बदलाव (Change)
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प्रतीकात्मक चित्र साभार NightCafe
डब्लू एडवर्ड्स डेमिंग कहते है, “बदलना अनिवार्य नहीं है। अस्तित्व बनाए रखना भी जरूरी नहीं।”
डेमिंग का यह कथन अत्यंत गहरा और वास्तविकता से जुड़ा हुआ संदेश देता है। वे यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि परिवर्तन करना किसी पर मजबूरी या कोई दबाव नहीं है, लेकिन यदि आप बदलते नहीं हैं, तो आपका अस्तित्व बनाए रखना या सफल बने रहना भी सुनिश्चित नहीं है। इस कथन की व्याख्या निम्न तीन बिंदुओं पर की जा सकती है—
1. परिवर्तन वैकल्पिक है (Change is optional)
किसी व्यक्ति, संगठन या प्रणाली को कोई बाध्य नहीं कर सकता कि वह बदले। हर कोई अपने पुराने तरीकों, सोच और प्रक्रियाओं के साथ बना रह सकता है। उदाहरण - एक कंपनी पुराने तरीकों से काम करती रह सकती है और नई तकनीक या सुधार अपनाने से इंकार कर सकती है।
2. अस्तित्व की गारंटी नहीं (Survival is not mandatory)
यदि व्यक्ति, संगठन या प्रणाली समय के अनुसार नहीं बदलता, तो वह प्रतिस्पर्धा में पीछे छूट सकता है और अंततः समाप्त भी हो सकता है। उदाहरण - अनेक कंपनियाँ डिजिटल युग के अनुरूप स्वयं को नहीं बदल सकीं और बाजार से गायब हो गईं अर्थात् उनका अस्तित्व ही समाप्त हो गया।
3. परिवर्तन = विकास और निरंतर सुधार
डेमिंग का सम्पूर्ण दर्शन निरंतर सुधार (Continual Improvement) पर आधारित है। वे यह संदेश देते हैं कि बदलना आवश्यक नहीं है, लेकिन बिना परिवर्तन के प्रगति असंभव है।
परिवर्तन का जीवन और संगठन में महत्व
व्यक्तिगत जीवन में
* जो व्यक्ति सीखना और बदलना बंद कर देता है, वह पीछे रह जाता है।
* नया कौशल और नई सोच ही सफलता की कुंजी है।
संगठन / व्यवसाय में
* बाजार, तकनीक और ग्राहकों की अपेक्षाएँ निरंतर बदलती रहती हैं।
* जो संगठन इन परिवर्तनों के अनुरूप स्वयं को ढाल नहीं पाते, वे प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाते।
सार
सार रूप में, डेमिंग का यह कथन एक स्पष्ट चेतावनी है। यदि आप बदलना नहीं चाहते, तो यह आपका चुनाव है; लेकिन फिर प्रतिस्पर्धा में टिके रहने की अपेक्षा भी न रखें। यह कथन हमें सिखाता है कि परिवर्तन डरावना नहीं, बल्कि आवश्यक है, और दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए बदलाव को अपनाना ही बुद्धिमानी है।
सादर,
केशव राम सिंघल