प्रक्रिया दृष्टिकोण (Process approach)
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ISO 9001:2026 QMS मानक का पैरा 0.3.1 कहता है कि एक संगठन को अपनी गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (QMS) को जुडी हुई प्रक्रियाओं के एक सेट के तौर पर चलाना चाहिए, न कि अलग-अलग विभाग के तौर पर। इसका उद्देश्य ग्राहक की अपेक्षाओं (Requirements) को पूरा करना और ग्राहक संतुष्टि (Customer satisfaction) को बेहतर बनाना है। ऐसा करने के लिए ज़रूरी अपेक्षाएँ मानक के खंड (Clause) 4.4 में बताई गई हैं।
सरल भाषा में हम कह सकते हैं कि एक प्रक्रिया विभाग नहीं होती। यह गतिविधियों का ऐसा सेट है जो आगत (Input) को निर्गम (Output) में बदलता है। एक प्रक्रिया का निर्गम प्रायः अगली प्रक्रिया का आगत होता है। यदि संगठन केवल “खरीद” और “उत्पादन” को अलग-अलग कार्य मानकर चलाता है, तो गड़बड़ी दोनों के जोड़ पर छिप जाती है। प्रक्रिया दृष्टिकोण उन्हीं जोड़ों का प्रबंधन करता है।
यह निर्धारित करने के लिए कि प्रक्रिया उपयुक्त, पर्याप्त और प्रभावी है या नहीं। मानक चार विचार जोड़ता है -
1. प्रक्रिया को पहचानें और उनकी परस्पर क्रिया का प्रबंधन करें ताकि नियोजित (Planned) परिणाम गुणवत्ता नीति (Quality policy) और रणनीति (Strategy) से मेल खाएँ।
2. PDCA साइकिल (प्लान–डू–चेक–एक्ट) का इस्तेमाल करके पूरी प्रणाली को एक साथ चलाएँ।
3. अनचाहे परिणामों को रोकने के लिए जोखिम-आधारित दृष्टिकोण का इस्तेमाल करें।
4. इच्छित परिणाम पाने के लिए अवसर-आधारित सोच का उपयोग करें। 2026 संस्करण में इसे जोखिम-आधारित सोच के समानांतर, अधिक स्पष्ट रूप से कहा गया है।
अगर इसे सही तरीके से लागू किया जाए, तो यह अपेक्षाओं को लगातार पूरा करता है, हर प्रक्रिया को मूल्य, जोखिम और अवसरों के हिसाब से देखता है, प्रक्रिया का प्रभावी निष्पादन देता है, और आकड़ों (Data) के आधार पर सुधार करता है।
ISO 9001:2026 मानक में दिया गया चित्र संख्या 1 वह चित्र है जिसमें निवेश के स्रोत, निवेश, गतिविधि, पैदावन (आउटपुट), पैदावन (आउटपुट) पाने वाले, और उस प्रक्रिया और उसके जोखिम के लिए चुने गए निगरानी जाँच बिंदु (Minitoring check points) बताए गए हैं। (पढ़ने वालों से निवेदन है कि वे ISO 9001:2026 मानक में यह चित्र देखें।)
हम आपको दो जुड़े हुए उदाहरण देते हैं।
उदाहरण 1 — उत्पादन
उत्पादन (Production) सिर्फ़ एक मशीन लाइन नहीं है। इसके स्रोत (Source) हैं खरीद (Purchasing), डिज़ाइन और ग्राहक का ऑर्डर। निवेश (Input) हैं सामग्री (Material), ड्रॉइंग और ऊर्जा। गतिविधियाँ हैं सेटअप, विनिर्माण (Manufacturing) और पैकिंग। आउटपुट हैं तैयार उत्पाद और अभिलेख (Records), जो वेयरहाउस या ग्राहक को मिलते हैं।
जाँच बिंदु इस प्रक्रिया के जोखिम से मिलते हैं -
1. आवक जाँच — लाइन में गलत सामग्री जाने से रोकें।
2. प्रक्रिया दौरान जाँच — पैरामीटर से अंतर को जल्दी पकड़ें।
3. अंतिम जाँच / टेस्ट — कस्टमर तक नॉन-कन्फ़र्मिंग प्रोडक्ट को पहुँचने से रोकें।
यह असल में प्रक्रिया सोच (Process approach) है - प्रक्रिया + नियंत्रण + जोखिम। खरीद का आउटपुट उत्पादन का निवेश बन जाता है — दोनों प्रक्रियाएँ मिलकर एक प्रणाली हैं।
