाम श्री काउरो इशीकावा है। वे जापानी ऋषि हैं और उनके विचारों और पुस्तकों का अंग्रेज़ी अनुवाद उपलब्ध है। मानवीय संवेदना में औद्योगिकीकरण के सामंजस्य और उसकी उपयोगिता को उन्होंने टोटल क्वालिटी मैनेजमेंट का नाम दिया।

जापान में कार्य से सिद्ध उपयोगिता के वृद्धि को धर्म या क्वालिटी कहते हैं। वहां क्वालिटी वस्तु की तकनीक में नहीं मानवता में वस्तु के उपयोगिता का नाम है। टोटल का अर्थ होता है अविभाजित या जिसमें व्यवसाय या प्रतिस्पर्धा के कारण कभी मनुष्यता के हितों का कोई टकराव न हो। क्वालिटी अर्थात वस्तु पर निर्भर उपयोगिता का वह भाव जिससे लगाव पैदा हो जाय या जिसे भारत में रज गुण कहते हैं। इसी विषय में उनका गंभीर चिंतन रहा है। मैनेजमेंट व्यवस्था की वह समझ है जिससे संगठन के माध्यम से समाज के उद्देश्य या लक्ष्य पूरे किए जा सकते हैं और जिससे रिस्क या सम्भावित असफलता के भय के सभी अनुमानित कारणों को दूर किया जाय या उसे होने पर नियंत्रित किया जा सके।
..........

श्री काउरो इशीकावा के चिंतन जिससे जापान बहुत प्रभावित हुआ है उसके वाक्य इस तरह के हैं।

किसी व्यक्ति की आमदनी इस लिये अधिक या कम नहीं होनी चाहिए कि उसकी योग्यता कैसी है। व्यक्ति की योग्यता या मेरिट को उसकी आमदनी से कभी नहीं जोड़ना चाहिए।

उनका यह कहना था कि यदि योग्यता का आकलन धन से होता है तो इसका मतलब यह है कि योग्यता खरीदी और बेची जा सकती है। इससे योग्य व्यक्ति निंदा का पात्र बन जायगा क्योंकि वह अपने योग्यता के वृद्धि के लिए धन को कारण समझेगा। शिक्षा का आधार ज्ञान नहीं व्यापार बन जायगा और ज्ञानी शिक्षित व्यक्ति व्यापार न जानने के कारण असहाय हो सकता है। लोग फिर अपने अपने रुचि या स्वाभाविक संकल्प को त्याग कर सिर्फ धन के लिये कार्य करेंगे। मानवता के पतित होने में फिर देरी नहीं लगेगी।

धन, किसी कार्य या क्वालिटी का उद्देश्य नहीं हो सकता। यह एक साधन है साध्य नहीं। धन की उपलब्धता व्यवसाय के लिए आवश्यक है किन्तु इससे क्वालिटी पर कोई असर नहीं होता। क्वालिटी का कारण कार्य में रुचि और मानवता के प्रति समर्पण है।

......

जापानी उद्योगपति अमेरिका या फ्रांस को देख कर आश्चर्य करते थे। उनको धन के लालच से कैसे विद्या या योग्यता का आकलन किया जाता है देख, आश्चर्य होता था। काम करने वाले मजदूर और उनके अधिकारियों के वेतन और सुख सुविधाओं में अमानवीय भिन्नता देख कर उनको विश्वास नहीं हुआ।

जापान एक साँस्कृतिक देश है। यह देश चारों ओर से समुद्र से घिरा हुआ है। भारत या अमेरिका की तरह यहां विदेशी आक्रमण नहीं हुये। इसी लिए यहां की संस्कृति बची रह गई। इसी लिए, यहां परस्पर अविश्वास का कोई कारण ही नहीं रहा और असत्य जैसे रक्षा उपकरणों की आवश्यकता नहीं रही। परिवार में जिस तरह लोग एक दूसरे का सम्मान और परंपरा का निर्वाह करते हैं उससे प्रबंध कला में जटिलता और द्वेष नहीं आ सकी। यहां वकील या झगड़े को लगाने बुझाने वालों की संख्या संसार में सबसे कम है। आज भी इस मामले में जापान एक निर्बल देश है।

भारत में जिस तरह अमानवीय औद्योगिकीकरण हुआ है वह पश्चिमी असभ्यता से भी अधिक है। हम भारतीय अपने आप को बुद्ध की सन्तान कहते रहे हैं किन्तु उससे कोई लाभ नहीं है। हमसे कई गुना अच्छे पश्चिमी असभ्य देश हैं जो संस्थागत लालच और भय के सदुपयोग से प्रबंधन की प्रणाली को विकसित कर चुके हैं। जहां योग्‍यता का बाजार है और वहां उसकी मंडी है। उनकी अमानवीयता या असमानता, इस लिए स्वीकार्य है कि उससे किसी का शोषण नहीं हो रहा है।

भारत में महाराष्ट्र में मजदूरों के रेल्वे के मार्ग पर कट कर मरने की खबर से मैं विचलित हो गया हूँ। मुझे लगता है कि मैं भी दोषी हूँ कि जिस देश में मैं यही शिक्षा देता रहा हूँ उसी भारत के औद्योगिक विकास की गति का कारण मानवता का शोषण है।

दुःख के साथ,

कृष्ण गोपाल मिश्र
गुरुग्राम, हरियाणा

नोट - लेखक का कहना है कि टोटल (Total) अविभाज्य को कहते हैं, जिसमें व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के कारण मानवीय हित का टकराव न हो।



(साभार - Das Krishna फेसबुक वॉल)