गुरुवार, 22 दिसंबर 2022

संस्थाओं को ग्राहक केंद्रित होना चाहिए

संस्थाओं को ग्राहक केंद्रित होना चाहिए

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तुर्की के शहर इंस्तांबुल से दिल्ली आ रही एक फ्लाइट का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एयर होस्टेस और एक यात्री के बीच भोजन को लेकर तीखी बहस हो रही है। एक जानकारी के मुताबिक यह वीडियो 16 नवंबर 2022 की है। इसमें बहस के दौरान एक पैसेंजर एयर होस्टेस से कहता है, "तुम यात्रियों की नौकर हो।" इसका जवाब देते हुए एयर होस्टेस कहती हैं, "मैं एक कर्मचारी हूँ, आपकी नौकर नहीं... मैं आपकी नौकर नहीं हूँ।" इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर यूजर्स की अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। मैं फिलहाल इस वीडियो की घटना पर कोई विशिष्ट जजमेंट नहीं देना चाहता और न ही यात्री के अशिष्ट बोलने को सहमति देना चाहता, पर अपने अनुभवों के आधार पर यह बताना चाहता हूँ कि संस्थाओं और उनके कर्मचारियों को ग्राहक केंद्रित और ग्राहकोन्मुख होना चाहिए। 








एक यात्री अपने लिए विमान के टिकट बुक कराते समय यात्रा के दौरान जैन लंच बुक करता है और यात्रा के दौरान उसे कहा जाता है कि जैन खाना तो उपलब्ध नहीं है, कुछ वैकल्पिक ले लो। यहाँ विमान कंपनी के लिए अपनी व्यवस्था (सिस्टम) को सुधारने कि जरुरत है। 


अवयस्क बेटी के बैंक-खाते के लिए उसकी माँ (जो खाता संचालित करती है और उस खाते में जॉइंट अकॉउंट होल्डर भी है) एटीएम कार्ड कि माँग करती है तो बैंक के कर्मचारी द्वारा उसे कहा जाता है कि अवयस्क के खातों में एटीएम देने की व्यवस्था नहीं है। जबकि रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार अवयस्क खातों में एटीएम दिया जा सकता है। यहाँ बैंक को अपनी व्यवस्था सुधारने की  जरुरत है। यदि सर्कुलर जारी करने की जरुरत है तो सर्कुलर जारी किया जाना चाहिए और समय-समय पर ऐसे छोटे-छोटे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए, जिससे बैंक कर्मचारियों कि जागरूकता बढे। 


बैंक का एक डिपोजिटर चाहता है कि उसकी जमा रसीद पर नामांकित व्यक्ति (Nominee) का नाम लिख दिया जाए और बैंक कर्मचारी ग्राहक को यह कहकर टाल देता है कि सिस्टम सपोर्ट नहीं करता नामांकित व्यक्ति (Nominee) का नाम छापना। यहाँ तथ्य यह है कि कर्मचारी की जानकारी में कमी है, जिसे सुधारने कि जरुरत है। यदि सर्कुलर जारी करने की जरुरत है तो सर्कुलर जारी किया जाना चाहिए और समय-समय पर ऐसे छोटे-छोटे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए, जिससे बैंक कर्मचारियों कि जागरूकता बढे। 


ग्राहक ईमेल से सम्प्रेषण भेजता है और बैंक द्वारा उसे न तो पावती दी जाती है और न ही कोई जवाब। यहाँ बैंक का रवैया किसी भी प्रकार से उचित नहीं कहा जा सकता। यहाँ बैंक को व्यवस्था सुधारने की जरुरत है। जैसे ही बैंक आईडी पर कोई ईमेल पहुँचे, उसके लिए स्वचालित पावती पावती-नंबर के साथ जारी होनी चाहिए जिसमें ग्राहक के ईमेल पर मामले से सम्बंधित जवाब देने  के लिए दिनों कि संख्या भी लिखी हो। बैंक का यह कदम निश्चित ही ग्राहक-सेवा में सुधार लाएगा। 