उदाहरण 2 — खरीद (Purchasing)
खरीदारी का मतलब केवल खरीद आदेश जारी करना नहीं है। इसके स्रोत उत्पादन मांग, डिज़ाइन विनिर्देश और अनुमोदित-आपूर्तिकर्ता सूची हैं। गतिविधियाँ प्रदाता का चयन करना, ऑर्डर जारी करना और सामग्री प्राप्त करना हैं। आउटपुट खरीदे गए उत्पाद और प्रमाणपत्र हैं, जो गोदाम और उत्पादन द्वारा प्राप्त किए जाते हैं।
जाँच बिंदु अलग-अलग हैं क्योंकि जोखिम अलग-अलग हैं -
1. प्रदाता का मूल्यांकन/पुनर्मूल्यांकन - अनुपयुक्त आपूर्तिकर्ता से बचें।
2. क्रय जानकारी/अनुबंध की समीक्षा - ऑर्डर पर गलत विवरण से बचें।
3. जो प्राप्त हुआ उसका सत्यापन - गैर-अनुरूप उत्पाद को उत्पादन में प्रवेश करना बंद करें।
सिद्ध आपूर्तिकर्ता की कम-जोखिम वाली कैटलॉग वस्तु के लिए केवल दस्तावेज़ और मात्रा की जाँच पर्याप्त हो सकती है। सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण कस्टम पार्ट के लिए स्रोत निरीक्षण के साथ आवक आयामी और सामग्री जाँच भी चाहिए। नियम यही है: जाँच बिंदु प्रक्रिया के चरणों और संबंधित जोखिम के अनुसार बदलते हैं।
किसी प्रक्रिया को डिज़ाइन और समीक्षा करते समय पूछे जाने वाले दस प्रश्न
एक प्रक्रिया को केवल परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए; यह निर्धारित करने के लिए समय-समय पर इसकी समीक्षा भी की जानी चाहिए कि क्या यह उपयुक्त, पर्याप्त और प्रभावी है। किसी नई प्रक्रिया को डिज़ाइन करते समय या किसी मौजूदा प्रक्रिया की समीक्षा करते समय निम्नलिखित प्रश्न किसी संगठन की मदद कर सकते हैं -
(1) प्रक्रिया का उद्देश्य क्या है?
(2) प्रक्रिया के इनपुट और इच्छित आउटपुट क्या हैं?
(3) इनपुट कौन देता है और आउटपुट कौन प्राप्त करता है?
(4) इच्छित आउटपुट प्राप्त करने के लिए किन गतिविधियों और अनुक्रम की आवश्यकता है?
(5) किन संसाधनों, ज्ञान और बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है?
(6) इस प्रक्रिया से जुड़े जोखिम और अवसर क्या हैं?
(7) पहचाने गए जोखिमों और अवसरों को संबोधित करने के लिए किन नियंत्रणों की आवश्यकता है?
(8) प्रक्रिया के प्रदर्शन और प्रभावशीलता की निगरानी और माप कैसे की जाएगी?
(9) यह प्रक्रिया क्यूएमएस के भीतर अन्य प्रक्रियाओं के साथ कैसे इंटरैक्ट करती है?
(10) बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए किन परिवर्तनों या सुधारों की आवश्यकता है?
ये प्रश्न यह सुनिश्चित करने में मदद करते हैं कि एक प्रक्रिया को उसके इच्छित परिणामों को प्राप्त करने और गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (QMS) की प्रभावशीलता में योगदान करने के लिए डिज़ाइन, नियंत्रण, निगरानी और लगातार सुधार किया जाता है।
संक्षेप में, प्रक्रिया दृष्टिकोण कार्य को प्रक्रियाओं की एक शृंखला मानकर चलाने को कहता है। ऊपर के दो उदाहरण वही शृंखला दिखाते हैं: खरीद का आउटपुट उत्पादन का इनपुट बनता है। नियंत्रण वहीं लगाए जाते हैं जहाँ उस प्रक्रिया का जोखिम वास्तव में होता है।
सादर,
केशव राम सिंघल
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