ISO ने जलवायु अनुकूलन और लचीलेपन पर पेरिस वक्तव्य अपनाया
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1 अक्टूबर 2026 को पेरिस में ISO की महासभा ने पेरिस वक्तव्य अपनाया। यह अधिक लचीलापन बनाने, जलवायु परिवर्तन के अनुकूल ढलने और प्रकृति की रक्षा की वैश्विक कोशिशों में अंतरराष्ट्रीय मानकों की भूमिका को फिर पुष्ट करता है। प्रस्ताव फ्रांस की राष्ट्रीय मानक संस्था और ISO वार्षिक बैठक 2026 के मेजबान AFNOR का था। वक्तव्य 2021 में अपनाई गई ISO की जलवायु प्रतिबद्धता पर आधारित है और दिखाता है कि जलवायु शमन के साथ अब अनुकूलन, पारिस्थितिकी तंत्र की लचीलापन और प्रकृति संरक्षण पर भी मज़बूत कार्रवाई चाहिए।
यह संयुक्त राष्ट्र का पेरिस समझौता नहीं है, और कोई नया अंतरराष्ट्रीय मानक भी नहीं। यह ISO सदस्यों का वक्तव्य है। मानक पहले की तरह स्वैच्छिक रहते हैं। समुदाय, सरकारें और व्यवसाय आपस में जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं — जलवायु के प्रभाव और जैव विविधता की हानि से लेकर जल व संसाधनों का दबाव, खाद्य सुरक्षा, वैश्विक स्वास्थ्य और तनी हुई आपूर्ति श्रृंखलाएँ। पेरिस वक्तव्य अंतरराष्ट्रीय मानकों को ऐसे व्यावहारिक औजार मानता है जो वैश्विक प्रतिबद्धता को कार्रवाई में बदलने में मदद कर सकते हैं।
वक्तव्य ISO रणनीति 2030 की प्राथमिकता के रूप में पर्यावरणीय सततता को भी मज़बूत करता है, और पेरिस समझौते, संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों तथा अनुकूलन व लचीलेपन के वैश्विक प्रयासों के प्रति ISO की प्रतिबद्धता को दोहराता है। ISO अध्यक्ष डॉ. खालिद सूफी ने महासभा में कहा, “आज पेरिस वक्तव्य के ज़रिए वैश्विक लचीलेपन और जलवायु अनुकूलन के लिए ISO की प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर था। यह जलवायु प्रतिबद्धताओं को ठोस कार्रवाई में बदलने के हमारे सामूहिक संकल्प का प्रतीक है। मैं अपने साझा दृष्टिकोण को साकार करने में आपके समर्थन पर भरोसा करता हूँ।” AFNOR के उप मुख्य कार्यकारी फ्रैंक लेबूगल ने कहा, “पेरिस वक्तव्य का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्वैच्छिक मानक चल रहे बड़े बदलावों का समर्थन करें: डिजिटल, पर्यावरणीय और सामाजिक संक्रमण। वे प्रमाणित, साझा सर्वोत्तम प्रथाएँ देकर आर्थिक पक्षों को सक्षम बनाते रहेंगे, ताकि वे लगातार बदलते वैश्विक परिदृश्य में मार्ग निकाल सकें और ढल सकें। अब पहले से कहीं अधिक, विश्वास हमारे संबंधों, हमारी अंतःक्रिया और आगे बढ़ने की सामूहिक क्षमता के केंद्र में होना चाहिए।”
पेरिस वक्तव्य
“तेज़ होते पारिस्थितिक, ऊर्जा और डिजिटल संक्रमणों के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय मानक लचीले और सतत विकास को संभव बनाने का रणनीतिक उत्तोलक हैं। खुली बहुपक्षीय व्यवस्था में विकसित ये स्वैच्छिक औजार हैं — जोखिमों का अनुमान लगाने, उन्हें मापने और प्रबंधित करने तथा व्यवहार बदलने के लिए।
अंतरराष्ट्रीय मानक नवाचार, लचीले अवसंरचना और सतत औद्योगिक विकास को आधार देकर सतत विकास लक्ष्यों में योगदान करते हैं, और तनी हुई आपूर्ति श्रृंखलाओं, जैव विविधता की हानि, संसाधनों के क्षय, जल और मिट्टी प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा तथा वैश्विक स्वास्थ्य जैसी जुड़ी चुनौतियों का समाधान करते हैं।
इन्हें स्थानीय और क्षेत्रीय विशिष्टताओं के अनुसार ढाला जा सकता है, ताकि समुदाय और संगठन बदलती सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप ढल सकें। ये वैज्ञानिक ज्ञान, तकनीकी विशेषज्ञता और बहु-हितधारक सहमति पर टिके हैं।
ISO रणनीति 2030 के अनुरूप ISO अपनी पर्यावरणीय सततता की कार्यसूची के केंद्र में विज्ञान, पारिस्थितिकी तंत्र की लचीलापन, जलवायु अनुकूलन और प्रकृति संरक्षण की केंद्रीय भूमिका की पुनः पुष्टि करता है।
ISO नीति-निर्माताओं, उद्योग और हितधारकों को भरोसेमंद ढाँचे देकर सुरक्षित, लचीला और टिकाऊ भविष्य का समर्थन जारी रखेगा, जो अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पहलों को व्यावहारिक क्रियान्वयन से जोड़ते हैं।
ISO सदस्य, तकनीकी समुदाय और सभी साझेदार निरंतर सहयोग, ज्ञान-साझा तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के विकास और उपयोग के माध्यम से जीवन को आसान, सुरक्षित और बेहतर बनाने के हमारे साझा उद्देश्य में योगदान दें।”
(ISO वक्तव्य और विज्ञप्ति पढ़ने के लिए क्लिक करें)
ISO वार्षिक बैठक 2026 AFNOR की मेजबानी में 28 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक पेरिस में हुई। थीम थी — बदलती दुनिया में विश्वास बनाना। बैठक ने वैश्विक नेताओं, नीति-निर्माताओं और मानक विशेषज्ञों को यह देखने के लिए एक साथ लाया कि दुनिया की सबसे आवश्यक चुनौतियों से निपटने में अंतरराष्ट्रीय मानकों की क्या भूमिका है।
सादर,
केशव राम सिंघल