मैं एक ही बात फिर दोहराता हूँ - संस्थाओं को ग्राहक केंद्रित होना चाहिए। यदि ग्राहक पर ध्यान नहीं दिया गया तो निश्चित है कि संस्था का भविष्य भी अच्छा नहीं होगा। 


प्रसंगवश - आने वाला ज़माना Lean Banking का होगा और इस पर मैंने एक किंडल पुस्तक लिखी है "Future Banking Is Lean Banking" जिसे अमेजन से प्राप्त किया जा सकता है।  इस पुस्तक का ASIN ‏ नंबर ‎ B09FZ4FX33 है। Kindle Unlimited के सदस्य इस किंडल पुस्तक को निःशुल्क पढ़ सकते हैं।


सादर,

केशव राम सिंघल 


शुक्रवार, 16 दिसंबर 2022

आप अपनी संस्था में मजबूत प्रबंधन प्रणाली (Robust Management System) चाहते हैं?

आप अपनी संस्था में मजबूत प्रबंधन प्रणाली (Robust Management System) चाहते हैं?

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एक शीर्ष प्रबंधन अधिकारी ने एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मुझसे पूछा, "हम एक मजबूत प्रबंधन प्रणाली (Robust Management System) कैसे प्राप्त कर सकते हैं।" 


"आप एक मजबूत प्रबंधन प्रणाली (Robust Management System) क्यों चाहते हैं," मैंने उनसे एक जवाबी सवाल किया। 


उन्होंने उत्तर दिया, "एक सफल संस्था बनने के लिए।" 


"तो, आपकी अपनी संस्था को लगातार सफलता प्राप्त करने की आवश्यकता है, जिसके लिए आप एक सीखने वाली संस्था (learning organization) के रूप में अपनी संस्था का निर्माण करते रहें," मैंने उसे सुझाव दिया। यह एक छोटी सी बातचीत थी, जो हमने की थी।


एक सीखने वाली संस्था अपनी प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करेगा और सफल होने के लिए अपना मार्ग प्रशस्त करेगा। हमेशा अपनी संस्था की सीखने की क्षमता को अपने प्रतिस्पर्धियों (competitors) से तेज़ रखें।


याद रखें, सीखना एक सतत प्रक्रिया है। (Learning is a continuous process.) सीखने के लिए एक संस्था की प्रतिबद्धता और क्षमता उसके सदस्यों की तुलना में अधिक नहीं हो सकती है, यही कारण है कि कुछ संस्थाएँ अपने लोगों के विकास को प्रोत्साहित करती हैं, जिसका उन्हें दीर्घकालीन लाभ मिलता है। 


संस्था के वातावरण में निरंतर अनुकूलन और परिवर्तन संस्था के सीखने की दृष्टि पर निर्भर करता है। जब संस्था की एक दृष्टि होती है, तो संस्था में लोग उत्कृष्टता प्राप्त करते हैं और सीखते हैं, इसलिए नहीं कि उन्हें कहा जाता है, बल्कि इसलिए कि वे नया कुछ सीखना चाहते हैं। सीखने के माध्यम से हम खुद को पुनर्निर्मित (re-create) करते हैं। सीखने से हम वह करने में सक्षम हो जाते हैं जो हम पूर्व में कभी नहीं कर पाए।


एक 'सीखने वाली संस्था' का मूल अर्थ - एक ऐसी संस्था जो अपने भविष्य को बनाने के लिए लगातार अपनी क्षमता का विस्तार करती है। सीखना एक प्रक्रिया है जो परिवर्तन की ओर ले जाती है। परिवर्तन अनुभव के परिणामस्वरूप होता है और बेहतर प्रदर्शन और भविष्य में सीखने की संभावना को बढ़ाता है।


आपको इस पर अधिक विचार करना चाहिए कि आप अपनी संस्था को एक सीखने वाली संस्था बनाकर अपनी संस्था की प्रबंधन प्रणाली को कैसे मजबूत कर सकते हैं।


शुभकामनाएँ,

केशव राम सिंघल